ब्रेनवाश

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अभय तिवारी

unread,
Jul 22, 2010, 10:44:08 PM7/22/10
to शब्द चर्चा
Brainwash / ब्रेनवाश की परिघटना को हिन्दी में सरल ढंग से कहने के लिए
कोई अच्छा तरीक़ा सुझायें.. एक शब्द न भी हो तो चलेगा, वाक्यांश जैसा कुछ?

संजय | sanjay

unread,
Jul 23, 2010, 12:30:35 AM7/23/10
to shabdc...@googlegroups.com
मुझे लगता है इसके लिए "मति" से कोई शब्द बनेगा/ है. मति भ्रष्ट कर देना? 

2010/7/23 अभय तिवारी <abha...@gmail.com>

Brainwash / ब्रेनवाश की परिघटना को हिन्दी में सरल ढंग से कहने के लिए
कोई अच्छा तरीक़ा सुझायें.. एक शब्द न भी हो तो चलेगा, वाक्यांश जैसा कुछ?



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संजय बेंगाणी | sanjay bengani | 09601430808
छवि मीडिया एण्ड कॉम्यूनिकेशन
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Bodhi Sattva

unread,
Jul 23, 2010, 1:25:49 AM7/23/10
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मति भ्रम

2010/7/23 संजय | sanjay <sanjay...@gmail.com>



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Dr. Bodhisatva, mumbai
0-9820212573

Pritish Barahath

unread,
Jul 23, 2010, 1:27:14 AM7/23/10
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"बरगलाना" क्या इससे अलग होता है?
 


 
2010/7/23 संजय | sanjay <sanjay...@gmail.com>
मुझे लगता है इसके लिए "मति" से कोई शब्द बनेगा/ है. मति भ्रष्ट कर देना? 



--
Pritish Barahath
Jaipur

Pritish Barahath

unread,
Jul 23, 2010, 1:29:10 AM7/23/10
to shabdc...@googlegroups.com
ब्रेनवाश में क्या केवल भ्रष्ट और भ्रमित करने का ही भाव है ?

2010/7/23 Pritish Barahath <priti...@gmail.com>



--
Pritish Barahath
Jaipur

Bodhi Sattva

unread,
Jul 23, 2010, 1:46:20 AM7/23/10
to shabdc...@googlegroups.com
यह शब्द सबसे पहले मुझे मेरे कमलेश भैया से सुनने को मिला था. जब मैं वामपंथियों के साथ उठने बैठने और उनकी तरह ही बातें करने लगा था। वे कहते कि साले सब तुम्हारा ब्रेन वाश कर दिए हैं। बहलाना
फुसलाना
या पट्टी पढ़ा देना
विवेक हरण भी चल सकता है।

2010/7/23 Pritish Barahath <priti...@gmail.com>

अविनाश वाचस्पति

unread,
Jul 23, 2010, 1:49:22 AM7/23/10
to shabdc...@googlegroups.com
मतिहरण
वैसे दिमाग की धुलाई
के लिए एक छोटा शब्‍द
क्‍या हो सकता है ?

मतिक्षरण पर भी
किया जा सकता है विचार।
अविनाश वाचस्‍पति

2010/7/23 Bodhi Sattva <abo...@gmail.com>



--
अविनाश वाचस्‍पति Avinash Vachaspati
Mobile 09868166586/09711537664
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संजय | sanjay

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Jul 23, 2010, 2:22:55 AM7/23/10
to shabdc...@googlegroups.com
अब तक का सबसे सही शब्द "मति-हरण". 

2010/7/23 अविनाश वाचस्पति <avinashv...@gmail.com>

Bodhi Sattva

unread,
Jul 23, 2010, 4:28:43 AM7/23/10
to shabdc...@googlegroups.com
मति नाश और मतिफेर हो सकता है 

अजित वडनेरकर

unread,
Jul 23, 2010, 4:38:17 AM7/23/10
to shabdc...@googlegroups.com
हिन्दी मुहावरों में ब्रेन वाश का सबसे रचनात्मक विकल्प मुझे पट्टी पढ़ाना लगता है।गहराई से विचार करें। पट्टी पढ़ाने में किसी को कुछ पढ़ाने से ज्यादा उसके मस्तिष्क में अपने मनमाफिक बात बैठाने का भाव है। यह भाव ब्रेनवाश का है। मतिहरना जैसे शब्द भी ब्रेनवाश का उचित विकल्प हैं पर वे  अनुवाद लगते हैं। जबकि पट्टी पढ़ाना में ऐसा नहीं है।

यह थी अपनी बात,
अब बाकी सुनते हैं।

2010/7/23 Bodhi Sattva <abo...@gmail.com>



--
शुभकामनाओं सहित
अजित
http://shabdavali.blogspot.com/

Abha Mishra

unread,
Jul 23, 2010, 5:12:18 AM7/23/10
to shabdc...@googlegroups.com
'हमारी मुम्बई में लोग टोपी पहनाते है,और खोपचे में लेते है।

2010/7/23 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>:

--
aabha
mumbai-67

Abha Mishra

unread,
Jul 23, 2010, 5:13:27 AM7/23/10
to shabdc...@googlegroups.com
पाठ पढ़ाना.
2010/7/23 Abha Mishra <apna...@gmail.com>:

--
aabha
mumbai-67

संजय | sanjay

unread,
Jul 23, 2010, 5:45:20 AM7/23/10
to shabdc...@googlegroups.com
पाठ पढ़ाना में सही शिक्षा देने का आभास होता है और पट्टी पढ़ाना में "गलत या मन माफिक शिक्षा देने" का भाव है.   

2010/7/23 Abha Mishra <apna...@gmail.com>
>>>>>>>>>> कोई अच्छा तरीक़ा सुझायें.. एक शब्द न भी हो तो चलेगा, वाक्यांश जैसा
--
aabha
mumbai-67

अभय तिवारी

unread,
Jul 23, 2010, 7:07:51 AM7/23/10
to शब्द चर्चा
देखिये बरग़लाना, बहलाना-फ़ुसलाना और पट्टी पढ़ाना जैसे शब्द भूले हुए था..
याद दिलाने के आप सभी मित्रों का तहे दिल से शुक्रिया। इसी बहाने मतिहरण
जैसा नायाब शब्द भी सामने आया। बहुत सुन्दर!

On Jul 23, 2:45 pm, संजय | sanjay <sanjaybeng...@gmail.com> wrote:
> पाठ पढ़ाना में सही शिक्षा देने का आभास होता है और पट्टी पढ़ाना में "गलत या
> मन माफिक शिक्षा देने" का भाव है.
>

> 2010/7/23 Abha Mishra <apnaag...@gmail.com>


>
>
>
> > पाठ पढ़ाना.

> > 2010/7/23 Abha Mishra <apnaag...@gmail.com>:


> > > 'हमारी मुम्बई में लोग टोपी पहनाते है,और खोपचे में लेते है।
>

> > > 2010/7/23 अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com>:


> > >> हिन्दी मुहावरों में ब्रेन वाश का सबसे रचनात्मक विकल्प मुझे पट्टी पढ़ाना
> > लगता
> > >> है।गहराई से विचार करें। पट्टी पढ़ाने में किसी को कुछ पढ़ाने से ज्यादा
> > उसके
> > >> मस्तिष्क में अपने मनमाफिक बात बैठाने का भाव है। यह भाव ब्रेनवाश का है।
> > >> मतिहरना जैसे शब्द भी ब्रेनवाश का उचित विकल्प हैं पर वे  अनुवाद लगते हैं।
> > >> जबकि पट्टी पढ़ाना में ऐसा नहीं है।
>
> > >> यह थी अपनी बात,
> > >> अब बाकी सुनते हैं।
>

> > >> 2010/7/23 Bodhi Sattva <abod...@gmail.com>


>
> > >>> मति नाश और मतिफेर हो सकता है
>

> > >>> 2010/7/23 संजय | sanjay <sanjaybeng...@gmail.com>


>
> > >>>> अब तक का सबसे सही शब्द "मति-हरण".
>

> > >>>> 2010/7/23 अविनाश वाचस्पति <avinashvachasp...@gmail.com>


>
> > >>>>> मतिहरण
> > >>>>> वैसे दिमाग की धुलाई
> > >>>>> के लिए एक छोटा शब्‍द
> > >>>>> क्‍या हो सकता है ?
>
> > >>>>> मतिक्षरण पर भी
> > >>>>> किया जा सकता है विचार।
> > >>>>> अविनाश वाचस्‍पति
>

> > >>>>> 2010/7/23 Bodhi Sattva <abod...@gmail.com>


>
> > >>>>>> यह शब्द सबसे पहले मुझे मेरे कमलेश भैया से सुनने को मिला था. जब मैं
> > >>>>>> वामपंथियों के साथ उठने बैठने और उनकी तरह ही बातें करने लगा था। वे
> > कहते कि
> > >>>>>> साले सब तुम्हारा ब्रेन वाश कर दिए हैं। बहलाना
> > >>>>>> फुसलाना
> > >>>>>> या पट्टी पढ़ा देना
> > >>>>>> विवेक हरण भी चल सकता है।
>

> > >>>>>> 2010/7/23 Pritish Barahath <pritish1...@gmail.com>


>
> > >>>>>>> ब्रेनवाश में क्या केवल भ्रष्ट और भ्रमित करने का ही भाव है ?
>

> > >>>>>>> 2010/7/23 Pritish Barahath <pritish1...@gmail.com>


>
> > >>>>>>>> "बरगलाना" क्या इससे अलग होता है?
>

> > >>>>>>>> 2010/7/23 संजय | sanjay <sanjaybeng...@gmail.com>


>
> > >>>>>>>>> मुझे लगता है इसके लिए "मति" से कोई शब्द बनेगा/ है. मति भ्रष्ट कर
> > >>>>>>>>> देना?
>

> > >>>>>>>>> 2010/7/23 अभय तिवारी <abhay...@gmail.com>

अविनाश वाचस्पति

unread,
Jul 23, 2010, 7:29:56 AM7/23/10
to shabdc...@googlegroups.com
वैसे एक और विकल्‍प मतिचरण की भी संभावना बनती है। मतलब मति पर चरण छप गए हों, वाला भाव अथवा कुभाव।
सादर

2010/7/23 अभय तिवारी <abha...@gmail.com>

Abha Mishra

unread,
Jul 23, 2010, 9:50:29 AM7/23/10
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राजनेताओं, ने जनता को जाति वाद का पाठ पढ़ा दिया है, कोई पक्ष तो कोई
विपक्ष में बहस करने लगता है.....।अब इस बाबत कौन किसको टोपी पहनाता है ,
कौन किसको ,खोपचे में ले जाता है , देखे । 25 तारीख को जाति विरोधी
जनगणना रैली है ....जिसका ब्रेन वाश न हुआ हो, और जाने का इक्क्षुक, हो
जाएँ ...।

2010/7/23 संजय | sanjay <sanjay...@gmail.com>:

--
aabha
mumbai-67

अजित वडनेरकर

unread,
Jul 23, 2010, 10:26:16 AM7/23/10
to shabdc...@googlegroups.com
इक्क्षुक लिखने में कुछ निहितार्थ है आभाजी या
इसे इच्छुक समझ लूं

2010/7/23 Abha Mishra <apna...@gmail.com>
360.gif

Abha Mishra

unread,
Jul 23, 2010, 12:23:30 PM7/23/10
to shabdc...@googlegroups.com
इक्क्षुक को --इच्छुक
 पढ़ें.
--
aabha
mumbai-67
360.gif

anil janvijay

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Jul 23, 2010, 12:35:12 PM7/23/10
to shabdc...@googlegroups.com
मुझे तो इन में से पट्टी पढ़ाना और बरगलाना ही ठीक लगते हैं। लेकिन मेरे पिता मुझसे
कहा करते थे "इन कम्युनिस्टों ने तो तुम्हारा 'दिमाग़ ख़राब' कर दिया है"। उनका मतलब
भी यही होता था कि ब्रेनवाश कर दिया है।

2010/7/23 Abha Mishra <apna...@gmail.com>



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anil janvijay
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Abhay Tiwari

unread,
Jul 23, 2010, 12:41:05 PM7/23/10
to shabdc...@googlegroups.com
पिताजी ठीक कहते थे! :)
360.gif

अजित वडनेरकर

unread,
Jul 23, 2010, 1:33:41 PM7/23/10
to shabdc...@googlegroups.com
"इन कम्युनिस्टों ने तो तुम्हारा 'दिमाग़ ख़राब' कर दिया है"। उक्त उदाहरण के संबंध में तो बहुत बहुत बढ़िया।
किन्तु मेरा तो दिमाग़ ही खराब हो गया है में संदर्भ ब्रेनवाश नहीं होगा, इसलिए भाव भी कुछ न सूझने वाला हो जाएगा।

2010/7/23 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com>
360.gif

अविनाश वाचस्पति

unread,
Jul 23, 2010, 1:36:39 PM7/23/10
to shabdc...@googlegroups.com
आइये कुछ नया बूझते हैं

2010/7/23 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>
"इन कम्युनिस्टों ने तो तुम्हारा 'दिमाग़ ख़राब' कर दिया है"। उक्त उदाहरण के संबंध में तो बहुत बहुत बढ़िया।
किन्तु मेरा तो दिमाग़ ही खराब हो गया है में संदर्भ ब्रेनवाश नहीं होगा, इसलिए भाव भी कुछ न सूझने वाला हो जाएगा।

2010/7/23 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com>

पिताजी ठीक कहते थे! :)
----- Original Message -----
Sent: Friday, July 23, 2010 10:05 PM
Subject: Re: शब्द चर्चा ब्रेनवाश

मुझे तो इन में से पट्टी पढ़ाना और बरगलाना ही ठीक लगते हैं। लेकिन मेरे पिता मुझसे
कहा करते थे "इन कम्युनिस्टों ने तो तुम्हारा 'दिमाग़ ख़राब' कर दिया है"। उनका मतलब
360.gif

Ghost Buster

unread,
Jul 23, 2010, 1:37:16 PM7/23/10
to shabdc...@googlegroups.com
पट्टी पढ़ाना, मति-हरण से बेहतर है. ब्रेनवाश में किसी व्यक्ति के विचारों पर किसी अन्य के विचारों का अध्यारोपण/प्रतिस्थापन कर दिये जाने का भाव है. मति-हरण में मति के भ्रष्ट किये जाने का भाव तो है लेकिन उसके स्थानापन्न का नहीं.

इस हिसाब से मैं "मति-लेपन" को प्राथमिकता दूंगा.

2010/7/23 अभय तिवारी <abha...@gmail.com>



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घोस्ट बस्टर का ब्लॉग
http://pret-vinashak.blogspot.com

अविनाश वाचस्पति

unread,
Jul 23, 2010, 8:52:06 PM7/23/10
to shabdc...@googlegroups.com
और मतिविलोप अथवा मतिविलोपन के संबंध में क्‍या विचार रखता है शब्‍दनिर्माणसमुदाय।

2010/7/23 Ghost Buster <gho...@gmail.com>

ashutosh kumar

unread,
Jul 23, 2010, 11:30:18 PM7/23/10
to shabdc...@googlegroups.com

वो भी क्या दिन थे , जब खाली कम्युनिस्ट ही लोगों का दिमाग खराब  किया करते थे. एक ज़माना यह है  जब बाज़ार ,   देश, धर्म , संस्कृति, आस्था और न जाने   काहे काहे के चमत्कारों  की पट्टी पढ़ाकर रोज रोज लोगों का मतिभ्रंश  किया जारहा है , और  चेताने वाले चुप बैठे हैं ,मानो  एक साथ सब की अक्ल  घास चरने चली गयी हो .    

संजय | sanjay

unread,
Jul 24, 2010, 12:46:02 AM7/24/10
to shabdc...@googlegroups.com
बचपन में (जैन) कहानियाँ सुना करता था उसमें "मति हर लेना" जैसे शब्द सुनने को मिलते थे. इसका अर्थ यह होता था कि आदमी दुसरे की बुद्धी के हिसाब से व्यवहार करने लगता है. अपना विवेक खो देता है. बेनवॉश में भी यही होता है. 

2010/7/24 ashutosh kumar <ashuv...@gmail.com>


वो भी क्या दिन थे , जब खाली कम्युनिस्ट ही लोगों का दिमाग खराब  किया करते थे. एक ज़माना यह है  जब बाज़ार ,   देश, धर्म , संस्कृति, आस्था और न जाने   काहे काहे के चमत्कारों  की पट्टी पढ़ाकर रोज रोज लोगों का मतिभ्रंश  किया जारहा है , और  चेताने वाले चुप बैठे हैं ,मानो  एक साथ सब की अक्ल  घास चरने चली गयी हो .    

sushrut jalukar

unread,
Jul 24, 2010, 3:52:51 AM7/24/10
to shabdc...@googlegroups.com
अभयजी,
क्या ब्रेनवॉश के लिए...मत/मन परिवर्तन करना...। उचित रहेगा?

सुश्रुत

2010/7/23 अभय तिवारी <abha...@gmail.com>
Brainwash / ब्रेनवाश की परिघटना को हिन्दी में सरल ढंग से कहने के लिए
कोई अच्छा तरीक़ा सुझायें.. एक शब्द न भी हो तो चलेगा, वाक्यांश जैसा कुछ?

संजय | sanjay

unread,
Jul 24, 2010, 4:03:46 AM7/24/10
to shabdc...@googlegroups.com
मामला हृदय परिवर्तन जैसा नहीं, मतिभ्रष्ट कर देने जैसा है.

2010/7/24 sushrut jalukar <sushrut...@gmail.com>

sushrut jalukar

unread,
Jul 24, 2010, 4:34:11 AM7/24/10
to shabdc...@googlegroups.com
लडकेने पढाई करनें की बात नही मानी, इसलिए पिताजी ने उसका ब्रेनवॉश कर उसे पढाई करनें पर मजबूर किया। इसमें ये मतलब थोडे निकलता है, की पिताजी नें लडके को पढाई करनें के लिए उसकी मतिभ्रष्ट कर दी...। ये एक उदाहरण है। वैसे हर एक सिक्के के दो रुप होते है..आप सही भी हो सकते है..।

सुश्रुत

2010/7/24 संजय | sanjay <sanjay...@gmail.com>

संजय | sanjay

unread,
Jul 24, 2010, 4:38:12 AM7/24/10
to shabdc...@googlegroups.com
बात तो सही है. वैसे जरूरी थोड़े ही है अच्छे-बूरे के लिए एक ही शब्द हो?

2010/7/24 sushrut jalukar <sushrut...@gmail.com>

अविनाश वाचस्पति

unread,
Jul 24, 2010, 7:15:57 AM7/24/10
to shabdc...@googlegroups.com
सम्‍मोहन के साथ जोड़कर तो मतिमोहन भी कहा जा सकता है। कैसा भी अर्थ रखता हो, मोहक तो लगेगा मोदक की तरह।
सादर

2010/7/24 संजय | sanjay <sanjay...@gmail.com>
बात तो सही है. वैसे जरूरी थोड़े ही है अच्छे-बूरे के लिए एक ही शब्द हो?

2010/7/24 sushrut jalukar <sushrut...@gmail.com>
लडकेने पढाई करनें की बात नही मानी, इसलिए पिताजी ने उसका ब्रेनवॉश कर उसे पढाई करनें पर मजबूर किया। इसमें ये मतलब थोडे निकलता है, की पिताजी नें लडके को पढाई करनें के लिए उसकी मतिभ्रष्ट कर दी...। ये एक उदाहरण है। वैसे हर एक सिक्के के दो रुप होते है..आप सही भी हो सकते है..।

सुश्रुत

2010/7/24 संजय | sanjay <sanjay...@gmail.com>
मामला हृदय परिवर्तन जैसा नहीं, मतिभ्रष्ट कर देने जैसा है.

2010/7/24 sushrut jalukar <sushrut...@gmail.com>

अभयजी,
क्या ब्रेनवॉश के लिए...मत/मन परिवर्तन करना...। उचित रहेगा?

सुश्रुत

2010/7/23 अभय तिवारी <abha...@gmail.com>
Brainwash / ब्रेनवाश की परिघटना को हिन्दी में सरल ढंग से कहने के लिए

कोई अच्छा तरीक़ा सुझायें.. एक शब्द न भी हो तो चलेगा, वाक्यांश जैसा कुछ?




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संजय बेंगाणी | sanjay bengani | 09601430808
छवि मीडिया एण्ड कॉम्यूनिकेशन
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         www.pinaak.org
blog:  www.tarakash.com/joglikhi
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संजय बेंगाणी | sanjay bengani | 09601430808
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अभय तिवारी

unread,
Jul 24, 2010, 8:35:39 AM7/24/10
to शब्द चर्चा
भाई सुश्रत, ब्रेनवॉश में एक हिंसा है, पिता जैसी शुभेच्छा उस में नहीं
समा सकती.. उस के लिए मत/मन परिवर्तन करना, मेरी समझ से तो ठीक नहीं है।
अविनाश जी पहले मतिहरण ले के आए और अब मतिमोहन.. क्या बात है, बहुत
सुन्दर शब्द है!

On Jul 24, 4:15 pm, अविनाश वाचस्पति <avinashvachasp...@gmail.com>
wrote:


> सम्‍मोहन के साथ जोड़कर तो मतिमोहन भी कहा जा सकता है। कैसा भी अर्थ रखता हो,
> मोहक तो लगेगा मोदक की तरह।
> सादर
>

> 2010/7/24 संजय | sanjay <sanjaybeng...@gmail.com>


>
>
>
> > बात तो सही है. वैसे जरूरी थोड़े ही है अच्छे-बूरे के लिए एक ही शब्द हो?
>

> > 2010/7/24 sushrut jalukar <sushrutjalu...@gmail.com>


>
> >> लडकेने पढाई करनें की बात नही मानी, इसलिए पिताजी ने उसका ब्रेनवॉश कर उसे
> >> पढाई करनें पर मजबूर किया। इसमें ये मतलब थोडे निकलता है, की पिताजी नें लडके
> >> को पढाई करनें के लिए उसकी मतिभ्रष्ट कर दी...। ये एक उदाहरण है। वैसे हर एक
> >> सिक्के के दो रुप होते है..आप सही भी हो सकते है..।
>
> >> सुश्रुत
>

> >> 2010/7/24 संजय | sanjay <sanjaybeng...@gmail.com>


>
> >> मामला हृदय परिवर्तन जैसा नहीं, मतिभ्रष्ट कर देने जैसा है.
>

> >>> 2010/7/24 sushrut jalukar <sushrutjalu...@gmail.com>


>
> >>> अभयजी,
> >>>> क्या ब्रेनवॉश के लिए...मत/मन परिवर्तन करना...। उचित रहेगा?
>
> >>>> सुश्रुत
>

> >>>> 2010/7/23 अभय तिवारी <abhay...@gmail.com>

anil janvijay

unread,
Jul 24, 2010, 8:45:21 AM7/24/10
to shabdc...@googlegroups.com
वैसे तो हिन्दी में 'मति फिरना' और 'मति मारी जाना' जैसे शब्द-समूहों का भी इस्तेमाल होता है।

2010/7/24 अभय तिवारी <abha...@gmail.com>

संजय | sanjay

unread,
Jul 25, 2010, 1:47:51 AM7/25/10
to shabdc...@googlegroups.com
मति-फेर

2010/7/24 anil janvijay <anilja...@gmail.com>

kapildev tripathi

unread,
Jul 25, 2010, 9:51:48 AM7/25/10
to shabdc...@googlegroups.com
जाकी मतिभ्रम भयउ खगेसासो कह पश्चिम उगेउ दिनेसातुलसी के यहां मतिभ्रम का
जो अर्थ है, वह क्या ब्रेनवाश के संदर्भ में ग्रहण करने योग्य है?  मति
भ्रम की जगह मति भ्रंश  कैसा रहेेगा ?On 23/07/2010, Bodhi Sattva
<abo...@gmail.com> wrote:> मति भ्रम> > 2010/7/23 संजय | sanjay
<sanjay...@gmail.com>> > > मुझे लगता है इसके लिए "मति" से कोई शब्द
बनेगा/ है. मति भ्रष्ट कर देना?  > > > > > > > > 2010/7/23 अभय तिवारी
<abha...@gmail.com> > > > > > > > Brainwash / ब्रेनवाश की परिघटना को
हिन्दी में सरल ढंग से कहने के लिए> > > कोई अच्छा तरीक़ा सुझायें.. एक

शब्द न भी हो तो चलेगा, वाक्यांश जैसा कुछ?> > > > > > > > -- > >>
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0-9820212573> -- kapildev

Abhay Tiwari

unread,
Jul 25, 2010, 9:58:17 AM7/25/10
to shabdc...@googlegroups.com
दोनों मे मौलिक फ़र्क़ ये है कि ये मतिभ्रम तो स्वतः हो रहा है जब कि ब्रेनवाश
किसी की दुष्प्रेरणा से हो रहा है। यह मतिभ्रम विपरीतबुद्धि जैसा है।

----- Original Message -----
From: "kapildev tripathi" <k.devt...@gmail.com>
To: <shabdc...@googlegroups.com>
Sent: Sunday, July 25, 2010 7:21 PM
Subject: Re: शब्द चर्चा ब्रेनवाश

अजित वडनेरकर

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Jul 25, 2010, 11:02:31 AM7/25/10
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मतिभ्रम और मतिभ्रंश दोनो की अलग अलग अर्थसत्ताएं हैं।

2010/7/25 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com>

ashutosh kumar

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Jul 25, 2010, 1:27:48 PM7/25/10
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मतिहरण निकटतम लगता है. यह ठीक है की मतिहरण में किसी ख़ास विचार के आरोपण का जो भाव ब्रेन वाश में है , वह ठीक ठीक  नहीं आता, लेकिन मूल बात यह है की जातक की अपनी स्वतंत्र मति का , सोचने विचारने की शक्ति का  , खात्मा हो गया है. उस की मति किसी और ने हर ली है . जिस ने हर ली है , जाहिर है जातक अब उसी की मति से चल रहा है, अपनी मति से नहीं .  

दिनेशराय द्विवेदी

unread,
Jul 25, 2010, 1:43:27 PM7/25/10
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मुझे लगता है कि ब्रेनवाश के लिए हिन्दी शब्द तलाशने के लिए पहले ब्रेनवाश को समझना आवश्यक है। ब्रेन को तो हम मस्तिष्क या दिमाग कहते हैं। इसे बुद्धि या मति भी कहा जा सकता है। लेकिन वाश के अनेक अर्थ हैं। धुलाई या धोना सामान्य अर्थ है लेकिन रंगना भी इस का एक अर्थ है। हम जब सफेदी कराते हैं तो उसे व्हाइट वाश कहते हैं। जब रंग कराते हैं तो उसे कलरवाश कहते हैं। इस अर्थ को भी ध्यान में रखा जाए तो ब्रेनवाश को हम मतिरंजन कह सकते हैं।

2010/7/25 ashutosh kumar <ashuv...@gmail.com>



मतिहरण निकटतम लगता है. यह ठीक है की मतिहरण में किसी ख़ास विचार के आरोपण का जो भाव ब्रेन वाश में है , वह ठीक ठीक  नहीं आता, लेकिन मूल बात यह है की जातक की अपनी स्वतंत्र मति का , सोचने विचारने की शक्ति का  , खात्मा हो गया है. उस की मति किसी और ने हर ली है . जिस ने हर ली है , जाहिर है जातक अब उसी की मति से चल रहा है, अपनी मति से नहीं .  



--
दिनेशराय द्विवेदी, कोटा, राजस्थान, भारत
Dineshrai Dwivedi, Kota, Rajasthan,

अजित वडनेरकर

unread,
Jul 25, 2010, 4:03:46 PM7/25/10
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किसी के रंग में रंगना भी अंधभक्ति, अंधशृद्धा का पर्याय है।
ब्रेनवाश के तत्व इसमें हैं।

इस नाते द्विवेदी जी का मतिरंजन एक अलग अर्थछटा के साथ सामने आया है। ब्रेनवाश से हटकर
भी मतिरंजन में एक स्वतंत्र हिन्दी शब्द बनने और इस्तेमाल होने के सभी गुण हैं। मैं इसका प्रयोग करूंगा।

शुक्रिया  दिनेशभाई हिन्दी में नया शब्द लाने के लिए। मैं इसे ब्रेनवाश के पर्याय के तौर पर नहीं बल्कि हिन्दी की भाव विदग्धता और वाग्मिता को बढ़ानेवाले शब्द
के बतौर देख रहा हूं।

2010/7/25 दिनेशराय द्विवेदी <drdwi...@gmail.com>

आराधना चतुर्वेदी "मुक्ति"

unread,
Jul 25, 2010, 4:05:51 PM7/25/10
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मुझे भी ये द्विवेदी जी की बात सही लगी.

2010/7/26 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>



--
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Abhay Tiwari

unread,
Jul 25, 2010, 8:55:32 PM7/25/10
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शृद्धा लिखने में कुछ निहितार्थ है अजित भाई, या उसे श्रद्धा ही समझा जाय..? :) :)
 
मतिरंजन अच्छा शब्द है मगर इसमें उस नकारात्मक बोध की कमी है जो मतिहरण या मतिमोहन में है। मनोरंजन जैसे शब्द की उपस्थिति के चलते इस में एक सुखद भाव का बोध हो रहा है.. ब्रेनवाश के लिए मेरा मत सबसे पहले तो बरगलाना और पट्टी पढ़ाना जैसे पहले से मौजूद शब्दों को है फिर मतिहरण और मतिमोहन जैसे नए शब्दों को.. बाक़ी तो हर व्यक्ति की अभिव्यक्ति आ़ज़ाद है..
 
इस चर्चा में कितने सुन्दर शन्द सामने आ रहे हैं यह देखकर मन मुदित है।

ashutosh kumar

unread,
Jul 26, 2010, 12:10:01 AM7/26/10
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कहा जा सकता है की राजू श्रीवास्तव मनोरंजन करतें हैं , जब की श्री श्री , मुरारी , आसाराम आदिक बापूजन  मतिरंजन  करतें हैं. अहा ... ! एकदम सटीक . क्योंकि ब्रेनवाश  ये  क्या खा कर करेंगे ! वह तो बस एक रजनीश ने किया था किसी जमाने में ! इन  के प्रवचनों को  ठीक ठीक मनोरंजन  कहना भी प्रतिभाशाली हास्य कलाकारों के लिए सम्मानजनक न होगा. मतिरंजन  यहां मुंह माँगी मुराद पूरी कर रहा है. एक विशिष्ट भारतीय परिघटना के लिए विशिष्ट भारतीय शब्द. मैं भी इस का प्रयोग करूंगा , दिनेश भाई , और अन्ग्रेजीसेवी  अपने  दुश्तों  [ दुश्मन  दोस्त , दुष्टों  }  को ललकारुंगा     कि ला के दिखाएँ इस का आंग्ल समानार्थी.   

दिनेशराय द्विवेदी

unread,
Jul 26, 2010, 12:29:37 AM7/26/10
to shabdc...@googlegroups.com
मित्रों!
मतिरंजन को आप लोगों ने मान्यता दी, लेकिन ब्रेनवाश के स्थान पर नहीं।
ब्रेन-वाश तो फिर खाली रह गया। इस दिशा में एक प्रयास और किया जाए।
तो.....
ब्रेनवाश के लिए...
मतिभंजन
कैसा है?

2010/7/26 ashutosh kumar <ashuv...@gmail.com>



कहा जा सकता है की राजू श्रीवास्तव मनोरंजन करतें हैं , जब की श्री श्री , मुरारी , आसाराम आदिक बापूजन  मतिरंजन  करतें हैं. अहा ... ! एकदम सटीक . क्योंकि ब्रेनवाश  ये  क्या खा कर करेंगे ! वह तो बस एक रजनीश ने किया था किसी जमाने में ! इन  के प्रवचनों को  ठीक ठीक मनोरंजन  कहना भी प्रतिभाशाली हास्य कलाकारों के लिए सम्मानजनक न होगा. मतिरंजन  यहां मुंह माँगी मुराद पूरी कर रहा है. एक विशिष्ट भारतीय परिघटना के लिए विशिष्ट भारतीय शब्द. मैं भी इस का प्रयोग करूंगा , दिनेश भाई , और अन्ग्रेजीसेवी  अपने  दुश्तों  [ दुश्मन  दोस्त , दुष्टों  }  को ललकारुंगा     कि ला के दिखाएँ इस का आंग्ल समानार्थी.   

Abhay Tiwari

unread,
Jul 26, 2010, 12:32:51 AM7/26/10
to shabdc...@googlegroups.com
अहा! .. अद्‌भुत है बन्धु!
----- Original Message -----
Sent: Monday, July 26, 2010 9:59 AM
Subject: Re: शब्द चर्चा ब्रेनवाश

आराधना चतुर्वेदी "मुक्ति"

unread,
Jul 26, 2010, 12:40:40 AM7/26/10
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मतिभंजन ... अच्छा लगा. 'मतिभ्रष्ट' से अपने आप होने का बोध होता है, जबकि 'मतिभंजन' ये स्पष्ट कर रहा है कि ब्रेनवाश दूसरे के द्वारा किया जाता है.

2010/7/26 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com>

संजय | sanjay

unread,
Jul 26, 2010, 12:57:37 AM7/26/10
to shabdc...@googlegroups.com
मतिरंजन का प्रयोग तो मैं भी करना चाहुंगा. हिन्दी के स्वभावानुकुल है. एक शुन्दर शब्द. कोई इसे वाक्य में प्रयोग करके भी बता दे तो अर्थ साफ हो जाए. सकारात्मकता है इस शब्द में अतः ब्रैन वॉश के लिए अभी और शब्द....

२६ जुलाई २०१० १०:१० AM को, आराधना चतुर्वेदी "मुक्ति" <guddub...@gmail.com> ने लिखा:

दिनेशराय द्विवेदी

unread,
Jul 26, 2010, 1:47:48 AM7/26/10
to shabdc...@googlegroups.com
संजय जी,
पत्नी रत्ना के एक वाक्य " मेरी हाड मांस से बनी देह पर इतनी आसक्ति के बदले ऐसी प्रीत श्री राम से करते तब , आप को अवश्य मुक्ति मिल जाती ! " रामबोला के हृदय में ऐसा प्रविष्ठ हुआ कि उस ने उसका मतिभंजन कर दिया। वह सीधे अपने गुरू नरहरि स्वामी की शरण में पहुँचा। उन से सुनी रामकथा ने उस का ऐसा मतिरंजन किया कि रामबोला तुलसीदास हो गया। तुलसीदास ने हमें रामचरित मानस जैसा हिन्दी साहित्य का अद्भुत मतिरंजक ग्रंथ दिया जो अब तक लाखों मनुष्यों का मतिरंजन कर चुका है और कर रहा है।

2010/7/26 संजय | sanjay <sanjay...@gmail.com>

संजय | sanjay

unread,
Jul 26, 2010, 1:56:50 AM7/26/10
to shabdc...@googlegroups.com
धन्यवाद दिनेशजी.

२६ जुलाई २०१० ११:१७ AM को, दिनेशराय द्विवेदी <drdwi...@gmail.com> ने लिखा:

ravikant

unread,
Jul 26, 2010, 2:01:39 AM7/26/10
to shabdc...@googlegroups.com
बिल्कुल दुरुस्त। समूह की रचनात्मकता चरम पर है। मतिभंजन या मतिहरण बेहतर है, मतिफेर या
मतिभ्रंश भी बुरा नहीं, संदर्भ पर मुनहसर होगा। लेकिन मैं मतिरंजन का इस्तेमाल
ओपिनियन-मेकिंग के लिए करना चाहूँगा। मतिरंजक -ओपिनियन मेकर।

इस चर्चा में निकला जातक शब्द भी निहायत मारक है। मैं चाहूँगा कि आशुतोष उस की और कुछ
अर्थच्छायाओं में जाएँ। मैं सोच रहा था कि हम सब्जेक्ट के लिए इसका प्रयोग कर सकते हैं,
क्योंकि हर जगह कर्ता काम नहीं करता।

शुक्रिया
रविकान्त

संजय | sanjay wrote:
> मतिरंजन का प्रयोग तो मैं भी करना चाहुंगा. हिन्दी के स्वभावानुकुल है. एक शुन्दर शब्द.
> कोई इसे वाक्य में प्रयोग करके भी बता दे तो अर्थ साफ हो जाए. सकारात्मकता है इस
> शब्द में अतः ब्रैन वॉश के लिए अभी और शब्द....
>
> २६ जुलाई २०१० १०:१० AM को, आराधना चतुर्वेदी "मुक्ति"

> <guddub...@gmail.com <mailto:guddub...@gmail.com>> ने लिखा:


>
> मतिभंजन ... अच्छा लगा. 'मतिभ्रष्ट' से अपने आप होने का बोध होता है, जबकि
> 'मतिभंजन' ये स्पष्ट कर रहा है कि ब्रेनवाश दूसरे के द्वारा किया जाता है.
>
> 2010/7/26 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com

> <mailto:abha...@gmail.com>>


>
> अहा! .. अद्‌भुत है बन्धु!
>
> ----- Original Message -----

> *From:* दिनेशराय द्विवेदी <mailto:drdwi...@gmail.com>
> *To:* shabdc...@googlegroups.com
> <mailto:shabdc...@googlegroups.com>
> *Sent:* Monday, July 26, 2010 9:59 AM
> *Subject:* Re: शब्द चर्चा ब्रेनवाश


>
> मित्रों!
> मतिरंजन को आप लोगों ने मान्यता दी, लेकिन ब्रेनवाश के स्थान पर नहीं।
> ब्रेन-वाश तो फिर खाली रह गया। इस दिशा में एक प्रयास और किया जाए।
> तो.....
> ब्रेनवाश के लिए...

> *मतिभंजन *


> कैसा है?
>
> 2010/7/26 ashutosh kumar <ashuv...@gmail.com

> <mailto:ashuv...@gmail.com>>


>
>
>
> कहा जा सकता है की राजू श्रीवास्तव मनोरंजन करतें हैं , जब की श्री

> श्री , मुरारी , आसाराम आदिक बापूजन */मतिरंजन/* करतें हैं.


> अहा ... ! एकदम सटीक . क्योंकि ब्रेनवाश ये क्या खा कर करेंगे !
> वह तो बस एक रजनीश ने किया था किसी जमाने में ! इन के प्रवचनों
> को ठीक ठीक मनोरंजन कहना भी प्रतिभाशाली हास्य कलाकारों के

> लिए सम्मानजनक न होगा. */मतिरंजन/* यहां मुंह माँगी मुराद पूरी


> कर रहा है. एक विशिष्ट भारतीय परिघटना के लिए विशिष्ट भारतीय
> शब्द. मैं भी इस का प्रयोग करूंगा , दिनेश भाई , और

> अन्ग्रेजीसेवी अपने *दुश्तों* [ दुश्मन दोस्त , दुष्टों } को


> ललकारुंगा कि ला के दिखाएँ इस का आंग्ल समानार्थी.
>
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> --
> दिनेशराय द्विवेदी, कोटा, राजस्थान, भारत
> Dineshrai Dwivedi, Kota, Rajasthan,
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ashutosh kumar

unread,
Jul 26, 2010, 10:51:26 AM7/26/10
to shabdc...@googlegroups.com


संतों , मुझे लग रहा है किम रचना और निर्माण की इस आंधी को नैक विश्राम  की जरूरत है.
क )मतिरंजन और मतिभंजन सुन्दर शब्द हैं, लेकिन इन की अर्थ्छायाओं को ले कर चर्चा समूह में भीषण गड़बड़झाला है. 
ख )मतिरंजन में अजितजी  ने अंधश्रद्धा और अंधभक्ति का स्पर्श पाया है. उन्हों ने  शब्द के वास्तविक उपयोग का उदाहरण प्रस्तुत नहीं किया है. अगर वे ऐसा करें तो हम उनके मंतव्य को बेहतर समझ पायेंगे. मैंने जो उदाहरण सोचा था , वह अजितजी के संकेत से प्रेरित लेकिन किंचित भिन्न है.मेरे उदाहरण में हमारे ख़ास दौर के नए गुरुओं के प्रभाव की ओर संकेत है. इसमें हल्का सा मजाहियापन और तंज़ भी है. मुझे लगता है कि इन गुरुओं का नए शहरी मध्य वर्ग पर जो प्रभाव है, उसे न तो अंधभक्ति कह सकतें हैं ब्रेनवाश. अंधभक्ति और ब्रेनवाश हमें चाहे जितना नापसंद हो , लेकिन उस में एक समर्पण होता है. उस में चालाकी नहीं होती . इन नए बापुओं के चेलों के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता. उन की भक्ति उनके जीवनक्रम को तनिक नही  प्रभावित करती. वे उनके प्रवचनों में एक नैतिक  विरेचन के लिए जातें हैं .इस के अतिरिक्त  थोड़ा सा समय और धन खर्च कर खुद को यह यकीन  दिला लेतें हैं की भगवान् जी को इतना उल्लू बना लिया है कि वे उनके शेष भ्रष्ट जीवन इग्नोर कर देंगे. इसलिए मनोरंजन के तर्ज पर इसे मतिरंजन कहना ठीक लग रहा है. एक नयी परिघटना के लिए नया शब्द . 
ग )दिनेशजी मतिरंजन का प्रयोग बुद्धि और ज्ञान के नए उन्मेष के परम सकारात्मक अर्थ में कर रहें हैं. इस के लिए सम्बोधि शब्द पहले से चलन में है. अर्तात सद्बुद्धि का जागरण.रविकांत ओपीनियन  मेकिंग का अर्थ ले रहें हैं , जो न सकारात्मक है, न नकारात्मक . एक तटस्थ शब्द है , मतनिर्माण  या मतरचना के बेहद करीब. 
घ )दिनेशजी ने मतिभंजन का जो प्रयोग किया है , वह और भी अटपटा है. लगता है जैसे रत्ना ने तुलसी की मति सुधारने की जगह उसे नष्ट भ्रष्ट कर डाला. रत्ना ने तुलसी के मोह को नष्ट किया या उनकी मति को ?    


  

ashutosh kumar

unread,
Jul 26, 2010, 10:56:12 AM7/26/10
to shabdc...@googlegroups.com
कृपया पिछली टिप्पणी   में   किम  को कि और अर्तात को अर्थात पढ़ें . 

2010/7/26 ashutosh kumar <ashuv...@gmail.com>

Abhay Tiwari

unread,
Jul 26, 2010, 11:02:38 AM7/26/10
to shabdc...@googlegroups.com
मित्रवर,
नए-नए शब्द बने हैं.. लोगों के उदार प्रयोग के बाद ही इन के अर्थ स्थिर हो पायेंगे.. वैसे भी अर्थविस्तार और अर्थ अंकोच तो शब्दयात्रा की स्वाभाविक प्रक्रिया है और ये शब्द तो अभी बन ही रहे हैं.. फिर भी आप की बातें और चिंताएं भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा है..
----- Original Message -----

Rangnath Singh

unread,
Jul 26, 2010, 11:26:03 AM7/26/10
to shabdc...@googlegroups.com
:-)

अजित वडनेरकर

unread,
Jul 26, 2010, 12:02:07 PM7/26/10
to shabdc...@googlegroups.com
श्रद्धा ही समझें भाई:))))


2010/7/26 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com>

ashutosh kumar

unread,
Jul 26, 2010, 1:51:18 PM7/26/10
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 उन तमाम बदनसीबों की   तरह , जिन्होंने शुक्ल जी का  श्रद्धा और भक्ति निबंध पढ़ा है , मैं  श्रद्धा को अंधश्रद्धा पढ़ पाने असमर्थ हूँ . क्या करूं?

Abhay Tiwari

unread,
Jul 26, 2010, 2:02:34 PM7/26/10
to shabdc...@googlegroups.com
प्रिय आशु,
 
अजित जी का आख़िरी जवाब मेरे लिए है.. उन्होने भूल से 'श्रद्धा' को 'शृद्धा' लिख दिया था तो मैंने चुहल में उनसे पूछा था : "शृद्धा लिखने में कुछ निहितार्थ है अजित भाई, या उसे श्रद्धा ही समझा जाय..?" तो उनका ये कहना कि "श्रद्धा ही समझें भाई:)" उसी के प्रत्युत्तर में है। तुमने जो पहले अंधभक्ति और अंधश्रद्धा की बाबत लिखा है उस से इसका सम्बन्ध नहीं है।
----- Original Message -----
Sent: Monday, July 26, 2010 11:21 PM
Subject: Re: शब्द चर्चा ब्रेनवाश

anil janvijay

unread,
Jul 26, 2010, 11:00:28 PM7/26/10
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श्रद्धा के मामले में तो महासंत भी गच्चा खा गए । :) :) ;)

2010/7/26 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com>

Bodhi Sattva

unread,
Jul 28, 2010, 10:21:33 AM7/28/10
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जाके प्रभु दारुन दुख देहीं। ताकी मति पहिले हरि लेहीं।
और
मति भ्रम मोर किआन बिसेखा।।

2010/7/27 anil janvijay <anilja...@gmail.com>

अजित वडनेरकर

unread,
Jul 28, 2010, 12:48:56 PM7/28/10
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हमारे मित्र दारुन का अर्थ दारू संबंधी लगाते थे। इस तरह दोहे का अर्थ होता था कि
ईश्वर जिसे मद्यव्यसनी बनाते हैं,
उनकी बुद्धि पहले ही भ्रष्ट कर देते हैं


2010/7/28 Bodhi Sattva <abo...@gmail.com>
360.gif

Rangnath Singh

unread,
Jul 28, 2010, 1:01:29 PM7/28/10
to shabdc...@googlegroups.com
@ajit ji. apki smiley to dil le gya :-)
360.gif

दिनेशराय द्विवेदी

unread,
Jul 28, 2010, 1:25:10 PM7/28/10
to shabdc...@googlegroups.com
अजित जी,
मुझे उस का कुछ भिन्न अर्थ भी समझ आया है ....
ईश्वर जिसे दारू न होने का दुखः देता है,
उनकी बुद्धि पहले ही भ्रष्ट कर देता है



2010/7/28 Rangnath Singh <rangna...@gmail.com>
360.gif

ashutosh kumar

unread,
Jul 28, 2010, 2:11:24 PM7/28/10
to shabdc...@googlegroups.com


सत्यवचन दिनेशजी.  दारू न होने के दुःख को कोई मतिहीन  ही झेल सके  है.ईश्वर सचमुच दयालु है.  

Abhay Tiwari

unread,
Jul 28, 2010, 2:18:21 PM7/28/10
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अरे कोई हम से मतई पूछे कि मतिहीनता में, दुख में, और मतिहीनता के दुख में डूबे-डूबे हम ने कैसे इतने साल निकाले हैं और पहाड़ सा जीवन आगे खड़ा है..
----- Original Message -----
Sent: Wednesday, July 28, 2010 11:41 PM
Subject: Re: शब्द चर्चा ब्रेनवाश



अजित वडनेरकर

unread,
Jul 28, 2010, 4:19:11 PM7/28/10
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अभयजी,
सब्र करे। पहाड़  के उस पार ही स्वर्ग है...

2010/7/28 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com>
360.gif

ashutosh kumar

unread,
Jul 29, 2010, 11:40:49 AM7/29/10
to shabdc...@googlegroups.com


और स्वर्ग में जो है सो पूरी नहर है शराब की , लेकिन चचा जान की इस बात का भी कुछ ख़याल करना चाहिए- 

कल के लिए न आज कर खिस्सत शराब में 
ये सू-ए-ज़न     है साकी -ए  - कौसर के बाब में 


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