मैने जिस मोदी के बारे में लिखा था वो ये मोदी नहीं था। हाँ, सामान्य वणिक उपनाम मोदी पर मैने लिखा है। मेरे आलेख में भी गुजराती सन्दर्भ हैं। ये नरेन्द्र मोदी का सम्बन्ध मोढेरा, मोढ़ वैश्य, मोढ़ घांची समुदाय से है। स्पष्ट है कि मोढ या मोढ़ से मोढ़ी हो सकता है और फिर मोदी रूपान्तर भी सम्भव है। हाँ, कुछ लोग सोचते हैं कि देशव्यापी मोदी का रिश्ता गुजरात के मोढेरा या गुजराती मोढ़ वैश्य समूदाय से है तो वह संकुचित दृष्टि है। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में साहू तेली होते हैं। यह साहू मूलतः साह, शाह से ही आ रहा है। प्रभावशाली वर्ग। अरबी मोदी की तुलना में मोढी या मोढ़ उपसर्ग का अर्थ व्यापक है। मोढेरा से जिनका रिश्ता है वे सभी मोढ हैं। खास तौर पर वणिकों और ब्राह्मणों में आप्रवासन ज्यादा हुआ सो मोढेरा के लोग मोढ हो गए। गुजाराती विश्वकोश के मुताबिक मोढ़ समुदाय में ब्राह्मण, वैश्य, किरानी, तेली, पंसारी, साहूकार सब आ जाते हैं।
बहुत सम्भव है नरेन्द्र मोदी का रिश्ता मोढ़ीवैश्य से हो। वैसे भी बहुसंख्य सन्दर्भों में मोढ़घांचियों को सम्पन्न तबका बताया गया है। यह कभी पिछड़ा वर्ग नहीं था। घी, तेल, परचून के व्यापार से आजीविका चलाने वाला मध्यमवर्गीय वणिकों का यह वर्ग बाद में पिछड़ों में गिना जाने लगा होगा।
शब्दों के सफर से जो बातें अब तक सामने आई हैं वह यह कि सामूहिकता, प्रवास, नेतृत्व, सेना, व्यापार, व्यवसाय, प्रकृति आदि से जुड़े शब्दों ने ही भाषा को अर्थवान बनाया है। मोढ़ से बने मोदी का दायरा गुजरात तक सीमित हो सकता है। किन्तु सामान्य तौर पर देशभर में प्रचलित मोदी का रिश्ता सैन्य शब्दावली से निकले मोदी से है, इसमें मुझे संदेह नहीं। अरबी मद्द से निकले मोदी का दायरा व्यापक है।