भारतीयों का जितना धन स्विस बैंक में जमा है, तकनीकी रूप से वह हमारे
जीडीपी का 6 गुना है। सरकार पर दबाव है और कोशिशें भी जारी है कि इस धन
को वापस देश में लाया जाए। तकनीकी रूप से यह ब्लैक मनी है। अगर यह धन देश
में वापस आ गया तो देश की इकोनॉमी और आम आदमी की बल्ले-बल्ले हो सकती है।
"कर्ज नहीं लेना पड़ेगा"
प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक भारत को अपने देश के लोगों का पेट भरने और
देश को चलाने के लिए 3 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेना पड़ता है। यही कारण
है कि जहां एक तरफ प्रति व्यक्ति आय बढ़ रही है, वही दूसरी तरफ प्रति
भारतीय पर कर्ज भी बढ़ता है। अगर स्विस बैंकों में जमा ब्लैक मनी का पहले
चरण में 30 से 40 पर्सेंट भी देश में आ गया तो हमें कर्ज के लिए आईएमएफ
या विश्व बैंक के सामने हाथ नहीं फैलाने पड़ेंगे। धन की कमी स्विस बैंक
में जमा धन पूरा करेगा।
"30 साल का बजट बिना टैक्स के"
स्विस बैंकों में भारतीयों का जितना ब्लैक मनी जमा है, अगर वह सारी राशि
भारत को मिल जाती है तो भारत देश को चलाने के लिए बनाया जाने वाला बजट
बिना टैक्स के 30 साल के लिए बना सकता है। यानी बजट ऐसा होगा कि जिसमें
कोई टैक्स नहीं होगा। आम आदमी को इनकम टैक्स नहीं देना होगा और किसी भी
वस्तु पर कस्टम या सेल टैक्स नहीं देना होगा।
"सभी गांव जुड़ेंगे सड़कों से"
सरकार सभी गांवों को सड़कों से जोड़ना चाहती है। इसके लिए 40 लाख करोड़
रुपये की जरूरत है। मगर सरकार के पास इतना धन कहां हैं। अगर स्विस बैंक
से ब्लैक मनी वापस आ गया तो हर गांव के पास एक ही चार लेन की सड़क बन
सकती है।
"कोई बेरोजगार नहीं"
देश में कोई भी बेरोजगार नहीं रहेगा। जितना धन स्विस बैंक में भारतीयों
का जमा है, उससे उसका 30 पर्सेंट भी देश को मिल जाए तो करीब 20 करोड़ नई
नौकरियां पैदा की जा सकती है। 50 पर्सेंट धन मिलेगा तो 30 करोड़ नौकरियां
मार्केट में आ सकती हैं।
"देश से गरीबी गायब"
अमेरिकी एक्सपर्ट का अनुमान है कि स्विस बैंकों में भारतीयों का जितना धन
जमा है, अगर वह उसका 50 पर्सेंट भी भारत को मिल गया तो हर साल प्रत्येक
भारतीय को 2000 रुपये मुफ्त में दिए जा सकते हैं। यह सिलसिला 30 साल तक
जारी रहा सकता है। यानी देश में गरीबी दूर हो जाएगी।