पागल

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अभय तिवारी

unread,
Oct 8, 2010, 7:04:20 AM10/8/10
to शब्द चर्चा
बहुत समय से इस शब्द के बारे में सोचता रहा हूँ, क्या हो सकती है इसकी
व्युत्पत्ति? बंगला और हिन्दी में ख़ूब प्रचलित है और अरबी-फ़ारसी से कोई
सम्बन्ध नहीं है। मोनियर-विलियम्स के अनुसार ब्रह्मवैवर्त पुराण में इसका
उल्लेख है.. आप्टे जी के कोश में इस शब्द की प्रविष्टि है तो सही मगर दी
हुई व्युत्पत्ति का ठीक-ठीक अर्थ कर सकने जितनी संस्कृत नहीं आती है
मुझे। जानकार लोग समझायें ;

पागल: पारक्षणम, तस्मात गलति विच्युतो भवति; पा+गल्‌+अच्‌

narayan prasad

unread,
Oct 9, 2010, 12:56:54 PM10/9/10
to shabdc...@googlegroups.com
<<मोनियर-विलियम्स के अनुसार ब्रह्मवैवर्त पुराण में इसका उल्लेख है.. >>

मुझे तो पागल शब्द का संस्कृत साहित्य में प्रयोग नहीं मिला । ब्रह्मवैवर्त पुराण में प्रयुक्त वाक्य को उद्धृत करें तो कुछ सोचा जाय ।


<<आप्टे जी के कोश में इस शब्द की प्रविष्टि है तो सही मगर दी
हुई व्युत्पत्ति का ठीक-ठीक अर्थ कर सकने जितनी संस्कृत नहीं आती है मुझे। जानकार लोग समझायें ; >>

पारक्षणम् = पा का अर्थ होता है रक्षा करना ।
तस्मात् गलति (विच्युतो भवति) = उससे विच्युत होता है अर्थात् रक्षण कार्य करने में सक्षम नहीं होता ।

अच् प्रत्यय एक कृत् प्रत्यय है । कृत् प्रत्यय धातु के साथ लगता है और उस धातु से जिस कार्य का बोध होता है, कृत्-प्रत्ययान्त शब्द से उसी कार्य के कर्ता का बोध होता है ।

---नारायण प्रसाद

2010/10/9 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com>
नारायण जी,
 
शब्द चर्चा में पागल वाले सूत्र पर आप की प्रतिक्रिया अपेक्षित है!
 
अभय

अजित वडनेरकर

unread,
Oct 9, 2010, 1:38:42 PM10/9/10
to shabdc...@googlegroups.com
यह प्रविष्टी मैं देख नहीं पाया। संदर्भ अधूरा सा है।

2010/10/9 narayan prasad <hin...@gmail.com>



--
शुभकामनाओं सहित
अजित
http://shabdavali.blogspot.com/
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