कल जिस किसी ने भी टीवी चैनलों पर विश्व के दो सबसे अधिक जनसंख्या वाले महान देशों के माननीय
प्रधानमंत्रियों के भाषण सुने होंगे, उसे चीन और भारत में फर्क समझ में आ गया होगा कि क्यों चीन शेर जैसा दबंग हैं और हम क्यों कायर गीदढ़ हैं।
हमारे माननीय प्रधानमंत्री अपने ही देश में अपने ही लोगों के बीच उस भाषा में बोले जिसे मात्र ३ प्रतिशत भारतीय समझते हैं, उनमें वह साहस शायद नहीं है कि उस भाषा में बोल सकें जिसे लगभग पूरा देश समझता है। वहीं चीनी प्रधानमंत्री उस भाषा में बोले जिसे भारत में कुछ गिने चुने लोग ही समझते होंगे- यह है राष्ट्रप्रेम और नैतिकता की राष्ट्रीय दबंगई कि दूसरे के देश में, अपरिचित लोगों में भी अपनी मां का सम्मान करना और खनक इतनी कि हमारे नीति नियंताओं की कायरता और बढ़ गई और हमारे देश की अस्मिता पर चोट करने वाली हिमाकत को मात्र एक घटना कह कर लीपा पोती खुद ही कर दी।
वाह मेरे देश- कहीं पर गुरु अर्जन देव जी, तेगबहुदुर जी , गोबिंद सिहं जी की पूरी की पूरी गुरु परंपरा की पवित्र आत्माएं मुंह छिपाकर शर्मिंदा हो रही होंगी कि हम इनके लिए कुर्बान हुए थे ।
काश हमारे जैसे हिन्दी प्रेमियों को मौत आ जाए और हम और अपने देश की . अपनी भाषा की
और अपनी नौकरी की और अपमानजनक छीछालेदर देखने से बच जाएं।
हे भगवान- तुम इन्हें कभी माफ मत करना क्योंकि ये सब जानते हैं कि ये क्या कर रहे हैं??
डॉ राजीव रावत
(निजी विचार, सरकारी दायित्वों से अलग)