एक चर्चासूत्र में नारायणप्रसाद दी जी ने लिखा था-
पाणिनीय सूत्र में आमन्त्रण और निमन्त्रण दोनों शब्दों का प्रयोग हुआ है । इसकी टीका में इन दोनों में अन्तर बताया गया है ।
निमन्त्रण = नियतरूपेण आह्वानं, नियोगकरणम् । आमन्त्रणम् = कामचारेण आह्वानम् आगच्छेत् वा न वा । अर्थात् निमन्त्रण का प्रयोग तब किया जाता है जब निमन्त्रित व्यक्ति का आना आवश्यक या कर्तव्य समझा जाता है ।
कहीं इसका उत्स मंत्रणा के लिये लोगों को इकठ्ठे करने में तो नहीं? 'आ' और 'नि' उपसर्गों के अर्थों को मंत्रण के अर्थ से जोड़ शायद राह मिले। मंत्रण का 'मंत्र' से भी सम्बन्ध है क्या भाऊ?
2012/11/19 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>
एक चर्चासूत्र में नारायणप्रसाद दी जी ने लिखा था-
पाणिनीय सूत्र में यऔर निमन्त्रण दोनों शब्दों का प्रयोग हुआ है । इसकी टीका में इन दोनों में अन्तर बताया गया है ।
= नियतरूपेण आह्वानं, नियोगकरणम् । आमन्त्रणम् = कामचारेण आह्वानम् आगच्छेत् वा न वा । अर्थात् निमन्त्रण का प्रयोग तब किया जाता है जब निमन्त्रित व्यक्ति का आना आवश्यक या कर्तव्य समझा जाता है ।
आमन्त्रण = कामचार से बुलाना, आवे या न आवे ।2012/11/19 Vinod Sharma <vinodj...@gmail.com>
एक तुक्का है लग जाएगा तो तीर बन सकता है।
आमंत्रण किसी भी प्रयोजन के लिए हो सकता है
जबकि निमंत्रण मेरे विचार से भोज पर बुलाने से संबंधित है।
इस में विवाह आदि का निमंत्रण शामिल है क्योंकि वहाँ भी भोज होता है।
सादर
विनोद शर्मा2012/11/19 संजय | sanjay <sanjay...@gmail.com>
निमंत्रण व आमंत्रण में क्या अर्थ भेद है?
एक वाक्य लिखते समय संशय बना है जैसे आपको आमंत्रित करते है या आपको निमंत्रित करते है,
--
संजय बेंगाणी | sanjay bengani
--
अजित
http://shabdavali.blogspot.com/
औरंगाबाद/भोपाल, 07507777230
बलजीत बासी
On 19 नव, 07:53, eg <girijesh...@gmail.com> wrote:
> वाह!
>
> 2012/11/19 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
>
>
>
> > 'न्योता' निमंत्रण से ही बना है . पंजाबी में 'न्योंदा' और 'नेंदा' है।- उद्धृत पाठ छिपाएँ -
>
> उद्धृत पाठ दिखाए
बलजीत बासी
On 19 नव, 08:04, eg <girijesh...@gmail.com> wrote:
> मैंने न्योता की व्युत्पत्ति बताने पर कहा। ऐसी बात पता चले तो वाह कहना बनता
> ही है। धन्यवाद।
>
> 2012/11/19 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
>
>
>
> > आप 'वाह 'ऐसे ही कह रहे हैं, मैंने कोई न्योता नहीं भेजा!
>
> > बलजीत बासी
>
> > On 19 नव, 07:53, eg <girijesh...@gmail.com> wrote:
> > > वाह!
>
> > > 2012/11/19 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
>
> > > > 'न्योता' निमंत्रण से ही बना है . पंजाबी में 'न्योंदा' और 'नेंदा' है।-
> > उद्धृत पाठ छिपाएँ -
>
> > > उद्धृत पाठ दिखाए- उद्धृत पाठ छिपाएँ -
राजस्थानी में 'नूंतो' कहा जाता है. और 'शिघ्री नुतों' का मतलब होता है जिसे चाहें ले आएं सपरिवार.
On 19 नव, 09:38, eg <girijesh...@gmail.com> wrote:
> क्या बात है! भोजपुरी में 'सबहर नेवता या बिजय' कहा जाता है। पता नहीं यह बिजय
> व्यंजन से आता है या विजय से?
>
> 2012/11/19 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>