दूसरा सही है
पश्चाताप और पश्चात्ताप, दोनों में कौन सही है। कृपया ज्ञानवर्धन करें।
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हिंदी मैं पश्चात्ताप का प्रयोग पहली बार देख रहा हूँ। हिंदी के कुछ वर्तनी ठीक करने वाले साफ्टवेयर जो मात्र मानकियकरण के अनुसार ही काम करते है। वह पश्चात्ताप को अनुमति नहीं देते। उसमें तो पश्चाताप ही सही है। यह जाँच मैंने माइक्रोसाफ्ट अशुद्धि जाँच उपकरण २०१३ पर जाँचा है।
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On 10 मार्च, 08:00, Anil Janvijay <aniljanvi...@gmail.com> wrote:
> हिन्दी में तीस-चालीस साल पहले तक 'पश्चात्ताप' ही चलता था। बचपन में मैंने
> हमेशा 'पश्चात्ताप' पढ़ा है। लेकिन बाद में जब हिन्दी के मानकीकरण की बात शुरू
> हुई और विद्वानों की एक समिति ने हिन्दी के मानकीकरण के लिए नियम बना दिए तो
> उनमें से एक नियम यह भी था कि 'त्त' की जगह इस तरह के शब्दों में सिर्फ़ 'त'
> लिखा जाए। अब 'पश्चाताप' ही चल रहा है।
>
> 2013/3/10 Abhay Tiwari <abhay...@gmail.com>
>
>
>
> > हिन्दी संस्कृत नहीं है.. जो संस्कृत में शुद्ध है उसी को हिन्दी का भी शुद्ध
> > रूप माना जाय ये ज़िद छोड़ देनी चाहिये.. ऐसे अनेक शब्द हैं जो संस्कृत से
> > हिन्दी में आए हैं मगर उनका थोड़ा बदला रूप हिन्दी में चलता है.. ये भी वैसे
> > ही है..
>
> > 2013/3/10 Vinod Sharma <vinodjisha...@gmail.com>
>
> >> होने को तो सब कुछ हो सकता है, और हो भी रहा है।
> >> पश्चाताप खूब प्रचलन में है। किन्तु प्रश्नकर्ता का प्रश्न था कि दोनों में
> >> से सही कौनसा है?
> >> आधुनिक हिंदी में अधिकतर शब्दों के दो रूप हैं-एक शुद्ध, दूसरा प्रचलित।
> >> शुद्ध वर्तनी के लिए शब्दसागर का यह लिंक देखें-
>
> >>http://dsal.uchicago.edu/cgi-bin/philologic/search3advanced?dbname=da...
> >> अब बात आती है पश्च और पश्चात की, दोनों के अर्थ में अंतर है।
> >> पश्च का अर्थ है- पीछे का, पीछे बैकसाइड, और
> >> पश्चात का अर्थ है - बाद में, आफ़्टर
> >> क्रोध के गुजर जाने के बाद जो स्थिति होती है
> >> पश्चात + ताप, वह कहलाती है पश्चात्ताप। किन्तु जिस प्रकार सरलीकरण के दौर
> >> में महत्त्व चलन में महत्व बन गया उसी प्रकार दो त् को अनावश्यक समझ
> >> उपयोगकर्ताओं ने पश्चाताप अपना लिया। देखा जाए तो पश्चाताप के प्रयोग का
> >> प्रतिशत लगभग दुगुना है।
> >> सादर,
> >> विनोद शर्मा
>
> >> 2013/3/10 दिनेशराय द्विवेदी <drdwive...@gmail.com>
>
> >>> भाई, हम तो संस्कृत के अल्पज्ञानी हैं, अल्पज्ञानी भी नहीं संगत वाले
> >>> समझिए। पर हिन्दी में पश्च से सैंकड़ों शब्द बने हैं। स्ंस्कृत का पश्चात भी
> >>> संभवतः पश्च + यात से निर्मित है। फिर पश्च् + तापः = पश्चाताप क्यों नहीं हो
> >>> सकता?
>
> >>> 2013/3/10 Vinod Sharma <vinodjisha...@gmail.com>
>
> >>>> नारायणजी का आशय यह था कि
> >>>> यहाँ संधि विच्छेद पश्चात् + ताप है।
> >>>> पश्च + ताप नहीं।
>
> >>>> 2013/3/10 दिनेशराय द्विवेदी <drdwive...@gmail.com>
>
> >>>>> अपने तो सवाल ही समझ नहीं आया। पश्च और ताप के संयोजन में ये दूसरा त
> >>>>> कहाँ से घुसा?
>
> >>>>> 2013/3/10 Vinod Sharma <vinodjisha...@gmail.com>
>
> >>>>>> बिलकुल सही कहा है नारायणजी ने।
> >>>>>> मुझे लगता है कि अब प्रश्न के उत्तर को दो श्रेणियों में विभाजित करना
> >>>>>> होगा।
> >>>>>> 1. सही 2. प्रचलित
> >>>>>> आज हिंदी की जो स्थिति इसलिए प्रश्नकर्ता के सामने दोनों विकल्प हैं:
> >>>>>> सही - पश्चात्ताप (व्याकरण के अनुसार)
> >>>>>> प्रचलित - पश्चाताप (चलन के अनुसार)
>
> >>>>>> 2013/3/10 narayan prasad <hin...@gmail.com>
>
> >>>>>>> पश्चात्ताप = पश्चात् + ताप
> >>>>>>> हिन्दी में पश्चा नहीं, बल्कि तत्सम शब्द पश्चात् ही चलता है । इसलिए
> >>>>>>> तत्त्व (= तत् + त्व), महत्त्व = महत् + त्व, की तरह ही पश्चात्ताप । परन्तु
> >>>>>>> यदि तत्व और महत्व को हिन्दी के लिए सही मान लिया जाता है तो पश्चाताप को भी
> >>>>>>> सही माना जा सकता है ।
> >>>>>>> --- नारायण प्रसाद
>
> >>>>>>> 2013/3/9 vinit utpal <vinitut...@gmail.com>
>
> >>>>>>>> पश्चाताप और पश्चात्ताप, दोनों में कौन सही है। कृपया ज्ञानवर्धन करें।
>
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अब तक की चर्चा का सार तो यही लगता है कि 'पश्चाताप' और 'पश्चात्ताप' में से पहले को सही कहा जाना चहिये. यह हिंदी के मानकीकरण के नियमानुसार है। "जो संस्कृत में शुद्ध है उसी को हिन्दी का भी शुद्ध रूप माना जाय" यह ज़िद भी यहाँ नहीं है. लेकिन क्या प्रकारांतर से हम 'पश्चात्ताप' को गलत कह रहे हैं? मूल प्रश्न यही तो था कि "पश्चाताप और पश्चात्ताप, दोनों में कौन सही है?" संस्कृतज्ञों के कुछ अनावश्यक आग्रहों का परिणाम है कि हिंदी के कुछ लोग संस्कृत को कभी-कभी हिकारत की निगाह से देखते जान पड़ते हैं. मैं सोचता हूँ अगर सवाल उठे कि 'तदोपरांत' और 'तदुपरांत' में से कौन सही है, तो उसका जवाब क्या होगा? 'उपर्युक्त' उपरि +उक्त से बनता है. यह तो संस्कृत शब्द हुआ. हिंदी का उपरोक्त कैसे बना है? ऊपर+उक्त से? लेकिन फिर तो यह ऊपरोक्त होना चाहिये। या यहाँ संधि के नियम को शिथिल करते हुए उपरोक्त बना दिया गया है? मेरी राय में 'पश्चाताप' और 'पश्चात्ताप' के सन्दर्भ में यह कहा जाना चाहिए कि शब्द मूलतः 'पश्चात्ताप' है जो हिंदी में 'पश्चाताप' हो गया है और वह वहां उसी रूप में प्रचलित है. चूंकि संस्कृत और हिंदी में गहरा नाता है, इसलिए हिंदी में संस्कृत के बहुत सारे शब्द शामिल हैं. कुछ अन्य संस्कृत शब्दों ने हिंदी में कुछ भिन्न रूप धारण कर लिए हैं और वे उस रूप में वहां अशुद्ध नहीं कहे जाएंगे। किन्तु इस कारण उनके संस्कृत रूप हिंदी में अस्वीकार्य नहीं हैं, न ही उन्हें अशुद्ध कहा जा सकता है. संस्कृत के नाम पर हिंदी के अधीर/असहज होने का कोई कारण नहीं है. न ही संस्कृत के सामने हिंदी में हीनभाव आने की कोई बात है. बेटी माँ नहीं है, किन्तु उसमें सहज-स्वाभाविक रूप से माँ की झलक दिखे तो दोनों में से किसी के लिए यह लज्जा या हीनता का विषय नहीं है. यह सही है कि भाषा एक प्रवाह है। किन्तु उसके बावजूद वह नियमों को स्वीकारती है. उसे अराजक या बाढ़ बनकर नहीं बहना होता है.

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आदरणीय नारायण जी,