बाबा जी के अनमोल वचन।
जब चिंता कोई सताये --सिमरन करो ।।
जब व्याकुल मन घबराये --सिमरन करो !!
कोई राह नजर न आये --सिमरन करो !!
अगर बात समझ में न आये --सिमरन करो ।।
अगर दिल घबराये - सिमरन करो।।
अगर किसी का डर सताये - सिमरन करो।।
अगर आशा तृष्णा सताए - सिमरन करो।।
अगर मान बड़ाई घेर ले - सिमरन करो।। (मान, बड़ाई, ईर्षा, द्वेष, गुस्सा - यह सब कुछ भी नहीं, यही तो काल के असली हथियार है सतगुरु के सिमरन से और उसके प्रेम से जीव को दूर करने के लिए)
अगर कोई भी नुक्सान हो जाये - सिमरन करो।। (क्योंकि सिमरन और सतगुरु प्रेम से दूर होने से बड़ा नुक्सान इस दुनिया में कोई भी नहीं है)
हर मर्ज की दवा है पुरे गुरु का सिमरन जिसके करने से तीनलोक में काल की शक्तियाँ इसका रास्ता छोड कर पीछे हट जाती है
कोशिश करो आपस में सतगुरु का प्रेम बढ़ाओ, चाहे इसमे आपका कितना भी नुक्सान क्यों न हो, आपस में सतगुरु का प्रेम हर पल बढ़ाना ही है कम नहीं करना, चाहे पूरी दुनिया ही नाराज़ क्यों न हो जाये, सतगुरु सबकुछ जानता है और देखता है, परमार्थ का लाभ उसी को होता है हर पल सतगुरु के प्रेम बैराग को बढ़ाने की चिंता रखता है और दुसरो में भी सतगुरु का प्रेम पैदा करता है।।
भीतर कपट रखकर ध्यान धरने से क्या होता है ? जो मन के पाप नष्ट नहीं हुए, तो ऐसे ध्यानी तो बगुले की तरह मछली का ध्यान करते हैं, और मीनी ( बिल्ली ) चूहों का ध्यान धरती है | बिचारे गरीब जन्तुओं को बगुला और बिल्ली खा लेते हैं | ऐसे ही कपटी ध्यानी अपने इन्द्रियों के भोगों को भोगते हैं और काल की शक्तियो(5 और 25 के शिकार हो जाते है)||
🙏 सिमरन करो, सिमरन करो, सिमरन करो ।।🙏
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