"नील" के पंजाबी यमक/श्लेष?

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ई-स्वामी

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Jul 9, 2011, 1:17:13 PM7/9/11
to शब्द चर्चा समूह
मैं नील कराईय़ां नीलकां मेरा तन-मन नीलो नील
मैन्नू हिज़्र दी सूली चाढेया मेरी इक ना सुनी ज़लील


इस में पहली लाईन बाऊंसर निकल गई है, कृपया भावार्थ स्पष्ट करें.

--
http://hindini.com
http://hindini.com/eswami

अजित वडनेरकर

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Jul 9, 2011, 3:46:46 PM7/9/11
to shabdc...@googlegroups.com
ओ बलजीत प्राजी तुसी कित्थे ओ...


2011/7/9 ई-स्वामी <esw...@gmail.com>



--


अजित

http://shabdavali.blogspot.com/
मोबाइल-
औरंगाबाद- 07507777230
    भोपाल- 09425012329


ई-स्वामी

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Jul 10, 2011, 11:42:17 AM7/10/11
to shabdc...@googlegroups.com
इसके दो वीडियो भी उपलब्ध हैं.
एक ओल्ड स्कूल एक न्यू स्कूल - जिनमे पहली पंक्ति के अलावा अलग अलग वर्जन हैं.
ओल्ड स्कूल या ओरिजिनल वीडियो की कडी दे रहा हूं. एकदम विंटेज किस्म की गायकी है लेकिन ऐसे गीतो से ही नये हिट  गीत उपजते हैं. :)

http://www.youtube.com/watch?v=napY_GylGSc


2011/7/9 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>

Baljit Basi

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Jul 10, 2011, 1:22:54 PM7/10/11
to शब्द चर्चा
मुझे नीलकां शब्द की दिक्कत है, मैंने यह कबी नहीं सुना. पंजाबी में कौए
को कां बोलते हैं , सो नीलकां का मतलब नीला कौया हुआ. आप किसी ने कबी
नीला कौया सुना है? यहाँ यह ज़ालिम प्रेमी का प्रतीक बनता है. अगर हम
इसे नीलकंठ माने तो यह पक्षी किसी को तंग करने वाला नहीं होता. हाँ किसी
पशू के ऊपर बैठा कौया उसकी गर्दन ज़रूर नोचता रहता है...खैर, अपनी समझ
अनुसार इन लाईनों का अर्थ पेश करता हूँ , भावार्थ अपने आप निकल लीजिये.
वियोग पीड़ित प्रेमिका कह रही है कि ज़ालिम 'नीलकां' के वियोग की पीड़ा ने
मेरा तन मन नीला कर दिया है.(बहुत चोटें लगने से शरीर में नील पड़ जाते
हैं, पंजाबी में इसे नीलो-नील होना कहा जाता है) . प्रेमी की रुसवाई ने
मुझे इस कदर ज़लील कर रखा है कि मानों मैं हिज्र की सूली पर चढ़ी
हूँ .नीलकां के बारे में जब भी मुझे पता चला , यहाँ जरूर बताऊँगा.

On 9 जुला, 15:46, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> ओ बलजीत प्राजी तुसी कित्थे ओ...
>
> 2011/7/9 ई-स्वामी <esw...@gmail.com>
>

> > *मैं नील कराईय़ां नीलकां मेरा तन-मन नीलो नील
> > मैन्नू हिज़्र दी सूली चाढेया मेरी इक ना सुनी ज़लील *


>
> > इस में पहली लाईन बाऊंसर निकल गई है, कृपया भावार्थ स्पष्ट करें.
>
> > --
> >http://hindini.com
> >http://hindini.com/eswami
>
> --
>

> *
> अजित*http://shabdavali.blogspot.com/

Rangnath Singh

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Jul 10, 2011, 1:59:30 PM7/10/11
to shabdc...@googlegroups.com
बलजीत जी, आपके दिए अर्थ के बाद तो लग रहा है की यहाँ नीलकां कृष्ण या राम  सरीखे नीले बदन वाले प्रेमी को भी कहा जा सकता है. परंपरागत कैलेंडर पोस्टरों में इन्हें नीले बदन वाला ही दिखाया जाता है. श्याम को नीला दिखाने का कारण का मुझे कोई अंदाजा नहीं.

(यह मेरा अनुमान है. बलजीत जी की टिप्पणी पढने के बाद. इसी कोई स्थापना न समझें)  

2011/7/10 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>

ई-स्वामी

unread,
Jul 10, 2011, 7:26:17 PM7/10/11
to shabdc...@googlegroups.com
धन्यवाद बलजीतजी! 
इस परिपेक्ष्य में पिछले संदेश में दी वीडियो कडी देखियेगा. 

इस के ओरिजिनल गीत में बोल यूँ हैं - 

मैं नील कराईयाँ नीलकाँ मेरा तन-मन नीलो नील 
मैं सौदे कित्ते दिलाँ दे विच ध्हर लए नैन वकील

शायद इस से कुछ और क्लू मिले! :) 



2011/7/10 Rangnath Singh <rangna...@gmail.com>

अजित वडनेरकर

unread,
Jul 11, 2011, 12:51:39 AM7/11/11
to shabdc...@googlegroups.com
स्वामीजी,
एक लिंक और संभालिए। मामला पंजाबी का था, सो बलजीत भाई की राह देख रहा था।
नीलकां तो अपने भी ऊपर से निकल गया था। अब जो नील उभर कर आया है सो वो
हिन्दी में भी है।
पेश है इसी नील पर लिखा गया सफ़र का एक पड़ाव-

चम्पा, नीलोफर और नील कमल
http://shabdavali.blogspot.com/2008/12/blog-post.html

On 7/11/11, ई-स्वामी <esw...@gmail.com> wrote:
> धन्यवाद बलजीतजी!
> इस परिपेक्ष्य में पिछले संदेश में दी वीडियो कडी देखियेगा.
>
> इस के ओरिजिनल गीत में बोल यूँ हैं -
>

> *मैं नील कराईयाँ नीलकाँ मेरा तन-मन नीलो नील *
> *मैं सौदे कित्ते दिलाँ दे विच ध्हर लए नैन वकील*
> *
> *


--

*
अजित*

Baljit Basi

unread,
Jul 11, 2011, 2:16:52 AM7/11/11
to शब्द चर्चा
ज़रा ठहरिये, मामला गड़बड़ है, शायद शब्द *नीलखां हो!

On 11 जुला, 00:51, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> स्वामीजी,
> एक लिंक और संभालिए। मामला पंजाबी का था, सो बलजीत भाई की राह देख रहा था।
> नीलकां तो अपने भी ऊपर से निकल गया था। अब जो नील उभर कर आया है सो वो
> हिन्दी में भी है।
> पेश है इसी नील पर लिखा गया सफ़र का एक पड़ाव-
>

> चम्पा, नीलोफर और नील कमलhttp://shabdavali.blogspot.com/2008/12/blog-post.html


>
> On 7/11/11, ई-स्वामी <esw...@gmail.com> wrote:
>
>
>
>
>
> > धन्यवाद बलजीतजी!
> > इस परिपेक्ष्य में पिछले संदेश में दी वीडियो कडी देखियेगा.
>
> > इस के ओरिजिनल गीत में बोल यूँ हैं -
>
> > *मैं नील कराईयाँ नीलकाँ मेरा तन-मन नीलो नील *
> > *मैं सौदे कित्ते दिलाँ दे विच ध्हर लए नैन वकील*
> > *
> > *

> > एक कडी और है -http://www.youtube.com/watch?v=h11p5dIwWCs&feature=related


> > शायद इस से कुछ और क्लू मिले! :)
>

> > 2011/7/10 Rangnath Singh <rangnathsi...@gmail.com>


>
> >> बलजीत जी, आपके दिए अर्थ के बाद तो लग रहा है की यहाँ नीलकां कृष्ण या राम
> >>  सरीखे नीले बदन वाले प्रेमी को भी कहा जा सकता है. परंपरागत कैलेंडर
> >> पोस्टरों
> >> में इन्हें नीले बदन वाला ही दिखाया जाता है. श्याम को नीला दिखाने का कारण
> >> का
> >> मुझे कोई अंदाजा नहीं.
>
> >> (यह मेरा अनुमान है. बलजीत जी की टिप्पणी पढने के बाद. इसी कोई स्थापना न
> >> समझें)
>

> >> 2011/7/10 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>

>     भोपाल- 09425012329- उद्धृत पाठ छिपाएँ -
>
> उद्धृत पाठ दिखाए

भाई भोपाली

unread,
Jul 11, 2011, 2:43:38 AM7/11/11
to shabdc...@googlegroups.com
नीलखां यानी नहीं देखा?
नी-लखाँ
क्या बलजीत भाई सही है?


2011/7/11 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>



--


अजित

Baljit Basi

unread,
Aug 5, 2011, 8:10:20 AM8/5/11
to शब्द चर्चा
मसला कुछ सुलझ गया है. मैंने जब वीडियो से सुना था तो शब्द 'नीलकां'
की जगह 'नीलखां' सुनाई दे रहा था. मैंने सोचा, जिस फिल्म का यह गाना है
शायद उसके किसी पात्र का नाम नीलखां होगा. बात और निकली, शब्द तो नीलखां
ही है लेकिन इसका अर्थ और है. चोट लगने पर जो शरीर में नीले दाग पड़ते
हैं उनको पंजाबी में नील कहते हैं (हिंदी में भी ऐसा ही है न?). पकिस्तान
की पंजाबी में इस नील को 'नीलख' कहते हैं और इस नीलख का बहुवचन हुआ
नीलखां. अगर नीलख हिंदी का शब्द हो तो इसका बहुवचन होगा 'नीलखें'. कुल
मिला कर भावअर्थ वही है जो मैंने पहले लिखा था. बस चोट खाए होने की दुहाई
है. मैं नील कराईय़ां नीलखां = मुझे नीले दागों ने नीला कर दिया. मुझे इस
शब्द का ज्ञान न था, यहाँ के एक पाकिस्तानी ने बताया. खैर, मुझे यह शब्द
बहुत अच्छा लगा, आप लोगों का भी शब्द-ज्ञान बड़ा.

On 11 जुला, 02:43, भाई भोपाली <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> नीलखां यानी नहीं देखा?
> नी-लखाँ
> क्या बलजीत भाई सही है?
>

> 2011/7/11 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>

दिनेशराय द्विवेदी

unread,
Aug 5, 2011, 8:38:31 AM8/5/11
to shabdc...@googlegroups.com
नील से बहुवचन सीधे नीलें बनता है। जिस का हिन्दी में बहुत प्रयोग होता है। हाडौंती वाले तो इसे लील या लीलें बोलते हैं।

2011/8/5 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>



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दिनेशराय द्विवेदी, कोटा, राजस्थान, भारत
Dineshrai Dwivedi, Kota, Rajasthan,
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Ravikant

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Aug 5, 2011, 9:16:04 AM8/5/11
to shabdc...@googlegroups.com
शुक्रिया बलजीत भाई।मगही में भी लील इसी अर्थ में चलता है: 'लील पाड़के मरलकै', यानि इतना पीटा कि नील पड़ गया।और आपको पढ़ते हुए मुझे एक हिन्दी गाने के बीच का टुकड़ा याद आ गया: 'एक आँख मारूँगी तो नील पड़ जाएगा' मुखड़ा अभी दग़ा दे रहा है।

रविकान्त 

raj....@sbi.co.in

unread,
Aug 5, 2011, 10:12:42 AM8/5/11
to shabdc...@googlegroups.com
भाई,पंजाबी का तो मुझे पता नही किन्तु हिन्दी और उसकी विभिन्न बोलियों मे ' नील' ही कहते हैं जो चोट या ऐसी मार-कुटाई जिसमे खाल हटे नही अर्थात खून न निकले, उससे पड़ने वाले निशान को नील कहते हैं बल्कि और आगे बढ़कर 'नीलसाह' या जन बोली मे बिगाड़ कर 'लीलसाह' भी कहते हैं. यहां 'साह' "स्याह" का अपभ्रंश है. वस्तुतः दाग काला ( स्याह) ही पड़ता है, बस उसे थोड़ा अच्छा (दाग अच्छे हैं ! ) करके नीला या नील कहते हैं.
राज नारायण

-----shabdc...@googlegroups.com wrote: -----
To: shabdc...@googlegroups.com
From: Ravikant
Sent by: shabdc...@googlegroups.com
Date: 08/05/2011 06:42PM
Subject: Re: [शब्द चर्चा] Re: "नील" के पंजाबी यमक/श्लेष?

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e Swami

unread,
Aug 5, 2011, 10:57:10 AM8/5/11
to shabdc...@googlegroups.com
बहुत बढ़िया ... हमारी भाषाओँ की सुन्दरता अलग ही है. धन्यवाद बासी जी.


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Rangnath Singh

unread,
Aug 5, 2011, 1:53:24 PM8/5/11
to shabdc...@googlegroups.com

बहुत ही सुन्दर समाधान बलजीत जी... पूवी उत्तर प्रदेश में नील पड़ना इसे ही कहते हैं..
2011/8/5 e Swami <esw...@gmail.com>

भाई भोपाली

unread,
Aug 5, 2011, 2:00:22 PM8/5/11
to shabdc...@googlegroups.com
बलजीत बासी जी का बहुत बहुत शुक्रिया है...

2011/8/5 Rangnath Singh <rangna...@gmail.com>



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अजित
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