जलंधर के अर्थ पर प्रकाश डालें

647 views
Skip to first unread message

Bodhisatva

unread,
Mar 3, 2013, 1:16:31 AM3/3/13
to shabdc...@googlegroups.com
पुराण कथाओं में शिव के माथे वाली आँख से एक क्रोधाग्नि निकलती है। वह इंद्र को जलाए कि उसके पहले देव गुरु के निवेदन पर
महादेव उसे समुद्र की ओर मोड़ देते हैं। समुद्र में जाकर वह अग्नि या ज्योति एक बालक का रूप ले लेती है। ब्रह्म देव उसे शिव का 
अंश मान कर उसके पास जाते हैं। उसे गोंद में उठाते हैं तो वह बालक ब्रह्मा जी का गला दबाने लगता है। ब्रह्मा जी के आँखों से जल 
गिरने लगता है, वे रोने लगते हैं, और उस बालक का नाम जलंधर रखते हैं। ब्रह्मा जी कहते हैं कि इसके कारण मेरे नेत्रों से जल निकला 
अतएव इसका नाम जलंधर होगा। मेरा सवाल है कि इस जलंधर का अर्थ क्या है।   

Mukesh Tyagi

unread,
Mar 3, 2013, 1:43:17 AM3/3/13
to shabdc...@googlegroups.com

 जलंधर के नाम से जुडी एक और कथा है! कथा ऐसी है कि जलंधर दैत्य अपनी सती पत्नी वृंदा के प्रभाववश सबल होता जा रहा था और शिवजी उसका वध नहीं कर पा रहे थे। विवश होकर उन्होंने विष्णुजी से सहायता की याचना की। विष्णुजी ने जब जलंधर का रूप धारण कर वृंदा की मर्यादा भंग कर दी तब जलंधर का दमन शिवजी ने किया। पति और सतीत्व से वंचित वृंदा ने आत्मदाह कर लिया पर इस बीच वृंदा पर मोहित विष्णुजी यह समाचार पाकर इतने क्षुब्ध हो गए कि देवताओं को तुलसी में वृंदा की आत्मा प्रतिष्ठित करनी पड़ी। अतः हर शाम वृंदा की आत्मा तुलसी पर उतरती है और विष्णु के साथ रमण कर प्रातः विदा हो जाती है। इसी कारण रात के समय तुलसी पत्र तोड़ना वर्जित है। तुलसी को वृंदा, विष्णु वल्लभा, विष्णु पत्नी, वैष्णवी, देव दुंदुभि आदि भी कहा जाता है।

(Link: http://hindi.webdunia.com/religion/occasion/others/0711/21/1071121015_1.htm)



2013/3/3 Bodhisatva <abo...@gmail.com>

--
You received this message because you are subscribed to the Google Groups "शब्द चर्चा " group.
To unsubscribe from this group and stop receiving emails from it, send an email to shabdcharcha...@googlegroups.com.
For more options, visit https://groups.google.com/groups/opt_out.
 
 



--

(¨`•.•´¨)Always           
`•.¸(¨`•.•´¨)Keep
(¨`•.•´¨)¸.•´smiling!
`•.¸.•´
A smiling face doesn’t mean there is no sorrow.
It rather means that they have the courage to deal with it.
So wear a smile always.

 Please don't print this e-mail unless you really need to. SAVE PAPER TO SAVE TREES

Mukesh Tyagi

unread,
Mar 3, 2013, 1:47:22 AM3/3/13
to shabdc...@googlegroups.com

जलंधर ===> पुं० [सं० जलधृ (धारण)+खच्, मुम्] १. एक प्रसिद्ध राक्षस जिसका जन्म समुद्र से माना जाता है, और जिसका वध विष्णु ने किया था। २. नाथपंथी एक सिद्ध। पुं=जलोदर (रोग)

Source: Pustak.org

(लिंक: http://dict.hinkhoj.com/hindi-dictionary.php?scode=dict_home&word=%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A4%B0)



2013/3/3 Mukesh Tyagi <mukesh....@gmail.com>

अजित वडनेरकर

unread,
Mar 3, 2013, 1:52:24 AM3/3/13
to shabdc...@googlegroups.com
बोधिभाई, जलंधर का सीधा सा अर्थ जल को धारण करने से ही है। चाहे यह जलधार के अर्थ में हो या जलधर के रूप में। दोनो भाव इसमें हैं। धार, धारा जैसे शब्दों में भी धारण करने का आशय ही है। कथाओं से कुछ हासिल नहीं होने वाला। क्षेपकों का चलन तो आप जानते ही हैं।

अजित

http://shabdavali.blogspot.com/
औरंगाबाद/भोपाल, 07507777230


  

अजित वडनेरकर

unread,
Mar 3, 2013, 2:04:46 AM3/3/13
to shabdc...@googlegroups.com
ठीक वैसे ही जैसे युगंधर का अर्थ जुए को धारण करने से है। मूल आशय चाहे जो हो प्रतीक के माध्यम से इसमें कृष्ण, युगपुरुष, कालपुरुष जैसी व्यंजनाएँ स्पष्ट हैं।

2013/3/3 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>

Abhay Tiwari

unread,
Mar 3, 2013, 2:50:52 AM3/3/13
to shabdc...@googlegroups.com
क्या ये सम्भव है कि जलंधर का अर्थ जल के द्वारा धारण करने से हो? जैसे कि कहानी संकेत कर रही है कि शिव की क्रोधाग्नि को समुद्र के जल 'ने' धारण किया- जो बालक के रूप में जलंधर कहलाया.. ? 

अजित वडनेरकर

unread,
Mar 3, 2013, 6:42:08 AM3/3/13
to shabdc...@googlegroups.com
कहानी के अनुसार तो ब्रह्मा ने इसलिए जलंधर नाम दिया क्योंकि उसकी वजह से उनके नेत्रों में जल आया। यानी उसके पास पान था।
जल+धर से जलधर बनेगा जिसका अर्थ भी पानी को धारण करने वाला होता है। बादल, मेघ। आदि।
जलम्+धर से जलंधर बना। भाव इसमें भी वही है। यह पौराणिक चरित्र भी है, हठयोग की मुद्रा भी है और एक नाथ योगी भी।
युगंधर में अगर युग को धारण करने का अर्थ है उस तर्क से भी जलंधर में जल को धारण करने का अर्थ ही आएगा।
मोनियर विलियम्स भी " water-bearer " ही कहते हैं।

मुद्दा ब्रह्मा की आँखो से पानी आने से जुड़ा है। सभी कथाएँ तयशुदा निष्कर्षों पर गढ़ी जाती रहीं। मुद्दा जलंधर के अस्तित्व में आने का है। समुद्र गौण है।
अगर कथा में थोड़ा परिवर्तन कर के देखें शिव की ऊर्जा पेड़ पर भी गिरती तो भी उर्जा का रूपान्तर दैत्य शिशु में ही होना था। बाकी कथा जस की तस रहती। वह शिशु ब्रह्मा का गला दबाता, ज़ाहिर है ब्रह्मा के आँसू ही निकलते। उस अनाम दैत्यशिशु को जलंधर कहने का तात्पर्य यही कि यह स्वयं जलधारक, जलसमृद्ध है। जन्म लेते ही जो संतान समृद्धि लाती है उसे लक्ष्मी या कुबेर जैसे नामों से पुकारने के पीछे यह तर्क होता था।

2013/3/3 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com>

अजित वडनेरकर

unread,
Mar 3, 2013, 6:44:31 AM3/3/13
to shabdc...@googlegroups.com
तेजी के चलते इसमें कई गलतियाँ रह गई हैं। कृपया अनदेखा करें।

Baljit Basi

unread,
Mar 3, 2013, 9:38:58 AM3/3/13
to शब्द चर्चा
मेरे अल्प ज्ञान अनुसार नाथ परम्परा में जालंधर (एक नाथ) का अर्थ 'जाल
धारण' करने वाला है।याद रहे मत्स्येन्द्र नाथ का संबंध मछली से है। इसको
मच्छ्गन या मीना नाथ भी कहते हैं। सन्दर्भ मिलने पर और लिखूंगा।

On 3 मार्च, 06:42, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> कहानी के अनुसार तो ब्रह्मा ने इसलिए जलंधर नाम दिया क्योंकि उसकी वजह से उनके
> नेत्रों में जल आया। यानी उसके पास पान था।
> जल+धर से जलधर बनेगा जिसका अर्थ भी पानी को धारण करने वाला होता है। बादल,
> मेघ। आदि।
> जलम्+धर से जलंधर बना। भाव इसमें भी वही है। यह पौराणिक चरित्र भी है, हठयोग
> की मुद्रा भी है और एक नाथ योगी भी।
> युगंधर में अगर युग को धारण करने का अर्थ है उस तर्क से भी जलंधर में जल को
> धारण करने का अर्थ ही आएगा।
> मोनियर विलियम्स भी " water-bearer " ही कहते हैं।
>
> मुद्दा ब्रह्मा की आँखो से पानी आने से जुड़ा है। सभी कथाएँ तयशुदा निष्कर्षों
> पर गढ़ी जाती रहीं। मुद्दा जलंधर के अस्तित्व में आने का है। समुद्र गौण है।
> अगर कथा में थोड़ा परिवर्तन कर के देखें शिव की ऊर्जा पेड़ पर भी गिरती तो भी
> उर्जा का रूपान्तर दैत्य शिशु में ही होना था। बाकी कथा जस की तस रहती। वह
> शिशु ब्रह्मा का गला दबाता, ज़ाहिर है ब्रह्मा के आँसू ही निकलते। उस अनाम
> दैत्यशिशु को जलंधर कहने का तात्पर्य यही कि यह स्वयं जलधारक, जलसमृद्ध है।
> जन्म लेते ही जो संतान समृद्धि लाती है उसे लक्ष्मी या कुबेर जैसे नामों से
> पुकारने के पीछे यह तर्क होता था।
>

> 2013/3/3 Abhay Tiwari <abhay...@gmail.com>


>
>
>
> > क्या ये सम्भव है कि जलंधर का अर्थ जल के द्वारा धारण करने से हो? जैसे कि
> > कहानी संकेत कर रही है कि शिव की क्रोधाग्नि को समुद्र के जल 'ने' धारण किया-
> > जो बालक के रूप में जलंधर कहलाया.. ?
>

> > 2013/3/3 अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com>


>
> >> ठीक वैसे ही जैसे युगंधर का अर्थ जुए को धारण करने से है। मूल आशय चाहे जो
> >> हो प्रतीक के माध्यम से इसमें कृष्ण, युगपुरुष, कालपुरुष जैसी व्यंजनाएँ
> >> स्पष्ट हैं।
>

> >> 2013/3/3 अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com>


>
> >>> बोधिभाई, जलंधर का सीधा सा अर्थ जल को धारण करने से ही है। चाहे यह जलधार
> >>> के अर्थ में हो या जलधर के रूप में। दोनो भाव इसमें हैं। धार, धारा जैसे
> >>> शब्दों में भी धारण करने का आशय ही है। कथाओं से कुछ हासिल नहीं होने वाला।
> >>> क्षेपकों का चलन तो आप जानते ही हैं।
>

> >>> 2013/3/3 Mukesh Tyagi <mukesh.conc...@gmail.com>
>
> >>>> जलंधर <http://dict.hinkhoj.com/words/meaning-of--in-english.html> ===> पुं०


> >>>> [सं० जल√धृ (धारण)+खच्, मुम्] १. एक प्रसिद्ध राक्षस जिसका जन्म समुद्र
> >>>> से माना जाता है, और जिसका वध विष्णु ने किया था। २. नाथपंथी एक सिद्ध।
> >>>> पुं=जलोदर (रोग)
>
> >>>> Source: Pustak.org
>
> >>>> (लिंक:
> >>>>http://dict.hinkhoj.com/hindi-dictionary.php?scode=dict_home&word=%E0%A
> >>>> 4%9C%E0%A4%B2%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A4%B0)
>

> >>>> 2013/3/3 Mukesh Tyagi <mukesh.conc...@gmail.com>


>
> >>>>>  जलंधर के नाम से जुडी एक और कथा है! कथा ऐसी है कि जलंधर दैत्य अपनी
> >>>>> सती पत्नी वृंदा के प्रभाववश सबल होता जा रहा था और शिवजी उसका वध नहीं कर पा
> >>>>> रहे थे। विवश होकर उन्होंने विष्णुजी से सहायता की याचना की। विष्णुजी
> >>>>> ने जब जलंधर का रूप धारण कर वृंदा की मर्यादा भंग कर दी तब जलंधर का दमन शिवजी
> >>>>> ने किया। पति और सतीत्व से वंचित वृंदा ने आत्मदाह कर लिया पर इस बीच वृंदा पर
> >>>>> मोहित विष्णुजी यह समाचार पाकर इतने क्षुब्ध हो गए कि देवताओं को तुलसी में
> >>>>> वृंदा की आत्मा प्रतिष्ठित करनी पड़ी। अतः हर शाम वृंदा की आत्मा तुलसी पर
> >>>>> उतरती है और विष्णु के साथ रमण कर प्रातः विदा हो जाती है। इसी कारण रात के
> >>>>> समय तुलसी पत्र तोड़ना वर्जित है। तुलसी को वृंदा, विष्णु वल्लभा, विष्णु
> >>>>> पत्नी, वैष्णवी, देव दुंदुभि आदि भी कहा जाता है।
>
> >>>>> (Link:

> >>>>>http://hindi.webdunia.com/religion/occasion/others/0711/21/1071121015...
> >>>>> )
>
> >>>>> 2013/3/3 Bodhisatva <abod...@gmail.com>


>
> >>>>>> पुराण कथाओं में शिव के माथे वाली आँख से एक क्रोधाग्नि निकलती है। वह
> >>>>>> इंद्र को जलाए कि उसके पहले देव गुरु के निवेदन पर
> >>>>>> महादेव उसे समुद्र की ओर मोड़ देते हैं। समुद्र में जाकर वह अग्नि या
> >>>>>> ज्योति एक बालक का रूप ले लेती है। ब्रह्म देव उसे शिव का
> >>>>>> अंश मान कर उसके पास जाते हैं। उसे गोंद में उठाते हैं तो वह बालक
> >>>>>> ब्रह्मा जी का गला दबाने लगता है। ब्रह्मा जी के आँखों से जल
> >>>>>> गिरने लगता है, वे रोने लगते हैं, और उस बालक का नाम जलंधर रखते हैं।
> >>>>>> ब्रह्मा जी कहते हैं कि इसके कारण मेरे नेत्रों से जल निकला
> >>>>>> अतएव इसका नाम जलंधर होगा। मेरा सवाल है कि इस जलंधर का अर्थ क्या है।
>
> >>>>>> --
> >>>>>> You received this message because you are subscribed to the Google
> >>>>>> Groups "शब्द चर्चा " group.
> >>>>>> To unsubscribe from this group and stop receiving emails from it,
> >>>>>> send an email to shabdcharcha...@googlegroups.com.

> >>>>>> For more options, visithttps://groups.google.com/groups/opt_out.


>
> >>>>> --
>
> >>>>> (¨`•.•´¨)Always
> >>>>> `•.¸(¨`•.•´¨)Keep
> >>>>> (¨`•.•´¨)¸.•´smiling!
> >>>>> `•.¸.•´
> >>>>> A smiling face doesn’t mean there is no sorrow.
> >>>>> It rather means that they have the courage to deal with it.
> >>>>> So wear a smile always.
>
> >>>>>  Please don't print this e-mail unless you really need to. SAVE PAPER
> >>>>> TO SAVE TREES
>
> >>>> --
>
> >>>> (¨`•.•´¨)Always
> >>>> `•.¸(¨`•.•´¨)Keep
> >>>> (¨`•.•´¨)¸.•´smiling!
> >>>> `•.¸.•´
> >>>> A smiling face doesn’t mean there is no sorrow.
> >>>> It rather means that they have the courage to deal with it.
> >>>> So wear a smile always.
>
> >>>>  Please don't print this e-mail unless you really need to. SAVE PAPER
> >>>> TO SAVE TREES
>
> >>>> --
> >>>> You received this message because you are subscribed to the Google
>

> ...
>
> और पढ़ें »- उद्धृत पाठ छिपाएँ -
>
> उद्धृत पाठ दिखाए

Baljit Basi

unread,
Mar 3, 2013, 9:42:29 AM3/3/13
to शब्द चर्चा
जालंधर शहर में जब बहुत वर्षा होती है तो अक्सर ही अख़बारों की सुर्खी
होती है, " जलंधर जल अन्दर"

अजित वडनेरकर

unread,
Mar 3, 2013, 11:09:31 AM3/3/13
to shabdc...@googlegroups.com
बलजीत भाई,
मत्स्येन्द्रनाथ का संबंध मछली से है क्योंक मत्स्य से ही मच्छ बनता है।  मछली का मूल संबंध जल से खास है। उसका जीवन जल से है। जाल से उसका अन्त होता है।
ये सब व्याख्याएँ बाद में सामने आईँ।
मोनियर विलियम्स भी जलंधर, जालंधर का संबंध जल से बताते हैं। मूल पौराणिक कथा में भी जल का संदर्भ है, जाल का नहीं।

हाँ, अलग चरित्र के तौर पर अगर जालंधरनाथ का अध्ययन किया जाए तो जाल, मछली तमाम संदर्भ महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
प्रस्तुत चर्चा जलंधर चरित्र पर है जिसमें जल का ही दख़ल है।

2013/3/3 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>
For more options, visit https://groups.google.com/groups/opt_out.


अजित वडनेरकर

unread,
Mar 3, 2013, 11:15:50 AM3/3/13
to shabdc...@googlegroups.com
"जलंधर जल अन्दर" मुख सुख और रंजककारी लोक अभिव्यक्तियाँ हैं। इन्हें ज्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।
 अंदर के मूल में आन्तरिक वाला अन्तर है। 'अंदर' का 'द' दरअसल 'त' का रूपान्तर है जो फ़ारसी से आया। 'अन्दरूनी' जैसे शब्द पर गौर करें। अब संस्कृत के 'अन्तर' से फ़ारसी में 'द' तो बन गया मगर उसे फिर संस्कृत के जलंधर में घुस कर 'ध' रूप लेने की क्या ज़रूरत पड़ रही है:)

2013/3/3 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>

अजित वडनेरकर

unread,
Mar 3, 2013, 11:20:36 AM3/3/13
to shabdc...@googlegroups.com
अंतर, अंदर के सिलसिले में शब्दों का सफ़र की इस कड़ी पर भी नज़र डाली जा सकती है-
अंदरखाने की बात

Baljit Basi

unread,
Mar 3, 2013, 11:55:59 AM3/3/13
to शब्द चर्चा
मैंने दोनों बातें जानकारी हित ही दी हैं। यह तो मैं समझता हूँ कि 'जल
अन्दर' वाली बात का यहाँ कोई महत्व नहीं . नाथ परम्परा में जालंधर नाथ का
क्या मतलब लिया जाता है, यह जानना भी ज़रूरी है। दरअसल मैं बहुत देर से
जालंधर पर लिखना चाह रहा हूँ। यह चर्चा अगर किसे सिरे लगती है तो मुझे
लाभ ही है।जालंधर मेरे गाँव का जिला भी है, नज़दीक भी है , इसके साथ
भावुकता भी है। यह किसी वक्त नाथों का केंद्र रहा है। जालंधर नाथ का एक
नाम हडी-पा भी है . अब बहुत कुछ भूल गया हूँ . यहाँ मेरे पास भारती
श्रोतों की कमी रहती है।

On 3 मार्च, 11:20, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> अंतर, अंदर के सिलसिले में शब्दों का सफ़र की इस कड़ी पर भी नज़र डाली जा सकती
> है-

> अंदरखाने की बात <http://shabdavali.blogspot.in/2010/05/blog-post_20.html>

अजित वडनेरकर

unread,
Mar 3, 2013, 12:05:04 PM3/3/13
to shabdc...@googlegroups.com
प्राजी ,
जंलधर ते जलंधर उत्ते लिखना मैं वी सालां से मुलतवी कीता होया ।  जलंधर  दे टांडा उडमुड पिंड नाल मेरा वी रिशता रेहा है ।
तुसी जाणदे ही हो ।  वधिया है इस चरचा से सानूं फायदा ही होणा है ।

तुहाडी जै हो

2013/3/3 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>
मैंने दोनों बातें जानकारी हित ही दी हैं। यह तो मैं समझता हूँ कि 'जल
--
You received this message because you are subscribed to the Google Groups "शब्द चर्चा " group.
To unsubscribe from this group and stop receiving emails from it, send an email to shabdcharcha...@googlegroups.com.
For more options, visit https://groups.google.com/groups/opt_out.


Bodhi Sattva

unread,
Mar 3, 2013, 12:29:38 PM3/3/13
to shabdc...@googlegroups.com
सब की जय हो। मैं इससे अधिक कुछ कहने की दशा में नहीं हूँ। 
2013/3/3 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>



--
Dr. Bodhisatva, mumbai
0-9820212573

Baljit Basi

unread,
Mar 3, 2013, 12:30:15 PM3/3/13
to शब्द चर्चा
जितनी अच्छी आपने पंजाबी लिखी है उतनी तो मैं हिंदी भी नहीं लिख सकता .
सिर्फ एक शब्द गलत लिखा है, 'से' की जगह 'तों' होना चाहिए जैसे 'सालां
से मुलतवी' की जगह 'सालां तों मुलतवी'. शुरू में 'जंलधर ते जलंधर उत्ते'
में दुहराई है . सिर्फ 'जंलधर ते' होना चाहिए। इससे शक पड़ता है कि यह
काम मशीनी है!

On 3 मार्च, 12:05, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> प्राजी ,
> जंलधर ते जलंधर उत्ते लिखना मैं वी सालां से मुलतवी कीता होया ।  जलंधर  दे
> टांडा उडमुड पिंड नाल मेरा वी रिशता रेहा है ।
> तुसी जाणदे ही हो ।  वधिया है इस चरचा से सानूं फायदा ही होणा है ।
>
> तुहाडी जै हो
>

> 2013/3/3 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>


>
>
>
>
>
> > मैंने दोनों बातें जानकारी हित ही दी हैं। यह तो मैं समझता हूँ कि 'जल
> > अन्दर' वाली बात का यहाँ कोई महत्व नहीं . नाथ परम्परा में जालंधर नाथ का
> > क्या  मतलब लिया जाता है, यह जानना भी ज़रूरी है। दरअसल  मैं बहुत देर से
> > जालंधर पर लिखना चाह रहा हूँ। यह  चर्चा  अगर किसे सिरे लगती है तो मुझे
> > लाभ ही है।जालंधर मेरे गाँव का जिला भी है, नज़दीक भी है , इसके साथ
> > भावुकता भी है। यह किसी वक्त  नाथों का केंद्र रहा है। जालंधर नाथ का एक
> > नाम हडी-पा  भी है . अब बहुत कुछ भूल गया हूँ . यहाँ मेरे पास  भारती
> > श्रोतों की कमी रहती है।
>
> > On 3 मार्च, 11:20, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> > > अंतर, अंदर के सिलसिले में शब्दों का सफ़र की इस कड़ी पर भी नज़र डाली जा
> > सकती
> > > है-
> > > अंदरखाने की बात <http://shabdavali.blogspot.in/2010/05/blog-post_20.html
>
> > --
> > You received this message because you are subscribed to the Google Groups
> > "शब्द चर्चा " group.
> > To unsubscribe from this group and stop receiving emails from it, send an
> > email to shabdcharcha...@googlegroups.com.
> > For more options, visithttps://groups.google.com/groups/opt_out.
>
> --
>

> *
> अजित*http://shabdavali.blogspot.com/
> औरंगाबाद/भोपाल, 07507777230- उद्धृत पाठ छिपाएँ -

अजित वडनेरकर

unread,
Mar 3, 2013, 12:44:53 PM3/3/13
to shabdc...@googlegroups.com
बेशक ये मशीनी है। मैने परसों ही खुलासा किया था। मैं मशीन के ज़रिये लगातार पंजाबी सीख रहा हूँ और अपना कुछ वक्त इसे दे रहा हूँ।
अरबी, फ़ारसी सीखने का काम भी चल रहा है। पंजाबी आसान है। मुझे कभी कठिन नहीं लगी। हरिद्वार में तो परिवेश में भी असर दिखता है।
उम्मीद है सीख लूंगा। बाकी अरबी-फ़ारसी के लिए मेहनत चाहिए। अभी काम पुरता चल रहा है। आपकी हौसलाअफ़ज़ाई चाहिए:)


2013/3/3 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>
For more options, visit https://groups.google.com/groups/opt_out.





--


अजित

http://shabdavali.blogspot.com/
औरंगाबाद/भोपाल, 07507777230


  

Baljit Basi

unread,
Mar 3, 2013, 1:56:50 PM3/3/13
to शब्द चर्चा
बहुत अच्छी बात है आप पंजाबी सीख रहे हैं। वधाई हो। कोई ज़रुरत पड़े तो
बताना .गुरमुखी भी सीख लो . उर्दू फ़ारसी के प्रति मेरी कठनाई है कि मैं
लिख सकता हूँ पढ़ना मुश्किल लगता है हालाँकि औरों की बात उल्ट होती है। कम
से कम मेरा एक आरटीकल तो पढ़ें और मुझे बताएं मैं कितने पानी (?) में
हूँ .

सुमितकुमार ओम कटारिया

unread,
Mar 6, 2013, 5:53:50 AM3/6/13
to shabdc...@googlegroups.com


रविवार, 3 मार्च 2013 5:12:08 pm UTC+5:30 को, अजित वडनेरकर ने लिखा:

जलम्+धर से जलंधर बना। भाव इसमें भी वही है। यह पौराणिक चरित्र भी है, हठयोग की मुद्रा भी है और एक नाथ योगी भी।

योग में ठोडी को छाती के ऊपर की गोल हड्डी से चिपकाने को जालंधर बंध कहते हैं। इस बंध का नाम ऐसा होना शिव की कहानी से समझ में आता है, कि मानों शिव नीचे देखने लगे।
Reply all
Reply to author
Forward
0 new messages