दामोदर नदी

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अजित वडनेरकर

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Jan 4, 2012, 11:34:32 AM1/4/12
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दामोदर ( नदी ) की व्युत्पत्ति के बारे में साथियों की राय जानना चाहता हूँ। मुझे जो जानकारी है उसे संक्षेप में सबसे साझा कर रहा हूँ।

कृष्ण के दामोदर नाम से सभी परिचित हैं। पौराणिक कथाओं में उन्हें ऊखल या पेड़ से बान्धने की वजह से उनका नाम दामोदर पड़ा। दाम यानी रस्सी, रज्जु।
दामोदर नदी के साथ यह व्युत्पत्ति नहीं जुड़ती। कुछ सन्दर्भ इसे दामुदा बताते हैं। झारखण्ड में मान्यता है कि इसका अर्थ पवित्र जल है। नदियों को पवित्र मानना सनातन भारतीय आस्था रही।
संस्कृत में दामन् का अर्थ रस्सी, रज्जु होता है। दामुदा का इस रूप में कोई अर्थ नहीं निकलता। दामुदा को दामोदर का रूपान्तर मानें तो इस दामोदर का अर्थ दाम से बंधे उदर से हट कर निकलना चाहिए।
एक मराठी सन्दर्भ से पता चलता है कि दाम सन्थाल भाषा का शब्द है। सन्थाली भाषा अत्यन्त प्राचीन है और मुंडा परिवार की है। यहाँ भूगर्भ में कोयले के भण्डार हैं। दाम का अर्थ सन्थाली में कोयला होता है। संस्कृत की ज़मीन पर इससे दामोदर शब्द बना जिसका अर्थ है कोयलांचल से निकली नदी। ध्यान रहे, छोटा नागपुर के एक क्षेत्र को दामुदा कहते हैं। कोयले की बहुतायत को देखते हुए दामुदा का अर्थ निकलता है कोयला प्रदान करने वाली भूमि।  

मुझे असम, उड़ीसा, झारखण्ड और बंगाल के किन्हीं क्षेत्रों के लिए अलग अलग दामुदा शब्द मिला है जिसका अर्थ कोयलांचल है।
क्या सन्थाली भाषा का कोई कोश है? मैं जानना चाहता हूँ कि कोयला के अर्थ में दाम शब्द कितना प्रामाणिक है।


--


अजित

http://shabdavali.blogspot.com/
मोबाइल-
औरंगाबाद- 07507777230

  


Abhay Tiwari

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Jan 4, 2012, 11:47:41 AM1/4/12
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आगे जो भी चर्चा हो पर जो जानकारी आपने निकाली है उसके लिए आपको साधुवाद है! 

2012/1/4 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>

Hansraj sugya

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Jan 4, 2012, 12:01:27 PM1/4/12
to शब्द चर्चा
भूगर्भ में पाए जानेवाले कोयले से नदी का नामकरण कुछ संगत प्रतीत नहीं होता, एक तुक्का ही भिडाता हूँ शायद कहीं समर्थन हो जाय। दामोदर,दाम+उदर अर्थात् जिसका पेट बंधा हो, यह नदी मध्य सफर, झारखंड में पहाड़ी और खाईनुमा स्थलों से संकुचित होकर गुजरती है, इसीलिए इसका नाम दामोदर पडा हो……… ज्ञानीजन कहे वही सही।


सस्नेह,
हंसराज "सुज्ञ"








Date: Wed, 4 Jan 2012 22:04:32 +0530
Subject: [शब्द चर्चा] दामोदर नदी
From: wadnerk...@gmail.com
To: shabdc...@googlegroups.com

अजित वडनेरकर

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Jan 4, 2012, 12:08:40 PM1/4/12
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@अभय तिवारी- बहुत आभार भाई।
@हंसराज सुज्ञ-आपके बताए लक्षणों के आधार पर प्रायः हर नदी दामोदर हो सकती है।


2012/1/4 Hansraj sugya <hansra...@msn.com>

अजित वडनेरकर

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Jan 4, 2012, 2:55:30 PM1/4/12
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कुछ किताबों में और कुछ इंटरनेट पर प्रमाण मिले हैं जिनमें दामोदर का अर्थ अग्निगर्भा की तरह बताया गया है।
अर्थात जिसके गर्भ में कोयला है।
उदर तो स्पष्ट है। दाम में अग्नि या कोयले का ही भाव निकल रहा है। हालाँकि संथाली भाषा का प्रमाण अभी मराठी सन्दर्भ ही है।
विस्तार से बाद में लिखूँगा। काम जारी है।




2012/1/4 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>
@अभय तिवारी- बहुत आभार भाई।

Anil Janvijay

unread,
Jan 4, 2012, 3:37:43 PM1/4/12
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मेरे ख़याल से सिर्फ़ एक ही दिशा में खोज करना उचित नहीं है। दाम के हिन्दी में जो अर्थ होते हैं, वे हैं- कंठहार, दाम (मूल्य), धन-सम्पत्ति, नीति, फंदा, माला, रस्सी और रेखा। दाम से ही दामन बना है। जिसका अर्थ होता है तलहटी, पल्ला, चादर, किनारा, अंचल और भिक्षा की झोली। दामन फैलाना, दामन भरना, प्रार्थना करना, शरण लेना आदि अर्थो में भी दाम ही मुख्य है। दामाद में भी दाम है और दामिनी (बिजली) में भी। दामासाह का मतलब होता है दिवालिया और दामी का मतलब बहुमूल्य। दमोदर के अन्य अर्थ नर और नारायण, कृष्ण तथा विष्णु भी हैं। इस बीच काम जारी है। कोई और अर्थ मिलेगा तो बताऊँगा। हाँ, कोयला के अर्थ में दाम हिन्दी में नहीं मिला। शायद संथाली में ही यह अर्थ है, बस।
--
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अजित वडनेरकर

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Jan 4, 2012, 3:59:35 PM1/4/12
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अनिल भाई,

आपने जो कुछ भी कह रहे हैं, उन्हें समेटते हुए शब्दों का सफ़र पर पोस्ट लिखी जा चुकी है।{
1.दम्पती यानी घर के मालिक 2.घरबारी होना, गिरस्तिन बनना 3....लेकिन अपना अपना दामन 4.कौन धाम, कहां के वासी?} इस शब्द शृंखला पर करीब एक साल से काम कर रहा हूँ। इनमें धाम, डोम को शामिल करना आप भूल गए। चूँकि इन सभी शब्दों पर काम कर चुका हूँ तो ज़ाहिर है मेरे दिमाग़ में ये सभी सन्दर्भ भी हैं। बड़ा आसान था रज्जु वाले दामोदर का उल्लेख जब मैने सफर में किया तो नदी वाले दामोदर को भी इसमें समेट लेता। पर व्याख्या ज़रूरी होती है। सिर्फ़ उल्लेख से काम नहीं चलता, तार्किक विवेचना चाहिए।  इसलिए नदी वाले दामोदर में इनकी अर्थछटाएँ मैं नहीं देख रहा हूँ, हैं भी नहीं। दाम के प्रचलित अर्थों से नदी के नाम की सार्थकता मैं बहुत दिनों से खोज रहा हूँ।

इस मंच पर पर प्रस्तुत यह प्रस्ताव उसी कड़ी का हिस्सा है।  कुछ दिनों पहले जब मराठी में नया और तार्किक सन्दर्भ मिला तो लगा कि राह आसान होगी अगर साथियों को अब तक की बातों से अवगत करा दिया जाए। वर्ना ये तमाम बातें तो सफ़र के सभी साथियों से साझा की जा चुकी हैं। अब तो मंज़िल के पास हूँ:)

मुझे खुशी है कि राह आसान हो रही है।

सादर, साभार
अजित

2012/1/5 Anil Janvijay <anilja...@gmail.com>

अजित वडनेरकर

unread,
Jan 4, 2012, 4:14:30 PM1/4/12
to shabdc...@googlegroups.com
अनिल भाई,
दाम के सन्दर्भ में मुद्रा, सम्पत्ति, धन वाला दाम बहुतों को भ्रमित करेगा। यह भारोपीय शब्द है, भारतीय नहीं।
ग्रीक मुद्रा द्रख्म > द्रम्म > दम्म > दाम > के तौर पर भारतीय समाज में दाखिल हुई।  संस्कृत ग्रन्थों में भी दो हजा़र सालों से है। मगर यह भारतीय शब्द नहीं  है, इस पर कोई बहस नहीं है। सफ़र में करीब 20 आलेखों की सिक्का शृंखला के तहत दाम पर भी लिख चुका हूँ और इससे बने निरे देसी शब्द दमड़ी पर भी। लिंक यहाँ हैं।
सिक्का-कहीं ढला, कहीं चला [सिक्का-1]
दो कौड़ी का छदम्मी !!! [सिक्का-6]


2012/1/5 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>

अजित वडनेरकर

unread,
Jan 4, 2012, 4:17:06 PM1/4/12
to shabdc...@googlegroups.com
अनिल भाई,
आपने दामाद का भी इस कड़ी में उल्लेख किया तो कहना चाहूँगा कि दामाद का इससे कोई मेल नहीं है। यह एकदम अलग शब्द है। कृपया ज़रूर देखें-
इसलिए पाहुन है दामाद…   

साभार,
अजित

Baljit Basi

unread,
Jan 4, 2012, 5:14:51 PM1/4/12
to शब्द चर्चा
आप जिस कदर दामोदर( नदी) के पीछे पड़े हैं, ज़रूर कुछ न कुछ निकाल ही
लेंगे.मैंने जो नेट पर थोड़ी खोज की है, उस के अनुसार इस में 'दामु' का
अर्थ पवित्र और और 'दा' का मतलब पानी मिला है.
कृषण के संबंध में मेरी समझ के अनुसार इसका निरुक्तक अर्थ तो वही है जो
आपने बताया, लेकिन इस की व्याख्या कुछ और है. दामोदर के रूप में कृषण को
एक चरवाहे के तौर पर देखा गया है. चरवाहे अपने पेट के चारों और एक *दाम
(रज्जू) बांधते थे जिन के साथ साथ और कई रस्सियाँ बंधी होती थीं. इन
रस्सियों का दूसरा सिरा कई पशुयों के गले में डाली गई रस्सियों के साथ
बंधा होता था. इस तरह एक साथ कई पशुयों को काबू में रखा जा सकता है.

On 4 जन, 11:34, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> *दामोदर ( नदी ) की व्युत्पत्ति के बारे में साथियों की राय जानना चाहता हूँ।
> मुझे जो जानकारी है उसे संक्षेप में सबसे साझा कर रहा हूँ। *


>
> कृष्ण के दामोदर नाम से सभी परिचित हैं। पौराणिक कथाओं में उन्हें ऊखल या पेड़
> से बान्धने की वजह से उनका नाम दामोदर पड़ा। दाम यानी रस्सी, रज्जु।
> दामोदर नदी के साथ यह व्युत्पत्ति नहीं जुड़ती। कुछ सन्दर्भ इसे दामुदा बताते
> हैं। झारखण्ड में मान्यता है कि इसका अर्थ पवित्र जल है। नदियों को पवित्र
> मानना सनातन भारतीय आस्था रही।
> संस्कृत में दामन् का अर्थ रस्सी, रज्जु होता है। दामुदा का इस रूप में कोई
> अर्थ नहीं निकलता। दामुदा को दामोदर का रूपान्तर मानें तो इस दामोदर का अर्थ
> दाम से बंधे उदर से हट कर निकलना चाहिए।
> एक मराठी सन्दर्भ से पता चलता है कि दाम सन्थाल भाषा का शब्द है। सन्थाली भाषा
> अत्यन्त प्राचीन है और मुंडा परिवार की है। यहाँ भूगर्भ में कोयले के भण्डार
> हैं। दाम का अर्थ सन्थाली में कोयला होता है। संस्कृत की ज़मीन पर इससे दामोदर
> शब्द बना जिसका अर्थ है कोयलांचल से निकली नदी। ध्यान रहे, छोटा नागपुर के एक
> क्षेत्र को दामुदा कहते हैं। कोयले की बहुतायत को देखते हुए दामुदा का अर्थ
> निकलता है कोयला प्रदान करने वाली भूमि।
>
> मुझे असम, उड़ीसा, झारखण्ड और बंगाल के किन्हीं क्षेत्रों के लिए अलग अलग
> दामुदा शब्द मिला है जिसका अर्थ कोयलांचल है।
> क्या सन्थाली भाषा का कोई कोश है? मैं जानना चाहता हूँ कि कोयला के अर्थ में
> दाम शब्द कितना प्रामाणिक है।
>
> --
>

> *
> अजित*http://shabdavali.blogspot.com/

अजित वडनेरकर

unread,
Jan 5, 2012, 1:54:30 AM1/5/12
to shabdc...@googlegroups.com
बलजीत भाई,

कृष्ण के दामोदर रूप की एकाधिक व्याख्याएँ हैं। पौराणिक सन्दर्भों का प्रयोग समाज में ज्यादातर नैतिक शिक्षा के लिए ज्यादा होता था।
इसीलिए यह विविधता भी देखने को मिलती है। वैसे भी पुराण तो भेलपूरी है। शिक्षा, दर्शन, साहित्य, नाट्य किसी भी खाँचे में उसे रख दिया जाता है। और जिसका इनसे भी सरोकार न हो वह महज़ गुटके को ही धोक देता है। रोज़ उस पर तिलक चन्दन चढ़ा कर अपने भले की कामना करता है। उसका भला हो न हो, ग्रन्थ की बारह बज जाती है। पहले कवर खराब होता है, फिर दीमक लगती है। काग़ज़ सड़ जाता है। क्या फ़र्क पड़ता है, गीता प्रेस गोरखपुर से काफी तादाद में सस्ता धार्मिक साहित्य मिलता है।

खैर, मेरे पास गोंडी भाषा का एक कोश है, फिलहाल उसे देख रहा हूँ:)

2012/1/5 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>



--


अजित

Abhishek Avtans

unread,
Jan 5, 2012, 8:25:36 AM1/5/12
to shabdc...@googlegroups.com
Paul O. Bodding का संताली भाषा शब्दकोश (1929) यहाँ उपलब्ध है.
इसे देखें 
सादर 

2012/1/5 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>
बलजीत भाई,



--

Abhishek Avtans अभिषेक अवतंस

Academia Profile



अजित वडनेरकर

unread,
Jan 5, 2012, 9:05:33 AM1/5/12
to shabdc...@googlegroups.com
मुझे ए. कैम्पबेल का 1899 में बनाया संथाली का कोश मिला है, मगर इसमें  उक्त शब्द की प्रविष्टि नहीं हैं। यह बड़े आश्चर्य की बात है। इसके साथ समस्या यह है कि दरअसल यह बंगाल के पुरुलिया क्षेत्र में बोली जाने वाली शहरी संथाली का प्रातिनिधिक कोश है। इसमें अपर दामोदर वैली क्षेत्र की संथाली बोली को लिया गया है। झारखण्ड की संथाली इसमें नहीं है। बंगाल में मुस्लिम राज होने के की वजह से फ़ारसी शब्दों के हजारों रूपान्तर इसमें हैं जिन्हें संथाली कहा गया है। इसमें दाम शब्द है, मगर वह द्रम्म से निकला हिन्दी, उर्दू, फारसी वाला दाम है जिसका अर्थ मूल्य है।
ताज्जुब यह कि जो संथाल समुदाय दामोदर को पवित्र नदी मानता है अथवा अन्य स्रोतों इसमें अग्नि, कोयला जैसे भाव देखते हैं, कैम्पबेल के कोश में दामोदर, दामुदा, दामोदा जैसे शब्द ही गायब हैं। जबकि दम् ध्वनि वाले शब्द झारखण्ड, बिहार, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों में खूब हैं और इससे मिलते जुलते नामों वाली जो बस्तियाँ हैं उनके साथ कोलियरी, खदान का रिश्ता विभिन्न सन्दर्भों से साबित होता है।

यह ज़रूरी नहीं कि दाम शब्द संथाली में निकल आए। सम्भव है यह आर्यभाषा परिवार का भी हो। खास बात यह कि कैम्पबेल के कोश में फ़ारसी के संथाली रूपान्तर मिलते हैं मगर दामोदर जैसे शब्द का कोई रूपान्तर नहीं मिलना आश्चर्य है। इससे ऐसा लगता है कि इसमें ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों की संथाली के शब्द चुने गए हैं।  ठेठ या शास्त्रीय संथाली इसमें नहीं है। इसे देखने के बाद मैं इसी नतीजे पर पहुँचा हूँ।

2012/1/5 Abhishek Avtans <abhia...@gmail.com>

अजित वडनेरकर

unread,
Jan 5, 2012, 9:14:17 AM1/5/12
to shabdc...@googlegroups.com
अवतंसजी,
बॉडिंग के कोश का लिंक तो ठीक है, पर यह तिलिस्मी है। इसमें कुछ नहीं मिलता।
न शब्द, न सारणी, न कोई टैक्स्ट।

Hansraj sugya

unread,
Jan 5, 2012, 9:20:33 AM1/5/12
to शब्द चर्चा
अगर सम्बंध आग्नेय कोयले से ही देखना है तो दव, दावानल, दामिनि में अग्नी का भाव है क्या अर्थ सम्बंध जुड सकता है?


सस्नेह,
हंसराज "सुज्ञ"








Date: Thu, 5 Jan 2012 19:44:17 +0530
Subject: Re: [शब्द चर्चा] Re: दामोदर नदी
From: wadnerk...@gmail.com
To: shabdc...@googlegroups.com

अजित वडनेरकर

unread,
Jan 5, 2012, 9:36:30 AM1/5/12
to shabdc...@googlegroups.com
जी बिल्कुल। उसी दिशा में देख रहा हूँ।
हमारी आदि भारोपीय भाषाओं का सम्बन्ध लगातार जनजातीय भाषाओँ से भी बना हुआ था।
बस, इस दिशा में बहुत कम काम हुआ है। शब्दों की शिनाख्त तो यूँ भी मुश्किल है, क्योंकि जनजातीय साहित्य
का विधिवत अध्ययन नही हुआ।


2012/1/5 Hansraj sugya <hansra...@msn.com>

Abhishek Avtans

unread,
Jan 5, 2012, 10:03:17 PM1/5/12
to shabdc...@googlegroups.com
अजित जी
बोडिंग के शब्दकोश में से कुछ दृष्टव्य है:
search `dam' in `Bodding's Santal Dic'

meanings of "dam"

n., v. a. m. Price, value, cost; to price, value, put a price on. #< Nui me+ro+m reak^ dam laime>, tell the price of this goat; < damte+t^ do+ tinak^>, what is the price; < noa cato+m do+ tinak^em d.et^ kana> (or, < d.ak^ kana>), what price are you putting on this umbrella; < Dan*gra isi Takae d.adin^a>, he asked me twenty rupees for the bullock; < Dan*gra isi Takae d.kedea> (or, < d.adea>), he priced the bullock at twenty rupees; < baRti d.ente ban^ hataolak^a>, as it was priced too highly I did not take it. #(H. B. < da=m>).

search `dom' in `Bodding's Santal Dic'

meanings of "dom"

n. A contrivance for lifting water, a basket for baling out water (not used in these parts; Desi < dum>).

##

search `dum' in `Bodding's Santal Dic'

meanings of "dum"

the same as < dom>, q. v. (very rare word).

##%QV%

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