'सोच' का प्रयोग 'दिमाग' के अर्थ में भी होता है क्या?

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madan mohan arvind

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Dec 24, 2011, 3:45:56 AM12/24/11
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'सोच' का प्रयोग 'दिमाग' के अर्थ में भी होता है क्या? जैसे 'भरे घर, सोच
खाली है' (घर भरे हैं, मगर सोच खाली है)

Baljit Basi

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Dec 24, 2011, 4:54:31 AM12/24/11
to शब्द चर्चा
सोच तो सोचने की क्रिया या भाव ही है. और दिमाग का काम इसी क्रिया में
पड़े रहना है. आप ने जो अर्थ किये वो ठीक ही तो हैं. 'भरे घर, सोच
खाली है' का मतलब घर की आर्थक हालत अच्छी है लेकिन कोई लम्बी नहीं सोचता.
इसमें सोच का अर्थ दिमाग करना ज़रूरी नहीं है, खाली सोच से ही काम चलता
है. हम ज्यादा से ज्यादा यही कह सकते हैं कि किसी सन्दर्भ में सोच दिमाग
का अर्थ देने लग जाता है. वरना सोच दिमाग नहीं, उसकी क्रिया है. यदि
सोच का अर्थ हर हालत में दिमाग होता तो क्या हम 'उसका दिमाग खराब हो गया'
की जगह कह सकते 'उसका सोच खराब हो गया'?

On 24 दिस., 03:45, madan mohan arvind <madanmohanarv...@gmail.com>
wrote:

अजित वडनेरकर

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Dec 24, 2011, 6:47:46 AM12/24/11
to shabdc...@googlegroups.com
सोच का इस्तेमाल विचार, चिन्तन के लिए होता है।
दिमाग़ के लिए ठीक नहीं।
उसकी सोच खराब है का अर्थ दिमाग़ ख़राब नहीं बल्कि उसके विचारों का प्रदूषित, कलुषित होना है।


2011/12/24 Baljit Basi <balji...@yahoo.com>



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अजित

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Madanmohanarvind

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Dec 25, 2011, 9:19:55 AM12/25/11
to shabdc...@googlegroups.com
धन्यवाद बलजीत जी, किसी ने मुझे डरा दिया था कि ऐसा वाक्य प्रयोग होता ही नहीं, वास्तव में तो मुझे यही पूछना था कि 'भरे घर सोच खाली है' वाक्य का वही अर्थ ठीक है या नहीं जो आप ने बताया। मैं सोच खाली का प्रयोग विचारों की रिक्तता के सन्दर्भ में ही करना चाहता था, मेरी तसल्ली के लिये एक बार फ़िर से सह्मति दीजियेगा। अगर कोई बात इस प्रयोग के विरुद्ध भी जाती हो तो शब्द चर्चा के मन्च पर उपस्थित अन्य विद्वान अवश्य मेरा मार्गदर्शन करें।

Anil Janvijay

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Dec 25, 2011, 10:54:47 PM12/25/11
to shabdc...@googlegroups.com
मदननोहन अरविन्द जी,
बलजीत बासी जी ने सोच शब्द की जो व्याख्या की है, वह हिन्दी के हिसाब से ठीक नहीं है। यह वाक्य पंजाबी में बोला जाता है कि घर तो भरा हुआ है, लेकिन सोच खाली है। हिन्दी में इस तरह से वाक्य नहीं बनाए जाते। हिन्दी में सोच शब्द का उपयोग दिमाग़ के लिए उचित नहीं है। सोच का मतलब हिन्दी में चिन्तन और विचार ही होता है, दिमाग़ नहीं। हिन्दी में हम कहेंगे-- घर तो भरे हुए हैं, लेकिन दिमाग़ खाली हैं।

2011/12/25 Madanmohanarvind <madanmoh...@gmail.com>



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Madan Mohan Sharma

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Dec 26, 2011, 1:32:31 AM12/26/11
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On 24-12-2011 17:17, अजित वडनेरकर wrote:
धन्यवाद बलजीत जी, किसी ने मुझे डरा दिया था कि ऐसा वाक्य प्रयोग होता ही नहीं, वास्तव में तो मुझे यही पूछना था कि 'भरे घर सोच खाली है' वाक्य का वही अर्थ ठीक है या नहीं जो आप ने बताया। मैं सोच खाली का प्रयोग विचारों की रिक्तता के सन्दर्भ में ही करना चाहता था, मेरी तसल्ली के लिये एक बार फ़िर से सह्मति दीजियेगा। अगर कोई बात इस प्रयोग के विरुद्ध भी जाती हो तो शब्द चर्चा के मन्च पर उपस्थित अन्य विद्वान अवश्य मेरा मार्गदर्शन करें।

Madan Mohan Sharma

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Dec 26, 2011, 4:03:19 AM12/26/11
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आदरणीय अनिल जी, अगर मैं कहना चाहूँ कि घर तो भरे हैं किन्तु विचारों में रिक्तता है, तब क्या स्थिति होगी. मैं पंजाबी तो नहीं हूँ, मुझे पक्का याद नहीं लेकिन यह प्रयोग मैंने कहीं पढ़ा या सुना है. जैसे सोच निकम्मी है, सोच में गड़बड़ है, सोच ठीक नहीं इसी के सामानांतर सोच खाली है भी  हो सकता है क्या? आप विद्वानों की पूर्ण स्वीकृति के बाद ही मैं इस वाक्य का प्रयोग करूँगा, यद्यपि जहाँ मैं यह वाक्य इस्तेमाल करना चाहता हूँ वहां के लिए उसी भावानुभूति और समान लय की कोई और पंक्ति मुझे मिल नहीं पा रही, इसीलिए यह प्रश्न बार-बार आप लोगों के सामने रखना पड़ रहा है. दिमाग में नहीं विचारों में भी तो खालीपन हो सकता है. मैं तो भ्रम की स्थिति में हूँ, आप ही कहें क्या ठीक है.

2011/12/26 Madan Mohan Sharma <madanmoh...@gmail.com>

अजित वडनेरकर

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Dec 26, 2011, 4:10:37 AM12/26/11
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सोच के इस तरह के प्रयोग बरास्ता उर्दू ही प्रचलित हुए हैं।
शायरी में एक नहीं, अनेक मिसाले हैं। उर्दू बरास्ता पंजाब ही विकसित होती दोआब तक पहुँची है।
सो पंजाबी अर्थात पंजाबियों वाली हिन्दी में भी सोच का यह बर्ताव है।
मुनीर नियाज़ी की ग़ज़ल का ये शेर देखिए-

आज की रात बहुत काली है
सोच के दीप जला कर 
देखो
--

Anil Janvijay

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Dec 26, 2011, 4:46:54 AM12/26/11
to shabdc...@googlegroups.com
वैसे तो उर्दू में भी सोच के इस तरह्के प्रयोग उन्हीं शायरों और कवियों या लेखकों ने किए हैं, जिनकी मातृभाषा पंजाबी या सिन्धी रही है। उर्दू में इक़बाल और फ़ैज़ से लेकर  साहिर लुधियानवी, कृष्णचन्दर, राजिन्दर सिंह बेदी तक ऐसे सैकड़ों शायर और लेखक हैं जिनकी मातृभाषा पंजाबी है, लेकिन जो उर्दू में लिखते रहे हैं। हिन्दी में भी भीष्म साहनी, अश्क, यशपाल से लेकर मोहन राकेश तक इसके बहुत से उदाहरण हैं।
मेरे बाबा (दादाजी) हरियाणा (पुराना पंजाब) के थे। वे भी कहते थे-  ’सोच निक़म्मी है’। आप इस वाक्य का प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन यह हिन्दी का वाक्य नहीं है।
वैसे कहा जाता है कि भाषा बहता पानी होती है। वह अभिव्यक्ति का माध्यम है। आपने जो बात कही है, अगर वह दूसरों तक पहुँचती है तो आपका शब्द-प्रयोग सफल है। :) :) :)
आप इस तरह ’सोच’ शब्द का इस्तेमाल कर सकते हैं। मैं सहमत हूँ।

2011/12/26 अजित वडनेरकर <wadnerk...@gmail.com>

Madan Mohan Sharma

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Dec 27, 2011, 2:18:03 AM12/27/11
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धन्यवाद अनिल जी, अब मेरा आत्मविश्वास कुछ वापस आया. एकबार पुनः धन्यवाद.

2011/12/26 Anil Janvijay <anilja...@gmail.com>

Baljit Basi

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Dec 27, 2011, 6:12:26 AM12/27/11
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उर्दू के पंजाब में पैदा होने की वजह से, और इसके
मुहावरे की पंजाबी के साथ समानता देखते हुए
एक बार राजिंदर सिंह बेदी ने कहा था कि इसका नाम
*पंजुर्दु होना चाहिए.

On 26 दिस., 04:46, Anil Janvijay <aniljanvi...@gmail.com> wrote:
> वैसे तो उर्दू में भी सोच के इस तरह्के प्रयोग उन्हीं शायरों और कवियों या
> लेखकों ने किए हैं, जिनकी मातृभाषा पंजाबी या सिन्धी रही है। उर्दू में इक़बाल
> और फ़ैज़ से लेकर  साहिर लुधियानवी, कृष्णचन्दर, राजिन्दर सिंह बेदी तक ऐसे
> सैकड़ों शायर और लेखक हैं जिनकी मातृभाषा पंजाबी है, लेकिन जो उर्दू में लिखते
> रहे हैं। हिन्दी में भी भीष्म साहनी, अश्क, यशपाल से लेकर मोहन राकेश तक इसके
> बहुत से उदाहरण हैं।
> मेरे बाबा (दादाजी) हरियाणा (पुराना पंजाब) के थे। वे भी कहते थे-  ’सोच
> निक़म्मी है’। आप इस वाक्य का प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन यह हिन्दी का वाक्य
> नहीं है।
> वैसे कहा जाता है कि भाषा बहता पानी होती है। वह अभिव्यक्ति का माध्यम है।
> आपने जो बात कही है, अगर वह दूसरों तक पहुँचती है तो आपका शब्द-प्रयोग सफल है।
> :) :) :)
> आप इस तरह ’सोच’ शब्द का इस्तेमाल कर सकते हैं। मैं सहमत हूँ।
>

> 2011/12/26 अजित वडनेरकर <wadnerkar.a...@gmail.com>
>
>
>
>
>
> > *सोच* के इस तरह के प्रयोग बरास्ता उर्दू ही प्रचलित हुए हैं।


> > शायरी में एक नहीं, अनेक मिसाले हैं। उर्दू बरास्ता पंजाब ही विकसित होती
> > दोआब तक पहुँची है।
> > सो पंजाबी अर्थात पंजाबियों वाली हिन्दी में भी सोच का यह बर्ताव है।
> > मुनीर नियाज़ी की ग़ज़ल का ये शेर देखिए-
>

> > आज की रात बहुत काली है *
> > सोच के दीप जला कर  **देखो*
>
> > 2011/12/26 Madan Mohan Sharma <madanmohanarv...@gmail.com>


>
> >> आदरणीय अनिल जी, अगर मैं कहना चाहूँ कि घर तो भरे हैं किन्तु विचारों में
> >> रिक्तता है, तब क्या स्थिति होगी. मैं पंजाबी तो नहीं हूँ, मुझे पक्का याद
> >> नहीं लेकिन यह प्रयोग मैंने कहीं पढ़ा या सुना है. जैसे सोच निकम्मी है, सोच
> >> में गड़बड़ है, सोच ठीक नहीं इसी के सामानांतर सोच खाली है भी  हो सकता है
> >> क्या? आप विद्वानों की पूर्ण स्वीकृति के बाद ही मैं इस वाक्य का प्रयोग
> >> करूँगा, यद्यपि जहाँ मैं यह वाक्य इस्तेमाल करना चाहता हूँ वहां के लिए उसी
> >> भावानुभूति और समान लय की कोई और पंक्ति मुझे मिल नहीं पा रही, इसीलिए यह
> >> प्रश्न बार-बार आप लोगों के सामने रखना पड़ रहा है. दिमाग में नहीं विचारों में
> >> भी तो खालीपन हो सकता है. मैं तो भ्रम की स्थिति में हूँ, आप ही कहें क्या ठीक
> >> है.
>

> >> 2011/12/26 Madan Mohan Sharma <madanmohanarv...@gmail.com>


>
> >>>  On 24-12-2011 17:17, अजित वडनेरकर wrote:
>
> >>> सोच का इस्तेमाल विचार, चिन्तन के लिए होता है।
> >>> दिमाग़ के लिए ठीक नहीं।
> >>> उसकी सोच खराब है का अर्थ दिमाग़ ख़राब नहीं बल्कि उसके विचारों का
> >>> प्रदूषित, कलुषित होना है।
>

> >>> 2011/12/24 Baljit Basi <baljit_b...@yahoo.com>


>
> >>>> सोच तो  सोचने की क्रिया या भाव ही है. और दिमाग का काम इसी क्रिया में
> >>>> पड़े रहना  है. आप ने जो अर्थ किये वो ठीक ही तो हैं. 'भरे घर, सोच
> >>>> खाली है' का मतलब घर की आर्थक हालत अच्छी है लेकिन कोई लम्बी नहीं सोचता.
> >>>> इसमें सोच का अर्थ दिमाग करना ज़रूरी नहीं है, खाली सोच से ही काम चलता
> >>>> है. हम ज्यादा से ज्यादा यही कह सकते हैं कि किसी सन्दर्भ में सोच दिमाग
> >>>> का अर्थ देने लग जाता है. वरना सोच दिमाग नहीं, उसकी  क्रिया है. यदि
> >>>> सोच का अर्थ हर हालत में दिमाग होता तो क्या हम 'उसका दिमाग खराब हो गया'
> >>>> की जगह कह सकते 'उसका सोच खराब हो गया'?
>
> >>>> On 24 दिस., 03:45, madan mohan arvind <madanmohanarv...@gmail.com>
> >>>> wrote:
> >>>>  > 'सोच' का प्रयोग 'दिमाग' के अर्थ में भी होता है क्या? जैसे 'भरे घर,
> >>>> सोच
> >>>> > खाली है' (घर भरे हैं, मगर सोच खाली है)
>
> >>> धन्यवाद बलजीत जी, किसी ने मुझे डरा दिया था कि ऐसा वाक्य प्रयोग होता ही
> >>> नहीं, वास्तव में तो मुझे यही पूछना था कि 'भरे घर सोच खाली है' वाक्य का वही
> >>> अर्थ ठीक है या नहीं जो आप ने बताया। मैं सोच खाली का प्रयोग विचारों की
> >>> रिक्तता के सन्दर्भ में ही करना चाहता था, मेरी तसल्ली के लिये एक बार फ़िर से
> >>> सह्मति दीजियेगा। अगर कोई बात इस प्रयोग के विरुद्ध भी जाती हो तो शब्द चर्चा
> >>> के मन्च पर उपस्थित अन्य विद्वान अवश्य मेरा मार्गदर्शन करें।
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