On Jul 30, 11:25 pm, योगेन्द्र सिंह शेखावत <yss.rajne...@gmail.com>
wrote:
हाँ, मगर मैंने लिखा है सुधारी हुयी लकड़ी |
लकड़ी मतलब कोई भी लकड़ी, कच्चा माल | काष्ठ मतलब इमारती लकड़ी (timber
wood), फर्नीचर वाली | लकड़ी छोटे-बड़ेसभी पेड़ों में होती है परन्तु सभी
का इस्तेमाल तो फर्नीचर में नहीं लिया जा सकता न |
On Jul 31, 12:24 am, farid khan <kfaridb...@gmail.com> wrote:
> तो फिर "लकड़ी की काठी" का क्या मतलब है ? लकड़ी को ही तो काठ कहते हैं
> न ?
>
> On Jul 30, 11:25 pm, योगेन्द्र सिंह शेखावत <yss.rajne...@gmail.com>
> wrote:
>
> > काठी या काठ शब्द भी कई जगह बोला जाता है, मेरे हिसाब से ये काष्ठ का ही
> > अपभ्रंश है, काष्ठ मतलब लकड़ी, सुधारी गयी लकड़ी जो फर्नीचर वगैरह बनाने के
> > काम में आती है | काठ का बना घोडा |
>
> > On Jul 30, 10:38 pm, farid khan <kfaridb...@gmail.com> wrote:
>
> > > "लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा"
> > > इसमें काठी का मतलब क्या है ?
हाँ, मगर मैंने लिखा है सुधारी हुयी लकड़ी |
लकड़ी मतलब कोई भी लकड़ी, कच्चा माल | काष्ठ मतलब इमारती लकड़ी (timber
wood), फर्नीचर वाली | लकड़ी छोटे-बड़ेसभी पेड़ों में होती है परन्तु सभी
का इस्तेमाल तो फर्नीचर में नहीं लिया जा सकता न |
> तो फिर "लकड़ी की काठी" का क्या मतलब है ? लकड़ी को ही तो काठ कहते हैं
> न ?
>
> On Jul 30, 11:25 pm, योगेन्द्र सिंह शेखावत <yss.rajne...@gmail.com>
> wrote:
>
> > काठी या काठ शब्द भी कई जगह बोला जाता है, मेरे हिसाब से ये काष्ठ का ही
> > अपभ्रंश है, काष्ठ मतलब लकड़ी, सुधारी गयी लकड़ी जो फर्नीचर वगैरह बनाने के
> > काम में आती है | काठ का बना घोडा |
>
> > On Jul 30, 10:38 pm, farid khan <kfaridb...@gmail.com> wrote:
>
> > > "लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा"
> > > इसमें काठी का मतलब क्या है ?
राजस्थानी भाषा में
काठी शब्द का अर्थ कस कर पकड़ना या कस कर थामे रहना होता है ।
दै तो दै , नईं दै तो काठी राख
अर्थात
देता है , तो दे दे , नहीं तो अपने पास रख ( कस कर )
पड़ मत जाये , घोड़ी री रास काठी झेलले ।
अर्थात गिर मत जाना , घोड़ी की रास कस कर थामलो / पकड़लो ।
और … मन काठो करलै , भाग पर किण रो जोर ?
अर्थात मन को वश / नियंत्रण / काबू
में करले , भाग्य पर किसका जोर ?
… लेकिन चर्चा में क्षेत्रीय भाषा के शब्दों की बात करना अनुचित / अनुपयोगी हो तो , कृपया , स्पष्ट कहदें ।
राजेन्द्र स्वर्णकार
शस्वरं
On Jul 31, 9:22 am, आराधना चतुर्वेदी "मुक्ति"
<guddubharg...@gmail.com> wrote:
> इसी प्रसंग में हमारी भोजपुरी में एक शब्द है " कठकरेजी" इसका भावार्थ होता है
> " पाषाणह्रदय" या "पत्थरदिल" , पर मूल में इसके भी लकड़ी वाला अर्थ है मतलब "
> लकड़ी की तरह कड़े दिल वाला"
>
> 2010/7/31 Rajendra Swarnkar <swarnkarrajen...@gmail.com>
>
>
>
> > राजस्थानी भाषा में
> > *काठी *शब्द का अर्थ *कस कर पकड़ना* या *कस कर थामे रहना* होता है ।*
>
> > *
> > दै तो दै , नईं दै तो *काठी *राख
> > अर्थात देता है , तो दे दे , नहीं तो अपने पास रख ( कस कर )
>
> > पड़ मत जाये , घोड़ी री रास *काठी* झेलले ।
> > अर्थात गिर मत जाना , घोड़ी की रास कस कर थामलो / पकड़लो ।
>
> > और … मन *काठो* करलै , भाग पर किण रो जोर ?
> > अर्थात मन को वश / नियंत्रण / काबू में करले , भाग्य पर किसका जोर ?
>
> > … लेकिन चर्चा में क्षेत्रीय भाषा के शब्दों की बात करना अनुचित / अनुपयोगी हो
> > तो , कृपया , स्पष्ट कहदें ।
>
> > राजेन्द्र स्वर्णकार
> > *शस्वरं* <http://shabdswarrang.blogspot.com/>
> > *
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> --http://feministpoems.blogspot.comhttp://feminist-poems-articles.blogspot.comhttp://draradhana.wordpress.com
On 7/31/10, Rajendra Swarnkar <swarnkar...@gmail.com> wrote:
> फरीद खान जी
> अवश्य काठा शब्द कठोर के लिए भी आता है ।
> प्रस्तुत उदाहरण में भी दोनों अर्थ काम में आ रहे हैं।
>
> एक और उदाहरण …
> आटो गीलो मत करे ,* काठो* उसणे ।
> आटा गीला मत करना , कठोर गूंधना ।
> राजेन्द्र स्वर्णकार
> *शस्वरं <http://shabdswarrang.blogspot.com/>*
>> > --http:/
>> /feministpoems.blogspot.comhttp://feminist-poems-articles.blogspot.comhttp://
>> draradhana.wordpress.com
>>
>
इसी प्रसंग में हमारी भोजपुरी में एक शब्द है " कठकरेजी" इसका भावार्थ होता है " पाषाणह्रदय" या "पत्थरदिल" , पर मूल में इसके भी लकड़ी वाला अर्थ है मतलब " लकड़ी की तरह कड़े दिल वाला"
On Jul 31, 2:45 pm, दिनेशराय द्विवेदी <drdwive...@gmail.com> wrote:
> इधर हाड़ौती में हम उसे गाठा थामना भी कहते हैं जो कि गाढ़ा पकड़ना का ही रुप
> है। यहाँ काठा का अर्थ गाढ़ा या मजबूती से पकड़ना है।
> ये लकड़ी की काठी तो आकार ही है।
>
> 2010/7/31 दिनेशराय द्विवेदी <drdwive...@gmail.com>
>
>
>
>
>
> > 2010/7/31 आराधना चतुर्वेदी "मुक्ति" <guddubharg...@gmail.com>
>
> >> इसी प्रसंग में हमारी भोजपुरी में एक शब्द है " कठकरेजी" इसका भावार्थ होता
> >> है " पाषाणह्रदय" या "पत्थरदिल" , पर मूल में इसके भी लकड़ी वाला अर्थ है मतलब
> >> " लकड़ी की तरह कड़े दिल वाला"
>
> >> 2010/7/31 Rajendra Swarnkar <swarnkarrajen...@gmail.com>
>
> >>> राजस्थानी भाषा में
> >>> *काठी *शब्द का अर्थ *कस कर पकड़ना* या *कस कर थामे रहना* होता है ।
> >>> *
>
> >>> *
> >>> दै तो दै , नईं दै तो *काठी *राख
> >>> अर्थात
> >>> देता है , तो दे दे , नहीं तो अपने पास रख ( कस कर )
>
> >>> पड़ मत जाये , घोड़ी री रास *काठी* झेलले ।
> >>> अर्थात गिर मत जाना , घोड़ी की रास कस कर थामलो / पकड़लो ।
>
> >>> और … मन *काठो* करलै , भाग पर किण रो जोर ?
> >>> अर्थात मन को वश / नियंत्रण / काबू
> >>> में करले , भाग्य पर किसका जोर ?
>
> >>> … लेकिन चर्चा में क्षेत्रीय भाषा के शब्दों की बात करना अनुचित / अनुपयोगी
> >>> हो तो , कृपया , स्पष्ट कहदें ।
>
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> > दिनेशराय द्विवेदी, कोटा, राजस्थान, भारत
> > Dineshrai Dwivedi, Kota, Rajasthan,
> > क्लिक करें, पढ़ें ...
> > अनवरत <http://anvarat.blogspot.com/>
> > तीसरा खंबा <http://teesarakhamba.blogspot.com/>
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On Jul 31, 5:50 pm, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> भाई, काठी शुद्ध ढांचा होती है। स्कैलिटन।
> इस पर घोड़े का रूपाकार काठी पे घोड़ा ही कहलाएगा।
> अगर गधे का रूपाकार है तो काठी पे गधा होगा[?]
>
> 2010/7/31 farid khan <kfaridb...@gmail.com>
> 360.gif
> < 1KViewDownload
> मतलब - पहले लकड़ी का ढाँचा बनाया (लकड़ी की काठी)
> फिर उस ढाँचे को घोड़े का रूप दिया (काठी पे घोड़ा)। बाप रे, बचपन का सुना
> गाना बुढ़ापे में समझ में आया।
> शुक्रिया अजित भाई। शुक्रिया आप सभी सुधी जनों।
मुझे नहीं लगता कि यह सही अर्थ है क्योंकि यह फ़िल्म में उन छोटे बच्चों के स्तर से बड़ी
बात हो गई।
लगता है गाने में कुछ और अर्थ होगा.
रावत
> On Jul 30, 10:38 pm, farid khan<kfaridb...@gmail.com> wrote:
>> "लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा"
>> इसमें काठी का मतलब क्या है ?
>
>
> साइकिल की सीट को हमारे यहां काठी कहा जाता है। यहां भी सीट की संदर्भ
> में उपयोग हुआ है। -राजेश
मैं समझता था कि घोड़े पर इंसान के बैठने के लिए जो सामान घोड़े की पीठ पर बाँधा जाता
है, उसको काठी कहते हैं। उस प्रकार से बैठने के आसन को काठी कहें तो यह सायकल या अन्य
वाहनों पर बैठने के स्थान को भी काठी बना देगे। इसको अंग्रेज़ी में सैडल कहते हैं। इसका
स्कूटर या मोटरसायकलों में प्रयोग होता है केवल तभी जब आगे पीछे बैठने की कुर्सियों को
जोड़ के एक ही लंबी सीट बनाया जाता है।
यदि काठी घोड़े के ऊपर होती है तो शायद उस गाने में खिलौने वाले लकड़ी के घोड़े पर बैठने
के लिए लकड़ी का आसन हो जिसको बच्चों ने शैतानी में उल्टा कर दिया हो जिससे काठी
नीचे और घोड़ा ऊपर हो गया है तभी गाने का विचार सूझा हो।
वैसे कद-काठी भी प्रयोग होता है जिसका अर्थ बिल्ड या ढाँचा होता है।
रावत
On Jul 30, 10:38 pm, farid khan <kfaridb...@gmail.com> wrote:
> "लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा"
> इसमें काठी का मतलब क्या है ?
रविकान्त