कारसेवा

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संजय | sanjay

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Oct 1, 2010, 8:31:16 AM10/1/10
to shabdc...@googlegroups.com
अयोध्या आंदोलन के समय से "कारसेवा" या "कारसेवक" शब्द लिखते-सुनते आया हूँ. इसका अर्थ क्या होता है? "कार" से इसका क्या सम्बन्ध हो सकता है?

--
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संजय बेंगाणी | sanjay bengani | 09601430808
छवि मीडिया एण्ड कॉम्यूनिकेशन
ए-507, स्मिता टावर, गुरूकुल रोड़, मेमनगर , अहमदाबाद, गुजरात. 
web : www.chhavi.inwww.tarakash.comwww.pinaak.org
blog:  www.tarakash.com/joglikhi


अजित वडनेरकर

unread,
Oct 1, 2010, 8:46:43 AM10/1/10
to shabdc...@googlegroups.com
संजय भाई,
सफ़र का यह पड़ाव देखें। कुछ संदर्भ है-
अपना हाथ जगन्नाथ…यानी महिमा कर्म की

2010/10/1 संजय | sanjay <sanjay...@gmail.com>



--
शुभकामनाओं सहित
अजित
http://shabdavali.blogspot.com/

संजय | sanjay

unread,
Oct 1, 2010, 8:51:39 AM10/1/10
to shabdc...@googlegroups.com
धन्यवाद अजितजी. पढ़ लिया है. इस समूह की उपयोगिता तो है :) 

2010/10/1 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>

Baljit Basi

unread,
Oct 1, 2010, 2:12:01 PM10/1/10
to शब्द चर्चा
अजित जी के किसी लेख में मैंने कारसेवा के बारी टिप्पणी दी थी लेकिन अब
मुझे वह मिली नहीं. पंजाबी में कार अपने आप में एक स्वतंत्र शब्द है जिस
का मतलब काम ही है. यह संभवत कार्य से ही बना हो या फिर जैसे अजीत जी ने
बताया कृ धातु से. लेकिन कारसेवा में कार शब्द की मैंने एक और सम्भावना
बताई थी. स्वर्ण मंदिर के सरोवर में से गार निकलने के लिए पहली कार सेवा
१९२३ में हुई थी. हो सकता है यह शब्द तब से परचलित हुआ हो. सिख धर्म के
एक विश्वकोष 'महान कोष' में यहाँ 'कार' को अरबी के एक शब्द 'कअर' से
व्युत्पत हुआ बताया गया है. अरबी में इसका मतलब होता है 'दरया या कुँए की
गहराई; कुँए और ताल की गार.' यह बात सही है कि सिख धर्म में कारसेवा
मुख्यत सरोवर में से गार निकलने के लिए होती रही है, भले ही आज इसको और
धार्मिक अथवा सार्वजनिक कार्यों के लिए श्रमदान के अर्थों का भी विस्तार
मिल गया हो. आज कल पंजाब में संत बलबीर सिंह सीचेवाल नाम का संत आपने
सेवकों से पंजाब के प्रदूषत दरयाओं को साफ़ करवाने में जुटा हुया हो और
उसकी बहुत प्रशंसा हो रही है. अगर हिन्दू मंदिरों में कारसेवा बहुत
पुराने समय से होती रही है, फिर तो अजित जी की बात सही है वरना अरबी वाली
सम्भावना पर भी गौर किया जाना चाहिए.
बालजी बासी

On 1 अक्तू, 08:51, संजय | sanjay <sanjaybeng...@gmail.com> wrote:
> धन्यवाद अजितजी. पढ़ लिया है. इस समूह की उपयोगिता तो है :)
>

> 2010/10/1 अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com>


>
>
>
>
>
> > संजय भाई,
> > सफ़र का यह पड़ाव देखें। कुछ संदर्भ है-

> > अपना हाथ जगन्नाथ…यानी महिमा कर्म की<http://shabdavali.blogspot.com/2010/05/blog-post_09.html>
>
> > 2010/10/1 संजय | sanjay <sanjaybeng...@gmail.com>


>
> > अयोध्या आंदोलन के समय से "कारसेवा" या "कारसेवक" शब्द लिखते-सुनते आया हूँ.
> >> इसका अर्थ क्या होता है? "कार" से इसका क्या सम्बन्ध हो सकता है?
>
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> उद्धृत पाठ दिखाए

अजित वडनेरकर

unread,
Oct 1, 2010, 2:26:06 PM10/1/10
to shabdc...@googlegroups.com
क्या बात कर रहे हैं बलजीत भाई?
संदर्भित लिंक में ही आपकी टिप्पणी मौजूद है। गौर से देखें-

Baljit Basi said...

पंजाबी में 'कार' स्वतंतर शब्द है और इसका व्यापक प्रचलन है. इसका मतलब काम ही है:
जो तुधु भावै साई भली कार - गुरू नानक
संजोगु विजोगु दुइ कार चलावहि लेखे आवहि भाग- गुरू नानक
नानक सचे की साची कार -गुरू नानक
एक मुहावरा है: हाथ कार वल, चित यार वल.
यहाँ कर 'संज्ञा' ही है. कारसेवा वाली बात ज़रा स्पष्ट करें.वैसे आप 'कार्य' और 'सेवा' को किर्याएँ बता रहे हैं , क्या यह भाववाचक संज्ञाएँ नहीं हैं?

May 10, 2010 3:26 AM
Baljit Basi said...

आप शायद क्रिया का वैयाकर्नक अर्थों में प्रयोग नहीं कर रहे.

May 10, 2010 3:59 AM
अजित वडनेरकर said...

@बलजीत बासी,
कारसेवा के संदर्भ में पंजाबी का हवाला इसलिए दिया क्योंकि कारसेवा का हिन्दी में जो प्रचलित प्रयोग है वह समाचार माध्यमों के जरिये पंजावी वाले कारसेवा की तरह अधिक होता है, अन्यथा कारसेवा, करसेवा ही है। करसेवा हिन्दी में भी है, पर अल्पप्रचलित। महाराष्ट्र में भी मंदिरों में करसेवा होती है। मराठी में भी यह प्रचलित है। वृहत प्रामाणिक हिन्दी कोश समेत अनेक कोशों में यह करसेवा ही दर्ज है जिसमें धार्मिक आयोजनों या धार्मिक निर्माण हेतु किया जानेवाला श्रमदान का भाव ही है। बाकी आप सही हैं।




2010/10/1 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>

दिनेशराय द्विवेदी

unread,
Oct 1, 2010, 2:29:49 PM10/1/10
to shabdc...@googlegroups.com
हिन्दी के कार्य शब्द को पंजाबी में कार ही बोला जाएगा। इस तरह कारसेवा वस्तुतः कोई कार्य कर के किया जाने वाला सेवाकार्य है।

2010/10/1 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>



--
दिनेशराय द्विवेदी, कोटा, राजस्थान, भारत
Dineshrai Dwivedi, Kota, Rajasthan,
क्लिक करें, ब्लाग पढ़ें ...  अनवरत    तीसरा खंबा

ashutosh kumar

unread,
Oct 1, 2010, 2:53:19 PM10/1/10
to shabdc...@googlegroups.com


मेरा ख़याल है हिंदी में कार सेवा पंजाबी से ही  आयी है.जब से स्वर्ण मंदिर की कार सेवा के बारे में सुना , तभी से हिन्दू मंदिरों में भी कार सेवा नज़र आने लगी. हिन्दुओं में सेवा की परम्परा तो है, कार सेवा की नहीं. होती भी तो सीधी सादी  कर सेवा की  जगह  इस भ्रामक कार सेवा को क्यूँ चलाया जाता ! वैसे कार सेवा  और कार सेवक का अब जो मतलब हो गया है , वह ठेठ हिन्दुस्तानी (सूबा हिन्दुस्तान  , यानी हिंदी उर्दू इलाका ) योगदान है . पता नहीं अब पंजाबी लोग  कार सेवा के बारे में क्या सोचतें हैं.   

Baljit Basi

unread,
Oct 1, 2010, 3:18:24 PM10/1/10
to शब्द चर्चा
मैं जिस टिप्पणी की बात कर रहा हूँ वह शायद किसी और लेख में है और
वहां मैंने कार शब्द की अरबी शब्द 'कअर' के साथ संभवत रिश्ते की बात कही
थी. मुझे याद है आप ने भी कुछ कुछ सहमती प्रकट की थी. वह मुझे नहीं मिली.
बलजीत बासी

On 1 अक्तू, 14:26, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> क्या बात कर रहे हैं बलजीत भाई?
> संदर्भित लिंक में ही आपकी टिप्पणी मौजूद है। गौर से देखें-
>

> Baljit Basi <http://www.blogger.com/profile/11378291148982269202> said...


>
> पंजाबी में 'कार' स्वतंतर शब्द है और इसका व्यापक प्रचलन है. इसका मतलब काम ही
> है:
> जो तुधु भावै साई भली कार - गुरू नानक
> संजोगु विजोगु दुइ कार चलावहि लेखे आवहि भाग- गुरू नानक
> नानक सचे की साची कार -गुरू नानक
> एक मुहावरा है: हाथ कार वल, चित यार वल.
> यहाँ कर 'संज्ञा' ही है. कारसेवा वाली बात ज़रा स्पष्ट करें.वैसे आप 'कार्य' और
> 'सेवा' को किर्याएँ बता रहे हैं , क्या यह भाववाचक संज्ञाएँ नहीं हैं?
>   May 10, 2010 3:26 AM

> <http://shabdavali.blogspot.com/2010/05/blog-post_09.html?showComment=...>
>  <http://www.blogger.com/delete-comment.g?blogID=7753883218562979274&po...>
>   Baljit
> Basi <http://www.blogger.com/profile/11378291148982269202> said...


>
> आप शायद क्रिया का वैयाकर्नक अर्थों में प्रयोग नहीं कर रहे.
>   May 10, 2010 3:59 AM

> <http://shabdavali.blogspot.com/2010/05/blog-post_09.html?showComment=...>
>  <http://www.blogger.com/delete-comment.g?blogID=7753883218562979274&po...>
>   अजित
> वडनेरकर <http://www.blogger.com/profile/11364804684091635102> said...


>
> @बलजीत बासी,
> कारसेवा के संदर्भ में पंजाबी का हवाला इसलिए दिया क्योंकि कारसेवा का हिन्दी
> में जो प्रचलित प्रयोग है वह समाचार माध्यमों के जरिये पंजावी वाले कारसेवा की
> तरह अधिक होता है, अन्यथा कारसेवा, करसेवा ही है। करसेवा हिन्दी में भी है, पर
> अल्पप्रचलित। महाराष्ट्र में भी मंदिरों में करसेवा होती है। मराठी में भी यह
> प्रचलित है। वृहत प्रामाणिक हिन्दी कोश समेत अनेक कोशों में यह करसेवा ही दर्ज
> है जिसमें धार्मिक आयोजनों या धार्मिक निर्माण हेतु किया जानेवाला श्रमदान का
> भाव ही है। बाकी आप सही हैं।
>

> 2010/10/1 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>

> > > blog:  www.tarakash.com/joglikhi-उद्धृत पाठ छिपाएँ -


>
> > > उद्धृत पाठ दिखाए
>
> --
> शुभकामनाओं सहित

> अजितhttp://shabdavali.blogspot.com/- उद्धृत पाठ छिपाएँ -

अजित वडनेरकर

unread,
Oct 1, 2010, 7:33:18 PM10/1/10
to shabdc...@googlegroups.com
जाहिर है वह टिप्पणी आपने संबंधित लेख पर ही ढूंढी होगी। उस लेख का संदर्भ बताएं तो कुछ बात बने। 
इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मैने आज तक अपने मित्र अरविंद मिश्र की एक टिप्पणी के अलावा किसी सफ़री की कोई टिप्पणी डिलीट नहीं की है।

2010/10/2 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>

Baljit Basi

unread,
Oct 1, 2010, 8:21:48 PM10/1/10
to शब्द चर्चा
अजित जी, डिलीट करने वाली बात तो मैंने सोची तक नहीं और उस में ऐसी
विद्वता वाली बात ही क्या है. मैंने टिप्पणी संबंधित लेख पर ही ढूंढी
थी . फिर मैंने अनुमान ही लगाया कि शायद किसी और लेख में होगी . मैंने
कुछ ढूंढने की कोशिश की लेकिन इतने समुद्र में कितनी छलांगें लगायें.
मेरा मकसद तो इतना ही था कि बनी बनाई टिपण्णी मिल जाती और मैं चेप देता.
खैर मैंने जो कहना था वो कह दिया.लेकिन मुझे कुछ कुछ याद आता है , आपने
कहा था कि अरबी के इस शब्द से 'कार' शब्द बन सकता है. हो सकता है मैंने
टिप्पणी पहले लिख कर फिर पोस्ट न की हो या आपने कोई पूरा लेख किसी और
वजह से डीलीट कर दिया हो. बाकी यादाशत का भी क्या भरोसा, अब वो उमर आने
ही वाली है, शायद आ ही गई है! आप निश्चिन्त रहें, मेरी उमर का फ़िक्र
करें.
बलजीत बासी

On 1 अक्तू, 19:33, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> जाहिर है वह टिप्पणी आपने संबंधित लेख पर ही ढूंढी होगी। उस लेख का संदर्भ
> बताएं तो कुछ बात बने।
> इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मैने आज तक अपने मित्र अरविंद मिश्र की एक टिप्पणी के
> अलावा किसी सफ़री की कोई टिप्पणी डिलीट नहीं की है।
>

> 2010/10/2 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>

> ...
>
> और पढ़ें »- उद्धृत पाठ छिपाएँ -

अजित वडनेरकर

unread,
Oct 2, 2010, 11:45:20 AM10/2/10
to shabdc...@googlegroups.com
यह रही बलजीत भाई की गुमशुदा प्रतिक्रिया-

अजित जी
कारसेवा के सम्बन्ध में आपकी बात कुछ सही तो लगती है लेकिन आगे खोज करने से कुछ शंका भी उतपन हो गयी है. पंजाबी में 'कार' का मतलब धर्म का टेक्स तो होता है(कार भेट गुर की सिख लाविह- एक सिख ग्रन्थ). लेकिन सिख धर्म का एक महान कोष कारसेवा वाले 'कार' को एक अरबी शब्द 'कअर' से निकला मानता है जिसका  मतलब दरिया अथवा कुआं की गेहराई और इनसे निकला गार(तिलछिट) है. यह बात सही है कि कारसेवा का मुख्य मंतव पवित्र सरोवर का गार निकालना ही रहा है. शायद १९२३ में पहिली बार अमृतसर सरोवर को साफ़ करने की सेवा के लिए यह शब्द इस्तेमाल किया किया गया था.
आप की व्याख्या प्रचलत व्याख्या से भिन्न है, इस लिए मुझे इस में दिलचस्पी है.
आपका
बलजीत



....यह हाज़िर है मेरी प्रतिक्रिया, जो बरामद हो गई है :)

बलजीत भाई,
आप भी तलछट से "माल" निकाल कर लाए हैं। व्युत्पत्तिमूलक शब्द संधान में सभी सभी संभावनाओं पर विचार करना होता है। भाषाओं के सांस्कृतिक, सामाजिक संदर्भ और अन्य भाषाओं से अंतर्संबंधों की पड़ताल ज़रूरी होती है। अरबी के कअर से मुझे मिट्टी के अर्थ में गार या गारा शब्द का साम्य भी दिलचस्प लग रहा है। क वर्णक्रम में ग का रूपांतर आम बात है।
सफर जारी रहे।
आभार

2010/10/2 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>

अविनाश वाचस्पति

unread,
Oct 2, 2010, 11:56:19 AM10/2/10
to shabdc...@googlegroups.com
सेवा करने के बाद कार मिलने की संभावनाएं बढ़ जाएं, वही कारसेवा कहलाए
 
सादर

2010/10/2 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>



--
अविनाश वाचस्‍पति Avinash Vachaspati
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Baljit Basi

unread,
Oct 2, 2010, 12:12:41 PM10/2/10
to शब्द चर्चा
पंजाब में कई टेक्सी-स्टेंडज पर मैंने कारसेवा लिखा हुआ देखा है.
बलजीत बासी

On 2 अक्तू, 11:56, अविनाश वाचस्पति <avinashvachasp...@gmail.com>
wrote:


> सेवा करने के बाद कार मिलने की संभावनाएं बढ़ जाएं, वही कारसेवा कहलाए
>
> सादर
>

> 2010/10/2 अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com>
>
>
>
> > *यह रही बलजीत भाई की गुमशुदा प्रतिक्रिया-*


>
> > अजित जी
> > कारसेवा के सम्बन्ध में आपकी बात कुछ सही तो लगती है लेकिन आगे खोज करने से
> > कुछ शंका भी उतपन हो गयी है. पंजाबी में 'कार' का मतलब धर्म का टेक्स तो होता
> > है(कार भेट गुर की सिख लाविह- एक सिख ग्रन्थ). लेकिन सिख धर्म का एक महान कोष
> > कारसेवा वाले 'कार' को एक अरबी शब्द 'कअर' से निकला मानता है जिसका  मतलब दरिया
> > अथवा कुआं की गेहराई और इनसे निकला गार(तिलछिट) है. यह बात सही है कि कारसेवा
> > का मुख्य मंतव पवित्र सरोवर का गार निकालना ही रहा है. शायद १९२३ में पहिली बार
> > अमृतसर सरोवर को साफ़ करने की सेवा के लिए यह शब्द इस्तेमाल किया किया गया था.
> > आप की व्याख्या प्रचलत व्याख्या से भिन्न है, इस लिए मुझे इस में दिलचस्पी है.
> > आपका
> > बलजीत
>

> > *....यह हाज़िर है मेरी प्रतिक्रिया, जो बरामद हो गई है :)*


>
> > बलजीत भाई,
> > आप भी तलछट से "माल" निकाल कर लाए हैं। व्युत्पत्तिमूलक शब्द संधान में सभी
> > सभी संभावनाओं पर विचार करना होता है। भाषाओं के सांस्कृतिक, सामाजिक संदर्भ और
> > अन्य भाषाओं से अंतर्संबंधों की पड़ताल ज़रूरी होती है। अरबी के कअर से मुझे
> > मिट्टी के अर्थ में गार या गारा शब्द का साम्य भी दिलचस्प लग रहा है। क
> > वर्णक्रम में ग का रूपांतर आम बात है।
> > सफर जारी रहे।
> > आभार
>

> > 2010/10/2 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>

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