बूँद या बूंद

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Rohit Gurjar

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Dec 12, 2011, 12:34:06 AM12/12/11
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बूँद सही है या बूंद ?

उच्चारण तो कुछ इस प्रकार लगता है बू न् द ।
तो नियमानुसार बूंद सही होना चाहिए।
पर ज़्यादातर बूँद का ही प्रयोग किया जाता है।

-रोहित

Vinod Sharma

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Dec 12, 2011, 12:39:17 AM12/12/11
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बूँद सही है या बूंद ?
रोहितजी,
सही तो बूँद ही है, किंतु आजकल सही को प्रचलन के पैमाने से तौला जाने लगा है।
समाचार पत्रों तथा कई संस्थाओं ने चंद्रबिंदु का प्रयोग करना बंद कर दिया है।
अतः शुद्ध बूँद  है किंतु बूंद भी प्रचलन में है।
विनोद शर्मा

2011/12/12 Rohit Gurjar <rohit...@gmail.com>

anil janvijay

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Dec 12, 2011, 12:59:36 AM12/12/11
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भाई रोहित जी,
हिन्दी के नियमों के अनुसार अगर ऊपर बिन्दी लगाकर कोई भी शब्द लिखा जाता है तो वह बिन्दी हमेशा चन्द्र बिन्दु के रूप में आएगी। लेकिन इसके कुछ अपवाद भी हैं। जैसे हँस और हंस। हँसना में तो चन्द्र बिन्दु लगेगा, लेकिन हंस में सिर्फ़ बिन्दी लगेगी। बाकी सभी जगह चन्द्र बिन्दु ही लगना चाहिए। लेकिन अब जब से कम्प्यूटर आया है, चन्द्र-बिन्दु की परम्परा ही ख़त्म होती जा रही है। सिर्फ़ चन्द्रबिन्दु ही नहीं ण, ङ, ञ, म जैसी ध्वनियाँ भी अब बिन्दी के माध्यम से ही व्यक्त की जा रही हैं। जैसे गङ्गा की जगह अब गंगा लिखा जाता है, घण्टा की जगह घंटा, पञ्चम की जगह पंचम, सन्त की जगह संत, सम्पत्ति की जगह संपत्ति।

2011/12/12 Vinod Sharma <vinodj...@gmail.com>



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anil janvijay
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अजित वडनेरकर

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Dec 12, 2011, 1:48:56 AM12/12/11
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अनिल भाई,

अपन जब नवभारत टाइम्स में दाखिल हुए थे तब राजेन्द्र माथुर जी प्रधान सम्पादक थे। उन्होंने सख्ती से चन्द्रबिन्दु लागू कराया था। सोच कर ताज्जुब होता है कि सत्ताइस बरस पहले तक अखबारों में हिन्दी लेखन का ध्यान रखा जाता था। अपन तो भरसक अर्धचन्द्र और आधे म् के प्रयोग का ध्यान रखते हैं।
अच्छा लगा कि आप भी इसी चलन को कायम रखे हैं।

सादर, साभार
अजित

2011/12/12 anil janvijay <anilja...@gmail.com>



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अजित

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Rohit Gurjar

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Dec 12, 2011, 2:43:20 AM12/12/11
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अनिल जी,

मैं पूछना ये चाह रहा था कि बूंद / बूँद में शुद्ध नासिक ध्वनि है या बू
के बाद अनुनासिक व्यञ्जन की आवृत्ति है ?
अगर पहला है तो बूँद सही..
और दूसरा है तो बूंद।
ये नियम चलन में होना चाहिए या नहीं वो अलग मुद्दा है। वैसे मैं तो चलाने
के पक्ष में हूँ. :)

मुझे लगता है बूंद में न् है, लेकिन अधिकांश लोग शायद शुद्ध नासिक ध्वनि
कहेंगे।
इसीलिए एक बार विद्वजनों से पूछना चाह रहा था।

- रोहित

narayan prasad

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Dec 12, 2011, 3:11:48 AM12/12/11
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मुझे तो हमेशा लोगों से "बून्द" ही उच्चरित सुनाई देता है, इसलिए "बूंद" ही ठीक होना चाहिए । परन्तु लिखित रूप में सामान्यतः "बूँद" दिखाई पड़ता है ।
---नारायण प्रसाद

2011/12/12 Rohit Gurjar <rohit...@gmail.com>

anil janvijay

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Dec 12, 2011, 3:57:00 AM12/12/11
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वैसे सही शब्द तो बून्द ही है। क्योंकि यह ’त’ वर्ग ( त थ द ध न ) के ’द’ व्यंजन से पहले आया है। इसलिए एकदम शुद्ध रूप से लिखना हो तो यह बून्द लिखा जाएगा। लेकिन जब इस ’न’ को अनुस्वार के रूप में लिखते हैं तो यह बूंद हो जाता है।  बूँद इसलिए लिखा जाता है क्योंकि हिन्दी के व्याकरण के अनुसार सिर्फ़ बिन्दु नहीं लिखा जा सकता है। शिरोरेखा के ऊपर पहुँचते ही अनुनासिक ध्वनियाँ चन्द्र बिन्दु में बदल जाती हैं। लेकिन अब प्रायः हिन्दी वर्तनी में सभी प्रकार के अनुनासिक स्वरों को सांकेतित करने के लिए सामान्य बिन्दु का ही प्रयोग प्रचलित है।


2011/12/12 narayan prasad <hin...@gmail.com>

anil janvijay

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Dec 12, 2011, 4:03:10 AM12/12/11
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आदरणीय अजित जी!
वैसे तो मैं सरल हिन्दी के पक्ष में हूँ ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग उसे सीख कर उसका उपयोग कर सकें। हिन्दी को इस समय वर्तनी कोष की बहुत ज़रूरत है। सवाल बस यही है कि उसे पुरानी वर्तनी के आधार पर बनाया जाए या नई वर्तनी के आधार पर। देश-विदेश में हिन्दी जिस तरह से लोकप्रिय हो रही है और अपने पाँव फैला रही है, उसके लिए वर्तनी को एकदम सरल बना देना ज़रूरी है। इसके लिए गये को ’गए’ लिखना यानी ये की जगह ज़्यादातर ’ए’ लिखना उचित होगा। कई तरह के बिन्दुओं या नासिक स्वरों की जगह भी सिर्फ़ बिन्दु लगाना ही ठीक होगा। यह मेरा मानना है। यह और बात है कि ख़ुद मैं ऐसे नहीं लिखता।
सादर
अनिल


2011/12/12 anil janvijay <anilja...@gmail.com>

narayan prasad

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Dec 12, 2011, 4:24:15 AM12/12/11
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<< हिन्दी के व्याकरण के अनुसार सिर्फ़ बिन्दु नहीं लिखा जा सकता है। शिरोरेखा के ऊपर पहुँचते ही अनुनासिक ध्वनियाँ चन्द्र बिन्दु में बदल जाती हैं। >>
 
यह तो बहुत बड़ी गलतफ़हमी पाल रखी है आपने । यदि मैं ही गलती कर रहा हूँ तो आप कृपया कोई उचित सन्दर्भ ग्रन्थ उद्धरण सहित बताएँ ।
---नारायण प्रसाद

2011/12/12 anil janvijay <anilja...@gmail.com>

lalit sati

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Dec 12, 2011, 4:38:04 AM12/12/11
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केंद्रीय हिंदी निदेशालय ने वर्ष 2003 में देवनागरी लिपि तथा हिंदी वर्तनी के मानकीकरण के लिए अखिल भारतीय संगोष्ठी का आयोजन किया था। इस संगोष्ठी में निम्नलिखित नियम निर्धारित किए गए थे : 

2.6.2 अनुनासिकता (चंद्रबिंदु)

2.6.2.1 हिंदी के शब्दों में उचित ढंग से चंद्रबिंदु का प्रयोग अनिवार्य होगा।

2.6.2.2 अनुनासिकता व्यंजन नहीं है, स्वरों का ध्वनिगुण है। अनुनासिक स्वरों के उच्चारण में नाक से भी हवा निकलती है। जैसे :– आँ, ऊँ, एँ, माँ, हूँ, आएँ।

2.6.2.3 चंद्रबिंदु के बिना प्राय: अर्थ में भ्रम की गुंजाइश रहती है। जैसे :– हंस : हँस, अंगना : अँगना, स्वांग (स्व+अंग): स्वाँग आदि में। अतएव ऐसे भ्रम को दूर करने के लिए चंद्रबिंदु का प्रयोग अवश्य किया जाना चाहिए। किंतु जहाँ (विशेषकर शिरोरेखा के ऊपर जुड़ने वाली मात्रा के साथ) चंद्रबिंदु के प्रयोग से छपाई आदि में बहुत कठिनाई हो और चंद्रबिंदु के स्थान पर बिंदु का (अनुस्वार चिहन का) प्रयोग किसी प्रकार का भ्रम उत्पन्न न करे, वहाँ चंद्रबिंदु के स्थान पर बिंदु के प्रयोग की छूट रहेगी। जैसे :– नहीं, में, मैं आदि। कविता आदि के प्रसंग में छंद की दृष्टि से चंद्रबिंदु का यथास्थान अवश्‍य प्रयोग किया जाए। इसी प्रकार छोटे बच्चों की प्रवेशिकाओं में जहाँ चंद्रबिंदु का उच्चारण अभीष्ट हो, वहाँ मोटे अक्षरों में उसका यथास्थान सर्वत्र प्रयोग किया जाए। जैसे :– कहाँ, हँसना, आँगन, सँवारना, मेँ, मैँ, नहीँ आदि।

(https://sites.google.com/site/hinditranslationservice/manaka-hindi-vartani-standard-hindi-spelling-)


2011/12/12 narayan prasad <hin...@gmail.com>

Rohit Gurjar

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Dec 12, 2011, 4:39:36 AM12/12/11
to शब्द चर्चा
अनिल जी,

शब्द चर्चा में ही इस विषय से संबंधित कुछ पुरानी चर्चाएँ देखी हैं मैने।
उनसे मैं जो समझा हूँ वो ये कि ङ् ञ् ण् न् म् के स्थान पर अनुस्वार लिख
सकते हैं अगर आगे उसी वर्ग के प्रथम चार अक्षर हों।
और चन्द्र बिन्दु मतलब शुद्ध नासिक ध्वनि, कोई अतिरिक्त व्यञ्जन नहीं।
(और जहाँ मात्रा सर से ऊपर जाती हो वहाँ मजबूरी में चन्द्र बिन्दु की जगह
बिन्दु लगाना पड़ेगी। )

" बूँद इसलिए लिखा जाता है क्योंकि हिन्दी के व्याकरण के अनुसार सिर्फ़

बिन्दु नहीं लिखा जा सकता है। " - ये बात कुछ समझ नहीं आई। सिर्फ़ बिन्दु
में क्या समस्या है।

और दूसरी बात सरलता की जो आपने की है, मेरे ख्याल से तो चन्द्र बिन्दु के
स्थान पर भी बिन्दु लिखने से तो
और कठिन हो जाएगी भाषा। नए सीखने वाले को ये परेशानी होगी कि बिन्दु को
शुद्ध नासिक ध्वनि पढ़े या अनुनासिक व्यंजन।
सरलता तो इसी में है कि जहाँ तक हो सके दो अलग-अलग उच्चारणों के लिए एक
ही वर्तनी न हो और दो अलग-अलग वर्तनियों का एक ही उच्चारण न हो।

- रोहित

Abhay Tiwari

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Dec 12, 2011, 5:22:37 AM12/12/11
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बार-बार बोलकर देख रहा हूँ.. पर बूँद की ध्वनि में बूँ, बूँ जैसा नहीं बल्कि बून् जैसा सुनाई दे रहा है.. हालांकि रसाल जी के कोष में बूँद ही लिखा हुआ है.. विन्दु से  बून्द का विकास स्वाभाविक है.. 

पर ये सब निजी स्वरयंत्रों से निकली ध्वनि का खेल है.. हो सकता है शेष साथियों को बूँ ही सुनाई दे रहा हो.. 

2011/12/12 Rohit Gurjar <rohit...@gmail.com>
33D.gif

दिनेशराय द्विवेदी

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Dec 12, 2011, 7:38:25 AM12/12/11
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बून्द और बूंद ही सही हैं। इस में कोई संशय नहीं है। अब छापे में तो इतनी गलतियाँ होने लगी हैं कि कुछ कहना बेकार है।

2011/12/12 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com>



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दिनेशराय द्विवेदी, कोटा, राजस्थान, भारत
Dineshrai Dwivedi, Kota, Rajasthan,
क्लिक करें, ब्लाग पढ़ें ...  अनवरत    तीसरा खंबा

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ePandit | ई-पण्डित

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Dec 12, 2011, 9:06:10 AM12/12/11
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हिन्दी के नियमों के अनुसार अगर ऊपर बिन्दी लगाकर कोई भी शब्द लिखा जाता है तो वह बिन्दी हमेशा चन्द्र बिन्दु के रूप में आएगी।

यह कौन सा नियम है अनिल भाई, पहली बार सुना। हिन्दी से पहले संस्कृत में भी अनुस्वार (बिन्दी) और अनुनासिक (चन्द्रबिन्दु) दोनों का ही प्रयोग है।

हिन्दी के व्याकरण के अनुसार सिर्फ़ बिन्दु नहीं लिखा जा सकता है। शिरोरेखा के ऊपर पहुँचते ही अनुनासिक ध्वनियाँ चन्द्र बिन्दु में बदल जाती हैं।

बिन्दी हो या चन्द्रबिन्दु शिरोरेखा के ऊपर ही होंगे, नीचे कहाँ होंगे? तो ऊपर पहुँचने पर बदलने की क्या बात हुयी?

2011/12/12 anil janvijay <anilja...@gmail.com>



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Shrish Benjwal Sharma (श्रीश बेंजवाल शर्मा)
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If u can't beat them, join them.

ePandit: http://epandit.shrish.in/

अजित वडनेरकर

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Dec 12, 2011, 9:17:49 AM12/12/11
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शिरोरेखा के ऊपर पहुँचते ही अनुनासिक ध्वनियाँ

उन्होंने ध्वनियाँ लिखा है, बिन्दु नहीं:)

2011/12/12 ePandit | ई-पण्डित <sharma...@gmail.com>
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