On 1 अक्तू, 08:51, संजय | sanjay <sanjaybeng...@gmail.com> wrote:
> धन्यवाद अजितजी. पढ़ लिया है. इस समूह की उपयोगिता तो है :)
>
> 2010/10/1 अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com>
>
>
>
>
>
> > संजय भाई,
> > सफ़र का यह पड़ाव देखें। कुछ संदर्भ है-
> > अपना हाथ जगन्नाथ…यानी महिमा कर्म की<http://shabdavali.blogspot.com/2010/05/blog-post_09.html>
>
> > 2010/10/1 संजय | sanjay <sanjaybeng...@gmail.com>
>
> > अयोध्या आंदोलन के समय से "कारसेवा" या "कारसेवक" शब्द लिखते-सुनते आया हूँ.
> >> इसका अर्थ क्या होता है? "कार" से इसका क्या सम्बन्ध हो सकता है?
>
> >> --
> >> ---------------------------------------------------------------
> >> संजय बेंगाणी | sanjay bengani | 09601430808
> >> *छवि मीडिया एण्ड कॉम्यूनिकेशन*
> >> ए-507, स्मिता टावर, गुरूकुल रोड़, मेमनगर , अहमदाबाद, गुजरात.
> >> web :www.chhavi.in।www.tarakash.com।www.pinaak.org
> >> blog: www.tarakash.com/joglikhi
>
> > --
> > शुभकामनाओं सहित
> > अजित
> >http://shabdavali.blogspot.com/
>
> --
> ---------------------------------------------------------------
> संजय बेंगाणी | sanjay bengani | 09601430808
> *छवि मीडिया एण्ड कॉम्यूनिकेशन*
> ए-507, स्मिता टावर, गुरूकुल रोड़, मेमनगर , अहमदाबाद, गुजरात.
> web :www.chhavi.in।www.tarakash.com।www.pinaak.org
> blog: www.tarakash.com/joglikhi- उद्धृत पाठ छिपाएँ -
>
> उद्धृत पाठ दिखाए
पंजाबी में 'कार' स्वतंतर शब्द है और इसका व्यापक प्रचलन है. इसका मतलब
काम ही है:
जो तुधु भावै साई भली कार - गुरू नानक
संजोगु विजोगु दुइ
कार चलावहि लेखे आवहि भाग- गुरू नानक
नानक सचे की साची कार -गुरू नानक
एक मुहावरा है: हाथ कार वल, चित यार वल.
यहाँ कर 'संज्ञा' ही है.
कारसेवा वाली बात ज़रा स्पष्ट करें.वैसे आप 'कार्य' और 'सेवा' को किर्याएँ
बता रहे हैं , क्या यह भाववाचक संज्ञाएँ नहीं हैं?
आप शायद क्रिया का वैयाकर्नक अर्थों में प्रयोग नहीं कर रहे.
@बलजीत बासी,
कारसेवा के संदर्भ में पंजाबी का हवाला इसलिए दिया
क्योंकि कारसेवा का हिन्दी में जो प्रचलित प्रयोग है वह समाचार माध्यमों के
जरिये पंजावी वाले कारसेवा की तरह अधिक होता है, अन्यथा कारसेवा, करसेवा
ही है। करसेवा हिन्दी में भी है, पर अल्पप्रचलित। महाराष्ट्र में भी
मंदिरों में करसेवा होती है। मराठी में भी यह प्रचलित है। वृहत प्रामाणिक
हिन्दी कोश समेत अनेक कोशों में यह करसेवा ही दर्ज है जिसमें धार्मिक
आयोजनों या धार्मिक निर्माण हेतु किया जानेवाला श्रमदान का भाव ही है। बाकी
आप सही हैं।
On 1 अक्तू, 14:26, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> क्या बात कर रहे हैं बलजीत भाई?
> संदर्भित लिंक में ही आपकी टिप्पणी मौजूद है। गौर से देखें-
>
> Baljit Basi <http://www.blogger.com/profile/11378291148982269202> said...
>
> पंजाबी में 'कार' स्वतंतर शब्द है और इसका व्यापक प्रचलन है. इसका मतलब काम ही
> है:
> जो तुधु भावै साई भली कार - गुरू नानक
> संजोगु विजोगु दुइ कार चलावहि लेखे आवहि भाग- गुरू नानक
> नानक सचे की साची कार -गुरू नानक
> एक मुहावरा है: हाथ कार वल, चित यार वल.
> यहाँ कर 'संज्ञा' ही है. कारसेवा वाली बात ज़रा स्पष्ट करें.वैसे आप 'कार्य' और
> 'सेवा' को किर्याएँ बता रहे हैं , क्या यह भाववाचक संज्ञाएँ नहीं हैं?
> May 10, 2010 3:26 AM
> <http://shabdavali.blogspot.com/2010/05/blog-post_09.html?showComment=...>
> <http://www.blogger.com/delete-comment.g?blogID=7753883218562979274&po...>
> Baljit
> Basi <http://www.blogger.com/profile/11378291148982269202> said...
>
> आप शायद क्रिया का वैयाकर्नक अर्थों में प्रयोग नहीं कर रहे.
> May 10, 2010 3:59 AM
> <http://shabdavali.blogspot.com/2010/05/blog-post_09.html?showComment=...>
> <http://www.blogger.com/delete-comment.g?blogID=7753883218562979274&po...>
> अजित
> वडनेरकर <http://www.blogger.com/profile/11364804684091635102> said...
>
> @बलजीत बासी,
> कारसेवा के संदर्भ में पंजाबी का हवाला इसलिए दिया क्योंकि कारसेवा का हिन्दी
> में जो प्रचलित प्रयोग है वह समाचार माध्यमों के जरिये पंजावी वाले कारसेवा की
> तरह अधिक होता है, अन्यथा कारसेवा, करसेवा ही है। करसेवा हिन्दी में भी है, पर
> अल्पप्रचलित। महाराष्ट्र में भी मंदिरों में करसेवा होती है। मराठी में भी यह
> प्रचलित है। वृहत प्रामाणिक हिन्दी कोश समेत अनेक कोशों में यह करसेवा ही दर्ज
> है जिसमें धार्मिक आयोजनों या धार्मिक निर्माण हेतु किया जानेवाला श्रमदान का
> भाव ही है। बाकी आप सही हैं।
>
> 2010/10/1 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
> > > blog: www.tarakash.com/joglikhi-उद्धृत पाठ छिपाएँ -
>
> > > उद्धृत पाठ दिखाए
>
> --
> शुभकामनाओं सहित
> अजितhttp://shabdavali.blogspot.com/- उद्धृत पाठ छिपाएँ -
On 1 अक्तू, 19:33, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> जाहिर है वह टिप्पणी आपने संबंधित लेख पर ही ढूंढी होगी। उस लेख का संदर्भ
> बताएं तो कुछ बात बने।
> इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मैने आज तक अपने मित्र अरविंद मिश्र की एक टिप्पणी के
> अलावा किसी सफ़री की कोई टिप्पणी डिलीट नहीं की है।
>
> 2010/10/2 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>
> ...
>
> और पढ़ें »- उद्धृत पाठ छिपाएँ -
On 2 अक्तू, 11:56, अविनाश वाचस्पति <avinashvachasp...@gmail.com>
wrote:
> सेवा करने के बाद कार मिलने की संभावनाएं बढ़ जाएं, वही कारसेवा कहलाए
>
> सादर
>
> 2010/10/2 अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com>
>
>
>
> > *यह रही बलजीत भाई की गुमशुदा प्रतिक्रिया-*
>
> > अजित जी
> > कारसेवा के सम्बन्ध में आपकी बात कुछ सही तो लगती है लेकिन आगे खोज करने से
> > कुछ शंका भी उतपन हो गयी है. पंजाबी में 'कार' का मतलब धर्म का टेक्स तो होता
> > है(कार भेट गुर की सिख लाविह- एक सिख ग्रन्थ). लेकिन सिख धर्म का एक महान कोष
> > कारसेवा वाले 'कार' को एक अरबी शब्द 'कअर' से निकला मानता है जिसका मतलब दरिया
> > अथवा कुआं की गेहराई और इनसे निकला गार(तिलछिट) है. यह बात सही है कि कारसेवा
> > का मुख्य मंतव पवित्र सरोवर का गार निकालना ही रहा है. शायद १९२३ में पहिली बार
> > अमृतसर सरोवर को साफ़ करने की सेवा के लिए यह शब्द इस्तेमाल किया किया गया था.
> > आप की व्याख्या प्रचलत व्याख्या से भिन्न है, इस लिए मुझे इस में दिलचस्पी है.
> > आपका
> > बलजीत
>
> > *....यह हाज़िर है मेरी प्रतिक्रिया, जो बरामद हो गई है :)*
>
> > बलजीत भाई,
> > आप भी तलछट से "माल" निकाल कर लाए हैं। व्युत्पत्तिमूलक शब्द संधान में सभी
> > सभी संभावनाओं पर विचार करना होता है। भाषाओं के सांस्कृतिक, सामाजिक संदर्भ और
> > अन्य भाषाओं से अंतर्संबंधों की पड़ताल ज़रूरी होती है। अरबी के कअर से मुझे
> > मिट्टी के अर्थ में गार या गारा शब्द का साम्य भी दिलचस्प लग रहा है। क
> > वर्णक्रम में ग का रूपांतर आम बात है।
> > सफर जारी रहे।
> > आभार
>
> > 2010/10/2 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>