अमृत-प्रतीक्षा

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Sense & Sensuality

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Nov 1, 2009, 1:02:00 PM11/1/09
to Sense & Sensuality, anami...@yahoo.co.in, 2phot...@gmail.com, Abhilas...@maruti.co.in, abhilas...@yahoo.com, aga...@shazzam.net, Akhan...@aol.com, akmish...@yahoo.com, aksharam, aksharams...@rediffmail.com, alok puranik, anbhay...@yahoo.co.in, anbhay...@yahoo.com.in, anilja...@gmail.com, anils...@yahoo.com, anju...@yahoo.com, Anson printers, anuj gupta, Anuj Gupta
डॉ सरोजिनी साहू का विश्व की नारीवादी लेखिकाओं में एक विशिष्ट स्थान
हैं. पाश्चात्य नारीवाद में उभरे मातृत्व के प्रति घृणा तथा वैराग्य के
विपरीत मातृत्व को नारीत्व के एक अहम् हिस्सा मानने वाली कहानी 'अमृत
प्रतिक्षारे' ( Waiting for Manna) लेखिका के नारीवादी विचारधारा को
प्रस्तुत करती हैं.
अपने ब्लॉग 'सरोजिनी साहू की श्रेष्ठ कहानियां' ( http://sarojinisahoostories.blogspot.com/)
में मैंने लेखिका की उस कहानी का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत किया
है.
यह कहानी लेखिका के 'ओड़िशा साहित्य अकादमी' द्वारा पुरस्कृत कहानी-
संग्रह 'अमृत प्रतीक्षारे' में से ली गई है. मूल रूप से यह कहानी १९८६
में लिखी गई थी और तत्कालीन ओड़िया भाषा की प्रसिद्ध पत्रिका 'झंकार' में
प्रकाशित हुई थी. बाद में इस कहानी का अंग्रेजी रूपांतरण 'वेटिंग फॉर
मन्ना' शीर्षक से इप्सिता षडंगी ने किया , जो लेखिका के दूसरे अंग्रेजी
कहानी-संग्रह 'वेटिंग फॉर मन्ना' ( ISBN: 978-81-906956) में शीर्षक
कहानी के रूप में संकलित हुई है.
कृपया मेरे ब्लॉग साईट में पधारें.

आपका सदय टिपण्णी सराहनीय है.
आभारी
दिनेश कुमार माली
http://sarojinisahoostories.blogspot.com/

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