पृथा का अर्थ पृथ्वी है। पृथ् धातु का अर्थ है
विस्तार करना। जो दूर तक फैली हुई है वही है पृथिवी (ऐसे भी लिखते हैं)। जो चौड़ा
है, प्रशस्त है वह है पृथु या पृथुल।
पर पार्थ का अर्थ सिर्फ़ पृथा का पुत्र है। पृथा भी
स्रिफ़ एक ही मिलती है जो कुंती के नाम से जानी गई। असल में तीन पाण्डव पार्थ है,
बाक़ी दो तो माद्रेय हैं। हालांकि कुंती की सर्वाधिक ममता सबसे छोटे और सबसे
सुन्दर माद्रीपुत्र सहदेव पर थी।