
एक :
Bhargava's Standard Illustrated Dictionary (Hindi - English Edition),
Compiled and Edited by : Prof. R.C. Pathak, B.A., L.T., Vth Enlarged
Edition (2000), Page No. 78, Column No. 2:
आशिष - n.fem. Benediciton, Blessings
आशिस -n.fem. The bestowal of a blessing upon another
आशीर्वाद -n.mas. Benediction, Blessings, Benison
दो :
Unicorn Publication, त्रिभाषीय शब्दकोश (हिन्दी-उर्दू-अंग्रेज़ी), लेखक:
मो.अशरफ अज़ीमाबादी, ISBN10:81-7806-179-1, ISBN978-81-7806-179-5, पेज
सं.36, कौलम-2:
आसीस (पु.) - दुआ - Blessings
| मधुसूदन |
|||
|---|---|---|---|
|
|
|||
|
|
|||
|
|
Download | Donate | Developer | Alliances | Media Kit | Blog | Feedback | Contact Us | FAQ
Gujaratilexicon : The Most Comprehensive Online Gujarati Language Resources
साथियों,
On Jan 19, 9:15 pm, Vinod Sharma <vinodjisha...@gmail.com> wrote:
> आशीष पुल्लिंग है
> असीस और दुआ स्त्रीलिंग हैं। यह सहज ही वाक्य में प्रयोग करके पता चल जाता है।
> हाँ, कोई भी भाषाविद भार्गव शब्दकोश को कभी महत्व नहीं देता जिसमें सर्वाधिक
> अशुद्धियाँ पाई जाती हैं। यदि अन्यथा न लें तो स्त्रोत अभी भी शुद्ध नहीं है।
> सही शब्द है स्रोत (srot).
>
> 2012/1/19 seema agrawal <thinkpositive...@gmail.com>
On Jan 20, 12:20 am, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> *“आशिष” शब्द को नकारा नहीं जा सकता !*
> यहाँ अटकने की ज़रूरत नहीं है। एक ही शब्द के कई रूपों का हिन्दी समेत अनेक
> भाषाओं में प्रचलन रहा है। आशिष लिखने वाले के भाव को हम आसानी से आशीष के
> अर्थ में ही समझते हैं। चोम्स्की जैसे अमेरिकी विद्वानों ने परिणामी और
> भाववादी भाषाविज्ञान के ज़रिए विभिन्न बोलियों के अध्ययन के ज़रिए यह स्थापित
> करने का प्रयास किया है कि हर मनुष्य की चेतना में व्याकरण का ढाँचा अलग अलग
> ढंग से विद्यमान रहता है। मिसाल के तौर पर शिवानी का सम्बन्ध कुमाऊँ से था।
> उनकी शिक्षा शान्तिनिकेतन में हुई। उनके लिखे में आशिष को देख कर हम आशीष के
> सही या गलत होने की बात कैसे कर सकते है?
>
> इसीलिए एक ही शब्द के स्त्रीलिंग या पुल्लिक रूपों और व्यवहारों पर हमेशा
> विवाद रहता है। या तो हम अपने दिमाग़ से यह निकाल दें कि हिन्दी का दायरा बहुत
> व्यापक नहीं है। और या फिर हिन्दी के व्यापक क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए
> शब्दों के विभिन्न प्रयोगों को स्वीकार कर लें। किन्ही दो रूपों में से किसी
> एक के सही होने या न होने के प्रति किसी निर्णय पर पहुँचने की कोशिश तो ठीक
> है, हिन्दी के विशाल क्षेत्र को देखते हुए किसी मानक नतीजे की आशा करना बेकार
> है।
>
> हमें यह ध्यान रखना है कि जो भी शब्द हम प्रयोग कर रहे हैं उसकी उपस्थिति मूल
> शब्दभंडार में है या नहीं। देशज शब्दों के भी प्रचलन के आधार पर अलग अलग रूप
> होते हैं। छोटू, छोटका, छुटका में भाव के स्तर पर कोई अन्तर नहीं है। अन्ततः
> इतना ही कह सकता हूँ कि किसी भी सामान्य हिन्दी भाषी से आशीष लिखे जाने की
> अपेक्षा ही की जा सकती है। मेरे सामने अगर कोई कॉपी आती है तो मैं उसमें से
> आशिष को काट कर आशीष कर देता हूँ:)
> कोई आग्रह करे तो भी नहीं मानूंगा क्योंकि मेरे इर्दगिर्द जो हिन्दी समाज है,
> वह मेरे हाथों निकली कॉपी में आशिष लिखा देख कर मेरी हिन्दी पर सन्देह व्यक्त
> कर सकता है:)
>
> 2012/1/19 seema agrawal <thinkpositive...@gmail.com>
> ...
>
> read more »
मेरा मकसद इस विषय पर बहस छेड़ना था और मैं खुश हूँ कि बहुत अच्छे नुक्ते
सामने आए. हर भाषा, बोली का आपना आपना व्याकरण है. अगर सटीक हिन्दी में
शब्द आशीष है और स्त्रीलिंग है तो कम से कम लेखकों को ऐसे ही प्रवान
करके चलाना चाहिए.
On Jan 20, 5:21 pm, Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com> wrote:
> धन्यवाद विनोद जी, लिखने में गलती हुई .
>
> On 19 जन, 21:19, Vinod Sharma <vinodjisha...@gmail.com> wrote:
>
>
>
>
>
>
>
> > मेरा मकसद इस विषय पर बहस छेड़ना था और मैं खुश हूँ कि बहुत अच्छे नुक्ते
यद्यपि चर्चा आरंभ करने वाले व्यक्ति द्वारा चर्चा का समापन कर दिया गया है लेकिन उनके द्वारा निजी निष्कर्ष को सामूहिक निष्कर्ष के रूप में घोषित किए जाने के कारण मुझे पुनः लिखना पड़ रहा है। आशिष मूल रूप से हिंदी का शब्द नहीं है। यह हिंदी से संस्कृत में नहीं गया है। सत्य यह है कि आशिष संस्कृत से हिंदी में आकर हिंदी की स्वाभाविक दीर्घीकरण की प्रवृत्ति के कारण आशीष बन गया। संस्कृत में यह स्त्रीलिंग था और हिंदी में आकर पुल्लिंग हो गया। मुझे याद नहीं पड़ता कि इस चर्चा में किसी ने भी आशिष को हिंदी का मूल शब्द बताया हो। हाँ, अपने-अपने निजी निष्कर्ष निकालने के लिए सभी स्वतंत्र हैं। कृपया इसे अन्यथा न लिया जाए।प्रचलित शब्द आशीष ही है पर शुद्ध आशिष है ये संस्कृत या बंगला नहीं
बल्कि हिंदी का ही शब्द है