दिनांक: 29.08.2016
भारत सरकार,
राजभाषा विभाग
गृह मंत्रालय,
नई दिल्ली
विषय: राजभाषा संबंधी आदेशों की जानबूझकर अवहेलना एवं राजभाषा अधिकारियों के साथ निष्पक्ष न्याय नहीं रखने के संबंध में।
उपर्युक्त विषय में मेरे दिनांक 01.08.2016 का पत्र जो गृह मंत्रालय एवं वित्त मंत्रालय को भेजा था, जिसके संदर्भ में आपका कार्यालय ज्ञापन सं: 12019/04/2016-रा.भा.(शिका.)/अन्य शिका.-3 दिनांक 12.08.2016 प्राप्त हुआ है, जिसके अनुसार विभाग द्वारा आवश्यक कार्रवाई हेतु संयुक्त सचिव(प्रशासन), वित्तीय सेवाएं विभाग, वित्त मंत्रालय को भेजा गया है, जिसकी प्रतिलिपि मुझे भेजी गई है। इस पत्र में दो बाते लिखी गई है, (1) यदि कोई कर्मचारी या अधिकारी जानबूझकर राजभाषा के बारे में लागू प्रावधानों की अवहेलना करता है तो प्रकरण में संबंधित नियमों एवं आदेशों के उल्लंघन होने के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है। (2) राजभाषा विभाग सभी केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों/कार्यालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको एवं केंद्रीय उपक्रमों से समस्त कार्यपालिका को राजभाषा प्रयोग संबंधी सौंपे गए संवैधानिक और सांविधिक दायित्वों के निष्पादन में और वार्षिक कार्यक्रम में उल्लिखित लक्ष्यों की पूर्ति की दिशा में अभीष्ट स्वैच्छिक समर्थन की आशा और अपेक्षा करता है।
मैं राजेश्वरी (53548), राजभाषा अधिकारी, यूको बैंक ने उपर्युक्त विषय में विभिन्न सरकारी कार्यालयों को भी ई-मेल व पत्र भेजा था, जिसमें केन्द्रीकृत लोक शिकायत निवारण और प्रणाली के प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग के ई-मेल cpgram...@nic.in, भारतीय रिज़र्व बैंक के बैंकिंग लोकपाल के ई-मेल no-r...@rbi.org.in एवं राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के ई-मेल से nhrc....@nic.in; मुझे केवल अंग्रेजी में उत्तर प्राप्त हुए है, तथा सूचना का अधिकार कानून-2005 के अंतर्गत सूचना प्राप्ति के लिए पोस्टल ऑर्डर के साथ हमारी यूको बैंक के सूचना अधिकारी श्री को आवेदन भेजा था, जिसका उत्तर अंग्रेजी में प्राप्त हुआ है। जो राजभाषा नियम 5 का घोर उल्लंघन है।
राजभाषा कार्यान्वयन के लिए 1950 से नियम लागू होने के पश्चात भी सरकारी कार्यालयों द्वारा ऑटो जनरेटेड, सिस्टम जनरेटेड ई-मेल केवल अंग्रेजी में भेजने की व्यवस्था क्यों है? उपर्युक्त उल्लंघन के पश्चात भी कार्यालयों की रिपोर्टों में राजभाषा कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा तथा रिपोर्ट के आंकड़ो व हिंदी संबंधी कार्यक्रमों/प्रतियोगिताओं के आधार पर पुरस्कार वितरण भी किए जाएंगे। इसी कारण अभी तक राजभाषा का उल्लंघन भी चलता रहा है तथा रिपोर्टों में राजभाषा अनुपालन का दिखावा भी चल रहा है। अतः रिपोर्टों में राजभाषा कार्यान्वयन दिखाकर राजभाषा अधिकारियों को कार्यालय के अन्य कार्य सौंपे जा रहे है। अधिकारी भी अपनी नौकरी की फ़िक्र में वह सब काम करने के लिए बाध्य होता है जिससे हिंदी का सरोकार नहीं होता है और कार्यालय को भी एक ऐसा जीव मिल जाता है जो हिंदी में काम करने या न करने पर भी राजभाषा अनुपालन की ही रिपोर्ट तैयार करता है। जो राजभाषा अधिकारी सही रूप से राजभाषा कार्यान्वयन करना चाहे तथा उल्लंघन करने वाले उच्च कार्यालय व उच्च कार्यपालकों को सूचित करें, तो उसे वार्षिक कार्यनिष्पादन रिपोर्ट में अंक कम देना, ताकि पदोन्नति न मिल पाएं तथा होम टाउन से स्थानांतरण कर देना, ताकि वह अधिकारी भी स्वतंत्र भारत में राजभाषा के कार्यान्वयन को छोड़कर उच्च अधिकारियों का गुलाम बन जाए तथा राजभाषा कार्यान्वयन का दिखावा करके देश व अपने दायित्वों के प्रति बेईमान बनें।
राजभाषा संबंधी आदेशों की जानबूझकर अवहेलना करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं कर सकते है, ऐसा कहीं पर भी नहीं लिखा गया है तथा किसी भी सरकारी अधिकारी को जानबूझकर राजभाषा नियमों के उल्लंघन का अधिकार भी नहीं दिया गया है एवं राजभाषा कार्यान्वयन न करने के बावजूद भी रिपोर्ट में कार्यान्वयन दिखाकर भ्रष्टाचार करना तो कानूनन गुनाह है। रिपोर्ट के आंकड़ों पर तथा हिंदी संबंधी कार्यक्रमों के आधार पर पुरस्कार वितरण करने से राजभाषा का सही कार्यान्वयन तो सुनिश्चित नहीं हो रहा बल्कि राजभाषा में दिखावे का भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, जो देश का दिखावे के रूप में आयोजित कार्यक्रमों का खर्च बढ़ाता हैं। प्रवीणता प्राप्त अधिकारियों द्वारा हिंदी में कार्य नहीं किया जाने पर कोई कार्रवाई नहीं करना, कार्यपालकों द्वारा राजभाषा नियमों की जानबूझकर अवहेलना करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं करना, लेकिन प्रत्येक वर्ष/तिमाही/माह/दिवस में राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठक, कार्यशाला, निरीक्षण, प्रतियोगिताएं, हिंदी दिवस, हिंदी प्रशिक्षण दिलवाना ही है। परिणाम स्वरूप प्रत्येक वर्ष/तिमाही/माह/दिवस में यह कार्यक्रम आयोजित किए जाते है एवं कार्यक्रम न किए जाने पर भी कार्यक्रम की रिपोर्ट/कार्यवृत अवश्य भेजना सुनिश्चित अवश्य किया जाता है।
राजभाषा संबंधी आदेशों की जानबूझकर अवहेलना होने पर भी कार्रवाई न करना, तो राजभाषा कार्यान्वयन में दिखावे रूपी भ्रष्टाचार को प्रेरणा और प्रोत्साहन देना है। तथापि यदि उल्लंघन पर कोई कार्रवाई नहीं करनी है तो रिपोर्टिंग में राजभाषा की वास्तविक स्थिति नहीं दर्शाने वाले भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी तथा वास्तविकता की जांच किए बिना ही रिपोर्ट के आंकड़ों को सही मानकर पुरस्कार प्रदान करने हेतु चयन करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों पर भी कार्रवाई करनी होगी, ताकि राजभाषा कार्यान्वयन की वास्तविक स्थिति बनी रहे एवं राजभाषा के कार्यान्वयन के दिखावे का भ्रष्टाचार भी बंद हो। राजभाषा के वास्तविक कार्यान्वयन से या राजभाषा के दिखावे को समाप्त करके हमारे देश के आदर्श सूत्र वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ को सार्थक करना होगा। राजभाषा अधिकारियों/कार्यपालकों का भी राजभाषा कार्यान्वयन की सही रिपोर्ट तैयार करके प्रेषित करने से स्वमान बढ़ेगा तथा अपने कर्तव्यों के प्रति बेईमानी करने के बोझ से मुक्ति मिल जाएगी।
व्यक्ति जितना अधिक गलत कार्य करता है, उतना अधिक स्वयं के प्रति बेईमान बनता है। जो व्यक्ति स्वयं के प्रति बेईमान बनेगा वह अन्य किसी के प्रति कैसे ईमानदार रह पाएगा। अतः आपसे नम्र अनुरोध करती हूँ कि देश में राजभाषा के सही सम्मान हेतु उचित कार्रवाई करें। वास्तविकता के बिना हिंदी दिवस मनाना केवल दिखावा है। अतः आपसे पुनः नम्र अनुरोध करती हूँ कि दिन 10 में राजभाषा संबंधी आदेशों की जानबूझकर अवहेलना एवं राजभाषा अधिकारियों के साथ निष्पक्ष न्याय नहीं रखने के संबंध में उचित कार्रवाई तथा न्याय करें। आपसे न्याय नहीं मिलने पर राजभाषा के सही कार्यान्वयन हेतु मैं दिनांक 14.09.2016 को "हिंदी दिवस समारोह" में शामिल होने के बजाय "हिंदी धरना दिवस" के रूप भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग, नई दिल्ली में धरना प्रारंभ करूंगी।
सोलंकी राजेश्वरी नरसिंहभाई
पता: 25/बी, रजतपार्क सोसायटी, बीआरटीएस बस-स्टैंड के पास, नेशनल हाईवे, चांदखेडा, अहमदाबाद-382424. मोबाइल: 9426722003 ई-मेल-dearri...@gmail.com
संलग्नक:
(1) यूको बैंक के सूचना अधिकारी श्री को सूचना प्राप्ति हेतु भेजा गया आवेदन।
(2) यूको बैंक के सूचना अधिकारी श्री द्वारा प्रेषित पत्र।
(3) केन्द्रीकृत लोक शिकायत निवारण और प्रणाली के प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग के ई-मेल cpgram...@nic.in से प्राप्त उत्तर।
(4) भारतीय रिज़र्व बैंक के बैंकिंग लोकपाल के ई-मेल no-r...@rbi.org.in से प्राप्त उत्तर।
(5) राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के ई-मेल nhrc....@nic.in से प्राप्त उत्तर।
प्रतिलिपि:
(1) माननीय श्री प्रणव मुखर्जी, राष्ट्रपति, भारत सरकार, नई दिल्ली। (ई-मेल व पत्र)
(2) माननीय श्री नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई-दिल्ली। (ई-मेल व पत्र)
(3) माननीय श्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री, गृह मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली। ई-मेल व पत्र)
(4) माननीय श्री अरुण जेटली, वित्त मंत्री, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली।(ई-मेल व पत्र)
(5) भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग, नई दिल्ली। (ई-मेल व पत्र)
(6) भारत सरकार, वित्त मंत्रालय, राजभाषा विभाग, नई दिल्ली। (ई-मेल व पत्र)
(7) माननीय श्री अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री, दिल्ली। (ई-मेल)
(7) भारतीय रिज़र्व बैंक, प्रधान कार्यालय, मुंबई। (ई-मेल)
(8) प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी, यूको बैंक, प्रधान कार्यालय, कोलकाता। (ई-मेल)
(9) राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली। (ई-मेल)
(10) उप आयुक्त, नई दिल्ली। (ई-मेल)
भारत के माननीय प्रधानमंत्री,
मैं राजेश्वरी यूको बैंक, अंचल कार्यालय, सूरत में राजभाषा अधिकारी के पद पर कार्यरत हूँ। मैंने 24.08.2012 को यूको बैंक में कार्यग्रहण किया था। हमारा देश 1950 से राजभाषा कार्यान्वयन हेतु प्रयासरत है। राजभाषा नीति का आधार प्रेरणा एवं प्रोत्साहन है। सभी सरकारी कर्मचारियों को धारा 3(3) के अंतर्गत जारी कागजात को शतप्रतिशत द्विभाषी में जारी करना है तथा हिंदी में प्राप्त पत्रों का उत्तर शतप्रतिशत रूप से हिंदी में ही देना है। जिन कर्मचारियों को हिंदी में प्रवीणता प्राप्त है, उन्हें शतप्रतिशत सरकारी कामकाज हिंदी/द्विभाषी में करने का व्यक्तिशः आदेश कार्यालय प्रमुख द्वारा जारी किया जाता है। जिन कर्मचारियों को हिंदी का ज्ञान नहीं है, उन्हें हिंदी में कार्यसाधक एवं प्रवीणता का ज्ञान प्राप्त करवाने हेतु प्रशिक्षण दिलवाना है तथा सभी स्टाफ-सदस्यों को हिंदी टंकण का प्रशिक्षण देना है। इसके पश्चात भी राजभाषा संबंधी आदेशों की जानबूझकर अवहेलना करने पर कार्रवाई की जा सकती है। इन नियमों का अनुपालन सुनिश्चित हो तो राजभाषा कार्यान्वयन में एक वर्ष से अधिक समय नहीं हो सकता है।
मैं राजभाषा कार्यान्वयन हेतु प्रयास कर रही हूँ, किन्तु जानबूझकर अवहेलना करने पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण राजभाषा केवल रिपोर्टों के आंकड़ो, सम्मेलनों एवं संसदीय समितियों के निरीक्षणों तक ही सीमित रह गई हैं, जिसके कारण राजभाषा अधिकारियों से भी यही उम्मीद रखी जा रही है कि वह रिपोर्ट में राजभाषा का अनुपालन दिखाकर राजभाषा के अलावा बैंक का अन्य कार्य करते रहे, क्योंकि बैंक का कार्य बहुत ही महत्वपूर्ण है, राजभाषा का कार्य तो रिपोर्ट के सही आंकड़ों से ही हो जाएगा। दिखावे की रिपोर्ट नहीं तैयार करने के कारण राजभाषा अधिकारी को वर्ष 2013-14 में वार्षिक कार्यनिष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट में 70 अंक देकर टिप्पणी लिखी गई कि very poor implementation of Hindi in the zone। जिसके कारण वर्ष 2016 में हुई पदोन्नति प्रक्रिया में साक्षात्कार हेतु राजभाषा अधिकारी को बुलावा नहीं भेजा गया, जबकि इन वर्षों में कोई कारण स्पष्ट करें नोटिस जारी नहीं किया गया था।
अहमदाबाद अंचल कार्यालय में अधिकारियों को व्यक्तिशः आदेश जारी करने के पश्चात भी वही अधिकारियों द्वारा केवल अंग्रेजी में तैयार किए गए धारा 3(3) के कागजातों पर कार्यालय प्रमुख द्वारा हस्ताक्षर करके कागजात जारी किए जाते है। प्रधान कार्यालय के कार्यपालकों द्वारा भी धारा 3(3) के कागजातों को केवल अंग्रेजी में जारी किया जाता है। ऐसी स्थिति में राजभाषा अधिकारी द्वारा प्रधान कार्यालय व अंचल कार्यालय को बार बार सूचित किया जाता है। इसके पश्चात राजभाषा अधिकारी का होम टाउन अहमदाबाद से सूरत स्थानांतरण कर दिया जाता है, जो अधिकारियों के एक स्थान पर 3 वर्ष होने पर होनेवाली स्थानांतरण प्रक्रिया का एक भाग होगा, जो बैंक के सभी राजभाषा अधिकारियों के लिए समान होना चाहिए।
किन्तु अभी तक कुछ ही राजभाषा अधिकारियों के स्थानांतरण किए गए है। एक ही स्थान पर 3 वर्ष एवं उससे भी ज्यादा वर्षो से राजभाषा का कार्य करनेवाले एवं पदोन्नति प्राप्त करनेवाले कई राजभाषा के अधिकारियों का स्थानांतरण नहीं किया गया है। हर बार मुझे अन्याय किया जा रहा है। सिर्फ इसलिए कि मैं राजभाषा के कार्यान्वयन को दिखावे की स्थिति से निकालकर वास्तविक रूप से अनुपालन सुनिश्चित करवाने हेतु प्रयासरत हूँ।
इसके लिए मैंने गृह मंत्रालय एवं वित्त मंत्रालय को भी रजिस्टर पोस्ट के द्वारा सूचित किया है तथा राजभाषा संबंधी आदेशों की अवहेलना करके केवल अंग्रेजी में जारी किए गए कागजातों की प्रतियाँ भी संलग्न की है।
मैंने अहमदाबाद अंचल कार्यालय से कायमुक्त होकर 04 अगस्त, 2016 को सूरत अंचल कार्यालय, यूको बैंक में कार्यग्रहण कर लिया है। हम सबको अपनी क्षेत्रीय भाषाओं का ज्ञान है। जब हम देवनागरी लिपि में कार्य करेंगे तब हमारे पत्राचार में हमारी क्षेत्रीय भाषाओं व अंग्रेजी के प्रचलित शब्द शामिल होंगे, जिससे अपने आप हमारे देश की एक अनोखी मिश्र भाषा अस्तित्व में आएगी। हमारी इस अनोखी भाषा में हमारी सभी भाषाओं का संगम होगा। हमारे देश की एक भाषा होने से हमारे देश का किसान भी कंप्यूटर में सेंसर की मदद से अपनी खेती करेंगे। देश के हर नागरिक को नियम व कानून की जानकारी होगी, जिससे भ्रष्टाचार भी अपने आप कम होगा। यदि हम स्वतंत्रता के इतने वर्षों पश्चात भी मानते है कि रिपोर्टों में दिखाए गए आंकड़ों के अनुसार हिंदी में कार्य करना संभव नहीं है, तो इस दिखावे को तो बंद करने हेतु प्रयास करना होगा। कब तक हम अपनी भाषा के लिए सम्मेलनों, हिंदी दिवस, निरीक्षणों, कार्यशालाएँ, बैठकों के आयोजनों के द्वारा दिखावे में छिपाते रहेंगे। कुछ तो विचार करना होगा।
निम्नानुसार मदों के लिए कौन जिम्मेदार है ?
(1) 2013-14 में राजभाषा कार्यान्वयन हेतु सिर्फ राजभाषा अधिकारी को पूर्व कोई कारण स्पष्ट नोटिस जारी किए बिना ही जिम्मेदार मानकर वा.का.मू.रि. में 70 अंक देना सही है ? पदोन्नति प्रक्रिया में साक्षात्कार के लिए बुलावा नहीं प्राप्त होने के लिए जिम्मेदार कौन है? यदि मैं ही हूँ तो मुझे क्यों कारण स्पष्ट करें नोटिस जारी नहीं किया गया ?
(2) प्रधान कार्यालय एवं अधीनस्थ कार्यालय के कार्यपालकों द्वारा राजभाषा संबंधी आदेशों की जानबूझकर अवहेलना करने की स्थिति में राजभाषा अधिकारी को राजभाषा कार्यान्वयन हेतु क्या करना चाहिए ?
(3) क्या स्वतंत्र भारत के सरकारी कार्यालय में कार्यपालकों को किसी भी अधिकारी को अन्याय करने का अधिकार है ?
(4) राजभाषा संबंधी आदेशों की जानबूझकर अवहेलना के लिए अभी तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है ?
(5) हमारे देश की राजभाषा व राजभाषा के नियम कब तक कागजातों में ही सीमित रहेंगे ?
(6) क्या हम भारतीय इतने सक्षम नहीं हैं कि देश का सरकारी कामकाज, संविधान, शिक्षण व न्याय प्रणाली को राजभाषा में कार्यान्वित कर सके ?
राजेश्वरी एन. सोलंकी25/बी, रजतपार्क सोसायटी,एएमटीएस बस-स्टॉप के सामने, नेशनल हाइवे,चांदखेडा-382424, अहमदाबाद, गुजरात।मोबाइल: 9426722003
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दि. 8/9/2016
नमस्ते मैडम ।
आप का पत्र बहुत ही स्पष्ट है। उस में जो सच्चाई आप ने बयान की है वह कटू है । वास्तव में सभी हिंदी विभाग के कर्मचारी एवं अधिकारी इसमें शामिल होना चाहिए। तिमाही के जो आँकडे जाते वह वास्तविक नहीं होते । किसी भी अधिकारी को हिंदी नियमों की जानकारी नहीं होती । फिर भी हिंदी कर्मचारी को बेवजह प्रताडित किया जाता है । आपने जो आवाज उठाई है वह सही है । मैं भी इसका शिकार हूँ । मैं भी हरेत को लिख चुका हूँ लेकिन कोई असर नही हुआ है । आप के कार्य के लिए शुभकामनाएँ ।
मधुकर अ. सूर्यवंशी
राजभाषा अधीक्षक(सेवानिवृत्त')
भारतीय रेल विद्युत इंजीनियरिंग संस्थान, नासिकरोड
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दिनांक: 10.09.2016
सेवा में
श्री आलोक कुमार वर्मा
पुलिस कमिश्नर
दिल्ली
विषय: 14 सितंबर, 2016 को धरना करने की स्वीकृति प्राप्त करने हेतु
महोदय,
जय भारत के साथ राजभाषा संबंधी आदेशों की जानबूझकर अवहेलना एवं राजभाषा अधिकारियों के साथ निष्पक्ष न्याय नहीं रखने के संबंध में मैं राजेश्वरी 14 सितंबर, 2016 को एक दिवसीय “हिंदी धरना दिवस” के रूप में राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार, एनडीडीसी-II भवन, बी.विंग, चौथा तल, जयसिंह रोड़, नई दिल्ली-110001 के सामने धरना करने की अनुमति प्राप्त करने हेतु आपसे नम्र अनुरोध करती हूँ तथा धरना के दौरान मेरी सुरक्षा की आपसे अपेक्षा रखती हूँ। मैं धरना का कार्यक्रम गांधीजी की अहिंसा की राह पर शांति से करना चाहती हूँ।
सोलंकी राजेश्वरी नरसिंहभाई
पता: 25/बी, रजतपार्क सोसायटी, बीआरटीएस बस-स्टैंड के पास, नेशनल हाईवे, चांदखेडा, अहमदाबाद-382424.
मोबाइल: 9426722003 ई-मेल-dearri...@gmail.com
प्रतिलिपि:
(1) माननीय श्री प्रणव मुखर्जी, राष्ट्रपति, भारत सरकार, नई दिल्ली।
(2) माननीय श्री नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई-दिल्ली।
(3) माननीय श्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री, गृह मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली।
(4) माननीय श्री अरुण जेटली, वित्त मंत्री, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली।
(5) माननीय श्री अरविंद केजरीवाल, मुख्य मंत्री, दिल्ली।
(6) भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग, नई दिल्ली।
(7) भारत सरकार, वित्त मंत्रालय, राजभाषा विभाग, नई दिल्ली।
(8) भारतीय रिज़र्व बैंक, प्रधान कार्यालय, मुंबई।
(9) प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी, यूको बैंक, प्रधान कार्यालय, कोलकाता।
(10) राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली।
(11) उप आयुक्त, नई दिल्ली।
(12) अंचल प्रबंधक, यूको बैंक अंचल कार्यालय, सूरत।
माननीय श्री प्रणव मुखर्जी
राष्ट्रपति,
भारत,
विषय: राजभाषा संबंधी आदेशों की अवहेलना एवं राजभाषा अधिकारियों के साथ निष्पक्ष न्याय नहीं रखने के संबंध में
हिंदी धरना दिवस
राजभाषा में बढ़ रहा दिखावे का भ्रष्टाचार !
· राजभाषा नियमों का हो रहा घोर उल्लंघन
· तथापि राजभाषा की रिपोर्टों में दिखाया जा रहा है अनुपालन
· राजभाषा अधिकारियों को सौंपे जा रहे कार्यालय के अन्य कार्य
· नौकरी की फ़िक्र में अधिकारी वह सब करने को मजबूर जिससे हिंदी का सरोकार नहीं
· राजभाषा का सही कार्यान्वयन कराने वाले को प्रताड़ित करते हैं कार्यपालक
· उन्हें वार्षिक कार्यनिष्पादन रिपोर्ट में अंक कम देना, ताकि पदोन्नति न मिल पाए तथा
· अन्याय के रूप में स्थानांतरण कर बनाया जाता है उच्च अधिकारियों का गुलाम
· हिंदी में प्रवीण कार्यपालकों को पूरी तरह से सरकारी कार्य हिंदी में करने का नहीं जारी किया जाता व्यक्तिशः आदेश
· हिंदी का ज्ञान नहीं होने वाले कार्यपालकों को नहीं दिलवाया जाता हिंदी प्रशिक्षण
· प्रवीणता प्राप्त अधिकारी भी नहीं करते हिंदी में कार्य
· राजभाषा हिंदी होने के बावजूद कार्यालयों में सिस्टम जनरेटेड उत्तर केवल अंग्रेजी में दिए जाते है
· सूचना का अधिकार कानून-2005 के अंतर्गत सूचना कानून-2005 के अंतर्गत दो बार यूको बैंक के सूचना अधिकारी ने हिंदी आवेदन का उत्तर केवल अंग्रेजी में दिया।
प्रधान कार्यालय एवं अधीनस्थ कार्यालय के कार्यपालकों द्वारा राजभाषा संबंधी आदेशों की जानबूझकर अवहेलना करने की स्थिति में राजभाषा अधिकारी को राजभाषा कार्यान्वयन हेतु क्या करना होगा ?
राजभाषा का वास्तविक कार्यान्वयन करने के फल स्वरूप राजभाषा अधिकारी पर हो रहे अन्याय को कैसे रोका जाए?
रिपोर्टों के आंकड़ों का जांच बिंदु कैसे निर्धारित होगा ?
कार्यालयों द्वारा राजभाषा नियमों का उल्लंघन करने के पश्चात भी रिपोर्ट में उल्लंघन न दिखाना, यह कानूनन अपराध है। इसके लिए क्या दंड का प्रावधान है ?
एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी को भेजी तथा दिनांक 25.07.2016 एवं 01.08.2016 की प्रतिलिपि तथा दिनांक 29.08.2016 का पत्र गृह मंत्रालय व वित्त मंत्रालय एवं अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजा है। दिनांक 01.08.2016 के मेरे पत्र के संदर्भ में भारत सरकार, गृह मंत्रालय,राजभाषा विभाग से भेजे गए पत्र सं.12019/04/2016-रा.भा.(शिका.)/अन्य शिका.3 दिनांक के अनुसार संयुक्त सचिव(प्रशासन), वित्तीय सेवाएं विभाग, वित्त मंत्रालय द्वारा आवश्यक कार्रवाई करनी अभी तक शेष है। यह बहुत ही दुःख की बात है कि संयुक्त निदेशक (रा.भा), वित्तीय सेवाएं विभाग, वित्त मंत्रालय ने दिनांक 01.08.2016 के मेरे पत्र को पढें बिना तथा इसी पत्र के संदर्भ में भारत सरकार, गृह मंत्रालय,राजभाषा विभाग से भेजे गए पत्र सं.12019/04/2016-रा.भा.(शिका.)/अन्य शिका.3 दिनांक 12.08.2016 को ध्यान में लिये बिना ही केवल दिनांक 29.08.2016 के मेरे पत्र के संदर्भ में आवश्यक कार्रवाई हेतु यूको बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी को दिनांक 09.09.2016 को पत्र भेजा है। मैंने अपनी शिकायत दिनांक 25.07.2016, 01.08.2016, 21.08.2016 एवं 29.08.2016 को हमारी यूको बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी को भेजी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
मुझे यह समझ नहीं आ रहा है कि इस मामलें में आवश्यक कार्रवाई करने हेतु पत्र अग्रेषित किया जा रहा है, लेकिन कार्रवाई कौन करेंगें?
मैं आज 14 सितंबर, 2016 को राजभाषा संबंधी आदेशों की जानबूझकर अवहेलना एवं राजभाषा अधिकारियों के साथ निष्पक्ष न्याय नहीं रखने के संबंध में दिल्ली पुलिस की अनुमति से " हिंदी धरना दिवस" के रुप में एक दिवसीय धरना कर रही हूं।
सोलंकी राजेश्वरी नरसिंहभाई
पता: 25/बी, रजतपार्क सोसायटी, बीआरटीएस बस-स्टैंड के पास, नेशनल हाईवे, चांदखेडा,अहमदाबाद-382424. मोबाइल: 9426722003 ई-मेल-dearri...@gmail.com