उच्चारण तो कुछ इस प्रकार लगता है बू न् द ।
तो नियमानुसार बूंद सही होना चाहिए।
पर ज़्यादातर बूँद का ही प्रयोग किया जाता है।
-रोहित

मैं पूछना ये चाह रहा था कि बूंद / बूँद में शुद्ध नासिक ध्वनि है या बू
के बाद अनुनासिक व्यञ्जन की आवृत्ति है ?
अगर पहला है तो बूँद सही..
और दूसरा है तो बूंद।
ये नियम चलन में होना चाहिए या नहीं वो अलग मुद्दा है। वैसे मैं तो चलाने
के पक्ष में हूँ. :)
मुझे लगता है बूंद में न् है, लेकिन अधिकांश लोग शायद शुद्ध नासिक ध्वनि
कहेंगे।
इसीलिए एक बार विद्वजनों से पूछना चाह रहा था।
- रोहित
2.6.2 अनुनासिकता (चंद्रबिंदु)
2.6.2.1 हिंदी के शब्दों में उचित ढंग से चंद्रबिंदु का प्रयोग अनिवार्य होगा।
2.6.2.2 अनुनासिकता व्यंजन नहीं है, स्वरों का ध्वनिगुण है। अनुनासिक स्वरों के उच्चारण में नाक से भी हवा निकलती है। जैसे :– आँ, ऊँ, एँ, माँ, हूँ, आएँ।
2.6.2.3 चंद्रबिंदु के बिना प्राय: अर्थ में भ्रम की गुंजाइश रहती है। जैसे :– हंस : हँस, अंगना : अँगना, स्वांग (स्व+अंग): स्वाँग आदि में। अतएव ऐसे भ्रम को दूर करने के लिए चंद्रबिंदु का प्रयोग अवश्य किया जाना चाहिए। किंतु जहाँ (विशेषकर शिरोरेखा के ऊपर जुड़ने वाली मात्रा के साथ) चंद्रबिंदु के प्रयोग से छपाई आदि में बहुत कठिनाई हो और चंद्रबिंदु के स्थान पर बिंदु का (अनुस्वार चिहन का) प्रयोग किसी प्रकार का भ्रम उत्पन्न न करे, वहाँ चंद्रबिंदु के स्थान पर बिंदु के प्रयोग की छूट रहेगी। जैसे :– नहीं, में, मैं आदि। कविता आदि के प्रसंग में छंद की दृष्टि से चंद्रबिंदु का यथास्थान अवश्य प्रयोग किया जाए। इसी प्रकार छोटे बच्चों की प्रवेशिकाओं में जहाँ चंद्रबिंदु का उच्चारण अभीष्ट हो, वहाँ मोटे अक्षरों में उसका यथास्थान सर्वत्र प्रयोग किया जाए। जैसे :– कहाँ, हँसना, आँगन, सँवारना, मेँ, मैँ, नहीँ आदि।
(https://sites.google.com/site/hinditranslationservice/manaka-hindi-vartani-standard-hindi-spelling-)
शब्द चर्चा में ही इस विषय से संबंधित कुछ पुरानी चर्चाएँ देखी हैं मैने।
उनसे मैं जो समझा हूँ वो ये कि ङ् ञ् ण् न् म् के स्थान पर अनुस्वार लिख
सकते हैं अगर आगे उसी वर्ग के प्रथम चार अक्षर हों।
और चन्द्र बिन्दु मतलब शुद्ध नासिक ध्वनि, कोई अतिरिक्त व्यञ्जन नहीं।
(और जहाँ मात्रा सर से ऊपर जाती हो वहाँ मजबूरी में चन्द्र बिन्दु की जगह
बिन्दु लगाना पड़ेगी। )
" बूँद इसलिए लिखा जाता है क्योंकि हिन्दी के व्याकरण के अनुसार सिर्फ़
बिन्दु नहीं लिखा जा सकता है। " - ये बात कुछ समझ नहीं आई। सिर्फ़ बिन्दु
में क्या समस्या है।
और दूसरी बात सरलता की जो आपने की है, मेरे ख्याल से तो चन्द्र बिन्दु के
स्थान पर भी बिन्दु लिखने से तो
और कठिन हो जाएगी भाषा। नए सीखने वाले को ये परेशानी होगी कि बिन्दु को
शुद्ध नासिक ध्वनि पढ़े या अनुनासिक व्यंजन।
सरलता तो इसी में है कि जहाँ तक हो सके दो अलग-अलग उच्चारणों के लिए एक
ही वर्तनी न हो और दो अलग-अलग वर्तनियों का एक ही उच्चारण न हो।
- रोहित

हिन्दी के नियमों के अनुसार अगर ऊपर बिन्दी लगाकर कोई भी शब्द लिखा जाता है तो वह बिन्दी हमेशा चन्द्र बिन्दु के रूप में आएगी।
हिन्दी के व्याकरण के अनुसार सिर्फ़ बिन्दु नहीं लिखा जा सकता है। शिरोरेखा के ऊपर पहुँचते ही अनुनासिक ध्वनियाँ चन्द्र बिन्दु में बदल जाती हैं।