आशिष/ आशीष

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seema agrawal

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Jan 19, 2012, 2:36:09 AM1/19/12
to शब्द चर्चा, kat...@gmail.com
आशिष/ आशीष शब्दों के विषय में अलग अलग स्रोत्रों से पता करने पर अलग -
अलग जानकारियां सामने आयीं हैं .कुछ प्रतिष्ठित स्रोत्र इन्हें
स्त्रीलिंग बताते हैं और कुछ पुल्लिंग .इनको लिखने के तरीकों में भी
भिन्नता है .. कृपयासंशय सुलझाइए
१) दोनों शब्द सही हैं या मात्र लेखन की भ्रांतियां हैं
२) उपरोक्त शब्द स्त्रीलिंग है या पुल्लिंग

seema agrawal

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Jan 19, 2012, 2:38:13 AM1/19/12
to शब्द चर्चा, shabdc...@googlegroups.com

kamal sahu

unread,
Jan 19, 2012, 2:39:25 AM1/19/12
to shabdc...@googlegroups.com
सीमा जी, आशीष सही है तथा यह पुल्लिंग शब्द है । 

2012/1/19 seema agrawal <thinkpos...@gmail.com>

अजित वडनेरकर

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Jan 19, 2012, 2:44:32 AM1/19/12
to shabdc...@googlegroups.com
आशिष, आशिस् संस्कृत रूप हैं।
हिन्दी में दीर्घीकरण की वृत्ति है इसलिए यह आशीष हुआ और यह पुल्लिंग है।

2012/1/19 kamal sahu <kamal...@gmail.com>



--


अजित

http://shabdavali.blogspot.com/
मोबाइल-
औरंगाबाद- 07507777230

  


Avinash Vachaspati

unread,
Jan 19, 2012, 3:05:13 AM1/19/12
to shabdc...@googlegroups.com
बिना किसी नियम के मुझे तो 'आशीष' ही सही लग रहा है। वैसे भी जब आशीष दे रहे हैं तो छोटी इ के साथ संकुचित मानसिकता और बड़ी ई के साथ मीठी ईख की विस्‍तृत मानसिकता का परिचायक प्रतीत होता है।
अविनाश वाचस्‍पति अन्‍नास्‍वामी (आजकल फेसबुक पर)

2012/1/19 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>



--
सादर/सस्‍नेह
अविनाश वाचस्‍पति/Avinash Vachaspati
मोबाइल 09718750843/09717849729
नीचे घूमते फिरते रहा कीजिए मित्रो


Vinod Sharma

unread,
Jan 19, 2012, 3:50:44 AM1/19/12
to shabdc...@googlegroups.com
अजितजी का कथन बिलकुल सही है। अन्य उदाहरण राष्ट्रिय (संस्कृत) राष्ट्रीय (हिंदी) है।

2012/1/19 Avinash Vachaspati <nuk...@gmail.com>

Vinod Sharma

unread,
Jan 19, 2012, 4:01:35 AM1/19/12
to shabdc...@googlegroups.com
सीमाजी, जब वर्तनी के संबंध में ही चर्चा हो रही है तो यहाँ उल्लेख करना समीचीन होगा कि क्या आपके द्वारा प्रयुक्त शब्द स्तोत्र सही है?

2012/1/19 Avinash Vachaspati <nuk...@gmail.com>

suresh mishra

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Jan 19, 2012, 7:06:50 AM1/19/12
to shabdc...@googlegroups.com
मैंने तो आज तक शुभ आशीष ही लिया है या दिया है.
मैं हिंदी की ही बात कर रहा हूँ.
संस्कृत से हिंदी आने में रंग बदल जाता है.



2012/1/19 Vinod Sharma <vinodj...@gmail.com>

Baljit Basi

unread,
Jan 19, 2012, 9:16:26 AM1/19/12
to शब्द चर्चा
यह भी देखो:
गुरुजन की आशिष सीस धरो,—आराधना०, पृ० ५१
पंजाबी में इसका रूप असीस ( और संकुचित 'सीस) है और यह स्त्रीलिंग है.

seema agrawal

unread,
Jan 19, 2012, 10:46:05 AM1/19/12
to शब्द चर्चा
निविवाद रूप से आशिष शब्द संस्कृत का है [देखें सभी शब्द कोष में कोष्ठक
में संज्ञा स्त्री. (संस्कृत )]लिखा है. मेरे पास जो हिन्दी शब्द कोष है
(नालंदा विशाल शब्द सागर -शब्द संख्या १,५०,००० श्री नवल जी द्वारा रचित
आदीश बुक डिपो) उसमें भी वही बात दोहराई गई है पृष्ठ संख्या {१३५} पर
उसके समानार्थी असीस,आशीर्वाद और दुआ बताये गए हैं इसी पृष्ठ पर आसीस भी
विराजमान है जिसे विद्वान लेखक ने इसे संज्ञा पुर्लिंग,हिन्दी दर्शाया
है.आशीष हिन्दी शब्द है और पुर्लिंग है. चूंकि अधिकतर शब्दकोशों में यह
समाहित नहीं किया गया है इसका कारण इसका “शब्द- जन्म” कुछ ही “सौ- साल”
का दृष्टिगोचर होता है. शब्द कोशों में लाखों हिन्दी के महत्वपूर्ण शब्द
हो सकता है कि न मिल पायें क्योंकि “शब्द- जन्म” लगातार और अनवरत
प्रक्रिया है . शब्द कोशों में आप बिलकुल एक जैसे अर्थ एक जैसी प्रस्तुति
पायेंगे. लेखकों के श्रम का कितनी मेहनत की है सहज जानकारी मिल जाती है
इनका अपडेशन समय समय पर आवश्यक और परिहार्य है
मुझे अब तक जो स्त्रोत प्राप्त हुये हैं उनके अनुसार...

एक :
Bhargava's Standard Illustrated Dictionary (Hindi - English Edition),
Compiled and Edited by : Prof. R.C. Pathak, B.A., L.T., Vth Enlarged
Edition (2000), Page No. 78, Column No. 2:
आशिष - n.fem. Benediciton, Blessings
आशिस -n.fem. The bestowal of a blessing upon another
आशीर्वाद -n.mas. Benediction, Blessings, Benison

दो :
Unicorn Publication, त्रिभाषीय शब्दकोश (हिन्दी-उर्दू-अंग्रेज़ी), लेखक:
मो.अशरफ अज़ीमाबादी, ISBN10:81-7806-179-1, ISBN978-81-7806-179-5, पेज
सं.36, कौलम-2:
आसीस (पु.) - दुआ - Blessings

Vinod Sharma

unread,
Jan 19, 2012, 11:15:57 AM1/19/12
to shabdc...@googlegroups.com
आशीष पुल्लिंग है
असीस और दुआ स्त्रीलिंग हैं। यह सहज ही वाक्य में प्रयोग करके पता चल जाता है।
हाँ, कोई भी भाषाविद भार्गव शब्दकोश को कभी महत्व नहीं देता जिसमें सर्वाधिक अशुद्धियाँ पाई जाती हैं। यदि अन्यथा न लें तो स्त्रोत अभी भी शुद्ध नहीं है। सही शब्द है स्रोत (srot).

2012/1/19 seema agrawal <thinkpos...@gmail.com>

Anil Janvijay

unread,
Jan 19, 2012, 11:49:56 AM1/19/12
to shabdc...@googlegroups.com
भाई विनोद जी, आपकी बात से मेरी पूरी सहमति है। इस पर कोई विवाद नहीं हो सकता।

2012/1/19 Vinod Sharma <vinodj...@gmail.com>



--
anil janvijay
कृपया हमारी ये वेबसाइट देखें


Moscow, Russia
+7 495 422 66 89 ( office)
+7 916 611 48 64 ( mobile)

Madhusudan H Jhaveri

unread,
Jan 19, 2012, 12:00:27 PM1/19/12
to shabdc...@googlegroups.com

(१)

गुजराती कोष भी इसे स्त्री-लिंगी ही बताता है।

(२) पर मैं जितने भी "आशिष" नाम के व्यक्तियों को जानता हूँ। सारे पुरूष ही है।

मधुसूदन



























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From: "Vinod Sharma" <vinodj...@gmail.com>
To: shabdc...@googlegroups.com
Sent: Thursday, January 19, 2012 11:15:57 AM
Subject: Re: [शब्द चर्चा] Re: आशिष/ आशीष

eg

unread,
Jan 19, 2012, 12:15:42 PM1/19/12
to shabdc...@googlegroups.com
ई सब तो ठीक हौ लेकिन तनि भारत सरकार के साइट पर देखल जाँ. ई शबद अपने राष्ट्रगान में भी हौ -  http://www.bharat.gov.in/knowindia/national_symbols.php?id=6

जन-गण-मन अधिनायक, जय हे
भारत-भाग्‍य-विधाता,
पंजाब-सिंधु गुजरात-मराठा,
द्रविड़-उत्‍कल बंग,
विन्‍ध्‍य-हिमाचल-यमुना गंगा,
उच्‍छल-जलधि-तरंग,
तव शुभ नामे जागे,
तव शुभ
आशिष मांगे,
गाहे तव जय गाथा,
जन-गण-मंगल दायक जय हे
भारत-भाग्‍य-विधाता
जय हे, जय हे, जय हे
जय जय जय जय हे।

ई पाठ ठीक हौ कि नाहीं? 


2012/1/19 Madhusudan H Jhaveri <mjha...@umassd.edu>

अजित वडनेरकर

unread,
Jan 19, 2012, 12:31:10 PM1/19/12
to shabdc...@googlegroups.com
साथियों,
भ्रमित न हों। हिन्दी में आशीष ही होता है।
बासी जी ने जो आशिष वाला पद बताया है वह मध्यकालीन कविताई है, आज की हिन्दी नहीं।
राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत हिन्दी में नहीं, बांग्ला में हैं। परिनिष्ठित बांग्ला की संस्कृतनिष्ठता और तत्सम शब्दावली इसमें झलकती है।
झवेरी जी भी जो उदाहरण दे रहे हैं वे गुजराती का है।
दीर्घ वाले आशीष के सन्दर्भ में उक्त तथ्य ध्यान रखे जाने चाहिएँ।


2012/1/19 eg <girij...@gmail.com>

दिनेशराय द्विवेदी

unread,
Jan 19, 2012, 12:33:16 PM1/19/12
to shabdc...@googlegroups.com
अजित जी से सहमत न होने का कोई कारण नहीं है।

2012/1/19 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>
साथियों,



--
दिनेशराय द्विवेदी, कोटा, राजस्थान, भारत
Dineshrai Dwivedi, Kota, Rajasthan,
क्लिक करें, ब्लाग पढ़ें ...  अनवरत    तीसरा खंबा

seema agrawal

unread,
Jan 19, 2012, 1:15:05 PM1/19/12
to शब्द चर्चा
, मुझमे निर्णय लेने की शक्ति नही लेकिन मैंने जहाँ भी देखा वह आशिष
(स्त्रि०) ही मिला ! आशीष , आसिस भी मिले लेकिन "*" जैसे प्रतीकों के
साथ ! लेकिन मूल शब्द "आशिष" ही मिले ! "बृहद प्रामाणिक हिंदी कोष" ,
"प्रभा बृहद हिंदी शब्दकोष "या फिर "जैनेन्द्र सिद्धांत कोष" सभी में यही
लिखा है ! कुछ में तो "आशीष" शब्द है ही नही !

On Jan 19, 9:15 pm, Vinod Sharma <vinodjisha...@gmail.com> wrote:
> आशीष पुल्लिंग है
> असीस और दुआ स्त्रीलिंग हैं। यह सहज ही वाक्य में प्रयोग करके पता चल जाता है।
> हाँ, कोई भी भाषाविद भार्गव शब्दकोश को कभी महत्व नहीं देता जिसमें सर्वाधिक
> अशुद्धियाँ पाई जाती हैं। यदि अन्यथा न लें तो स्त्रोत अभी भी शुद्ध नहीं है।
> सही शब्द है स्रोत (srot).
>

> 2012/1/19 seema agrawal <thinkpositive...@gmail.com>

seema agrawal

unread,
Jan 19, 2012, 1:18:31 PM1/19/12
to शब्द चर्चा
“तब शुभ आशिष मांगे” के अलावा एक बहुत ही ज्यादा सुना और गाया जाने वाला
भजन “आशिष आपो संत” में भी इसी शब्द का प्रयोग है! ये तो हुई पद्य की बात
लेकिन गद्य में भी श्री लाल शुक्ल जी ने दंड विधान नामक उपन्यास में
“आशिष” शब्द का प्रयोग किया है ! इसी की पुनरावृति शिवानी द्वारा रचित
उपन्यास “पूतोंवाली” में हुई है ! दोनों जगह इसका प्रयोग पुलिंग रूप में
हुआ है ! (मैंने कुछ अंश पढ़े है इन पुस्तकों के)
गद्य और पद्य दोनों में ही “आशिष” शब्द को नकारा नहीं जा सकता ! अब इसके
आगे वही बता सकता है जिसने इस विषय पर शोध कार्य किया हो !

अजित वडनेरकर

unread,
Jan 19, 2012, 2:20:55 PM1/19/12
to shabdc...@googlegroups.com
“आशिष” शब्द को नकारा नहीं जा सकता !
यहाँ अटकने की ज़रूरत नहीं है। एक ही शब्द के कई रूपों का हिन्दी समेत अनेक भाषाओं में प्रचलन रहा है। आशिष लिखने वाले के भाव को हम आसानी से आशीष के अर्थ में ही समझते हैं। चोम्स्की जैसे अमेरिकी विद्वानों ने परिणामी और भाववादी भाषाविज्ञान के ज़रिए विभिन्न बोलियों के अध्ययन के ज़रिए यह स्थापित करने का प्रयास किया है कि हर मनुष्य की चेतना में व्याकरण का ढाँचा अलग अलग ढंग से विद्यमान रहता है। मिसाल के तौर पर शिवानी का सम्बन्ध कुमाऊँ से था। उनकी शिक्षा शान्तिनिकेतन में हुई। उनके लिखे में आशिष को देख कर हम आशीष के सही या गलत होने की बात कैसे कर सकते है?

इसीलिए एक ही शब्द के स्त्रीलिंग या पुल्लिक रूपों और व्यवहारों पर हमेशा विवाद रहता है। या तो हम अपने दिमाग़ से यह निकाल दें कि हिन्दी का दायरा बहुत व्यापक नहीं है। और या फिर हिन्दी के व्यापक क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए शब्दों के विभिन्न प्रयोगों को स्वीकार कर लें।   किन्ही दो रूपों में से किसी एक के सही होने या न होने के प्रति किसी निर्णय पर पहुँचने की कोशिश तो ठीक है, हिन्दी के विशाल क्षेत्र को देखते हुए किसी मानक नतीजे की आशा करना बेकार है।

हमें यह ध्यान रखना है कि जो भी शब्द हम प्रयोग कर रहे हैं उसकी उपस्थिति मूल शब्दभंडार में है या नहीं। देशज शब्दों के भी प्रचलन के आधार पर अलग अलग रूप होते हैं। छोटू, छोटका, छुटका में भाव के स्तर पर कोई अन्तर नहीं है। अन्ततः इतना ही कह सकता हूँ कि किसी भी सामान्य हिन्दी भाषी से आशीष लिखे जाने की अपेक्षा ही की जा सकती है। मेरे सामने अगर कोई कॉपी आती है तो मैं उसमें से आशिष को काट कर आशीष कर देता हूँ:)
कोई आग्रह करे तो भी नहीं मानूंगा क्योंकि मेरे इर्दगिर्द जो हिन्दी समाज है, वह मेरे हाथों निकली कॉपी में आशिष लिखा देख कर मेरी हिन्दी पर सन्देह व्यक्त कर सकता है:)

2012/1/19 seema agrawal <thinkpos...@gmail.com>

seema agrawal

unread,
Jan 19, 2012, 3:15:01 PM1/19/12
to शब्द चर्चा
सर बात सिर्फ प्रचलन की नहीं भाषा की साहित्यिकता की भी होनी चाहिए
प्रचलित शब्द पर आपत्ति  नहीं है शुद्ध शब्द की जानकारी के प्रति
जागरूकता की है ....बदलाव तो समय और सहूलियत की मांग है और वो होने भी
चाहिए पर सही जानकारी भी जरूरी है जो मुझे मिल चुकी है ...  मूल शब्द
आशिष ही है आशीष नहीं धन्यवाद

On Jan 20, 12:20 am, अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com> wrote:
> *“आशिष” शब्द को नकारा नहीं जा सकता !*


> यहाँ अटकने की ज़रूरत नहीं है। एक ही शब्द के कई रूपों का हिन्दी समेत अनेक
> भाषाओं में प्रचलन रहा है। आशिष लिखने वाले के भाव को हम आसानी से आशीष के
> अर्थ में ही समझते हैं। चोम्स्की जैसे अमेरिकी विद्वानों ने परिणामी और
> भाववादी भाषाविज्ञान के ज़रिए विभिन्न बोलियों के अध्ययन के ज़रिए यह स्थापित
> करने का प्रयास किया है कि हर मनुष्य की चेतना में व्याकरण का ढाँचा अलग अलग
> ढंग से विद्यमान रहता है। मिसाल के तौर पर शिवानी का सम्बन्ध कुमाऊँ से था।
> उनकी शिक्षा शान्तिनिकेतन में हुई। उनके लिखे में आशिष को देख कर हम आशीष के
> सही या गलत होने की बात कैसे कर सकते है?
>
> इसीलिए एक ही शब्द के स्त्रीलिंग या पुल्लिक रूपों और व्यवहारों पर हमेशा
> विवाद रहता है। या तो हम अपने दिमाग़ से यह निकाल दें कि हिन्दी का दायरा बहुत
> व्यापक नहीं है। और या फिर हिन्दी के व्यापक क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए
> शब्दों के विभिन्न प्रयोगों को स्वीकार कर लें।   किन्ही दो रूपों में से किसी
> एक के सही होने या न होने के प्रति किसी निर्णय पर पहुँचने की कोशिश तो ठीक
> है, हिन्दी के विशाल क्षेत्र को देखते हुए किसी मानक नतीजे की आशा करना बेकार
> है।
>
> हमें यह ध्यान रखना है कि जो भी शब्द हम प्रयोग कर रहे हैं उसकी उपस्थिति मूल
> शब्दभंडार में है या नहीं। देशज शब्दों के भी प्रचलन के आधार पर अलग अलग रूप
> होते हैं। छोटू, छोटका, छुटका में भाव के स्तर पर कोई अन्तर नहीं है। अन्ततः
> इतना ही कह सकता हूँ कि किसी भी सामान्य हिन्दी भाषी से आशीष लिखे जाने की
> अपेक्षा ही की जा सकती है। मेरे सामने अगर कोई कॉपी आती है तो मैं उसमें से
> आशिष को काट कर आशीष कर देता हूँ:)
> कोई आग्रह करे तो भी नहीं मानूंगा क्योंकि मेरे इर्दगिर्द जो हिन्दी समाज है,
> वह मेरे हाथों निकली कॉपी में आशिष लिखा देख कर मेरी हिन्दी पर सन्देह व्यक्त
> कर सकता है:)
>

> 2012/1/19 seema agrawal <thinkpositive...@gmail.com>

> ...
>
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Baljit Basi

unread,
Jan 19, 2012, 6:20:19 PM1/19/12
to शब्द चर्चा

मेरा मकसद इस विषय पर बहस छेड़ना था और मैं खुश हूँ कि बहुत अच्छे नुक्ते
सामने आए. हर भाषा, बोली का आपना आपना व्याकरण है. अगर सटीक हिन्दी में
शब्द आशीष है और स्त्रीलिंग है तो कम से कम लेखकों को ऐसे ही प्रवान
करके चलाना चाहिए.

Vinod Sharma

unread,
Jan 19, 2012, 9:19:36 PM1/19/12
to shabdc...@googlegroups.com
बासीजी, आपने निष्कर्ष में फिर घालमेल कर दिया, दरअसल आशीष और आशीर्वाद दोनों पुल्लिंग हैं और समानार्थी भी। इसी प्रकार आशिष, असीस, दुआ ये तीनों शब्द ही स्त्रीलिंग हैं। हाँ प्ंजाबी का मामला थोड़ा अलग है क्यों कि पंजाबी में आशीष प्रयुक्त ही नहीं होता। पंजाबी में प्रयुक्त होने वाला शब्द है, असीस जो कि स्त्रीलिंग है। बंगाली में शब्दों के संस्कृतनिष्ठ स्वरूप अधिक प्रचलित होने से आशिष का प्रयोग स्वाभाविक है। गुजराती और मराठी में अनेक हिंदी शब्दों की भिन्न वर्तनी का प्रयोग होता है। जहाँ तक लेखन का सवाल है मैंने अनेक लेखकों की पुस्तकों में आशिर्वाद पढ़ा है, जबकि आशीर्वाद पर कोई मतभेद नहीं है। 
जहाँ तक मानकीकरण की बात है, कम से कम हिंदी भाषा में तो यह लगभग असंभव कार्य है। आज से सैकड़ों साल पहले भी विद्वानों के बीच मतभेद रहते थे और आज भी सभी विद्वान किसी भी विषय पर एकमत नहीं हो पाते। हिंदी व्याकरण के पुरोधा आचार्य किशोरीदास बाजपेयी जिन्होंने संस्कृत से स्वतंत्र हिंदी के अपने व्याकरण की सरल व्याख्या प्रस्तुत की थी, जिदगी भर लोगों की आँख में खटकते रहे।  

Baljit Basi

unread,
Jan 20, 2012, 7:21:24 AM1/20/12
to शब्द चर्चा
धन्यवाद विनोद जी, लिखने में गलती हुई .

seema agrawal

unread,
Jan 20, 2012, 9:08:02 AM1/20/12
to शब्द चर्चा
बलजीत जी दरअसल शब्द को चर्चा में लाने का मेरा भी वही मकसद था जो आपने
आगे बढाया ....धन्यवाद् मित्रों एक अच्छी चर्चा के लिए
प्रचलित शब्द आशीष ही है पर शुद्ध आशिष है ये संस्कृत या बंगला नहीं
बल्कि हिंदी का ही शब्द है पर जैसा की आप लोगो ने बताया हिंदी में
दीर्घीकरण  की प्रवृत्ति है शायद इसीलिए यह आशीष हो गया है जैसे
राष्ट्रीय ,अजीत ..पर मै बलजीत जी की बात से सहमत हूँ की साहित्यकारों को
ही इसे सामने लाना होगा अपनी रचनाओं में प्रयोग के द्वारा .पुनः
धन्यवाद्

On Jan 20, 5:21 pm, Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com> wrote:
> धन्यवाद विनोद जी, लिखने में गलती हुई .
>
> On 19 जन, 21:19, Vinod Sharma <vinodjisha...@gmail.com> wrote:
>
>
>
>
>
>
>

> > मेरा मकसद इस विषय पर बहस छेड़ना था और मैं खुश हूँ कि बहुत अच्छे नुक्ते

Vinod Sharma

unread,
Jan 20, 2012, 10:05:57 AM1/20/12
to shabdc...@googlegroups.com
प्रचलित शब्द आशीष ही है पर शुद्ध आशिष है ये संस्कृत या बंगला नहीं
बल्कि हिंदी का ही शब्द है 
यद्यपि चर्चा आरंभ करने वाले व्यक्ति द्वारा चर्चा का समापन कर दिया गया है लेकिन उनके द्वारा निजी निष्कर्ष को सामूहिक निष्कर्ष के रूप में घोषित किए जाने के कारण मुझे पुनः लिखना पड़ रहा है। आशिष मूल रूप से हिंदी का शब्द नहीं है। यह हिंदी से संस्कृत में नहीं गया है। सत्य यह है कि आशिष संस्कृत से हिंदी में आकर हिंदी की स्वाभाविक दीर्घीकरण की प्रवृत्ति के कारण आशीष बन गया। संस्कृत में यह स्त्रीलिंग था और हिंदी में आकर पुल्लिंग हो गया। मुझे याद नहीं पड़ता कि इस चर्चा में किसी ने भी आशिष को हिंदी का मूल शब्द बताया हो। हाँ, अपने-अपने निजी निष्कर्ष निकालने के लिए सभी स्वतंत्र हैं। कृपया इसे अन्यथा न लिया जाए।


अजित वडनेरकर

unread,
Jan 20, 2012, 10:37:22 AM1/20/12
to shabdc...@googlegroups.com


2012/1/20 Vinod Sharma <vinodj...@gmail.com>

प्रचलित शब्द आशीष ही है पर शुद्ध आशिष है ये संस्कृत या बंगला नहीं
बल्कि हिंदी का ही शब्द है 
यद्यपि चर्चा आरंभ करने वाले व्यक्ति द्वारा चर्चा का समापन कर दिया गया है लेकिन उनके द्वारा निजी निष्कर्ष को सामूहिक निष्कर्ष के रूप में घोषित किए जाने के कारण मुझे पुनः लिखना पड़ रहा है। आशिष मूल रूप से हिंदी का शब्द नहीं है। यह हिंदी से संस्कृत में नहीं गया है। सत्य यह है कि आशिष संस्कृत से हिंदी में आकर हिंदी की स्वाभाविक दीर्घीकरण की प्रवृत्ति के कारण आशीष बन गया। संस्कृत में यह स्त्रीलिंग था और हिंदी में आकर पुल्लिंग हो गया। मुझे याद नहीं पड़ता कि इस चर्चा में किसी ने भी आशिष को हिंदी का मूल शब्द बताया हो। हाँ, अपने-अपने निजी निष्कर्ष निकालने के लिए सभी स्वतंत्र हैं। कृपया इसे अन्यथा न लिया जाए।


987.gif

Dr. Sheo Shankar Jaiswal

unread,
Jan 20, 2012, 10:43:00 PM1/20/12
to shabdc...@googlegroups.com
पूरी बहस ने प्रचलन को सही साबित किया है. हिन्दी में आशीष ही प्रयोग में आता है, यह ऐसे ही लिखा जाता है और पुल्लिंग है. इसकी वर्तनी तथा इसके लिंग में जो भेद दर्शाए गए हैं, वे हिन्दी की व्यापकता की वज़ह से हैं. अजित जी समेत कुछ अन्य मित्रों ने इसका विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया है.  

2012/1/20 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>



--
Dr. S S Jaiswal
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