
हंसराज "सुज्ञ" जी-
मैं ने सुना था, कि-
(२) भारत वर्ष का आकार जामुन (जाम) या अमरूद की भाँति है। हिमालय से नीचे, उसे उलटा कर के देखने से ऐसा प्रतीत होता है।
मेरी शाला में सीखा हुआ ऐसा स्मरण है।
(२)
वैसे और यह द्वीप (एक भूभाग ) भी माना गया है।
बडा मनोरन्जक (दिलचस्प ) तो है ही।
"जम्बुद्वीपका केन्द्रीय भाग भारतवर्षमें विद्यमान है"।<===वा. शि. आप्टे।
मधुसूदन
मनु स्मृति (2.22) के अनुसार हिमालय और विंध्य पर्वत शृंखलाओं के बीच, पूर्वी और पश्चिमी समुद्र तक आर्यावर्त की सीमा थी।
वशिष्ठ धर्मसूत्र (।.8-9 तथा 12-13) के अनुसार लुप्त नदी सरस्वती के पूर्व में कलकवन तक तथा परियात्रा और विंध्य पर्वत के उत्तर में, हिमालय बौद्धयान के दक्षिण में इसकी सीमा थी।
धर्मसूत्र (BDS) 1.12.10 के अनुसार कलकवन के पश्चिम में, आदर्शन के पूर्व में, हिमालय के दक्षिण में तथा विंध्य पर्वत के उत्तर में आर्यावर्त की सीमा थी लेकिन BDS 1.1.2.11 के अनुसार आर्यावर्त गंगा-यमुना और दोआब क्षेत्र तक सीमित था। पतंजलि महाभाष्य वशिष्ठ धर्मसूत्र में दी गई सीमा की पुष्टि करता है।
जैन साहित्य में तो जम्बूद्वीप बहुत ही विशाल भूभाग है,
उसके दक्षिणार्ध में 6 विभागों वाला
भरत खण्ड़ है उसके लगभग एक खण्ड में आर्यवर्त
अथवा वर्तमान भारतवर्ष है।
इस संकल्प सूत्र के अनुसार भी जम्बूद्वीप एक विशाल महाद्वीप है जिसके अन्तर्गत भरतखण्ड़
आता है, भरतखण्ड़ के अन्तर्गत आर्यावर्त है और उसमें भारतवर्ष का भूभाग है। पुराणों के उल्लेख के अनुसार
सम्भवतः
सात महाद्वीपों में से किसी एक का नाम जम्बूद्वीप
है। एक बात तो निश्चित है वर्तमान
भारत ही मात्र जम्बूद्वीप
नहीं है, जम्बूद्वीप से आशय विशाल महाद्वीप से है।
On Jan 1, 4:33 am, "Dr.Rupesआदि h Shrivastava"
<rudrakshanathshrivasta...@gmail.com> wroteबू:
> जम्बूद्वीप की भौगोलिक स्थिति पर तो आप सबने विमर्श कर लिया लेकिन जैनों को
> ताल ठोंक कर राक्षस कहने वाले "अनूप मंडल" के अनुसार "मेरुपर्वत" की भौगोलिक
> स्थिति भी तलाशी जानी चाहिये जहाँ दुश्मनों का हनन कर देने वाले अरिहंत भगवान
> का वास बताया गया है। उपनिषदों और पुराणों की कथित वैज्ञानिकता को संदिग्ध
> बना देने की स्थिति तक ले आने के लिये क्या मात्र काल को ही एक घटक स्वीकारा
> जा सकता है?
>
> 2012/1/1 Hansraj sugya <hansrajsu...@msn.com>
>
>
>
>
>
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>
> > जैन साहित्य में तो जम्बूद्वीप बहुत ही विशाल भूभाग है, उसके दक्षिणार्ध
> > में 6 विभागों वाला भरत खण्ड़ है उसके लगभग एक खण्ड में आर्यवर्त अथवा
> > वर्तमान भारतवर्ष है।
> > इस संकल्प सूत्र के अनुसार भी जम्बूद्वीप एक विशाल महाद्वीप है जिसके
> > अन्तर्गत भरतखण्ड़ आता है, भरतखण्ड़ के अन्तर्गत आर्यावर्त है और उसमें भारतवर्ष
> > का भूभाग है। पुराणों के उल्लेख के अनुसार सम्भवतः सात महाद्वीपों में से
> > किसी एक का नाम जम्बूद्वीप है। एक बात तो निश्चित है वर्तमान भारत ही मात्र
> > जम्बूद्वीप नहीं है, जम्बूद्वीप से आशय विशाल महाद्वीप से है।
>
> > सस्नेह,
> > *हंसराज "सुज्ञ"*
>
> > 'सुज्ञ' ब्लॉग <http://shrut-sugya.blogspot.com/>
>
> > ------------------------------
> > Date: Sun, 1 Jan 2012 05:42:55 +0100
> > Subject: Re: [शब्द चर्चा] जम्बू द्वीप
> > From: sanjaybeng...@gmail.com
> > To: shabdc...@googlegroups.com
>
> > जैन सािहत्य में भारत को जम्बु द्वीप ही कहा गया है । यहाँ यह सामान्य शब्द
> > है ।
>
> > On Saturday, December 31, 2011, Ashutosh Kumar <ashuvand...@gmail.com>
> > wrote:
> > > भारतवर्ष को जम्बू द्वीप क्यों कहा गया होगा ?
>
> > --
> > संजय बेंगाणी | sanjay bengani
> > *छवि मीडिया एण्ड कॉम्यूनिकेशन*
> > ए-507, स्मिता टावर, गुरूकुल रोड़,
> > मेमनगर , अहमदाबाद, गुजरात.
> > chhavi.in | तरकश <http://www.tarakash.com/2/index.php> | मेरा ब्लॉग<http://www.tarakash.com/joglikhi>
महाराज सगर के पुत्रों के पृथ्वी को खोदने से जम्बूद्वीप में आठ उपद्वीप बन गये थे जिनके नाम हैं।:
जम्बूद्वीप के वर्ष
अनिलजी, यदि इन वर्षों और द्वीपों का संबंध वर्तमान भौगोलिक इकाइयों से स्थापित करता हुआ कोई आलेख मिल जाए तो यह वर्णन अधिक स्वीकार्य हो जाएगा, अन्यथा जैसा कि अभय भाई कह चुके हैं कि पुराणों में वर्णित इन स्थानों का वैज्ञानिक आधार नहीं है, आज के समय में तार्किकता के बिना कुछ भी स्वीकार करना आसान नहीं है। इतने द्वीपों और वर्षों में से कुछ तो आज भी विद्यमान होने चाहिए।