# चर्चा शब्द पुल्लिंग है या स्त्रीलिंग ?चर्चा शब्द क्या मूलतः संस्कृत से ही आया है , अथवा … ?राजेन्द्र स्वर्णकार
तत्सम शब्द चर्चा स्त्रीलिंग है -
आज की बैठक में इस समस्या पर बहुत देर तक चर्चा हुई ।
परन्तु इस फ़िल्मी गीत पर गौर करें -
यहाँ तो चर्चा बहुवचन हो कर चरचे हो गई है। जब कि चर्चाएँ होना चाहिए था। चरचे होते ही यह पुल्लिंग भी हो गयी। लगता है हिन्दी में लिंग परिवर्तन होता रहता है।
2010/10/9 narayan prasad <hin...@gmail.com>
तत्सम शब्द चर्चा स्त्रीलिंग है -
आज की बैठक में इस समस्या पर बहुत देर तक चर्चा हुई ।
परन्तु इस फ़िल्मी गीत पर गौर करें -
आजकल तेरे मेरे प्यार के चरचे हर जबान पर, सबको मालूम है और सबको खबर हो गई ।
---नारायण प्रसाद
2010/10/9 Rajendra Swarnkar <swarnkar...@gmail.com># चर्चा शब्द पुल्लिंग है या स्त्रीलिंग ?चर्चा शब्द क्या मूलतः संस्कृत से ही आया है , अथवा … ?राजेन्द्र स्वर्णकार
On 9 अक्तू, 10:20, दिनेशराय द्विवेदी <drdwive...@gmail.com> wrote:
> नईम की रचना है....
> छोड़ो छोड़ो *चरचे *अब ये बहुत पुराने।
> कब तक इनमें हम रस, रूप, सुगंध तलाशें?
> जीवित हैं कुछ शब्द और कुछ केवल लाशें।
> लोगों को लगता है आए नए ज़माने-
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> 2010/10/9 Rajendra Swarnkar <swarnkarrajen...@gmail.com>
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> > *हिंदी के किसी स्थापित कवि/ साहित्यकार द्वारा चर्चा को पुल्लिंग की तरह
> > शायद ही काम में लिया गया होगा ।*
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> > 2010/10/9 दिनेशराय द्विवेदी <drdwive...@gmail.com>
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> >> यहाँ तो चर्चा बहुवचन हो कर चरचे हो गई है। जब कि चर्चाएँ होना चाहिए था।
> >> चरचे होते ही यह पुल्लिंग भी हो गयी। लगता है हिन्दी में लिंग परिवर्तन होता
> >> रहता है।
>
> >> 2010/10/9 narayan prasad <hin...@gmail.com>
>
> >> तत्सम शब्द चर्चा स्त्रीलिंग है -
> >>> आज की बैठक में इस समस्या पर बहुत देर तक चर्चा हुई ।
>
> >>> परन्तु इस फ़िल्मी गीत पर गौर करें -
>
> >>> आजकल तेरे मेरे प्यार के चरचे हर जबान पर, सबको मालूम है और सबको खबर हो गई
> >>> ।
>
> >>> ---नारायण प्रसाद
>
> >>> 2010/10/9 Rajendra Swarnkar <swarnkarrajen...@gmail.com>
>
> >>>> # *चर्चा* शब्द पुल्लिंग है या स्त्रीलिंग ?
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> >>>> *चर्चा* शब्द क्या मूलतः संस्कृत से ही आया है , अथवा … ?
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> >>>> राजेन्द्र स्वर्णकार
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> >> दिनेशराय द्विवेदी, कोटा, राजस्थान, भारत
> >> Dineshrai Dwivedi, Kota, Rajasthan,
> >> *क्लिक करें, ब्लाग पढ़ें ... अनवरत <http://anvarat.blogspot.com/> तीसरा
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> दिनेशराय द्विवेदी, कोटा, राजस्थान, भारत
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संतों , इस में न कोई झगड़ा है, न कोई वहम है. बात महज़ इतनी है किचर्चा और धारा दोनों उर्दू में पुल्लिंग हैं, जब कि हिंदी में स्त्रीलिंग.वचन से लिंग -विवेक पर कोई फर्क नहीं पड़ता.