सरोकार

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हंसराज सुज्ञ

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May 18, 2012, 2:25:11 AM5/18/12
to शब्द चर्चा

"सरोकार" शब्द की व्युत्पत्ति, इसका अन्य सार्थक हिंदी पर्यायवाची शब्द, सटीक भावार्थ क्या हो सकता है?

 सविनय,
हंसराज "सुज्ञ"

सुज्ञ

Anil Janvijay

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May 18, 2012, 3:39:44 AM5/18/12
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भाई सुज्ञ जी,
मुझे मालूम नहीं कि मेरा अनुमान कितना उचित है, लेकिन मैं समझता हूँ कि यह सरोकार शब्द सर+उकार की संधि है। सर का अर्थ होता है स्रोत, उद्गम, निकास  और उकार का अर्थ होता है अभिव्यक्ति, निकालना,  आरम्भ करना, शुरू करना।  ओंकार का मतलब होता है ओम ध्वनि का उच्चारण (अभिव्यक्ति) ।  तो इस तरह सरोकार का अर्थ हुआ (किसी स्रोत की) अभिव्यक्ति या उससे  सम्बन्ध (जुड़ाव),  उसका प्रयोजन, (उसके प्रति) व्यवहार ,  उससे वास्ता या उसका संदर्भ। 
इस शब्द का उपयोग प्राय: सम्बन्ध और प्रयोजन के अर्थ में किया जाता है। लेकिन कोई एक सटीक अर्थ नहीं है।
सादर
अनिल 

2012/5/18 हंसराज सुज्ञ <hansra...@msn.com>



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अजित वडनेरकर

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May 18, 2012, 7:28:36 AM5/18/12
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मेरी नज़र में सरोकार सीधे फ़ारसी मूल से आया शब्द है । इसके दोनो पद सर + कार भारोपीय भाषा परिवार की भारत-ईरानी परिवार के हैं । इस परिवार की भाषाओं में शिर या सिर ( जैसे संस्कृत में ) जैसे शब्द हैं जिसमें शरीर के सबसे उच्च और प्रमुख हिस्से सिर का आशय है । फ़ारसी में इसकी अर्थवत्ता काफ़ी व्यापक है । मस्तक के अलावा इसमें ख़ास, प्रमुख, विशिष्ट, रुझान, प्रवृत्ति, सम्मुख, अग्रभाग, सर्वेच्च, शिखर, उच्चतम, पराकाष्ठा जैसे अनेक भाव हैं । कार भी करने के अर्थ वाली क्रिया है । संस्कृत में कृ से अनेक शब्द बने हैं । अवेस्ता, पहलवी और फ़ारसी में भी यह है । कार की अर्थवत्ता भी फ़ारसी में अधिक है । श्रम, क्रिया, प्रतिक्रिया, कार्य, मेहनत, योजना, सेवा, व्यवसाय, अभिनय, फ़साद, शरारत, मामला, आदत, गति  जैसे भाव हैं ।  सर और कार दोनों ही शब्दों से अनेक मुहावरे बने हैं और मुहावरों के जरिए ही इनकी अर्थवत्ता का विकास हुआ है । जॉन प्लैट्स के कोश में सर प्रविष्टि के अंतर्गत सरोकार मुहावरा दिया गया है । सरोकार में मूलतः रिश्ता, सम्बन्ध, लेन-देन, कार्य-व्यापार, मेल-जोल, व्यवहार, पारस्परिकता, संसर्ग, प्रभाव, कर्तव्य जैसे भाव हैं ।

2012/5/18 Anil Janvijay <anilja...@gmail.com>



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अजित

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Anil Janvijay

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May 18, 2012, 7:42:08 AM5/18/12
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हाँ, अजित जी की बात ही ठीक है। उर्दू और फ़ारसी में कहा जाता है -- बर सर-ए-कार होना। यानि किसी काम में मसरूफ़ (व्यस्त) होना। इस तरह सर-ए-कार  से ही सरोकार बना है। वैसे  उर्दू और फ़ारसी में भी सरोकार शब्द का इस्तेमाल सरोकार के ही अर्थ में उपयोग किया जाता है। 
 
 
 

 
2012/5/18 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>

हंसराज सुज्ञ

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May 18, 2012, 7:53:03 AM5/18/12
to शब्द चर्चा

अजितभाई नें अच्छी व्याख्या प्रस्तुत की आभार, अनिल जी आभार,
क्या इसे 'शीर्ष दायित्व बोध' के अर्थाभिगम में लेना चाहिए?

Date: Fri, 18 May 2012 15:42:08 +0400
Subject: Re: [शब्द चर्चा] सरोकार
From: anilja...@gmail.com
To: shabdc...@googlegroups.com

अजित वडनेरकर

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May 18, 2012, 8:57:42 AM5/18/12
to shabdc...@googlegroups.com
फ़ारसी में सर ओ कार रूप भी है । सरोकार इसका ही संश्लिष्ट रूप सरोकार है । हिन्दी में सरोकार का व्यापक रूपों में प्रयोग होता है । दायित्वबोध भी उसमें निहित है ।
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