निमंत्रण व आमंत्रण

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संजय | sanjay

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Nov 19, 2012, 6:01:46 AM11/19/12
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निमंत्रण व आमंत्रण में क्या अर्थ भेद है?

एक वाक्य लिखते समय संशय बना है जैसे आपको आमंत्रित करते है या आपको निमंत्रित करते है,

--
संजय बेंगाणी | sanjay bengani



Vinod Sharma

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Nov 19, 2012, 6:10:03 AM11/19/12
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एक तुक्का है लग जाएगा तो तीर बन सकता है।
आमंत्रण किसी भी प्रयोजन के लिए हो सकता है
जबकि निमंत्रण मेरे विचार से भोज पर बुलाने से संबंधित है।
इस में विवाह आदि का निमंत्रण शामिल है क्योंकि वहाँ भी भोज होता है।
सादर
विनोद शर्मा
2012/11/19 संजय | sanjay <sanjay...@gmail.com>

अजित वडनेरकर

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Nov 19, 2012, 6:12:48 AM11/19/12
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एक चर्चासूत्र में नारायणप्रसाद दी जी ने लिखा था-
पाणिनीय सूत्र में आमन्त्रण और निमन्त्रण दोनों शब्दों का प्रयोग हुआ है । इसकी टीका में इन दोनों में अन्तर बताया गया है । 
= नियतरूपेण आह्वानं, नियोगकरणम् । आमन्त्रणम् = कामचारेण आह्वानम् आगच्छेत् वा न वा ।  अर्थात् निमन्त्रण का प्रयोग तब किया जाता है जब निमन्त्रित व्यक्ति का आना आवश्यक या कर्तव्य समझा जाता है ।
आमन्त्रण = कामचार से बुलाना, आवे या न आवे ।

2012/11/19 Vinod Sharma <vinodj...@gmail.com>



--


अजित

http://shabdavali.blogspot.com/
औरंगाबाद/भोपाल, 07507777230


  


अजित वडनेरकर

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Nov 19, 2012, 6:14:05 AM11/19/12
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एक चर्चासूत्र में नारायणप्रसाद दी जी ने लिखा था-
पाणिनीय सूत्र में आमन्त्रण और निमन्त्रण दोनों शब्दों का प्रयोग हुआ है । इसकी टीका में इन दोनों में अन्तर बताया गया है । 
निमन्त्रण = नियतरूपेण आह्वानं, नियोगकरणम् । आमन्त्रणम् = कामचारेण आह्वानम् आगच्छेत् वा न वा ।  अर्थात् निमन्त्रण का प्रयोग तब किया जाता है जब निमन्त्रित व्यक्ति का आना आवश्यक या कर्तव्य समझा जाता है ।

eg

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Nov 19, 2012, 6:19:18 AM11/19/12
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कहीं इसका उत्स मंत्रणा के लिये लोगों को इकठ्ठे करने में तो नहीं? 'आ' और 'नि' उपसर्गों के अर्थों को मंत्रण के अर्थ से जोड़ शायद राह मिले। मंत्रण का 'मंत्र' से भी सम्बन्ध है क्या भाऊ?

2012/11/19 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>

अजित वडनेरकर

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Nov 19, 2012, 6:47:01 AM11/19/12
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मन्त्रण का अर्थ वही है जो आप सोच रहे हैं, बस रूढ़ अर्थों में यह आयोजन से जुड़ गया । भाव चर्चा-सत्र या विचार-विमर्श का ही है ।

2012/11/19 eg <girij...@gmail.com>
कहीं इसका उत्स मंत्रणा के लिये लोगों को इकठ्ठे करने में तो नहीं? 'आ' और 'नि' उपसर्गों के अर्थों को मंत्रण के अर्थ से जोड़ शायद राह मिले। मंत्रण का 'मंत्र' से भी सम्बन्ध है क्या भाऊ?
2012/11/19 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>
एक चर्चासूत्र में नारायणप्रसाद दी जी ने लिखा था-
पाणिनीय सूत्र में यऔर निमन्त्रण दोनों शब्दों का प्रयोग हुआ है । इसकी टीका में इन दोनों में अन्तर बताया गया है । 
= नियतरूपेण आह्वानं, नियोगकरणम् । आमन्त्रणम् = कामचारेण आह्वानम् आगच्छेत् वा न वा ।  अर्थात् निमन्त्रण का प्रयोग तब किया जाता है जब निमन्त्रित व्यक्ति का आना आवश्यक या कर्तव्य समझा जाता है ।
आमन्त्रण = कामचार से बुलाना, आवे या न आवे ।

2012/11/19 Vinod Sharma <vinodj...@gmail.com>

एक तुक्का है लग जाएगा तो तीर बन सकता है।
आमंत्रण किसी भी प्रयोजन के लिए हो सकता है
जबकि निमंत्रण मेरे विचार से भोज पर बुलाने से संबंधित है।
इस में विवाह आदि का निमंत्रण शामिल है क्योंकि वहाँ भी भोज होता है।
सादर
विनोद शर्मा

2012/11/19 संजय | sanjay <sanjay...@gmail.com>
निमंत्रण व आमंत्रण में क्या अर्थ भेद है?

एक वाक्य लिखते समय संशय बना है जैसे आपको आमंत्रित करते है या आपको निमंत्रित करते है,

--
संजय बेंगाणी | sanjay bengani







--


अजित

http://shabdavali.blogspot.com/
औरंगाबाद/भोपाल, 07507777230


  


संजय | sanjay

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Nov 19, 2012, 7:07:22 AM11/19/12
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भोज के लिए निमंत्रित करूँ, बजाय आमंत्रित करने के. सही?
छवि मीडिया एण्ड कॉम्यूनिकेशन
ए-507, स्मिता टावर, गुरूकुल रोड़,
मेमनगर , अहमदाबाद, गुजरात. 



eg

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Nov 19, 2012, 7:08:11 AM11/19/12
to shabdc...@googlegroups.com
हाँ। हमको भी भेज दीजियेगा। 

संजय | sanjay

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Nov 19, 2012, 7:44:11 AM11/19/12
to shabdc...@googlegroups.com
:)


2012/11/19 eg <girij...@gmail.com>

Baljit Basi

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Nov 19, 2012, 7:49:58 AM11/19/12
to शब्द चर्चा
'न्योता' निमंत्रण से ही बना है . पंजाबी में 'न्योंदा' और 'नेंदा' है।

eg

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Nov 19, 2012, 7:52:33 AM11/19/12
to shabdc...@googlegroups.com
वाह! 

2012/11/19 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>

Baljit Basi

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Nov 19, 2012, 7:59:56 AM11/19/12
to शब्द चर्चा
आप 'वाह 'ऐसे ही कह रहे हैं, मैंने कोई न्योता नहीं भेजा!

बलजीत बासी


On 19 नव, 07:53, eg <girijesh...@gmail.com> wrote:
> वाह!
>

> 2012/11/19 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
>
>
>
> > 'न्योता' निमंत्रण से ही बना है . पंजाबी में 'न्योंदा' और 'नेंदा'  है।- उद्धृत पाठ छिपाएँ -
>
> उद्धृत पाठ दिखाए

eg

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Nov 19, 2012, 8:03:21 AM11/19/12
to shabdc...@googlegroups.com
मैंने न्योता की व्युत्पत्ति बताने पर कहा। ऐसी बात पता चले तो वाह कहना बनता ही है। धन्यवाद। 

2012/11/19 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>

Baljit Basi

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Nov 19, 2012, 8:22:21 AM11/19/12
to शब्द चर्चा
एक वाह वाली और बात,
परिवार के सभी सदस्यों को निमंत्रित किया जाये तो उसे 'चूल्हे-न्योंदा'
कहा जाता है अर्थात उनके घर का चूल्हा ठंडा रहेगा, लेकिन देखा जाये
चूल्हा बेचारा तो भूखा रहेगा, उसको खाने के लिए आग नहीं मिलेगी .

बलजीत बासी


On 19 नव, 08:04, eg <girijesh...@gmail.com> wrote:
> मैंने न्योता की व्युत्पत्ति बताने पर कहा। ऐसी बात पता चले तो वाह कहना बनता
> ही है। धन्यवाद।
>

> 2012/11/19 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>


>
>
>
> > आप 'वाह 'ऐसे ही कह रहे हैं, मैंने कोई न्योता नहीं भेजा!
>
> > बलजीत बासी
>
> > On 19 नव, 07:53, eg <girijesh...@gmail.com> wrote:
> > > वाह!
>
> > > 2012/11/19 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
>
> > > > 'न्योता' निमंत्रण से ही बना है . पंजाबी में 'न्योंदा' और 'नेंदा'  है।-
> > उद्धृत पाठ छिपाएँ -
>

> > > उद्धृत पाठ दिखाए- उद्धृत पाठ छिपाएँ -

eg

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Nov 19, 2012, 9:37:30 AM11/19/12
to shabdc...@googlegroups.com
क्या बात है! भोजपुरी में 'सबहर नेवता या बिजय' कहा जाता है। पता नहीं यह बिजय व्यंजन से आता है या विजय से? 


2012/11/19 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>

संजय | sanjay

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Nov 19, 2012, 9:52:58 AM11/19/12
to shabdc...@googlegroups.com
राजस्थानी में 'नूंतो' कहा जाता है. और 'शिघ्री नुतों' का मतलब होता है जिसे चाहें ले आएं सपरिवार. 


2012/11/19 eg <girij...@gmail.com>

Vinod Sharma

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Nov 19, 2012, 10:19:59 AM11/19/12
to shabdc...@googlegroups.com
हरियाणा में ‘चूल-नौत’ सपरिवार निमंत्रण के लिए प्रयुक्त होता है

2012/11/19 संजय | sanjay <sanjay...@gmail.com>
राजस्थानी में 'नूंतो' कहा जाता है. और 'शिघ्री नुतों' का मतलब होता है जिसे चाहें ले आएं सपरिवार. 

Baljit Basi

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Nov 19, 2012, 11:33:05 AM11/19/12
to शब्द चर्चा
बिजय व्यंजन से आता है
बलजीत बासी

On 19 नव, 09:38, eg <girijesh...@gmail.com> wrote:
> क्या बात है! भोजपुरी में 'सबहर नेवता या बिजय' कहा जाता है। पता नहीं यह बिजय
> व्यंजन से आता है या विजय से?
>

> 2012/11/19 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>

ई-स्वामी

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Nov 22, 2012, 12:59:45 AM11/22/12
to shabdc...@googlegroups.com
बहुत बढ़िया  विमर्श ! 
2012/11/19 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>



--
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http://hindini.com/eswami
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