'जी'

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sanjay vyas

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Oct 31, 2010, 12:14:43 PM10/31/10
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बहुत अरसे से ये सवाल मन में आता रहा है,अब इसे सबसे उपयुक्त मंच पर रख रहा हूँ.
हिंदी में सबसे प्रचलित आदर सूचक शब्द 'जी' का मूल कहाँ से हुआ? कई आंचलिक भाषाओं में इसका 'जू'रूप भी मिलता है.इनका कुटुंब कहाँ है?

अविनाश वाचस्पति

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Oct 31, 2010, 12:16:36 PM10/31/10
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जिव्‍हा यानी जीभ पर
कोई शक

2010/10/31 sanjay vyas <sanjay...@gmail.com>

बहुत अरसे से ये सवाल मन में आता रहा है,अब इसे सबसे उपयुक्त मंच पर रख रहा हूँ.
हिंदी में सबसे प्रचलित आदर सूचक शब्द 'जी' का मूल कहाँ से हुआ? कई आंचलिक भाषाओं में इसका 'जू'रूप भी मिलता है.इनका कुटुंब कहाँ है?

ashutosh kumar

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Nov 1, 2010, 9:36:07 PM11/1/10
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जीभ पर क्यों 
जी पर या जीव पर क्यों नहीं?
{जी की खोजबीन करते एक मजेदार लोकोक्ति नज़र आ  गयी. संतजन बूझें और हमें भी समुझावैं. 
''हिंदी न फारसी  / मियाँ जी बनारसी ''

anil janvijay

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Nov 2, 2010, 1:05:31 AM11/2/10
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मैंने खोजबीन नहीं की है । लेकिन संत आशुतोष कुमार का यह कहना मुझे भी उचित लग रहा है कि ’जी’ जीव से ही आया होगा। भारतीय दर्शन में जीव का बड़ा महत्व है।
 
2010/11/2 ashutosh kumar <ashuv...@gmail.com>



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anil janvijay
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Abhay Tiwari

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Nov 2, 2010, 1:29:00 AM11/2/10
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रसाल जी के अनुसार यह 'जी', जित् या श्रीयुत का बदला हुआ रूप है।

Abhay Tiwari

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Nov 2, 2010, 1:32:41 AM11/2/10
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अगर आप को कभी बनारसी जाने को सुअवसर प्राप्त हुआ हो तो स्मरण कीजिये वहाँ लोग फ़ारसी तो नहीं ही बोलते हैं, 'हिन्दी' भी नहीं बोलते हैं। जाति-धर्म के कृत्रिम वर्गीकर्णों के परे वहाँ का जन-जन काशिका बोलने में ही गौरवान्वित महसूस करता है। इसीलिए कहा है कि भैया, हिन्दी न फ़ारसी, मियाँ जी बनारसी।
----- Original Message -----
Sent: Tuesday, November 02, 2010 7:06 AM
Subject: Re: [शब्द चर्चा] 'जी'



संजय | sanjay

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Nov 2, 2010, 1:43:25 AM11/2/10
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मेरी धारणा है कि अपने मन या आत्मा को "जी" भी कहा जाता है, जैसे "जी का जंजाल". तो आत्मन का एक रूप "जी" भी हो सकता है. यानी "जिव" से सीधे सीधे जुड़ा हुआ मामला है जी. 

2010/11/2 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com>



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संजय बेंगाणी | sanjay bengani | 09601430808
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ई-स्वामी

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Nov 2, 2010, 3:07:33 AM11/2/10
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अगर "दे जा वू" नहीं है तो क्या है? क्यूं लगता है ये या ऐसा विमर्श पढा हुआ है जी!

2010/11/2 संजय | sanjay <sanjay...@gmail.com>



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अजित वडनेरकर

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Nov 2, 2010, 7:13:39 AM11/2/10
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रसालजी की बताई हुई व्युत्पत्ति ज्यादा सही लग रही हैं। आशुभाई से एक बार चर्चा हुई तब भी याद आ रहा था और अब भी कि इस जी के जन्मसूत्र का कोई ठोस संकेत हमें मिला ज़रूर था, पर संदर्भसूत्र दर्ज़ नहीं हो पाया था। तलाश जारी है।

2010/11/2 ई-स्वामी <esw...@gmail.com>



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शुभकामनाओं सहित
अजित
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