
On 9 जुला, 15:46, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> ओ बलजीत प्राजी तुसी कित्थे ओ...
>
> 2011/7/9 ई-स्वामी <esw...@gmail.com>
>
> > *मैं नील कराईय़ां नीलकां मेरा तन-मन नीलो नील
> > मैन्नू हिज़्र दी सूली चाढेया मेरी इक ना सुनी ज़लील *
>
> > इस में पहली लाईन बाऊंसर निकल गई है, कृपया भावार्थ स्पष्ट करें.
>
> > --
> >http://hindini.com
> >http://hindini.com/eswami
>
> --
>
> *
> अजित*http://shabdavali.blogspot.com/
चम्पा, नीलोफर और नील कमल
http://shabdavali.blogspot.com/2008/12/blog-post.html
On 7/11/11, ई-स्वामी <esw...@gmail.com> wrote:
> धन्यवाद बलजीतजी!
> इस परिपेक्ष्य में पिछले संदेश में दी वीडियो कडी देखियेगा.
>
> इस के ओरिजिनल गीत में बोल यूँ हैं -
>
> *मैं नील कराईयाँ नीलकाँ मेरा तन-मन नीलो नील *
> *मैं सौदे कित्ते दिलाँ दे विच ध्हर लए नैन वकील*
> *
> *
--
*
अजित*
On 11 जुला, 00:51, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> स्वामीजी,
> एक लिंक और संभालिए। मामला पंजाबी का था, सो बलजीत भाई की राह देख रहा था।
> नीलकां तो अपने भी ऊपर से निकल गया था। अब जो नील उभर कर आया है सो वो
> हिन्दी में भी है।
> पेश है इसी नील पर लिखा गया सफ़र का एक पड़ाव-
>
> चम्पा, नीलोफर और नील कमलhttp://shabdavali.blogspot.com/2008/12/blog-post.html
>
> On 7/11/11, ई-स्वामी <esw...@gmail.com> wrote:
>
>
>
>
>
> > धन्यवाद बलजीतजी!
> > इस परिपेक्ष्य में पिछले संदेश में दी वीडियो कडी देखियेगा.
>
> > इस के ओरिजिनल गीत में बोल यूँ हैं -
>
> > *मैं नील कराईयाँ नीलकाँ मेरा तन-मन नीलो नील *
> > *मैं सौदे कित्ते दिलाँ दे विच ध्हर लए नैन वकील*
> > *
> > *
> > एक कडी और है -http://www.youtube.com/watch?v=h11p5dIwWCs&feature=related
> > शायद इस से कुछ और क्लू मिले! :)
>
> > 2011/7/10 Rangnath Singh <rangnathsi...@gmail.com>
>
> >> बलजीत जी, आपके दिए अर्थ के बाद तो लग रहा है की यहाँ नीलकां कृष्ण या राम
> >> सरीखे नीले बदन वाले प्रेमी को भी कहा जा सकता है. परंपरागत कैलेंडर
> >> पोस्टरों
> >> में इन्हें नीले बदन वाला ही दिखाया जाता है. श्याम को नीला दिखाने का कारण
> >> का
> >> मुझे कोई अंदाजा नहीं.
>
> >> (यह मेरा अनुमान है. बलजीत जी की टिप्पणी पढने के बाद. इसी कोई स्थापना न
> >> समझें)
>
> >> 2011/7/10 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
> भोपाल- 09425012329- उद्धृत पाठ छिपाएँ -
>
> उद्धृत पाठ दिखाए

On 11 जुला, 02:43, भाई भोपाली <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> नीलखां यानी नहीं देखा?
> नी-लखाँ
> क्या बलजीत भाई सही है?
>
> 2011/7/11 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
To: shabdc...@googlegroups.com
From: Ravikant
Sent by: shabdc...@googlegroups.com
Date: 08/05/2011 06:42PM
Subject: Re: [शब्द चर्चा] Re: "नील" के पंजाबी यमक/श्लेष?
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