जम्बू द्वीप

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Ashutosh Kumar

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Dec 31, 2011, 1:04:15 PM12/31/11
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भारतवर्ष को जम्बू द्वीप क्यों कहा गया होगा ?

Hansraj sugya

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Dec 31, 2011, 1:07:41 PM12/31/11
to शब्द चर्चा
जम्बू (जामुन) वृक्षों की अधिकता के कारण। ऐसा मैने सुना था, बाकी तो ज्ञानीजन प्रकाश डालेंगे।


सस्नेह,
हंसराज "सुज्ञ"


'सुज्ञ' ब्लॉग





> Date: Sat, 31 Dec 2011 10:04:15 -0800
> Subject: [शब्द चर्चा] जम्बू द्वीप
> From: ashuv...@gmail.com
> To: shabdc...@googlegroups.com

अजित वडनेरकर

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Dec 31, 2011, 1:30:45 PM12/31/11
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हंसराज जी सही कह रहे हैं। इसके मूल में जामुन का वृक्ष ही है। मोनियर विलियम्स लिखते हैं-
"the central one of the 7 continents surrounding the mountain मेरु (= India Buddh. ; named so either from the जम्बु trees abounding in it , or from an enormous जम्बु tree on Mount मेरु visible like a standard to the whole continent) MBh. Hariv. &c"


2011/12/31 Hansraj sugya <hansra...@msn.com>



--


अजित

http://shabdavali.blogspot.com/
मोबाइल-
औरंगाबाद- 07507777230

  


Madhusudan H Jhaveri

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Dec 31, 2011, 4:48:29 PM12/31/11
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हंसराज "सुज्ञ" जी-

मैं ने सुना था, कि-

(२)  भारत वर्ष का आकार जामुन (जाम) या अमरूद की भाँति है। हिमालय से नीचे, उसे उलटा कर के देखने से ऐसा प्रतीत होता है।

मेरी शाला में सीखा हुआ ऐसा स्मरण है।

(२)

 वैसे और यह द्वीप (एक भूभाग ) भी माना गया है।

बडा मनोरन्जक (दिलचस्प ) तो है ही।

"जम्बुद्वीपका केन्द्रीय भाग भारतवर्षमें विद्यमान है"।<===वा. शि. आप्टे।

मधुसूदन



ashutosh kumar

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Dec 31, 2011, 10:15:25 PM12/31/11
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 समूचे भारत वर्ष में जामुन  वृक्षों की प्रचुरता मान  लेने का का कोई विशेष आधार नहीं दिखाई देता . मेरु पर किसी विशाल जामुन वृक्ष की बात कयास के रूप में ही कही भी गयी है . मधुसूदन एह झावेरी का सुझाव अधिक विश्वसनीय है .
जाम/ जम्बु /जम्बू  अमरुद  आदि अमरूद समेत अनेक फलों को कहा गया है . क्या इस संभावना पर सोचा जा सकता है कि जम्बू  किसी समय किसी खास फल का नाम न हो कर फल मात्र के लिए एक जेनेरिक शब्द रहा हो , और भारत भूमि में फलदार वृक्षों की अधिकता के कारण इसे जम्बू द्वीप कहा गया हो ?

suresh mishra

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Dec 31, 2011, 10:23:01 PM12/31/11
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मेरे लिए भारत को द्वीप मान लेना ही कठीन है. अतः जिस समय इस शब्द का प्रयोग होता था इसकी
प्रष्टभूमी को विचारे बिना अनुमान लगाना कठीन है. यह  शब्द बाहर के लोग उपयोग में लाते थे या
यहाँ के लोग?




2012/1/1 ashutosh kumar <ashuv...@gmail.com>

Abhay Tiwari

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Dec 31, 2011, 10:32:27 PM12/31/11
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क्या जम्बू द्वीप का कोई सम्बन्ध जम्मू से हो सकता है? 

आर्यों की आदिस्थान की तमाम प्रस्थापनाओं में से एक, उनका आदिस्थान कश्मीर भी मानती है, जहाँ से निकलकर उन्होने जम्बूद्वीप में प्रवेश किया होगा.. यह प्रस्थापना एक तथ्य है। दूसरा तथ्य यह है कि अगर कश्मीर को एक अलग भौगोलिक इकाई माना जाय तो जम्मू से एक दूसरी भौगोलिक इकाई शुरु होती है। तीसरा तथ्य यह है कि भरतीय उपमहाद्वीप वास्तव में गोण्डवानालैण्ड का एक टूटा हुआ हिस्सा है जो लाखों साल तक अलग-थलग बहने के बाद एशियाई टुकड़े से आ टकराया और उस टकराहट के परिणाम से हिमालय की सृष्टि हुई।  उस नज़रिये से भारतीय उपमहाद्वीप वास्तव में एक द्वीप था और जिसका उत्तरी छोर जम्मू को माना जा सकता है। 

2012/1/1 ashutosh kumar <ashuv...@gmail.com>

eg

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Dec 31, 2011, 11:26:41 PM12/31/11
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रोचक मामला है। जम्बू तो निश्चित ही जामुन है। सनातनी पूजा पाठ के संकल्प से कुछ सहायता मिलेगी:
 
जम्बूद्वीपे भरतखंडे आर्यावर्ते ....
 
दक्षिण भारत में इसका क्या रूप है, कोई बताये तो पता चले कि भरतखंड क्या है और आर्यावर्त की सीमा कहाँ तक मानी गयी है!

2012/1/1 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com>

संजय | sanjay

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Dec 31, 2011, 11:42:55 PM12/31/11
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जैन सािहत्य में भारत को जम्बु द्वीप ही कहा गया है । यहाँ यह सामान्य शब्द है ।


On Saturday, December 31, 2011, Ashutosh Kumar <ashuv...@gmail.com> wrote:
> भारतवर्ष को जम्बू द्वीप क्यों कहा गया होगा ?

--
संजय बेंगाणी | sanjay bengani
छवि मीडिया एण्ड कॉम्यूनिकेशन
ए-507, स्मिता टावर, गुरूकुल रोड़,
मेमनगर , अहमदाबाद, गुजरात. 



Vinod Sharma

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Dec 31, 2011, 11:46:26 PM12/31/11
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मनु स्मृति (2.22) के अनुसार हिमालय और विंध्य पर्वत शृंखलाओं के बीच, पूर्वी और पश्चिमी समुद्र तक आर्यावर्त की सीमा थी।

वशिष्ठ धर्मसूत्र (।.8-9 तथा 12-13) के अनुसार लुप्त नदी सरस्वती के पूर्व में कलकवन तक तथा परियात्रा और विंध्य पर्वत के उत्तर में, हिमालय बौद्धयान के दक्षिण में इसकी सीमा थी।

धर्मसूत्र (BDS) 1.12.10 के अनुसार कलकवन के पश्चिम में, आदर्शन के पूर्व में, हिमालय के दक्षिण में तथा विंध्य पर्वत के उत्तर में आर्यावर्त की सीमा थी लेकिन BDS 1.1.2.11 के अनुसार आर्यावर्त गंगा-यमुना और दोआब क्षेत्र तक सीमित था। पतंजलि महाभाष्य वशिष्ठ धर्मसूत्र में दी गई सीमा की पुष्टि करता है। 


2012/1/1 eg <girij...@gmail.com>

Hansraj sugya

unread,
Jan 1, 2012, 12:07:55 AM1/1/12
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जैन साहित्य में तो जम्बूद्वीप बहुत ही विशाल भूभाग है, उसके दक्षिणार्ध में 6 विभागों वाला भरत खण्ड़ है उसके लगभग एक खण्ड में आर्यवर्त अथवा वर्तमान भारतवर्ष है।
इस संकल्प सूत्र के अनुसार भी जम्बूद्वीप एक विशाल महाद्वीप है जिसके अन्तर्गत भरतखण्ड़ आता है, भरतखण्ड़ के अन्तर्गत आर्यावर्त है और उसमें भारतवर्ष का भूभाग है। पुराणों के उल्लेख के अनुसार  सम्भवतः सात महाद्वीपों में से किसी एक का नाम जम्बूद्वीप है। एक बात तो निश्चित है वर्तमान भारत ही मात्र जम्बूद्वीप नहीं है, जम्बूद्वीप से आशय विशाल महाद्वीप से है।



सस्नेह,
हंसराज "सुज्ञ"


'सुज्ञ' ब्लॉग






Date: Sun, 1 Jan 2012 05:42:55 +0100
Subject: Re: [शब्द चर्चा] जम्बू द्वीप
From: sanjay...@gmail.com
To: shabdc...@googlegroups.com

suresh mishra

unread,
Jan 1, 2012, 12:29:28 AM1/1/12
to shabdc...@googlegroups.com

 जब जम्बु की बात कर रहे हैं तो जंबो की भी बात कर लें
जम्बो जेट वाला जम्बो
शायद उससे कुछ हल सामने आये.


2012/1/1 संजय | sanjay <sanjay...@gmail.com>

Hansraj sugya

unread,
Jan 1, 2012, 1:13:44 AM1/1/12
to शब्द चर्चा
जम्बूद्वीप पर यहाँ प्रस्तुत जानकारी दृष्टव्य है………

http://www.answers.com/topic/jambudvipa



सस्नेह,

हंसराज "सुज्ञ"








Date: Sun, 1 Jan 2012 10:16:26 +0530
Subject: Re: [शब्द चर्चा] जम्बू द्वीप
From: vinodj...@gmail.com
To: shabdc...@googlegroups.com

Vinod Sharma

unread,
Jan 1, 2012, 1:41:49 AM1/1/12
to shabdc...@googlegroups.com
हमारा दुर्भाग्य यह है कि प्राचीन भारतीय सभ्यता और इतिहास के लिखित साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। स्मृतियों और पुराणों को शेष विश्व मान्यता नहीं देता। पश्चिमी इतिहासकारों द्वारा दिए गए वृत्तांतों से भारत के इतिहास के संबंध में कोई पुष्टि नहीं होती। उनकी नजर में भारत का इतिहास सिकंदर के भारत पर आक्रमण से आरंभ होता है। जबकि जम्बूद्वीप की परिकल्पना उससे भी हजारों साल पहले की है। जैन धर्म की जम्बूद्वीप की अवधारणा बहुत व्यापक है जिमें समस्त ब्रह्मांड को ही जम्बूद्वीप माना गया है। इसका मॉडल हस्तिनापुर में बनाया गया है। जम्बू वृक्ष का भी मॉडल बनाया गया है।


2012/1/1 Hansraj sugya <hansra...@msn.com>

Abhay Tiwari

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Jan 1, 2012, 2:35:58 AM1/1/12
to shabdc...@googlegroups.com
पुराणों में जो भूगोल और खगोल मिलता है वो अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है बड़ा अवैज्ञानिक है। 

2012/1/1 Vinod Sharma <vinodj...@gmail.com>

Dr.Rupesh Shrivastava

unread,
Jan 1, 2012, 7:33:28 AM1/1/12
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जम्बूद्वीप की भौगोलिक स्थिति पर तो आप सबने विमर्श कर लिया लेकिन जैनों को ताल ठोंक कर राक्षस कहने वाले "अनूप मंडल" के अनुसार "मेरुपर्वत" की भौगोलिक स्थिति भी तलाशी जानी चाहिये जहाँ दुश्मनों का हनन कर देने वाले अरिहंत भगवान का वास बताया गया है।  उपनिषदों और पुराणों की कथित वैज्ञानिकता को संदिग्ध बना देने की स्थिति तक ले आने के लिये क्या मात्र काल को ही एक घटक स्वीकारा जा सकता है? 


2012/1/1 Hansraj sugya <hansra...@msn.com>

Pratibha Saksena

unread,
Jan 1, 2012, 10:24:09 AM1/1/12
to शब्द चर्चा
जंबू द्वीप ,उन सप्तद्वीपों में (कुश,प्लक्ष,शाल्मलि आदि) , से एक है
जिनके कारण वसुंधरा को 'सप्तद्वीपा' कहा गया है.मेरा अनुमान है कि
समुद्रों में ये सात विशाल भू खंड रहे होंगे.जंबू-द्वीप 'एशिया या
यूरेशिया(उस समयकी भौगोलिक स्थिति के अनुसार) .संकल्प पढ़ते समय उल्लेख
होता है -जंबू द्वीपे ,भारत(खंडे)वर्षे आदि.आदि...अतः जंबू द्वीप -एशिया-
का एक भाग भारतवर्ष .और 'वर्ष' भी विभाजन का एक रूप है(और भी अनेक वर्ष
हैं). अतः जंबू द्वीप भारत नहीं एशिया का नाम है .
यह मेरा विचार है -किसी के लिये बाध्यता नहीं .-प्रतिभा सक्सेना.

On Jan 1, 4:33 am, "Dr.Rupesआदि h Shrivastava"
<rudrakshanathshrivasta...@gmail.com> wroteबू:


> जम्बूद्वीप की भौगोलिक स्थिति पर तो आप सबने विमर्श कर लिया लेकिन जैनों को
> ताल ठोंक कर राक्षस कहने वाले "अनूप मंडल" के अनुसार "मेरुपर्वत" की भौगोलिक
> स्थिति भी तलाशी जानी चाहिये जहाँ दुश्मनों का हनन कर देने वाले अरिहंत भगवान
> का वास बताया गया है।  उपनिषदों और पुराणों की कथित वैज्ञानिकता को संदिग्ध
> बना देने की स्थिति तक ले आने के लिये क्या मात्र काल को ही एक घटक स्वीकारा
> जा सकता है?
>

> 2012/1/1 Hansraj sugya <hansrajsu...@msn.com>


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> >  जैन साहित्य में तो जम्बूद्वीप बहुत ही विशाल भूभाग है, उसके दक्षिणार्ध

> > में 6 विभागों वाला भरत खण्ड़ है उसके लगभग एक खण्ड में आर्यवर्त अथवा


> > वर्तमान भारतवर्ष है।
> > इस संकल्प सूत्र के अनुसार भी जम्बूद्वीप एक विशाल महाद्वीप है जिसके

> > अन्तर्गत भरतखण्ड़ आता है, भरतखण्ड़ के अन्तर्गत आर्यावर्त है और उसमें भारतवर्ष


> > का भूभाग है। पुराणों के उल्लेख के अनुसार  सम्भवतः सात महाद्वीपों में से
> > किसी एक का नाम जम्बूद्वीप है। एक बात तो निश्चित है वर्तमान भारत ही मात्र
> > जम्बूद्वीप नहीं है, जम्बूद्वीप से आशय विशाल महाद्वीप से है।
>
> > सस्नेह,

> > *हंसराज "सुज्ञ"*
>
> > 'सुज्ञ' ब्लॉग <http://shrut-sugya.blogspot.com/>
>
> > ------------------------------


> > Date: Sun, 1 Jan 2012 05:42:55 +0100
> > Subject: Re: [शब्द चर्चा] जम्बू द्वीप

> > From: sanjaybeng...@gmail.com


> > To: shabdc...@googlegroups.com
>
> > जैन सािहत्य में भारत को जम्बु द्वीप ही कहा गया है । यहाँ यह सामान्य शब्द
> > है ।
>

> > On Saturday, December 31, 2011, Ashutosh Kumar <ashuvand...@gmail.com>


> > wrote:
> > > भारतवर्ष को जम्बू द्वीप क्यों कहा गया होगा ?
>
> > --
> > संजय बेंगाणी | sanjay bengani

> > *छवि मीडिया एण्ड कॉम्यूनिकेशन*
> > ए-507, स्मिता टावर, गुरूकुल रोड़,


> > मेमनगर , अहमदाबाद, गुजरात.

> > chhavi.in | तरकश <http://www.tarakash.com/2/index.php> | मेरा ब्लॉग<http://www.tarakash.com/joglikhi>

Anil Janvijay

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Jan 1, 2012, 10:43:45 AM1/1/12
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यह लेख हिन्दू धर्मानुसार वर्णित है।
भारतवर्ष कर्मप्रधान वर्ष है। इस वर्ष में जन्म लेने के लिये देवता भी लालायित रहते हैं। वे कहते हैं कि भारतवर्ष में जन्म लेने वाले प्राणी धन्य हैं। इस भारतवर्ष में अनेकों ऊँचे-ऊँचे रम्य पर्वत तथा नद-नदी विद्यमान हैं। इन पर्वतों पर और नदियों के तट पर बड़े-बड़े आत्मज्ञानी ऋषि आश्रम बनाकर रहते हैं। यहाँ पर जैसा कर्म करते हैं वैसा ही फल प्राप्त होता है। भारतवासी यज्ञादि कर्म करते समय भिन्न भिन्न देवताओं को हर्वि प्रदान करते हैं जिसे यज्ञपुरुष स्वयं पधार कर स्वीकार करते हैं। वे सकाम भाव वाले मनुष्यों की कामना पूर्ण करते हैं तथा निष्काम भाव वाले मनुष्यों को मोक्ष प्रदान करते हैं।

महाराज सगर के पुत्रों के पृथ्वी को खोदने से जम्बूद्वीप में आठ उपद्वीप बन गये थे जिनके नाम हैं।:

जम्बूद्वीप के वर्ष

  • भारतवर्ष के अतिरिक्त अन्य वर्षों का वर्णन इस प्रकार हैः
  • भद्राश्चवर्ष में धर्मराज के पुत्र भद्रश्रवा का राज्य है। वहाँ पर भगवान हयग्रीव की पूजा होती है।
  • हरिवर्ष में दैत्यकुलभूषण भक्तवर प्रह्लाद जी रहते हैं। वहाँ पर भगवान नृसिंह की पूजा होती है।
  • केतुमालवर्ष वर्ष में लक्ष्मी जी संवत्सर नाम के प्रजापति के पुत्र तथा कन्याओं के साथ भगवान कामदेव की आराधना करती हैं।
  • रम्यकवर्ष के अधिपति मनु जी हैं। वहाँ पर भगवान मत्स्य की पूजा होती है।
  • हिरण्यमयवर्ष के अधिपति अर्यमा हैं। वहाँ पर भगवान कच्छप की पूजा होती है।
  • उत्तरकुरुवर्ष में भगवान वाराह की पूजा होती है।
  • किम्पुरुषवर्ष के स्वामी श्री हनुमान जी हैं। वहाँ पर भगवान श्रीरामचन्द्र जी की पूजा होती है।

 



2012/1/1 Pratibha Saksena <pratibha...@gmail.com>



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Vinod Sharma

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Jan 1, 2012, 11:09:36 AM1/1/12
to shabdc...@googlegroups.com
अनिलजी, यदि इन वर्षों और द्वीपों का संबंध वर्तमान भौगोलिक इकाइयों से स्थापित करता हुआ कोई आलेख मिल जाए तो यह वर्णन अधिक स्वीकार्य हो जाएगा, अन्यथा जैसा कि अभय भाई कह चुके हैं कि पुराणों में वर्णित इन स्थानों का वैज्ञानिक आधार नहीं है, आज के समय में तार्किकता के बिना कुछ भी स्वीकार करना आसान नहीं है। इतने द्वीपों और वर्षों में से कुछ तो आज भी विद्यमान होने चाहिए।


2012/1/1 Anil Janvijay <anilja...@gmail.com>

Abhay Tiwari

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Jan 1, 2012, 12:09:16 PM1/1/12
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इस सन्दर्भ में 'वर्ष' की चर्चा भी प्रासंगिक हो सकती है। आम तौर पर वर्ष समय की एक इकाई है जिसका उत्स वर्षा (मूल धातु वृष्‌   - बरसना) की वापसी से सम्बन्धित समझा जाता है-  मगर यहाँ पर वर्ष समय की नहीं बल्कि भौगोलिक इकाई है। 

2012/1/1 Vinod Sharma <vinodj...@gmail.com>
अनिलजी, यदि इन वर्षों और द्वीपों का संबंध वर्तमान भौगोलिक इकाइयों से स्थापित करता हुआ कोई आलेख मिल जाए तो यह वर्णन अधिक स्वीकार्य हो जाएगा, अन्यथा जैसा कि अभय भाई कह चुके हैं कि पुराणों में वर्णित इन स्थानों का वैज्ञानिक आधार नहीं है, आज के समय में तार्किकता के बिना कुछ भी स्वीकार करना आसान नहीं है। इतने द्वीपों और वर्षों में से कुछ तो आज भी विद्यमान होने चाहिए।

अजित वडनेरकर

unread,
Jan 1, 2012, 12:43:53 PM1/1/12
to shabdc...@googlegroups.com
वर्ष का सन्दर्भ आया तो एक सफर याद आ गया-
नववर्ष-1 / बारिश में स्वयंवर और बैल
नववर्ष-2 / साल-दर-साल, बारम्बार


2012/1/1 Abhay Tiwari <abha...@gmail.com>
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