जिस तरह जनक की बेटी को 'जानकी', और विदेह की बेटी 'वैदेही' कहते हैं, उस
तरह से धरती की पुत्री के लिए कोई शब्द है क्या ?
On Jul 20, 7:54 am, Abha Mishra <apnaag...@gmail.com> wrote:
> सीता का एक पर्याय है ,भूमिजा
> आभा
> 2010/7/20 ई-स्वामी <esw...@gmail.com>:
>
>
>
> > धरती के पर्यायवाची हैं -
> > पृथिवी ,पृथ्वी ,मही , मृत्तिका ,भुवन , स्थिरा ,
> > उर्वी , क्ष्मा ,धरा ,धरित्री ,भूतधारिणी ,विश्वंभरा
> > ,क्षिति ,धरणी , भू ,भूमि ,मेदिनी ,वसुधा ,अन्तर्नेमि
> > ,अवनी ,अचला ,धरणि ,भूतल , महीतल
>
> > पुत्री के पर्यायवाची हैं -
> > धीलटी दुहितृ (आत्म)जा कन्यका नन्दिनी अङ्गजा सुता
>
> > कन्या के पर्यायवाची हैं -
> > बाला बालिका कन्यका कुमारी कन्दिनी
>
> > ठीक-ठीक भाव से लगा के भी १५-२० कॉंबिनेशन संभव हैं.
>
> > 2010/7/19 संजय | sanjay <sanjaybeng...@gmail.com>
>
> >> शब्द का पता नहीं. बनाना हो और सुता का अर्थ बेटी होता हो तो भू-सुता कह लें.
>
> >> १९ जुलाई २०१० १०:२७ AM को, farid khan <kfaridb...@gmail.com> ने लिखा:
2010/7/20 farid khan <kfari...@gmail.com>:
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aabha
mumbai-67
On Jul 20, 11:38 am, Abha Mishra <apnaag...@gmail.com> wrote:
> ठीक है ,लेकिन यह
> !!! तीन विस्मय बोधक क्यों
>
> 2010/7/20 farid khan <kfaridb...@gmail.com>:
On Jul 20, 12:58 pm, Bodhi Sattva <abod...@gmail.com> wrote:
> सीता वह लकीर है जो जोतने पर धरती में बनती है.....न की पूरी जुती भूमि....
>
> 2010/7/20 sumant <sumantmishra.kan...@gmail.com>
2010/7/20 sumant <sumantmis...@gmail.com>:
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aabha
mumbai-67
धी, धिया आदि शब्द दुहिता से बने हैं। दुहिता भारोपीय भाषा परिवार का शब्द है। फारसी का दुख्तर, पश्तो का दोख्तर और अंग्रेजी का डॉटर शब्द इसी कड़ी का हिस्सा है। अवेस्ता में इसका रूप दुहितर होता है। यह समझा जा सकता है कि पूर्ववैदिक काल के गण समाज में पशुओं को दूहने का काम बेटियां या पुत्रियों की जिम्मेदारी थी। दुहिता अर्थात जो दूहने का काम करे। फारसी में कहावत है दुख़्तर नेक अख़्तर यानी बेटी आंख का तारा होती है। डॉ रामविलास शर्मा पश्चिमोत्तर क्षेत्रों खासतौर पर सुविस्तृत ईरान के संदर्भ में संस्कृत परिवार के पूर्ववैदिक स्वरूप की चर्चा करते हुए बताते हैं कि खोवार भाषा में झ़ऊ का अर्थ बच्चा या पुत्र है। लड़की के लिए झ़ूर शब्द है। वे लिखते हैं कि भाषाविद मोर्गेन्स्टीन ने कल्पना की है की झ़ूर का मूलरूप जुहता था। दुहिती के ग्रीक प्रतिरूप थुगातेर में आदिस्थानीय थ् मूलरूप के ध् की ओर संकेत करता है। धूता, धूतर जैसे रूपों से दुहिता बनना संभव है। धी (लड़की) के समान धू, धउ (लड़का) रूप प्रचलित थे और इनके साथ धूत या धूर जैसे रूप थे जिनसे खोलवार झ़ूर, कलश का झूर्, ब्रज का छोरा - छोरी जैसे शब्द बने हैं। भ्राता का बहुचन खोवार में ब्रारगिनि है। यहां गिनि, गण का रूपान्तर है। फारसी में बिरादर से बने बिरादरी में गणवाची यही समूह उभर रहा है। यही तमिल का गळ है। खोवार में पत्नी के लिए बोको शब्द है जो मराठी बाइको से तुलनीय है। बाइको का बाई, अंग्रेजी वाइफ के बाई से तुलनीय है और बाई का नारीवाचक आधुनिक आर्य प्रतिरूप बाई है। मज़े की बात यह कि संस्कृत का भगिनी या बहन हिन्दी में बहिनी हो जाता है। बाई शब्द चाहे उत्तर भारत में हीन समझा जाता हो मगर मालवी में बाई बड़ी बहन को बोलते हैं। बहिन, बहिना, बहीनी जैसे शब्द भगिनी के प्रतिरूप हैं। मराठी में भी बाई शब्द सम्मानसूचक है। मराठी में भाभी को वहिनी कहते हैं। यह भी भगिनी से ही बना है। भाई की पत्नी के साथ भी बहन जैसे रिश्ते की कल्पना मराठी समाज का विशिष्ट सांस्कृतिक आधार है।
भारोपीय संदर्भों में मातृ-मादर-मदर, पितृ-पिदर-पिसर-फादर, भ्रातृ-बिरादर-ब्रदर की कड़ी में जैसे ही डॉटर शब्द के तुलनीय फारसी या संस्कृत की चर्चा होती थी तब उक्त पारिवारिक शब्दों के समान किसी अन्य शब्द की कल्पना इसलिए सामान्य व्यक्ति नहीं कर पाता क्योंकि दुहिता शब्द बोलचाल की हिन्दी में नहीं है और संस्कृत में पुत्री शब्द अधिक प्रचलित है। जैसे ही दुहिता-दुख्तर सामने आते हैं, डॉटर शब्द पहेली नहीं रह जाता।
अत्यंत मूल्यवान जानकारी. आभार , आभार , आभार .