उपसंहार

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संजय | sanjay

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Oct 5, 2010, 4:35:17 AM10/5/10
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इसे खुराफात समझ सकते है या शरारती जिज्ञासा. मगर हिन्दी सीखने वाले किसी बेचारे को परेशान कर सकने वाला सवाल उपजा है.

"उप" एक कदम नीचे वाले के लिए उपयोग में आता है जैसे "उप-प्रधान"
और संहार का मतलब होता है "नाश" करना.

ऐसे में "उपसंहार" का अर्थ छोटा नाश करना होना चाहिए.  

अग्रिम क्षमा के साथ,  बात विचित्र और अनावश्यक लगे तो रद्दी के हवाले करें.

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संजय बेंगाणी | sanjay bengani | 09601430808
छवि मीडिया एण्ड कॉम्यूनिकेशन
ए-507, स्मिता टावर, गुरूकुल रोड़, मेमनगर , अहमदाबाद, गुजरात. 
web : www.chhavi.inwww.tarakash.comwww.pinaak.org
blog:  www.tarakash.com/joglikhi


narayan prasad

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Oct 5, 2010, 4:48:14 AM10/5/10
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यहाँ संहार का अर्थ "समाप्त करना" ले लीजिए ।
उप एक कदम पहले इसलिए कि लेख को समाप्त करने के पहले उस कदम पर सार अंश प्रस्तुत करना होता है ।
---नारायण प्रसाद

2010/10/5 संजय | sanjay <sanjay...@gmail.com>

ashutosh kumar

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Oct 5, 2010, 1:18:17 PM10/5/10
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दिलचस्प सवाल है! संहार का एक अर्थ संहति या समेटना भी है. विनाश से नितांत भिन्न. उप एक ऐसा उपसर्ग है , जो विशिष्टता का  भी संकेत देता है, केवल अधीनता का नहीं. . जैसे उपकार या उपस्थित   में. किसी प्रबंध को इस विशिष्ट ढंग से समेटना कि उस का मर्म  खुल  जाए, उपसंहार कहलाता है.यह सार संक्षेप नहीं है. हालांकि संक्षेप भी संहार का एक अर्थ है.  

ई-स्वामी

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Oct 5, 2010, 1:23:45 PM10/5/10
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आप तीनो का शुक्रिया!
यह प्रश्न मेरे मन मे भी उठा था लेकिन बेफ़ाल्तू का ना करार दे दिया जाए, इस भय से पूछा न था.
नारायण जी और आशुतोष के उत्तरों से सीखने को भी मिला है.

2010/10/5 ashutosh kumar <ashuv...@gmail.com>



दिलचस्प सवाल है! संहार का एक अर्थ संहति या समेटना भी है. विनाश से नितांत भिन्न. उप एक ऐसा उपसर्ग है , जो विशिष्टता का  भी संकेत देता है, केवल अधीनता का नहीं. . जैसे उपकार या उपस्थित   में. किसी प्रबंध को इस विशिष्ट ढंग से समेटना कि उस का मर्म  खुल  जाए, उपसंहार कहलाता है.यह सार संक्षेप नहीं है. हालांकि संक्षेप भी संहार का एक अर्थ है.  



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http://hindini.com
http://hindini.com/eswami

अजित वडनेरकर

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Oct 5, 2010, 2:20:37 PM10/5/10
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संहार को ज़रा सा खोलकर देखिए तो समाहार मिलता है जिसका अर्थ समेटना या पूर्णाहुति अर्थात अंत  करना ही है।

2010/10/5 ई-स्वामी <esw...@gmail.com>



--
शुभकामनाओं सहित
अजित
http://shabdavali.blogspot.com/

Abhay Tiwari

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Oct 5, 2010, 9:00:47 PM10/5/10
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इस शब्द मूल धातु ह्र का प्रयोग हुआ है। ह्र का अर्थ मिलता है लेना, चुराना,
छीनना, खींचना, नष्ट करना, आदि; इसी से हरण-अपहरण आदि शब्द बनते हैं। आप्टे जी
की इस की व्युत्पत्ति सम + ह्र + घञ बताते हैं और अर्थ करते हैं मिलाकर खींचना,
सिकोड़ना, वापिस लेना, विनाश, अंत करना आदि।

ashutosh kumar

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Oct 5, 2010, 11:20:36 PM10/5/10
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संहार की विविध अर्थ छटाओं को श्यामसुंदर  दास और महेंद्र चतुर्वेदी के शब्दकोशों में देखा जा सकता है.वैसे  संहार , समाहार और संहति में अर्थ की जो भी दूरी लगती हो , किसी स्तर पर वे करीब भी हैं.  


संजय | sanjay

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Oct 6, 2010, 12:53:27 AM10/6/10
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चर्चा का उपसंहार: बेफालतू लगती जिज्ञासा पर भी सार्थक चर्चा हो सकती है और ज्ञान बढ़ सकता है.

आप सब का आभार.

2010/10/6 ashutosh kumar <ashuv...@gmail.com>

संहार की विविध अर्थ छटाओं को श्यामसुंदर  दास और महेंद्र चतुर्वेदी के शब्दकोशों में देखा जा सकता है.वैसे  संहार , समाहार और संहति में अर्थ की जो भी दूरी लगती हो , किसी स्तर पर वे करीब भी हैं.  


Ghost Buster

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Oct 6, 2010, 3:25:04 AM10/6/10
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ई-स्वामी के बाद अब संजय जी भी ’बेफ़ालतू’ शब्द का पूरी गंभीरता से प्रयोग कर रहे हैं. ’फ़ालतू’ के स्थान पर ’बेफ़ालतू’ प्रचलन में क्यों और कैसे आ गया समाज में जबकि इसका अर्थ १८० अंश विपरीत है? विद्वत्जन कुछ प्रकाश डालें.

2010/10/6 संजय | sanjay <sanjay...@gmail.com>



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http://pret-vinashak.blogspot.com

अजित वडनेरकर

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Oct 6, 2010, 7:03:05 AM10/6/10
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ये सब देसी खोपड़ी के चमत्कार है।
आजकल बेइज़्ज़ती खराब करने में खोपड़ी चल रही है।

2010/10/6 Ghost Buster <gho...@gmail.com>

संजय | sanjay

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Oct 6, 2010, 7:08:16 AM10/6/10
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बेफालतू को "बेफालतू" यानी कि कोमा में फालतू में नहीं लिखा था :) . यह शब्द जब पढ़ा तो बचपन की याद आ गई. तब ऐसे ही बोला करते थे, "तू बेफालतू की बककास बन्द कर". तो जरा भावनाओं में बह कर लिख दिया. क्या पता था बेफालतू खिंचाई होगी. 

2010/10/6 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>

ashutosh kumar

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Oct 6, 2010, 7:43:15 AM10/6/10
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