युजीसी के निर्देश अनुसार अध्यापक आपना अॅकॅडमीक बायोडाटा सक्षम करने हेतू या API स्कोर बनाने हेतू विद्यावार्ता मे लिखते है। तथा शोधार्थीयोको M.Phil या Ph.D. आदी संशोधनात्मक कार्य सिद्ध करणे हेतू विद्यापीठ को शोधलेख प्रकाशन सादर करना होता है। उपरोक्त दोनों लेखकोंको अब इंटरनेट की सुविधा बहोतही मददगार हो रही है तथा इनमे कुछ लोग अर्धसाक्षर होने कारण इंटरनेटपर की जानकारी, सांख्यकी कॉपी-पेस्ट तरीकेसे मिसयुज कर रहै है। “विद्यावार्ता रिसर्च जर्नल” इस प्रकार के कॉपी पेस्ट तरीकेसे बनाये-बनवाये आलेख तुरंत अस्वीकृत करते है। अतीसामान्य आलेख हम वापीस नही भेजते। आज के शोधकार्य जमाने में 60 प्रतिशत अध्यापक तकनीकी सुविधा में अनभिज्ञ है। उन्हे सोशल मिडीया या अन्थ वेब सुविधायोंका गंध नही है इसलीये वो प्रवाह से दूर है। भारतीय शैक्षिक प्रणाली की ये बडी क्षती है की आधेसे भी ज्यादा अध्यापक तंत्रज्ञान क्षेत्र में अशिक्षीत है। “विद्यावार्ता संशोधन पत्रिका” इन सभी लोगों तक किसी न किसी रास्ते से पहूचने का प्रयास कर रही है । “विद्यावार्ता” परीवार में जुडे नये अध्यापक और संशोधक लेखकोंका हम स्वागत करते हुये नये अंक प्रकाशित करते है । हमें भारत के सभी राज्योंसे अलग-अलग विषय के शोधालेख प्रकाशन हेतू मिलते है। इनमें शोधार्थीयोंका सहयोग भी काफी लक्षवेधी है।
संशोधनात्मक नियतकालीक में मनोरंजनात्मक अंश नही होता । “विद्यावार्ता संशोधन पत्रिका” में बौद्धिक एवं तार्किक लेखन पे जोर दिया जाता है। इसकी वजह से इन पात्रिकाओंको जनसामान्य वाचक, अलोचक का आधार नही मिलता। परीणाम स्वरुप संशोधनात्मक पत्रिकाओं की खपत सिमीत होती है। दुसरी बाजू ये भी है की जनसामान्य वाचकों को व्यवहारोपयोगी ज्ञान इन पत्रिकाओंसे कम मिलता है। अब इसका मतलब साफ है की, संशोधन जर्नल केवल उच्च शिक्षा या शैक्षिक व्यवहार से संबंधी लोगो से ही पढा जाता है। देखा जाता है। इन जर्नल के प्रकाशक की नजर से देखा तो संशोधन जर्नल में कोईभी विज्ञापन नही होती इसकी वजहसे प्रकाशक को आर्थिक लाभ नही होता। सरकार इन प्रोफेशनल जर्नल को कोईभी सुविधायें या अनुदान नही देती। प्रकाशक को जर्नल छपवाने में या उत्पादन करने में दुसरी असुविधा ये है की ५०० कॉपी बनाने के लिए प्रिंटींग पूर्व प्रक्रिया का पुरा चक्कर लगवानाही पडता है और 5000 कॉपी बनवाने में भी उतनाही पूर्वकार्य या प्रकाशकीय यांत्रिक प्रक्रिया करनी पडती है । उपरोक्त बाते देखते हुये विद्यावार्ता संशोधन पत्रिका” ने पाठक संख्या एव वार्षिक सदस्य बढाने का प्रयास सुरु किया है । हमारे वाचक सदस्य और लेखक संशोधक इस व्यवहार में सहयोग करें ये अपेक्षा है। अगर आप वाटस्अप का कोई ग्रूप चलाते है तो हमारे 09850203295, ०९८५०२०२३९३, 07588057695, ०७५८८०५७८०८ ये नंबर उनमे अॅड करें। इन मोबाईलसे हम और हमारे सहयोगी केवल उच्च शिक्षासंबंधीत जानकारी भेजते है । आपके सहयोग से “विद्यावार्ता संशोधन पत्रिका” आंतरराष्ट्रीय स्तरपर जा रही है
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