'अंधेर नगरी'

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Ashutosh Kumar

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Aug 25, 2010, 1:52:34 PM8/25/10
to शब्द चर्चा
जैसे कलकत्ते के विल्सन मंदिर के भीतरिये , वैसे अंधेर नगरी के हम .''
भारतेंदु के प्रहसन 'अंधेर नगरी' में हलवाई कहता है.
यह नाटक १८८० के आस पास लिखा गया था.उस वक़्त यह विल्सन मंदिर क्यों
मशहूर था ?क्या वह आज भी है?भीतरिये कौन थे? यह कोई धर्म स्थान ही था
अथवा कोई नाट्यशाला या कोई महल या कुछ और?
इसी प्रहसन में घासीराम काशी की मशहूर वेश्याओं तौकी और मैना का जिक्र
करता है.गफूरन और मुन्नी का भी. ये सभी वास्तविक लोग थे. किन्ही संत से
कुछ प्रकाश मिलेगा ?

अजित वडनेरकर

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Aug 26, 2010, 9:09:32 AM8/26/10
to shabdc...@googlegroups.com
दिलचस्प।
यह हम भी जानना चाहेंगे।
बढ़िया जिज्ञासा लेकर आए आशुभाई...

फिलहाल हमें यह जानकारी मिली है। बिशप विल्सन द्वारा स्थापित कैथेड्रल को संभवतः तब विल्सन मंदिर कहा गया होगा....इस पर और प्रकाश इस मंच के संत-महात्मा डाल सकते हैं।


Saint Pauls Cathedral
Location: southern end of the Maidan
Period of construction: 1839-1847
Dedicated to: St. Paul
Calcutta St. Paul's Cathedral is the first Episcopal Church of the Orient. Bishop Wilson patronized the construction of this beautiful church in 1839. The credit for the awesome designing of this Indo-Gothic architecture goes to Major W.N. Forbes. The work of establishing the St. Paul Cathedral of Kolkata, India got completed in 1847. It is situated at the southern end of the Maidan. Read on to know more about the Saint Pauls Cathedral…

The church got destroyed due to the earthquake of 1897 and then it was renovated. But, the earthquake of 1934 led to the collapse of the tower and eventually it was rebuilt on the lines of the Bell Harry Tower of Canterbury Cathedral. It is 247 ft. in length and 81 ft. in width. The main hall of the cathedral is very large containing splendid carved wooden pews and chairs. Its eastern walls are covered with the mind-blowing colorful artwork.

The church is located within huge grounds, where you can also find a meditation point that has been set up in the recent times in collaboration with distinguished citizens of Tagore's Shantiniketan. The beautiful pictures describe the life and works of Saint Paul. The atmosphere of this cathedral is very tranquil. The architecture and the interim of the Saint Paul Cathedral is truly a feast for eyes.



2010/8/25 Ashutosh Kumar <ashuv...@gmail.com>



--
शुभकामनाओं सहित
अजित
http://shabdavali.blogspot.com/

Baljit Basi

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Aug 26, 2010, 10:24:26 AM8/26/10
to शब्द चर्चा
कोलकाता का एक Auckland Hotel भी मशहूर रहा है, जो इस के मालिक विल्सन के
नाम से 'विल्सन होटल' के तौर पर जाना जाता था. इसमें मार्क टवेन, खरुशचेव
और क्वीन एलिज़ाबेथ ठहर चुके हैं. हो सकता है इस के पास कोई मंदिर हो.
http://en.wikipedia.org/wiki/David_Wilson_(Calcutta)

David Wilson was born in Brilley, Herefordshire in 1808. He worked as
a confectioner in Calcutta and on 18 Nov 1840 he opened the Auckland
Hotel at 1-3 Old Court House Road in Calcutta. The hotel was also
known as Wilson's Hotel and changed its name to the Great Eastern
Hotel. It became the most famous hotel in India and is still
functioning today as the Grand Great Eastern Kolkata and is part of
the Bharat Hotels Group.

David married Mary Mandy (née Rose) in Calcutta in 1838. One of their
grandchildren was Lieut Boyd Alexander the famous African explorer.
David's sister Anne was in Calcutta and married one of David's
friends, also a confectioner, Frederick William Browne in 1840 also in
Calcutta. Frederick died on 5 October 1864 on board the steamer Persia
when it was lost at Sandheads in the great cyclone of 1864.

David moved back to England in the 1860s but continued to manage the
hotel. Over the ensuing years the hotel moved from strength to
strength. In 1863 it became the first hotel in India to be fully
electrified. Over the years famous guests have included Samuel Clemens
(Mark Twain), Nikita Khruskhev and Queen Elizabeth II.

When David died in 1880 his net worth was over 60000 pounds.

ashutosh kumar

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Aug 26, 2010, 2:25:04 PM8/26/10
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संतों , आप ने कमाल कर दिया. सारे दिन मैं हलकान रहा, लेकिन रौशनी की  लकीर  यहीं मिली. शब्द समूह की जय हो. 
अब सवाल है चर्च या होटल?
नाटक में वह उक्ति हलवाई की है . वह कहता है-जैसे विल्सन मंदिर के भितरिये , वैसे अंधेर नगरी के हम .डेविड विल्सन साहब भी हलवाई ही  ठहरे. भितरिये  से मैं परिचित न था, सो मैंने उसे भीतरिये पढ़ा और ऐसा ही उद्धृत भी किया. यह भितरिये   क्या रसोईयों  खानसामों के लिए इस्तेमाल किया गया हो सकता है ?कोई सूत्र बनाता है ऐसा?
मंदिर  तो महलों और ऊंची इमारतों को कहते ही  थे, सो देश भर में मशहूर उस होटल को विल्सन मंदिर कहा गया  हो , यह संभव है. जरूरी नहीं कि  उस के आस पास कोई मंदिर भी रहा हो. 
चर्च  को गिरिजाघर कहने का ही चलन है, उसे मंदिर कहा गया हो ,इस की संभावना कम लगती है .
उम्मीद है , इस पर कुछ और प्रज्ञा प्रवाह होगा...

अजित वडनेरकर

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Aug 27, 2010, 1:01:08 AM8/27/10
to shabdc...@googlegroups.com
चर्च  को गिरिजाघर कहने का ही चलन है, उसे मंदिर कहा गया हो ,इस की संभावना कम लगती है .

आशुभाई,
चर्च के लिए मंदिर शब्द का प्रयोग एक लेखकीय छूट की तरह है। तत्कालीन समाज में इसका प्रचलन था, यह नहीं कहता। एक रचनाकार अपने समय की परिस्थितियों पर क्या रचनात्मक टिप्पणी करता है, उसकी व्याख्या या विवेचना भी उसके दिमाग़ में ही होती है। कभी हम उसके नज़दीक पहुंचते हैं, कभी नहीं। हर लेखक द्वारा प्रयोग किए गए पद कहावत या मुहावरा बन जाएं, यह भी ज़रूरी नहीं। अक्सर व्यंग्य के दौरान ही ये टर्म बनती हैं। विल्सन मंदिर भी इसी तरह उपजा होगा, यह संभव है। चर्च है तो आराधना स्थल ही और मंदिर भी।

समाज को कुछ समझाने की कोशिश में ही टेढ़ी खीर जैसा मुहावरा चल पड़ता है। आज से दो सौ बरस पहले कोलकाता में बना यह भव्य आराधना स्थल तत्कालीन समाज में चर्चा का विषय रहा होगा। शिवशम्भू के चिट्ठे में भी ऐसी बातें मिलती हैं।

2010/8/26 ashutosh kumar <ashuv...@gmail.com>

V S Rawat

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Aug 27, 2010, 2:17:06 AM8/27/10
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On 8/27/2010 10:31 AM India Time, _अजित वडनेरकर_ wrote:

> _/चर्च को गिरिजाघर कहने का ही चलन है, उसे मंदिर कहा गया हो ,इस की संभावना कम
> लगती है ./_

गिरिजाघर का उद्भव किससे हो सकता है?

रावत

Abhay Tiwari

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Aug 27, 2010, 2:18:59 AM8/27/10
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वैसे तो मंदिर का अर्थ कोई भी घर हो सकता है। रामचरितमानस में ही जब हनुमान जी
लंका भ्रमण कर रहे हैं तो राक्षसों के घरों को भी मंदिर कहते हैं:

मंदिर मंदिर प्रति करि सोधा। देखे जहँ तहँ अगनित जोधा।।
गयउ दसानन मंदिर माहीं। अति बिचित्र कहि जात सो नाहीं।।

अगर भारतेन्दु ऐसा कुछ लिखें तो अचरज नहीं होना चाहिये। वैसे मैं सन्दर्भ से
पूरी तरह अपरिचित हूँ, अन्धेर नगरी मेरा पढ़ा हुआ नहीं है। बाक़ी लोग तय करें कि
मामला क्या है..

Abhay Tiwari

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Aug 27, 2010, 2:21:40 AM8/27/10
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इंगरिजया से घिस कर गिरजा..

----- Original Message -----
From: "V S Rawat" <vsr...@gmail.com>
To: <shabdc...@googlegroups.com>

V S Rawat

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Aug 27, 2010, 2:48:06 AM8/27/10
to shabdc...@googlegroups.com
On 8/27/2010 11:51 AM India Time, _Abhay Tiwari_ wrote:

> इंगरिजया से घिस कर गिरजा..

सोचना पड़ेगा कि ऐसा हो सकता है क्या। कुछ दूर की कौड़ी लग रही है।

वैसे कोई हिन्दू कनफुजाय तो नहीं गया था जो उसने गिरिजाघर नाम रखा। हो सकता है
किसी सीधे सादे भोले भाले हिन्दू पंडित जी ने चर्च में जा के देखा हो तो मदर मेरी की
मूर्ति को पार्वती की मूर्ति समझ लिया हो और पार्वती के दूसरे नाम उमा या गिरिजा
होने के कारण, गिरिजाघर नाम दे दिया हो।

सोचा दूर की कौड़ियाँ चल रही हैं तो एक मैं भी दे दूँ। हा हा हा। ये मेरी अपनी,
अभी-अभी तैयार की थ्योरी है। भ्रमित न हों।

रावत

Abhay Tiwari

unread,
Aug 27, 2010, 2:55:34 AM8/27/10
to shabdc...@googlegroups.com
मेरी कौड़ी नहीं है.. रमाशंकर शुक्ल 'रसाल' के शब्दकोष से है..

kamal swaroop

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Aug 27, 2010, 4:41:21 AM8/27/10
to shabdc...@googlegroups.com
gir ja ghar    ghutno per gir ja

2010/8/27 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com>

V S Rawat

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Aug 27, 2010, 4:45:13 AM8/27/10
to shabdc...@googlegroups.com
On 8/27/2010 2:11 PM India Time, _kamal swaroop_ wrote:

> gir ja ghar ghutno per gir ja

गिरि पहाड़ होता है। तो पहाड़ पर जा के बनाए गए घर को गिरि-जा-घर

रावत

>
> 2010/8/27 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com <mailto:abha...@gmail.com>>


>
> इंगरिजया से घिस कर गिरजा..
>
> ----- Original Message ----- From: "V S Rawat" <vsr...@gmail.com

> <mailto:vsr...@gmail.com>>
> To: <shabdc...@googlegroups.com
> <mailto:shabdc...@googlegroups.com>>

ashutosh kumar

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Aug 27, 2010, 6:16:07 AM8/27/10
to shabdc...@googlegroups.com
लेखकीय छूट  की बात  तर्क संगत है अजित भाई. मसला यह है कि हलवाई खुद को विल्सन मंदिर के भितरियों जैसा बताते हुए किस पर कटाक्ष करता है . और क्यों? अभी कोई प्रामाणिक बात तो सामने है नहीं . केवल अटकलबाजी है . इस लिए  संभावनाओं की नाप जोख करनी पड़ रही है. अंधेर नगरी का हर शब्द अर्थगर्भित है , और व्यंजनामंडित भी. इस लिए  विल्सन मंदिर का रहस्य (! )खुलना ही चाहिए. आप ने  तो भारतेंदुप्रेमी  रामविलासजी का खूब   पारायण कर  रखा है. मुझे उम्मीद है, आप कोई सूत्र निकाल लायेंगे. 
और मियाँ अभय,फारसी  और अंग्रेजी  की मोटी मोटी पोथियों से मिलट दो मिलट की फुरसत निकाल कर  नायिका की जगतप्रसिद्द कटि  सरीखी   अत्यंत दुबली इस  हिंदी कितबिया को पढ़ डालोगे ,   तो हम पर बड़ा उपकार होगा.  दिलचस्प  शब्दों का एक जखीरा है उहाँ  , जो समूह में आगे भी अवतरित होते रहेंगे. हिंदी शब्द चर्चा भारतेंदु युग के आहाते से बहुत दूर नहीं रह सकती. 
 

Baljit Basi

unread,
Aug 27, 2010, 6:53:37 AM8/27/10
to शब्द चर्चा
चुर्च को पुर्तगीज में गिरजा कहते हैं और यह पुर्तगीज से ही हमारी भाषाओँ
में आया. गिरजा और चर्च सुजाति हैं. बहुत सी यूर्पी भाषाओं में गिरजा
जैसा ही शब्द है जैसे फ्रांसीसी
में, iglesia हंगेरियन में egyhez, इंडोनेशियन में, gereja . लेकिन
जर्मन में kirche हो गया. फ़ारसी में इस कलीसा कहते हैं जो ग्रीक ecclesia
से आया है. यह सबी शब्द सुजाति हैं. मैं निश्चत रूप से नहीं कह सकता,
अनुमान है कि हमारा कलश शब्द भी इसका सुजाति है.
Baljit Basi

ashutosh kumar

unread,
Aug 27, 2010, 7:36:42 AM8/27/10
to shabdc...@googlegroups.com


गिरिजा का भेद खोलने के लिए बासी जी को सलाम .
तो रसालजी की कल्पनाशक्ति भी कम उर्वर न थी. 

V S Rawat

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Aug 27, 2010, 7:44:09 AM8/27/10
to shabdc...@googlegroups.com
हाँ, यह बढ़िया व्याख्या लगी। धन्यवाद, बासी जी।

अच्छा किया कि बता दिया कि फ़ारसी का कलीसा ग्रीक के ecclesia से आया है. वरना
हम तो सोचते रहते की कलीसा हमारे कलश से ही लिया गया होगा।

रावत

Abhay Tiwari

unread,
Aug 27, 2010, 7:57:49 AM8/27/10
to shabdc...@googlegroups.com
बासी जी की बात मुझे भी तार्किक लग रही है।

ashutosh kumar

unread,
Aug 27, 2010, 12:22:58 PM8/27/10
to shabdc...@googlegroups.com
इस प्रसंग में उद्धृत वाक्य के ठीक पहले का वाक्य यों है-
ऐसी जात हलवाई , जिस के छत्तीस कौम हैं भाई.

 अपने लेखन में भारतेंदु बार बार  उस जमाने में होटल प्रेम की नयी बयार तंज़ करतें हैं.होटल पश्चिमी सभ्यता की तमाम  बुराईयों के प्रतीक के रूप में आता है. 
घर बनाम होटल . 
अर्थात, पूरब बनाम पश्चिम. 

होटल प्रेम के रहते भारतीय सभ्यता बच नहीं सकती , क्योंकि होटल  जाति पांति के भेद के विरुद्ध नयी सभ्यता का एक स्टेटमेंट है. 

होटल का छोटा भाई है हलवाई. 
जिस  के छतीस कौम हैं भाई.

अपने समय का सब से मशहूर होटल भारतेंदु के गुस्से से बच नहीं सकता था.अंधेर नगरी से लेकर ज्ञाति विनाशिनी सभा तक उन के बहुत सारे नाटक जाति भेद के मिटते हुए कगारों से जन्म लेने वाली उन की विकट विकलता का प्रमाण हैं. 

जात vinaashak  

ashutosh kumar

unread,
Aug 27, 2010, 12:33:04 PM8/27/10
to shabdc...@googlegroups.com


चिप्पी मुकम्मल  होने के पहले ही प्रेषित हो गयी. 
जाति विनाशक आधुनिकता के समर्थक नहीं थे भारतेंदु.असल में अंधेर नगरी नाटक खुद उन ब्राहमणों पर भी हमला करता है , जो पैसे के लालच में लोगों की जाति के साथ घाल मेल करतें रहतें हैं. यह नाटक  सब से ज्यादा भिन्न जातियों में भेद न करने की नयी अंगरेजी कानूनियत के खिलाफ है. 

'सेत सेत सब एक से जहां कपूर कपास 
ऐसे देस कुदेस में कभी न कीजे बास.'

 इस कंजेक्चर से विलसन होटल के बारे में  बासी जी की अटकल ठीक मालूम होती ही. संतों की क्या राय है?

अजित वडनेरकर

unread,
Aug 27, 2010, 12:54:44 PM8/27/10
to shabdc...@googlegroups.com
एकदम सही है। जब इतने प्रसंग और संदर्भ है तब होटल को ही मंदिर कहा गया होगा।
मंदिर महल भी है, घर भी है, प्रासाद भी है।


2010/8/27 ashutosh kumar <ashuv...@gmail.com>

अभय तिवारी

unread,
Aug 27, 2010, 1:06:21 PM8/27/10
to शब्द चर्चा
अब खुल गया सब राज़. देखो पहले की लाइन दबाए बठे थे गुरु.. उसी में छिपा
था सब भेद..

ashutosh kumar

unread,
Aug 27, 2010, 1:09:24 PM8/27/10
to shabdc...@googlegroups.com
दबाये नहीं बैठे थे . उस पहले के वाक्य का महत्व ही तब समझ में आया , जब बासी जी ने होटल की बाबत बताया. 
शब्द चर्चा समूह , जिंदाबाद!

Ajit Wadnerkar

unread,
Oct 22, 2010, 5:33:17 PM10/22/10
to शब्द चर्चा
पिछले दिनों व्यस्त था, जब यह शब्दचर्चा चल रही थी। शब्दों का सफ़र पर
कलश शब्द के मद्देनज़र इसकी याद आई। कलश की दूसरी कड़ी में इस चर्चा का
ज़िक्र हुआ है। कृपया देखें-


हिन्दू विधि-विधानों में मांगलिक कार्य से पूर्व घट या कलश स्थापना का
बड़ा महत्व है। संस्कृत के क वर्ण में जल का भाव है। कलश का अर्थ हुआ जो
जल से सुशोभित है। संस्कृत हिन्दी में कलस और कलश दोनों रूप प्रचलित हैं
जिनका अर्थ है हिन्दू धर्मकोश में कालिकापुराण के हवाले से उल्लेख है कि
जब देवों और असुरों के बीच अमृत मन्थन हो रहा था तब अमृत धारण करने के
लिए विश्वकर्मा ने देवताओं अलग अलग कलाओं को एकत्र कर कलश का निर्माण
किया था जिससे इसे यह नाम मिला। कलां कलां गृहित्वा च दानं विश्वकर्मण।
निर्मितोSयं सरैर्यस्मात् कलशस्तेन उच्यते।। कलश को पृथ्वी का प्रतीक भी
माना जाता है और मांगलिक कार्यों में कलश स्थापना के पीछे पृथ्वी की पूजा
का ही भाव है। पृथ्वी जो आकाशीय जल को धारण करती है। बाद में कलश पूजा के
साथ विभिन्न देवों के आह्वान का भाव भी जुड़ गयां।
कलश स्थापना दरअसल वरुण की पूजा है। कलश का महत्व इसी बात से आँका जात
सकता है कि इसके मुख में विष्णु, ग्रीवा में शंकर, मूल में ब्रह्मा और
मध्य में मातृगणों की स्थिति मानी गई है। कलशस्य मुखे विष्णु: कण्ठे
रुद्रळ समाश्रित:, मूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणा: स्मृता:।
यह भी कहा गया है कि सभी वेद, नक्षत्रगण, सभी दिक्पाल अर्थात दिग्गजों की
व्याप्ति में कलश में होती है। कलश में उच्चता, पराकाष्ठा और शिखर का भाव
भी है। यहां भी जलतत्व का संकेत ही है जो आकाश से बरसता है। जिसे बादल
धारण करते हैं। पर्वतशिखर हिम से वेष्टित होते हैं जो उसका कलश है। जल ही
पृथ्वी पर समृद्धि और जीवन का कारक है इसीलिए प्रायः सभी मंदिरों-
देवालयों के शिखर पर कलश स्थापित होता है जो सुख, समृद्धि और मंगल का
प्रतीक होता है।
गूगल के शब्दचर्चा समूह में पिछले दिनों अमेरिका प्रवासी पंजाबी के
कोशकार बलजीत बासी ने एक चर्चा के दौरान संभावना जताई की ईसाई
प्रार्थनास्थल के लिए उर्दू में प्रचलित कलीसा शब्द का कलश से रिश्ता हो
सकता है। इस पर विचार करने से पहले जानते हैं कलीसा शब्द के बारे में जो
उर्दू में फ़ारसी से आया है। मूलतः कलीसा को अरबी लफ़्ज़ माना जाता है।
भाषाविज्ञानियों इसे सेमिटिक भाषा परिवार का नहीं मानते और सामी परिवार
की भाषाओं में इसकी आमद प्राचीन ग्रीक के इक्कलेसिया ekklesia से मानते
हैं। ग्रीक में इक्लेसिया का प्रचलित अर्थ है चर्च, ईसाइयों का पूजास्थल।
विद्वानों का मानना है कि अंग्रेजी का चर्च शब्द दरअसल ग्रीक इक्कलेसिया
का अनुवाद है और यह धार्मिक शब्द न होकर राजनीतिक शब्दावली से जुड़ता है।
ग्रीक इक्लेसिया दो शब्दों से मिलकर बना है एक ek यानी बाहर और कलेओ यानी
kaleo यानी पुकारना। भाव हुआ लोगों का आह्वान करना, उन्हें बुलाना। ग्रीक
इक्लेसिया दरअसल एक सामूहिक पंचायत होती थी जिसमें लोगों को मिल बैठकर
किसी मुद्दे पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया जाता था। ईसा खुद अपनी कौम के
प्रमुख थे और उनकी सभाओं के लिए, इक्लेसिया शब्द का प्रयोग हुआ है। बाद
में बाइबल के न्यू टेस्टामेंट में इसका अनुवाद बतौर चर्च हुआ। ईसा के बाद
यह शब्द पूजास्थल के रूप में रूढ़ होता चला गया। इसका अरबीकरण हुआ कुछ
यूं हुआ- इक्लेसिया > कलीसिया > कलीसा। हालाँकि कई विद्वानों का यह भी
कहना है कि शुद्ध अरबी में कलीसा जैसा कोई शब्द नहीं मिलता। अरबी में
ईसाई आराधनास्थल के लिए जो लफ़्ज़ है वह कनीसः है जिसका मूल स्त्रोत
आरमेइक ज़बान है न कि ग्रीक। इसकी पुष्टि मद्दाह साहब के उर्दूकोश से भी
होती है जिसमें कलीसा के नाम से कोई प्रविष्टि दर्ज़ नहीं है अलबत्ता
कनीसः या किनीस ज़रूर दिया हुआ है जिसका अर्थ ईसाई उपासनाघर बताया गया
है। कनीसिया इसका बहुवचन होता है। ईजे ब्रिल्स के फर्स्ट
इन्साइक्लोपीडिया ऑफ इस्लाम में भी कलीसा का उल्लेख न होकर कनीसः का ही
ज़िक्र है।

भारत में ईसाई पूजास्थल के लिए गिरजा या गिरजाघर शब्द खूब प्रचलित है
जिसकी आमद हिन्दी में बरास्ता पुर्तगाली हुई। गिरजा का मूल भी इक्लेसिया
ही है। ग्रीक से इसका स्पैनिश रूप हुआ इग्लेजिया iglelisa जहाँ से
पुर्तगाली में यह हुआ इगरेजिया igreja. पुर्तगाली जब भारत आए तो इसका एक
नया रूपांतर हुआ गिरजा। अंग्रेजी का चर्च इस मूल से नहीं निकला है।
एटिमऑनलाईन के अनुसार यह प्राचीन भारोपीय मूल की धातु क्यू से निकला है।
मूलतः ग्रीक में इसके लिए किरीयोस kyrios शब्द है जो राजा, श्रीमंत या
प्रभावी व्यक्तियों के लिए प्रयोग होता है। इससे बना kyriakon doma
अर्थात शाही महल या प्रासाद। विभिन्न यूरोपीय भाषाओं में इसके मिलते
जुलते रूपांतर हुए जिसमें जर्मन रूप था Kirche किर्चे और इसका ही
अंग्रेजी रूपांतर है चर्च। जर्मन किर्चे इक्लेसिया की कड़ी में नहीं आता
और न ही iglelisa का रूपांतर है, जैसा कि बलजीत बासी बता रहे हैं।
ईसाई गिरजाघरों के शिखर या तो नुकीले होते हैं या फिर वहां क्रॉस लगा
होता है। कलश लगाने जैसी कोई परिपाटी गोथिक स्थापत्य में नहीं मिलती। घट
या कलश का जैसा महत्व भारतीय संस्कृति में है वैसा यूरोपीय संस्कृति में
नहीं है। दूसरी सबसे खास बात कलश में जल और उच्चता के भावों का उद्घाटन
होना। इक्लेसिया या कलीसा से कलश की उत्पत्ति तार्किक रूप से स्वीकार तभी
की जा सकती है जब इक्लेसिया के मूल में भी उच्चता और जल जैसे निहितार्थ
हों, पर वहां ऐसा नहीं है। इक्लेसिया स्थानवाची, समूहवाची शब्द है। इसका
स्पष्ट अर्थ जनसमूह की गोष्ठी है। यही बात चर्च में भी है जिसका
व्युत्पत्तिमूलक अर्थ श्रीमंत का आवास है। यहां भी स्थानवाचक भाव प्रमुख
है। इसलिए कलीसा शब्द की कलश से तुलना सिर्फ ध्वनिसाम्य का मामला है
बाकी अर्थगत और भावगत कोई भी रिश्ता दोनों शब्दों में नहीं है। कलश में
स्पष्ट चिंतन है, दर्शन है, अध्यात्म है और अलग अलग संदर्भों में इसकी
अर्थवत्ता और गहरी होती जाती है, जबकि चर्च, गिरजा या कलीसा सिर्फ़
आराधना स्थलों के नाम भर हैं।
-जारी

On Aug 27, 4:57 pm, "Abhay Tiwari" <abhay...@gmail.com> wrote:
> बासी जी की बात मुझे भी तार्किक लग रही है।
>
> ----- Original Message -----
> From: "Baljit Basi" <baljit_b...@yahoo.com>
> To: "शब्द चर्चा" <shabdc...@googlegroups.com>
> Sent: Friday, August 27, 2010 4:23 PM
> Subject: [शब्द चर्चा] Re: गिरिजाघर
>
> > चुर्च को पुर्तगीज में गिरजा कहते हैं और यह पुर्तगीज से ही हमारी भाषाओँ
> > में आया. गिरजा और चर्च सुजाति हैं. बहुत सी यूर्पी भाषाओं में गिरजा
> > जैसा ही शब्द है जैसे फ्रांसीसी
> > में, iglesia हंगेरियन में egyhez, इंडोनेशियन में, gereja .  लेकिन
> > जर्मन में kirche हो गया. फ़ारसी में इस कलीसा कहते हैं जो ग्रीक ecclesia
> > से आया है. यह सबी शब्द सुजाति हैं. मैं निश्चत रूप से नहीं कह सकता,

> > अनुमान है कि हमाराकलशशब्द भी इसका सुजाति है.

Baljit Basi

unread,
Oct 25, 2010, 7:24:59 AM10/25/10
to शब्द चर्चा
मैं करीब दो हफ्ते के लिए घर से बहुत दूर सियाटल में हूँ . हवाई सफ़र ही
सात घंटे का है. कम्प्युटर का साथ कम ही होता है, इस लिए इन दिनों शब्द
चर्चा में भी भाग नहीं ले रहा.
बहुत साल पहले अंग्रेज़ी-पंजाबी कोष बनाते समय जब हम ecclesiastic शब्द
पर आए थे तो सोचा था कि शायद इस का संबंध कलश से हो .शब्दों की व्युत्पति
में तब हमारी रुची ना थी और ना ही ज़रुरत पड़ती थी. उस दिन गिरजाघर शब्द
का ज़िक्र करते हुए यह बात दिमाग में आ गई और चलती कलम में ऐसा लिखा
गया . यह मेरी भूल थी जिस का मुझे जल्दी अहसास हो गया जब मैं ने इस शब्द
की व्युत्पति की पड़ताल की, लेकिन तब तक चर्चा ख़तम हो गई थी.फिर यह काम
बाद के लिए छोड़ दिया . वैसे भी कलश शब्द की व्युत्पति जानना मेरे वश की
बात न थी , यह काम तो अजीत जी ही कुशलता से कर पाते हैं और ऐसा किया भी
है. मैं उनका शुक्रगुज़ार हूँ, उन्होंने मेरे मन का बोझ उतार दिया.

OCTOBER 25, 2010 4:49 PM

> > > जर्मन में kirche हो गया. फ़ारसी में इस कलीसा कहते हैं जो ग्रीक ecclesia

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