मेरी नज़र में सरोकार सीधे फ़ारसी मूल से आया शब्द है । इसके दोनो पद सर + कार भारोपीय भाषा परिवार की भारत-ईरानी परिवार के हैं । इस परिवार की भाषाओं में शिर या सिर ( जैसे संस्कृत में ) जैसे शब्द हैं जिसमें शरीर के सबसे उच्च और प्रमुख हिस्से सिर का आशय है । फ़ारसी में इसकी अर्थवत्ता काफ़ी व्यापक है । मस्तक के अलावा इसमें ख़ास, प्रमुख, विशिष्ट, रुझान, प्रवृत्ति, सम्मुख, अग्रभाग, सर्वेच्च, शिखर, उच्चतम, पराकाष्ठा जैसे अनेक भाव हैं । कार भी करने के अर्थ वाली क्रिया है । संस्कृत में कृ से अनेक शब्द बने हैं । अवेस्ता, पहलवी और फ़ारसी में भी यह है । कार की अर्थवत्ता भी फ़ारसी में अधिक है । श्रम, क्रिया, प्रतिक्रिया, कार्य, मेहनत, योजना, सेवा, व्यवसाय, अभिनय, फ़साद, शरारत, मामला, आदत, गति जैसे भाव हैं । सर और कार दोनों ही शब्दों से अनेक मुहावरे बने हैं और मुहावरों के जरिए ही इनकी अर्थवत्ता का विकास हुआ है । जॉन प्लैट्स के कोश में सर प्रविष्टि के अंतर्गत सरोकार मुहावरा दिया गया है । सरोकार में मूलतः रिश्ता, सम्बन्ध, लेन-देन, कार्य-व्यापार, मेल-जोल, व्यवहार, पारस्परिकता, संसर्ग, प्रभाव, कर्तव्य जैसे भाव हैं ।
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अजितhttp://shabdavali.blogspot.com/
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