On 30 दिस., 03:06, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> यही है ।
>
> 2012/12/30 दिनेशराय द्विवेदी <drdwive...@gmail.com>
>
>
>
>
>
> > जघन्य का अर्थ आप्टे ने सब से पिछला, अंतिम, सब से बुरा, अत्यन्त दुष्ट,
> > कमीना, अधम, निन्द्य और शूद्र ही दिया है।
>
> > 2012/12/30 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
>
> >> जघन्य' का सम्बन्ध 'जाँघ' से हो सकता है? जघन्य के मुख्य अर्थ अंतिम;
> >> अत्यंत बुरा और नीच जाती अथवा शूद्र है। जांघ को शरीर का निचला भाग
> >> माना गया है इस लिए इसका अर्थ अंतिम बना । आगे इसका अर्थ बना जो जांघ
> >> से पैदा हुआ। नीचे से पैदा होने के कारण वह शूद्र है और शूद्र को करूर
> >> माना जाता है इसलिए इसका अर्थ करूर है। यह मेरा अनुमान है।
>
> >> On 29 दिस., 22:12, eg <girijesh...@gmail.com> wrote:
> >> > कृपया 'जघन्य' और 'नृशंस' शब्दों के उत्स और प्रयोग पर प्रकाश डालें।
>
> >> > धन्यवाद।
>
> > --
> > *दिनेशराय द्विवेदी, *कोटा, राजस्थान, भारत
> > Dineshrai Dwivedi, Kota, Rajasthan,
> > *क्लिक करें, ब्लाग पढ़ें ... अनवरत <http://anvarat.blogspot.com/> तीसरा
> > खंबा <http://teesarakhamba.com/>*
>
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> *
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>
> उद्धृत पाठ दिखाए
On 30 दिस., 03:14, दिनेशराय द्विवेदी <drdwive...@gmail.com> wrote:
> नृशंस का अर्थ भी लगभग वही है जो जघन्य का है नृ का अर्थ एक नर या मादा
> मनुष्य, शस् का अर्थ काटना, मारना, नष्ट करना है और अण् का अर्थ तुच्छ है।
> नृ+शस्+अण् से यह शब्द बना है। इस का अर्थ मनुष्य को काटना, मारना या नष्ट
> करना होना चाहिए।
>
> 2012/12/30 दिनेशराय द्विवेदी <drdwive...@gmail.com>
>
>
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>
> > जघन्य का अर्थ आप्टे ने सब से पिछला, अंतिम, सब से बुरा, अत्यन्त दुष्ट,
> > कमीना, अधम, निन्द्य और शूद्र ही दिया है।
>
> > 2012/12/30 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
>
> >> जघन्य' का सम्बन्ध 'जाँघ' से हो सकता है? जघन्य के मुख्य अर्थ अंतिम;
> >> अत्यंत बुरा और नीच जाती अथवा शूद्र है। जांघ को शरीर का निचला भाग
> >> माना गया है इस लिए इसका अर्थ अंतिम बना । आगे इसका अर्थ बना जो जांघ
> >> से पैदा हुआ। नीचे से पैदा होने के कारण वह शूद्र है और शूद्र को करूर
> >> माना जाता है इसलिए इसका अर्थ करूर है। यह मेरा अनुमान है।
>
> >> On 29 दिस., 22:12, eg <girijesh...@gmail.com> wrote:
> >> > कृपया 'जघन्य' और 'नृशंस' शब्दों के उत्स और प्रयोग पर प्रकाश डालें।
>
> >> > धन्यवाद।
>
> > --
> > *दिनेशराय द्विवेदी, *कोटा, राजस्थान, भारत
> > Dineshrai Dwivedi, Kota, Rajasthan,
> > *क्लिक करें, ब्लाग पढ़ें ... अनवरत <http://anvarat.blogspot.com/> तीसरा
> > खंबा <http://teesarakhamba.com/>*
>
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> *दिनेशराय द्विवेदी, *कोटा, राजस्थान, भारत
> Dineshrai Dwivedi, Kota, Rajasthan,
> *क्लिक करें, ब्लाग पढ़ें ... अनवरत <http://anvarat.blogspot.com/> तीसरा
> खंबा <http://teesarakhamba.com/>*- उद्धृत पाठ छिपाएँ -
On 30 दिस., 03:27, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> जी कोशिश करता हूँ ।। कुछ वक़्त दीजिए । वर्षान्त की अतिव्यस्तता है फ़िलहाल ।
>
> 2012/12/30 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
On 30 दिस., 03:48, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> मेरे हिसाब से अन्त एक नैसर्गिक क्रिया है सो शुभ ही है ।
> किसी दुष्ट के हाथों ऋषि का अन्त नैसर्गिक नहीं है
> पर वीर के हाथों दुष्ट का अन्त नैसर्गिक है ।
> सो यह वाक्य प्रयोग कि दुष्ट ने ऋषि का अन्त कर दिया ग़लत होगा यहाँ ऋषि की
> हत्या ज्यादा उचित होगा ।
> हाँ वीर ने दुष्ट का अन्त कर दिया प्रयोग भी सही है ।
>
> हम सबके लिए वर्षान्त हमेशा ही शुभ लक्षण है:)
>
> 2012/12/30 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>

जघन और जंघा दो भिन्न शब्द मिलते हैं शब्दकोष में.. जघन का अर्थ दिया है कूल्हा या पुट्ठा- जो शरीर का सबसे पिछला भाग है- और सेना का पिछला भाग; जंघा का अर्थ मिलता है टखने से घुटने तक का भाग यानी पिण्डली। हालांकि ये जंघा के लोकप्रिय अर्थ से अलग है।जघन्य जो जघन से बना है, का अर्थ 'अन्तिम', सबसे पिछला होने के कारण से ही है।