दोस्तो मेरा नाम अंकिता हैं और मैं मेरे घेर मैं सबके साथ छुड़ाई कर चुकी
हो मुझे मेरे घर मैं और ससुराल मैं भी सबसे छुड़ाई हूआमैं पूरी सोलह साल
की हो चुकी और मैं औरत मर्द के रिश्ते को समझती थी. एक बार पापा को मम्मी
को छोड़ते देखा तू इतना मज़ा आया की रोज़ देखने लगी. मैं पापा की छुड़ाई
देख इतना मस्त हुई थी की अपने पापा को फंसानॠका जाल बुन ने लगी और आख़िर
एक दिन कामयाबी मिल ही गयी. पापा को मैने फँसा ही लिया. अब जब भी मौक़ा
मिलता, पापा की गोद मैं बैठ उनसे चूचियाँ दबवा दबवा मज़ा लेती. पैर अभी
तक केवल चूचियों को ही दबवा पाई थी, पूरा मज़ा नही लिया था. मेरे मामा की
शादी थी इसलिए मम्मी अपने मयक़े जा रही थी. रात मैं पापा ने मुझे अपनी
गोद मैं खड़े लंड पे बिठाकर कहा था बेटी कल तेरी मम्मी चली जाएगी फिर
तुझे कल पूरा मज़ा देकर जवान होने क मतलब बताएँगे. मैं पापा की बात सुन
ख़ुश हो गयी थी. पापा अब अपने बेडरूम की कोई ना कोई विंडो खुली रखते थे
जिससे मैं पापा को मम्मी को छोड़ते देख सकूँ. ऐसा मैने ही कहा था. फिर उस
रात पापा ने मम्मी को एक कुर्सी पैर बिठाकर उनकी छूट को छाटकार दो बार
झाड़ा और फिर 3 बार हचाक कर छोड़ा फिर दोनो सो गाये. अगले दिन मम्मी को
जाना थाआज मम्मी ज्जा रही थी पापा ने मेरे कमरे मैं आ मेरी चूचियों को
पकड़कर दो टीन बार मेरे हूत चूमे और लंड से छूट दबा कहा की तुम्हारी
मम्मी को स्टेशन छ्छोड़कर आता हून फिर आज रात तुमको पूरा मज़ा देंगे. मैं
बड़ी ख़ुश थी. पापा चले गाये तू मैं घर मैं अकेली रह गयी. मैं अपनी चड्डी
उतर पापा की वापसी का इंतेज़र कर रही थी. मैं सोचा की जब तक पापा नही आते
अपनी छूट को पापा के लंड के लिए उंगली से फैला लून. तभी किसी ने दरवाज़ा
खटखटाया. मैने छूट मैं उंगली पेलते हुवे पूच्हा, “कौन है” मैं हून उमेश.
उमेश का नठसुन मैं गुड़गूदी से भर गयी. उमेश मेरा 20 य्र्स. का पड़ोसी
था. वा मुझे बड़े दीनो से फासना छह रहा था पैर मैं उसे लाइन नही दे रही
थी. वा रोज़ मुझे गंदे गंदे इशारे करता था और पास आ कभी कभी चूचि दबा
देता और कभी गांड पैर हाथ फैर कहता की रानी बस एक बार चखा दो. आज अपनी
छूट मैं उंगली पेल मैं बेताब हो गयी थी. आज उसके आने पैर इतनी मस्ती
छ्छाई की बिना चड्डी पहने ही दरवाज़ा खोल दिया. मुझे उसके इशारो से पता
चल चक्का थठकी वा मुझे छोड़ना चाहता है. आज मैं उससे छुड़वाने को तैइय्यर
थी. आज सुबह ही पापा ने मम्मी को चेर पैर बिठाकर छूट चटकार छोड़ा था.
मम्मी के भाई की शादी थी इसलिए वा एक सप्ताह के लिए गयी थी. पापा ने कहा
था की आज पूरा मज़ा देंगे. इसके पहले पापा ने कई बार मेरी गाड्राई
चूचियों को दबाकर मज़ा दिया था. मैं घर मैं अकेली चड्डी उतरकर अपनी छूट
मैं उंगली पैल्कर मज़ा ले रही थी जिस से जब पापा का मोटा लंड छूट मैं जाए
तू र्द ना हो. उमेश के आने पैर सोचा की जब तक पापा नही आते तब तक क्यों
ना इसी से एक बार छुड़वकर मज़ा लिया. यही सोचकर दरवाज़ा खोल दिया.
मैने जैसे ही दरवाज़ा खोला उमेश फ़ौरन अंदर आया और मुझे देखकर ख़ुश हो
मेरी चूचियों को पकड़कर बोला, “हाए रानी बड़ा अच्छा मौक़ा है.” मैं उसकी
हरकत पैर सँसना गयी. उसने मेरी चूचियों को छ्छोड़कर पलटकर दरवाज़ा बंद
किया और मुझे अपनी गोद मैं उठा लिया और मेरी दोनो चूचियों को मसलते हुवे
मेरे हूँतो को चूसने लगा और बोला, “हाए रानी तुम्हारी चूचियों तू बहुत
टाइट हैं. हाए बहुत तड्पया है तुमने रानी आज ज़रूर छोঠँगा.” हाए भगवान दो
पापा आ जाएँगे. “डरो नही मेरी जान बहुत जल्दी से छोड़ लूंगा. मेरा टा है
दर्द नही होगा.” वा मेरी गांड सहला बोला, “हाए चड्डी नही पहनी है, यह तू
बहुत अच्छा है.” मैं तू अपने पापा से छुड़वाने के जुगाड़ मैं ही नंगी
बैठी थी पैर यह तू एक सुनहरा मौक़ा मिल गया था. मैं पापा से छुड़वाने के
लिए पहले से ही गरम थी. जब उमेश मेरी चूचियों और गालो को मसलने लगा तू
मैं पापा से पहले उमेश से मज़ा लेने को बेठार हो गयी. उसकी छ्छेद छ्छाद
मैं मज़ा आ रहा था. मेरी छूट पापा का लंड खाने से पहले उमेश का लंड खाने
को बेताब हो गयी. मैं अपनी कमर लचकाती बोली, “हाए उमेश जो करना हो जल्दी
से कर लो कहीं पापा ना आ जाए.” मैं पागल होती बोली तू उमेश मेरा इशारा पा
मुझे बेड पैर लिटा अपनी पंत उतरने लगा. नंगा हो बोला, “रानी बड़ा मज़ा
आएगा. तुम एकदम तैइय्यर माल हो. देखो मेरा लंड छ्होटा है ना.”
उसने मेरा हाथ अपने लंड पैर रखा तू मैं उसके 4 इंच के खड़े लंड को पकड़
मस्त हो गयी. इसका तू मेरे पापा से आधा था. मैं उसका लंड सहलती बोली,
“हाए राम जो करना है जल्दी से कर लो.” उमेश के लंड पकड़ते ही मेरा बदन
टापने लगा. पहले मैं दार्र रही थी पैर लंड पकड़ मचल उठी. मेरे कहने पैर
वा मेरी टॅंगो के बीच आया और मेरी कसी कुँवारी छूट पैर अपना छ्होटा लंड
रख धक्का मारा. सूपड़ा कुच्छ से अंदर गया. फिर 3-4 धक्के मारकर पूरा ल
अंदर पेल दिया. कुच्छ देर बाद उसने धीरे धीरे छोड़ते हुवे पूच्हा, “मेरी
जान दर्द तू नही हो रहा है. मज़ा आ रहा है ना” “हाए मारो धक्के मज़ा आ
रहा है.” मेरी बात सुन वा तेज़ी से धक्के मरने लगा. मैं उससे छुड़वते
हुवे मस्त हो रही थी. उसकी छुड़ाई मुझे जन्नत की सैरकरा रही थी. मैं नीचे
से गांड उचकाती सीसियते हुवे बोली, “हाए उमेश ज़ोर ज़ोर से छोड़ो
तुम्हारा लंड बहुत छ्होटा है. ज़रा ताक़त से छोड़ो राजा.” मेरी सुन उमेश
ज़ोर ज़ोर से छोड़ने लगा. उसका छ्होटा लंड सक्साकक मेरी छूट मैं आ जा रहा
था. मैं पहली बार छुड़ रही थी इसलिए उमेश के छ्होटे लंड से भी बहुत मज़ा
आ रहा था. वा इसी तरह छोड़ते हुवे मुझे जन्नत का मज़ा देने लगा. 10 मिनिट
बाद वा मेरी चूचियों पैर लुढ़क गया और कुत्ते की तरह हाफ़्ने लगा. उसके
लंड से गरम, गरम पानी मेरी छूट मैं गिरने लगा. मैं पहली बार चूड़ी थी और
पहली बार छूट मेनलॅंड की मलाई गिरी थी इसलिएमज़े से भर मैं उससे चिपक
गयी. मेरी छूट भी तपकने लगी. कुच्छ देर हमलोग अलग हुवे.
वा कपड़े पहन चला गया. मेरी छूट चिपचिपा गयी थी. उमेश मुझे छोड़कर चला
गया पैर उसकी इस हिम्मत भारी हरकत से मैं मस्त थी. उसने छोड़कर बता दिया
की छुड़वाने मैं बहुत मज़ा है. उमेश ठीक से छोड़ नही पाया था, बस ऊपर से
छूट को रग़ाद कर चला गया था पैर मैं जान गयी थी की छुड़ाई मैं अनोखा मज़ा
है. उसके जाने पैर मैने चड्डी पहन ली थी.. मैं सोच रही थी की जब उमेश के
छ्होटे लंड से इतना मज़ा आया है तू जब पापा अपना मोटा तगड़ा ठड पेलेंगे
तू कितना मज़ा आएगा. उमेश के जाने के 6-7 मिनिट बाद ही पापा स्टेशन से
वापस आ गाये. वा अंदर आते ही मेरी कड़ी कड़ी चूचियों को फ्रॉक के ऊपर से
पकड़ते हुवे बोले, “आओ बेटी अब हम तुमको जवान होने का मतलब बताएँगे.” “ओह
पापा आप ने तू कहा था की रात को बताएँगे.” “अरे अब तू मम्मी चली गयी हैं
अब हर समय रात ही है. मम्मी के कमरे मैं ही आओ. क्रीम लेती आना.” पापा
मेरी चूचियों को मसलते हुवे बोले. मैं उमेश से छुड़वर जान ही चुकी थी.
मैं जान गयी की क्रीम का क्या होगा पैर अनजान बन बोली, “पापा क्रीम
क्यों” “अरे लेकर आओ तू बताएँगे.” पापा मेरी चूचियों को इतनी कसकर मसल
रहे थे जैसे उखाड़ ही लेंगे. मैं क्रीम और टवल ले मम्मी के बेडरूम मैं
फुँछी. मैं बहुत ख़ुश थी. जानती थी की क्रीम क्यों मंगाई है. उमेश से
छुड़ने के बाद क्रीम का मतलब समझ गयी थी. पापा मुझे लड़की से औरत बनाने
के लिए बेकरार थे. मैं भी पापा का मोटा केला खाने क तड़प रही थी. कमरे
मैं पहुँची तू पापा बोले, “बेटी क्रीम तबले पैर रखकर बैठ जाओ.”
मैं गुड़गूदते मॅन से चेर पैर बैठ गयी तू पापा मेरे पीच्े आए और अपने
दोनो हाथ मेरी कड़ी चूचियों पैर लाए और दोनो को प्यार से दबाने लगे. पापा
के हाथ से चूचियों को दबवाने मैं बड़ा मज़ा आ रहा था. तभी पापा ने अपने
हाथ को गले की ऊवार से फ्रॉक के अंदर डाल दिया और नंगी चूचियों को दबाने
लगे. मैं फ्रॉक के नीचे कुच्छ नही पहने थी. पापा मेरी कड़ी कड़ी चूचियों
को मूतही मैं भरकर दबा रहे थे साथ ही दोनो घुंडियों को भीमसल रहे थे. मैं
मस्ती से भारी मज़ा ले रही थी. तभी पापा ने पूछा, “क्यों बेटी तुमको
अच्छा लग रहा है” हाए पापा बहुत मज़ा आ रहा है. “इसी तरह कुच्छ देर बैठो.
आज तुमको शादी से पहले ही शादी वाला मज़ा देंगे. अब तुम जवान हो गयी हो.
हाए तुम लेने लायक हो गयी हो. आज तुमको ख़ूब मज़ा देंगे.”
आााहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ऊऊऊऊऊहह्छ पाआआपाआा. “जब मैं इस तरह से तुम्हारी
चूचियों को दबाता हून तू तुमको कैसा लगता है” पापा मेरी कचूचियों को
नीचोड़कर बोले तू मैं उतावाली हो बोली, “हाए पापा ऊह् ससीए इस तरह तू
मुझे और भी अच्छा लगता है.” “जब तुम कपड़े उतरकर नंगी होकर मज़ा लोगी तू
और ज़्यादा मज़ा आएगा. हाए तुम्हारी चूचियों छ्छोटी हैं.” “पापा मेरी
चूचियाँ छूती क्यों हैं. मम्मी की तू बड़ी हैं.” “घबरओ मत बेटी. तुम्हारी
चूचियों को भी मम्मी की तरह बड़ी कर दूँगा. हाए बेटी कपड़े उतरकर नंगी
होकर बैठो तू बड़ा मज़ा आएगा.” “पापा चड्डीभी उतर डून.” मैं अनजान बनी
थी.” “हन बेटी चड्डी भी उतर दो. लड़कियों का असली मज़ा तू चड्डी मैं ही
होता है. आज तुमको सारी बात बताएँगे. जब तक तुम्हारी शादी नही होती तब
मैं ही तुमको शादी वाला मज़ा दूँगा. तुम्हारे साथ मैं ही सुहाग्रात
मानौंगा. तुम्हारी चूचियाँ बहुत टाइट हैं. बेटी नंगी हो.” पापा फ्रॉक के
अंदर हाथ डाल दोनो को दबाते बोले.
जब पापा ने मेरी चूचियों को मसलते हुवे कपड़े उतरने को कहा तू यक़ीन हो
गया की आज पापा के लंड का मज़ा मिलेगा. मैं उनके लंड को खाने की सोच
गुड़गूदा गयी थी. मैं मम्मी की रंगीन छुड़ाई को याद करती कुर्सी से नीचे
उतरी और कपड़े उतरने लगी. कपड़े उतर नंगी हो मम्मी की तरह ही पैर फैला
कुर्सी पैर बैठ गयी. मेरी छ्छोटी छूती चूचियाँ तनी थी और मुझे ज़रा भी
शरम नही लग रही थी. मेरी जांघो के बीच रोएदार छूट पापा को सॉफ दठ रही थी.
पापा मेरी गाड्राई छूट को गौर से देख रहे थे. छूट का गुलाबी छ्छेद मस्त
था. पापा एक हाथ से मेरी गुलाबी काली को सहलाते बोले, “हाय राम बेटी
तुम्हारी तू जवान हो गयी है.” क्या जवान हो गयी है पापा. “अरे बेटी
तुम्हारी छूट.” पापा ने छूट को दबाया. पापा के हाथ से छूट दबाए जाने पैर
मैं सँसना गयी. मैं मस्ती से भारी अपनी छूट को देख रही थी. तभी पापा ने
अपने अंगूठे को क्रीम से चुपद मेरी छूट मैं डाला. वा मेरी छूको क्रीम से
चिक्नी कर रहे थे. अंगूठा जाते ही मेरा बदन गंगाना गया. तभी पापा ने छूट
से अंगूठा बाहर किया तू उसपर लगे छूट के रस को देख बोले, “हाए बेटी यह
क्या है. क्या किसी से छुड़वकर मज़ा लिया है” मैं पापा के अनुभव से धक्क
से रह गयी. मैं घबराकर अनजान बनती बोली, “कैसा मज़ा पापा” “बेटी यहाँ कोई
आया था” नही पापा यहाँ तू कोई नही आया था. “तू फिर तुम्हारी छूट मैं यह
गढ़ा रस कैसा” मुझे क्या पता पापा जब आप मेरचूचियाँ मसल रहे थे तब
कुच्छगिरा था शायद. मैं बहाना बनती बोली. “लगता है तुम्हारी छूट ने एक
पानी छ्छोड़ दिया है. लो टवल से सॉफ कर लो.”
पापा मुझे टवल दे चूचियों को मसलते हुवे बोले. पापा से टवल ले अपनी छूट
को रग़ाद राग़ादकार सॉफ किया. पापा को उमेश वाली बात पता नही चलने दी.
मैं चूचियाँ मसल्वाते हुवे पापा से खुलकर गंदी बाते कर रही थी ताकि सभी
कुच्छ जान सकूँ. “बेटी जब तुम्हारी चूचियों को दबाता हून तू कैसा लगता
है” “हाए पापा तब जन्नत जैसा मज़ा मिलता है.” “बेटी तुम्हारी छूट मैं भी
कुच्छ होता है” “हन पापा गुड़गूदी हो रही है.” मैं बेशरहो बोली.” ज़रा
तुम्हारी चूचियाँ और दबा लून तू फिर तुम्हारी छूट को भी मज़ा डून. बेटी
किसी को बताना नही नही पापा बहुत मज़ा है. किसी को नही पता चलेगा.” पापा
मेरी चूचियों को मसलते रहे और मैं जन्नत का मज़ा लेती रही. कुच्छ देर बाद
मैं तड़प कर बोली, “ऊओहह्छ पापा अब बंद करो चूचियाँ दबाना और अब अपनी
बेटी की छूट का मज़ा लो.” अब मैं भी पापा के साथ खुलकर बात कर रही थी. इस
समय हुंदोनो बाप-बेटी पति-पत्नी थे. पापा म
री चूचियों को छ्छोड़कर मेरे सामने आए. पापा का मोटा लंड खड़ा होकर मेरी
आँख के सामने फूदकने लगा. लंड तू पापा का पहले भी देखा था पैर इतनी पास
से आज देख रही थी. मेरा मॅन उसे पकड़ने को लालचाया तू मैने उसे पकड़ लिया
और दबाने लगी. छूट पापा के मस्त लंड को देख लार टप्कने लगी. मैं पापा के
केले को पकड़कर बोली, “श पापा आपका लंड बहुत मोटा है. इतना मोटा मेरी छूट
मैं कैसे जाएगा”
अरे पगली मर्द का लंड ऐसा ही होता है. मोटे से ही तू मज़ा आता है. “पैर
पापा मेरी छूट तू छ्छोटी है.” “कोई बात नही बेटी. देखना पूरा जाएगा.”
“पैर पापा मेरी फ़टट जाएगी.” अरे बेटी नही फतेगी. एक बार छुड़ जाओगी तू
रोज़ छुड़वाने के लिए तदपॉगी. अपने पैर फैलाकर छूट खोलो पहले अपनी बेटी
की छूट छत ले फिर छोदुँगा. मैं समझ गयी की पापा मम्मी की तरह मेरी छूट को
चटना चाहते हैं. मैने जब मम्मी को छूट चटवाते देखा था तभी से स रही थी की
काश पापा मेरी छूट भी छत्ते. अब जब पापा ने छूट फैलने के लिए तू फ़ौरन
दोनो हाथ से छूट की दरार को छिड़ॉरकर खोल दिया. पापा घुटने के बल नीचे
बैठ गाये और मेरी रोएदार छूट पैर अपने हूनत रख चूमने लगे. पापा के चूमने
पैर मैं गंगाना गयी. दो चार बार चूमने के बाद पापा ने अपनी जीभ मेरी छूट
के चारो ऊवार चलते हुवे चटना शुरू किया. वा मेरे हल्के हल्के बॉल भी चाट
रहे थे. मुझे ग़ज़ब का मज़ा आ रहा था. पापा छूट छाऍते हुवे तीत (क्लिट)
भी छत रहे थे.. मैं मस्त थी. उमेश तू बस जल्दी से छोड़कर चला गया था.
चूचि भी नही दबाया था जिससे कुच्छ मज़ा नही आया था. लेकिन पापा तू चालक
खिलाड़ी की तरह पूरा मज़ा दे रहे थे. पापा ने छूट के बाहर चाट छाटकार
गीला कर दिया था. अब पापा छूट की दरार मैं जीभ चला रहे थे. कुच्छ देर तक
इसी तरह करने के बाद पापा ने अपनी जीभ मेरी गुलाबी छूट के लास लसाए छ्छेद
मैं पेल दिया. जीभ छ्छेद मैं गयी तू मेरी हालत राब हो गयी. मैं मस्ती से
तड़प उठी. पहली बार छूट छ्छाती जा रही थी. इतना मज़ा आया की मैं नीचे से
छूटड़ उच्चालने लगी. कुच्छ देर बाद पापा छ्ात्कार अलग हुवे और अपने खड़े
लंड को मेरी छूट पैर लगा लंड से छूट रग़ादने लगे.
छूट की चटाई के बाद लंड की रागदाइ ने मुझे पागल बना दिया और मैं
उतावलेपान से पापा से बोली, “पापा अब पेल भी दो मेरी छूट मैं. आअहह्ह्ह
ऊऊहह्छ.” पापा ने मेरी तड़पति आवाज़ पैर मेरी चूचियों को पकड़कर कमर को
उठाकर ढाका मारा तू करारा शॉट लगने पैर पापा का आधा लंड मेरी छूट मैं
अरास गया. पापा का मोटा और लंबा लंड मेरी छ्छोटी छूट को ककड़ी की तरह
चीरकर घुसा था. आधा जाते ही मैं दर्द से तदपकर बोली, “आआाहह्ह्ह्ह्ह
ठऊऊईई ममम्म्माररर्र गयी पापा. धीरे धीरे पापा बहुत मोटा है पापा छूट
फ़टट गयी.” पापा का मोटा और लंबा लंड मेरी छूट मैं कसा था. मेरे करहने
पापा ने धक्के मारना बांडकर मेरी चूचियों को मसलना शुरू किया. अब मज़ा
आने लगा. 6-7 मिनिट बाद दर्द ख़तम हो गया. अब पापा बिना रुके धक्के लगा
रहे थे. धीरे धीरे पापा का पूरा लंड मेरी छूट की झिल्ली फदता हूवा घुस
गया. मैं दर्द से छ्त्पटाने लगी. ऐसा लगा जैसे छूट मैं चाकू(नाइफ) ठसा
है. मैं कमर झटकते बोली, “हाए पापा मेरी फ़टट गयी. निकालो मुझे नही
छुड़वाना.” पापा अपना लंड पेलते हुवे मेरे गाल चाट रहे थे. पापा मेरे गाल
चाट बोले, “बेटी रो मत अब तू पूरा चला गया. हर लड़की को पहली बार दर्द
होता है फिर मज़ा आता है.”
कुच्छ देर बाद मेरा करहना बंद हूवा तू पापा धीरे धीरे छोड़ने लगे. पापा
का कसा कसा आ जा रहा था. अब सच ही मज़ा आ रहा था. अब जब पापा ऊपर से
धक्का लगते तू मैं नीचे से गांड उच्चलती. उमेश तू केवल ऊपर से राग़ादकार
छोड़कर चला गया था. असली छुड़ाई तू पापा कर रहे थे. पापा ने पूरा अंदर तक
पेल दिया था. पापा का लंड उमेश से बहुइट मज़ेदार था. जब पापा शॉट लगते तू
सूपड़ा मेरी बच्चेदानी तक जाता. मुझे जन्नत के मज़े से भी अधिठमज़ा मिल
रहा था. तभी पापा ने पूच्हा, बेटी अब दर्द तू नही हो रही है “हाए पापा अब
तू बहुत मज़ा आ रहा है. आअहह्छ पापा और ज़ोर ज़ोर से छोड़िये.” पापा इसी
तरह 20 मिनिट तक छोड़ते रहे. 20 मिनिट बाद पापा के लंड से गरम गरम मलाइडर
पानी मेरी छूट मैं गिरने लगा. जब पापा का पानी मेरी छूट मैं गिरा तू मैं
पापा से चिपक गयी और मेरी छूट भी फालफ़लकार झड़ने लगी. हुंदोनो साथ ही
झाड़ रहे थे. पापा ने फिर मुझे रात भर छोड़ा. सुबह 12 जे सोकर उठे तू
मैने पापा से कहा, “पापा आज फिर छोड़ेंगे” अरे मेरी जान अब मैं बेटिछोड़
बन गया हून. अब तू तुझे रोज़ ही छोदुँगा. अब तू मेरी दूसरी बीवी है पैर
पापा जब मम्मी आ जाएँगी तू अरे मेरी जान उसे तू बस एक बार छोड़ दूँगा और
वा ठंडी हो जाएगी फिर तेरे कमरे मैं आ जया करूँगा. मैं फिर पापा के साथ
रोज़ सुहाग्रात मानने लगी.श्याद कोई आ रहा अहन मैं बादमईन स्टोरी लिखूँगी
बाक़ी मुजेह माइल केरना कसिए लगी स्टोरी
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बहन की दोस्त के साथ सेक्स के मज़े लिये
Posted May 5, 2008 by raj007007
Categories: हिंदी सेक्स कहानिया ¤
बहन की दोस्त के साथ सेक्स के मज़े लिये
मैं जो स्टोरी आपको बताने जा रहा हूं वो रियल तो है हि, साथ ही ये घटना
मेरे साथ सिर्फ़ 6 दिन पहले हुई।
तो हुआ ये के मैं अपने PC पर बैठा BF देख रहा था, तभि कुछ देर में मेरे
पापा आ गये, मैने सब बंद कर दिया। बोले के चलो सबको आज घुमा कर लाते हैं।
मैने सोचा अगर मैं गया तो सारा मज़ा बेकार हो जायेगा, इसलिये मैने जाने से
मना कर दिया। सब चले गये। मैं घर में अकेला था। मैने फिर से BF स्टार्ट
कर दी। तभी मेरी बहन की दोस्त उसे पूछने आ गयी के मेरी सिस कहां है। मैने
कहा के सब बाहर गये हैं। तो उसने मुझसे पूछा के तुम क्या कर रहे हो। मैने
कहा के PC पर बैठा था। तो बोली के मैं अपना mail चेक कर लूं। मैने हां कह
दिया। मैने कहा के मैं ज़रा toilet से आता हूं। जब मैं आया तो देखता हूं
के मैने realplayer बंद नहीं किया था और उषहा सब कुछ देख रही थी। मैं उसे
खिड़की से देखता रहा। उसका चेहरा computer की तरफ़ होने से उसने पीछे नहीं
देखा के मैं खड़ा हूं। वो सब कुछ देख रही थी और बहुत गरम हो चुकी थी। इतने
में उसने अपने मम्मे ऊपर से दबाने शुरु कर दिये। मेरा लंड खड़ा हो चुका था
और मैं तो पक्का फ़ैसला कर चुका था के हो ना हो, ये आज मुझसे चुद कर ही
जायेगी। फिर मैं थोड़ा और पीछे चला गया और हल्की सी आवाज़ निकली। वो समझ
गयी के मैं आ रहा हूं। उसने player बंद कर दिया। मैं आया तो उससे कहा के
mail चेक कर लिये तो बोली के हां कर लिये। फिर मैने हिम्मत बांध कर उससे
कह ही दिया के उषहा तुम जो देख रही थी वो मैं पीछे खिड़की के पास खड़ा होकर
देख रहा था। तो वो शरमा गयी और कुछ नहीं बोली। मैं समझ गया के मामला फ़िट
हो गया। मैने दोबारा BF स्टार्ट कर दी। अब हम दोनो देखने लगे। वो तो गरम
हो ही चुकी थी। तभी मैने कहा के देखती ही रहोगी या फिर। तो वो हल्की सी
मुस्कुराहट लायी। मैने तभी बिना टाइम वेस्ट किये उसके जांघ पर हाथ रख
दिया। उसने मेरे हाथ को पकड़ लिया। फिर मैं अपने हाथ को धीरे धीरे उसके
ऊपर की तरफ़ लाने लगा। उसके मम्मे को दबाना शुरु किया। फिर उसे किस करने
लगा। फिर मैने उसका एक हाथ अपने लंड पर रख दिया। वो उसके साथ खेलने लगी।
करीब 5 मिनट तक हम किस करते रहे। फिर मैं उसे बेड पर ले आया और धीरे-धीरे
उसके कपड़े उतारने लगा। पहले उसका सूट उतारा तो उसके ब्रा दिखने लगी। मैने
उसकी ब्रा भी उतार दी। उसके मुंह से अजीब अजीब आवाज़ें निकलने लगी मानो कह
रही हो के मेरी चूत को जल्दी शांत करो। उसके दूध से भरे मम्मे देख कर मैं
दंग रह गया। मैने उसको चाटना शुरु कर दिया। तो बोली के पहले कपड़े तो उतार
लो। फिर मैने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और सलवार उतार दी। उसने काले
रंग की पैंटी पहनी थी। फिर मैने उसे मेरे कपड़े उतारने को कहा तो उसने
पहले मेरी पैंट फिर कच्छा उतारा।
मैने बनियान में था। बनियान मैने खुद उतार दी। अब हम दोनो बिल्कुल नंगे
थे। पहले मैने उसकी चूत चाटनी शुरु कर दी। तो वो बोली के ये क्या कर रहे
हो। मैने कहा के असली मज़ा तो इसी में है। उसके मुंह से सिसकारियां निकलने
लगी। कहने लगी, खा जाओ, फाड़ डालो मेरी चूत को और aauuuuuuurrrrrr
zorrrrrrrrseeee. ..aaaaaaahhhhhhh hhhh hmmmm….फिर मैने अपना 6′4″ इंच
का लंड उसके हाथ में दे दिया और कहा के इसे चाटो। उसने फ़टाफ़ट अपने मुंह
में ले लिया और चाटने लगी। मेरे लंड से हल्का हल्का पानी निकलने लगा।
मैने कहा इसे पी जाओ। वो पीकर बोली के खट्टा खट्टा है। फिर मैं उसके
पैरों के पास गया और उसकी टांगें फ़ैला दी और उससे कहा के अपनी चूत का छेद
खोलो। उसने अपने चूत का छेद और चौड़ा कर दिया। फिर मैने अपना लंड जैसे ही
उसकी चूत पर रखा तो उसके मुंह से आआआआआह्हह्हह्हह्हह्हह्ह की आवाज़ निकली।
मैने एक झटका दिया और आधा लंड उसकी चुत में अटक गया। तो वो चिल्ला पड़ी और
बोली के बाहर निकालो प्लीज बहुत दर्द हो रहा है। मैं कुछ देर हल्के हल्के
झटके देता रहा उसकी चूत से खून निकलने लगा, मगर उसने नहीं देखा। फिर जब
वो पूरे जोश में आ गयी तो मैने 1 झटका और दिया और पूरा 6′4″ का मेरा लंड
उसकी चूत में गया और वो फिर से चिल्लायी। मगर मैने उसके लिप्स पर अपने
लिप्स रख दिये और उसे चिल्लाने नहीं दिया। फिर वो और गरम हो गयी। उसके
मुंह से आवाज़ निकली और घुसाओ और ज़ोर से मैने अपनी स्पीड और बढ़ा दी अब वो
भी अपने चूतड़ उठा उठा कर साथ देने लगी और हमारी आवाज़ें निकलती रहीं
आआअह्हह्हह्हह्हह म्मम्मम्मम्मम्मम्ममहये मार डाला।त्तत्तूऊऊम्मम्मम
बाआआहूऊत्तत्तत्त आआआस्सछह्हह्हहीईईईईए हूऊऊऊऊओ और ज़ोर से। उसका पूरा छेद
मैने फ़ाड़ डाला। करीब आधे घंटे बाद उसका पानी निकल गया। मगर मैं उसे 5
मिनट तक और चोदता रहा फिर मेरा भी पानी निकल गया। मैने अपना सारा cum
उसके मुंह में डाल दिया और उसे पिला दिया। फिर मैने उसे अपना लंड चाटने
को कहा तो बोली के अब चुद तो मैं गयी हूं, अब क्या। तो मैने कहा के
दोबारा मेरा लंड खड़ा करो। हम दोनो 69 की position में हो गये। मेरा लंड
फिर खड़ा हो गया। मैने अब उसे घोड़ी बना दिया और पीछे से उसकी गांड में 1
हल्का सा झटका दिया और उसकी तो मानो जान ही निकल गयी हो मगर मैं हटा
नहीं। थोड़ी देर ऐसे ही रहा। फिर थोड़ी देर बाद 1 ज़बरदस्त झटका दिया और
उसका मुंह अपने हाथ से बंद कर दिया। उसकी हालत तो ऐसी हो गयी मानो मरने
ही वाली हो। फिर मैं ऐसे ही झटके मारता रहा। फिर वो भी मज़े लेने
लगी,,,,और आआआआआआह्हह्हह्हह्हह्हह्हह आआआआआआअह्हह्हह्हह्हह्हह्हह घुसाओ
फ़ाड़ो और अपना पूरा बम्बू मेरी चूत में घुसा दूऊऊऊऊ।।।।और ज़ोर से। करीब 10
मिनट बाद मैने पानी छोड़ दिया। और सारा cum उसकी गांड में छोड़ दिया। फिर
मैं उसे किस करता रहा और थोड़ी देर हम ऐसे ही लेटे रहे। फिर उस दिन से
मैने उसे चोदने का सिलसिला रोज़ शुरु कर दिया। जो शायद अब उसकी शादी पर ही
खतम हो। I hoped you all guys & gals too liked this story
प्रस्तुतकर्ता raj 007 पर 1:45 AM
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लाला की दुकान
Posted May 5, 2008 by raj007007
Categories: हिंदी सेक्स कहानिया ¤
लाला की दुकान
लाला किशाराम की एक छोटीसी राशन की दुकान थी.वह
एक ४० साल का हट्ताकत्ता आदमी था और बड़ा रंगीन्मिजाज़ था.उसका
मस्ताना लंड हमेशा ठिठोरे मारता था.लेकिन उसकी बदकिस्मती यह थी की
उसकी बीवी चंपा एक बहोठी मोंटी और ठंडी औरत थी.लाला को रंडीयों
के पास जाना अचछा नही लगता था और मूठ मारने भी
उसे पसंद नही हींदी कहानीयां
था.ईसलिए उसने अपने लंड की प्यास बुझाने का एक अलग ही तरीका निकल
लिया था.वह नौकारानियों को चोदकर अपना काम चला लेता था.अभीतक
उसने कई नौकरानियों को चोदा था.उसमे नौजवान लड़कियों से लेकर अधेड़
उम्र की औरतें भी शमिल थी.उसकी बीवी के गुस्सैल स्वाभाव के करण
कोई भी नौकरानी ज्यादा दीन नही टिकती थी और लाला को नाई नाई चूत
का मजा मिलाता था.काली कलूटी ही सही लेकीन काम तो चल जाता था.
पिचले दास दिनों से घर्पर कोई नौकरानी काम पर नही थी
इसलिए लाला बड़ा बेचैन था.उसका लंड बाहोठी तड़प रह था.चंपा तो उस
से चुंचियां मसल्वाकर और छूत चट्वाकर झर जाती थी.उसको
चुदाई मे कोई रस नही था और उसकी तोम्द बड़ी होने के करण चुदाई ढंग
से हो भी नही पाती थी.उसे पता था की लाला नौकारानियों को चोदता
हैं लेकिन उसे कोई एतराज नही था क्योंकी लाला उस की चूत चाटकर उसे
खुश कर देता था.पिचले दास दिनों मे उस ने २-३ बार बड़ी मुश्किल से
ही सही जैसे तैसे चंपा को चोदकर अपनी तड़प कुछ कम करने की
कोशिश जरूर की थी लेकिन उल्टे उसकी प्यास और बढ गयी थी.उसकी दुकान मे
कई लडकियां और औरतें राशन लेने आती थी.वह उनकी सूरतें
देखकर और कपडों के उपर से ही उनके शारीर का नाप तौल करके और सामान
और रुपयों के लें दें के समय उनको स्पर्श करके अपना दील बहला लेता
था.लेकिन आजतक आईएस से आगे बढ़ाने की उसकी हिम्मत नही हुई थी.
ना जाने नै नौकरानी कब मिलेगी आईएस सोच मे डूबा वह दुकान मे
बैठा था तभी एक बुद्धू सा दिखने वाला मरियल नौजवान उस के पास
आया और उसने पुछा की क्या आपही लाला किशन राम हैं तो लाला ने
हाँ भर दी.फिर उसने बताया की उसका नाम बुद्धुराम हैं और वह लाला
के गों से ही आया है.उसकी माँ लाला को जानती थी और उसने नौकरी
के लिए उसे लाला के पास भेजा था.उसे देखकर लाला को उसे नौकरी पर
रखने कोई इच्छा नही थी.लेकीन जब बातों ही बातों मे उसने बताया की
उसकी बीवी भी उसके साथ यहाँ आयी हैं और वह भी घर का काम कर
लेगी तो लाला की आँखें चमक उठी.उसने तुरंत हाँ भर दी और उसे
तुरंत बीवी को लेकर आने ए लिए कहा.बुद्धेराम उल्टे पांव लौटकर
अपनी बीवी को ले आया,जिसे उसने बस्स स्टैंड पर छोड़ा था.उसका नाम उसने
बेला बताया था.
जब बुद्दुराम लौटा तो उस के पीछे पीछे एक पुराणी सी मैली
घगारा चोली पहनी औरत ठुमकती चाल से आ रही थी.उसका बदन बहोत
कसा कसा था.उमर भी २०-२२ से ज्यादा नही लगती थी.उसे देखकर लाला
अपनी जगह पर उठ खड़ा हुआ.उसके मुँह से लार टपकने लगी.उस औरत की
रंगर साम्वाली थी.उसने अपने हाथों मे कुहनियों तक चुदियाँ पेहें
रखी थी और पावों मे बड़ी पैन्जनिया थी जो चलते समय छान
छान बजती थी.चोली और घग्रा बदन पर जैसे कसा हुआ था इसलिए उसके
अगले और पिचले उभारों का आकार तुरंत नजरों मे आ रह था.उसकी
काले रेशमी बालों वाली लंबी चोटी उसके चुतादों पर लहरा रही
थी.लाला उसकी सूरत नही देख पाय था क्यूंकि उसने सर पर घूँघट लिया
हुआ था.लाला को पहली नजर मे ही वह औरत भा गयी थी और वह उसकी
सूरत देखने को बेताब था.बुद्धुराम ने जैसे लाला के मन की बात
भांप ली थी.उस ने बेला से कहा,“अरी शर्म मत.लालाजी मेरे तौ जैसे
ही हैं.यूएन से क्या पर्दा? चल घुम्घत खोल और पाय लाग इन के.हमे
काम पर रखकर बड़ा अहसान किया हैं इन्होने हम पर.”
अपने मरद की आज्ञा मानकर बेलने झिझकते हुए घुम्गत खोला
तो लाला का मुँह खुला ही रह गया.हाआआआआय् क्या मतवाली सुअर्ट थी
उसकी ! बड़ी बड़ी काली नशीली आँखें,तीखा नाक,उभरे गाल,सुर्ख
होंठ,लंबी गर्दन,बड़ी बड़ी चुंचियां,कासी कासी क़मर,भरी भरी
जाम्घें सब कुछ बड़ा मस्त था.ऐसी गजब की औरत लाला ने आजतक नही
देखी थी.उस के चेहेर पर एक एस*क्ष्य् सी मुस्कान थी और वह बिना लाज के अब
लाला को घुर रही थी.उस की इस अदा से लाला का रागीला दील पानी पानी
हो रह था.उस ने कनखियों से बुद्द्धुराम को देखा था लेकीन वह तो
इन बातों से जैसे बेखबर सा खड़ा था.लाला का हौसला बढ गया और
वह भी सीधे बेला को घूरने लगा.उसकी वासना मे डूबी नजर बेला के
एक एक अम्ग का जायजा लेने लगी.लाला तो पुराना खिलाडी था,उस ने तुरंत
भांप लिया की बेला खेली खायी औरत हैं और आसानी से उसके चंगुल
मे फँस सकती हैं.यह जानकार वह बड़ा खुश हुआ और मुस्कुराते हुए
बेला को घूरने लगा.बेला भी उसकी नजर भांप गयी थी और जवाब
मे वह भी मुस्कुरा दी.दोनो हरामियों ने एक दुसरे को पहचान लिया
था.
लाला को एक बात का बड़ा अचरज लग रह था की बेला जैसी
मस्तानी औरत बुद्धुराम के पल्ले कैसे पट गयी ! उस ने तुरंत उन् को दोनो
को घर ले गया और चंपा से उनका परिचय करवाया.फिर बेला को घर
पर छोड़कर वह बुद्धुराम के साथ दुकान लॉट आया.बुद्धुराम नाम की
तरह की भोला भला था.लाला ने कुछ ही देर मे उस से सब कुछ सच
उगलवा लिया.बुद्धुराम सिर्फ नाम का ही मर्द था.उसको मर्द और औरत के
संबंधों के बारे मे ज्यादा जानकारी ना थी और कोई खास लगाव भी
नही था.बेला जैसी औरत को खुश करना उसके बस की बात नही थी.वह तो
दुसरे कई मर्दों के साथ मजा लेकर अपना काम चलती थी.उसके
चाहनेवालों से तंग आकर्ही बुद्धुराम की माँ ने उसे गों छोड़ने की सलाह
दी थी.
वैसे बेला इस खेल की पुराणी खिलाडी थी.वह जब जवान हुई थी
यानी १३ की उमर से ही चुद्वा रही थी.वह अपने माँ के साथ लोगों के
गह्रों मे और खेतों मे काम पर जाती थी.माँ तो सीधी सदी थी लेकीन
बेला की चूत तो जवानी मे कदम रखते ही खुजलाने लगी थी.उसका बाप
बचपन मे ही मर गया था और उसको द्दंत्नेवाला कोई नही था.माँ की तो
उसके आगे एक ना चलती थी.वैसे उसे अपने चाहनेवालों से अच्छे रुपये
भी मिल जाते और घर का खर्च आसानी से चल रह था इसलिए माँ भी
जानकार अनजान बन रही थी.बेला खुदी बड़ी चुदाक्काद किस्म की लडकी
थी और मर्दों को पटना खूब जानती थी फिर मर्द तो ऐसी चुदाक्काद की
तलाश मे ही होते हैं.गों मे तो क्या बहार से भी लोग बेला को छोड़ने
आते थे.लेकीन इस वजह से उसकी बहोत बदनामी हो चुकी थी और उसकी
शादी हों लाघ्बघ असंभव था.इसलिए तंग आकर उसकी माँ ने उसे
बुद्धुराम जैसे अनाडी के पल्ले बंध दिया.बुद्धुराम की माँ के पास भी कोई
चारा नही था.उसकी शादी वह बेला से ना करवाती तो वह बेचारा कंवारा
ही
रह जाता.
बेला को सुहागरात मे ही पता चल गया था की उसका पति सुके काम
का नही था.उसकी लाख कोशिशों के बावजूद उसका पिदिसा लंड खड़ा नही
हो पाय था.हाथों से मसल कर जब उसके हाथ दुखने लगे तो उसने
लंड को मुँह लेकर खड़ा करने की कोशिश भी की थी लेकीन वह तुरंत झाड़
गया.बुद्धुराम शर्मिंदा होकर सोगया लेकीन बेला रातभर चूत मे
उंगली करते हुए सो नही पायी.पहले तो उसे बहोत गुस्सा आया लेकीन
जब उसने ठंडे दिमाग से सोचा.उसके लिए यह कोई परेशानिवाली बात नही
थी.उस के कई चोदु अपना लंड हाथ मे लेकर तैयार ही बैठे थे.तो
शादी के बाद भी उसका ग़ैर मर्दों से चुद्वाना बीए-दस्तूर जारी
रह.उसे चाहनेवालों से नए कपडे और रुपये भी मिल जाते थे.बुद्धुराम को
तो बेला से कोई शिक़ायत नही थी लेकीन उसकी माँ तंग आ चुकी
थी.पिचले दो महिनोस से बेला की सास ने हंगामा खड़ा कर दिया था इसलिए बेला
को मजबूरी से खुद को रोकना पड़ा था.फिर भी कभी कभार मौका मिलते
ही वह किसी ना किसी से चुद्वा लेटी थी.
लेकीन आफत तो तब आयी थी जब उसने गों के महाजन के कम उमर
लड़के को अपने जाल मे फंसा लिया था.पता चलने के बाद महाजन ने
उसकी सास को फटकार लगायी थी तब मजबूर होकर उसने बुद्धुराम से
गों छोड़ने की सलाह दी थी.चुदाक्काद बेला की चूत मे जैसे अंगार सी लगी
थी.रोज दो बार चुद्वानेवाली औरत को कभी कभार चुद्वाकर कैसे रह जाता ? उपर
से तिन दीन सफ़र के करण प्यास और भड़की थी.उपर से ट्रेन मे एक बुधे ने रात
मे उसकी चूत मे उंगली करके उसकी आग मे मानो घी दाल दिया था.इसलिए जब उसने
लाला के आंखों मे वासना के डोरे देखे थे तो वह सिहर उठी थी.वह जान गयी थी
की लाला उसपर फीदा हो चुका हैं और आसानी से जाल मे फँस सकता हैं.लेकीन
लाला जैसा सेठ आदमी उसके काम का है या नही इस बारे मे उसे शक ही
था,क्योंकी सेठ लोगों के बारे मे उसका अनुभव अचछा नही था.
उसने सुना था की यह सेठ लोग अपनी बीवियों को ही चोद नही सकते इसलिए उनकी
बीवियां नौकरों से या गैर्मर्दों से चुद्वाती हैं.उसका खुद का पाला भी एक
बार ऐसे सेठ से पड़ा था जिसने उसके साथ चुमचाती की थी और उसकी चुंचियां
मसली थी.बाद मे चूत पर लंड रगड़ते ही वह बहार ही झर गया था.बुद्धुराम के
साथ भी ऐसा एक हादसा हुआ था.वह एक सेठ यहाँ काम पर लगा था.वह सेठ के घर
का काम देखता था और सेठ और सेठानी के हाथ पाँव भी दबाता था.सब नौकर
बुद्धुराम की हंसी उड़ते थे.उसे कुछ समझ नही आता था.एक दीन सेठ ने उसे घर
बुलाया था.उसने देखा तो सेठ बैठा शराब पी रह था और सेठानी सामने पलंग पर
नंगी लेटी थी.सेठ उसे कहा की तुम अगर मेरी गांड मारोगे तो बदले मे मैं
तुम्हे मेरी बीवी को छोड़ने दूंगा. उस सेठ को पता नही था की बुद्धुराम इस
काम के लायक नही था.बुद्धुराम तो डरकर उल्टे पांव भाग खड़ा हुआ.बाद मे
उसे पता चला की सेठ कई नौकरों से यह काम करवा चुका हैं.
इसलिए बेला को शक था की कहीं लाला भी ऐसा ना हो.लाला उसके काम का हुआ तो
अचछा ही था क्यूँकी यहाँ रहने को मकान,अचछा खाना और कपडे मिल सकते थे.और
लाला से काम बन गया तो किसी और को धून्दाने की जरूरत नही थी.उस मे नौकरी
जाने का दर भी था.लेकीन जबतक वह लाला से चुद्वा नही लेटी तब तक उसे पता
नही चल सकता था.उसने आजही इस बात का फैसला करने की ठान ली.घर का काम
अच्छी तरह करके और चंपा की अच्छी मालिश करके उसने मालकिन का दील जीत
लिया.चंपा ने खुश होकर उसे अपना एक पुराना घग्रा और चोली दे दी.उसे रहने
के लिए बहर्वाला कमरा दे दिया.जब सेठ और बुद्धुराम घर लौटे तो उसने
बुद्धुराम से रात मे छत पर सोने का हुक्म दिया और खुद सेठ को खाना परोसने
लगी.मर्द को तद्पताद्पकर फाँसने वह माहिर थी.उसने लाला को भी उसी नुस्खे
से फंसने की सोच ली.
खाना परोसते समय उसने पालू इस तरह लपेट लिया की उसकी सूरत तो क्या शारीर
का कोई भी हिस्सा ना दिख सके.लाला तो दीन भर बेला की सोच मे पागल बना हुआ
था.उसका मचलता जोबन देखकर वो खुद काबू नही रख पा रह था.उसने आज रात ही
बेला को छोड़ने का मन बना लिया था.उसकी ठोस नंगी चुंचियां,भरी भरी गांड
और मचलती चूत देखने को वह बेताब था.लेकीन यहाँ तो बेला की सूरत तक देखने
को वह तरस गया था.दोपेहेर मे चुदास से भरी लग रही यह औरत अचानक इतनी शरीफ
कैसे बन गयी.या तो इसे चंपा ने सब बताकर संभालकर रहने को कहा होगा या फिर
वह नखरा दिखा रही थी.शायद इसे मुझसे रुपये एन्थाने होंगे ऐसा भी विचार
उसके मन आया.जो भी हो आज रात इसकी चूत मारनी ही मारनी हैं यही सोचते
सोचते उसने खाना खा लिया.जब वह बहार आया तो उसे बुधुराम तकिया और चद्दर
लेकर छत की ओर जाता दिखाई दिया.लाला ने उसे टोका तो उसने बता दिया की
बेला ने ही उसे छत पर सोने के लिए कहा है.यह सुनकर लाला ख़ुशी से झूम
उठा.बेला की चालाकी पर वह बड़ा खुश हुआ.जरूर उसने मुझसे चुदवाने के चक्कर
मे ही बुद्धुराम को छत पर भेज दिया हैं इस ख़ुशी मे झुमते हुए वह अपने
कमरे मे चंपा के पास पहुँचा.
उसने फौरन चंपा को नंगा करके उसकी चुंचियां खूब मसली और ऐसी चूत छाती की
चंपा को पहली बार इतना मजा आया.वह झर कर खर्रतें भरने लगी.लाला चुपचाप
उठा और दरवाजा धीएरे से बंद करके बेला के कमरे के पास पहुंच गया.दरवाजा
थोदासा खुला देखकर वह ख़ुशी से झूमता हुआ धीएमे कदमो से अन्दर दाखिल हुआ
और दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया.जब उसकी नजर छापी पर लेटी बेला पर पडी तो
वह ठगा सा उसे देखता ही रह गया.रोशनदान से चांद की हल्किसी रौशनी अन्दर आ
रही थी और और उस रोशनी मे लेटी बेला गजब की सुन्दर दिख रही थी.वह आंखों
पर हाथ रखकर ऐसे लेटी थी मानो उसे नींद लग गयी थी.उसका पालो खिसक गया था
और उसके ठोस उभर साँसों के साथ उपर नीचे हो रहे थे.सांवले कसे पेट का कुछ
हिस्सा नजर आ रह था.उसका घगारा उपर सरक गया था और घुटनों तक तांगे नंगी
थी.बिना बालों की कासी कासी मांसल पिन्धलियाँ गजब की एस*क्ष्य् दिख रही
थी.उसके सूरः होंठ थोदेसे खुले हुए थे और मानो लाला को उन्हें चूमने का
न्योता दे रहे थे.
प्रस्तुतकर्ता raj 007 पर 3:35 AM
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जनता के सेवक
Posted May 5, 2008 by raj007007
Categories: हिंदी सेक्स कहानिया ¤
जनता के सेवक
बात आज़ाद भारत की ही है . नेता लोग साफ़ प्रशासन की दुहाई देते रेहते
हैं . उनके इशारों पे अफ़सर भी उनकी ही भाषा बोलते हुए अपने आप को जनता
का सेवक बताते हैं . आईए आपको आज़ाद भारत के एक कबियली इलाक़े में ले
चलते हैं जहाँ पे क़ानून और रक्षा मंत्री महिला जेल का निरीक्षण करने आने
वाले हैं . जेल की अधिकीक्षिका स स पी रंक की तेजश्वरी राणा आख़री
तय्यरियाँ कर रही है वो रौंद करने के बाद आश्वस्त हैं . अपने कमरे में
घुसते हुए वोह अपनी हवलदार कोकिला शेखावत से मुख़ातिब होती है ” उन तीन
हराम की ज़नियों को सब कुछ ठीक से समझा दिया है ना ? मंत्री जी के सामने
कोई हील हुज्जत ना हो .” “जी मदाम सा कोई तकलीफ़ नही होगी रात में अच्छी
तरह क्लास ली है उनकी “.
निकाल सामान मंत्री जी के आने से पेहले चुस्त हो लिया जाए . साली दौरे की
सिरदर्दी तो रेहती ही है बेशक मंत्री जी का हाथ हमारे सिर पे है “. स स
पी तेजेश्वरी अपनी कुर्सी पे बैठते हुए बोली. दरवाज़ा ढोने के बाद कोकिला
दराज़ से स्मिरणोफ़्फ वोदका की बोतल और दो ग्लास निकलती है . साथ में
भूने हुए काजू एक प्लटे में रखती है “ज़रा तगड़ा बनाना एक दो पीने का ही
वख़्त है स स पी तेजश्वरी ने हिदायत दी. पेहले पेग से तो बड़े घूँत पीने
के बाद उन्होने कुछ काजू मुह में डाले और उन्हे एक और घूंत के साथ गले
में उतरने के बाद ड्राज़ से मेंत्थहोल सिगरेट निकल कर सूलगा ली. धुआँ
छोड़ते हुए उनका हत अपनी पेंट के उस हिस्से पे पहुँच जिसके ठीक नीचे उनकी
बूर थी. पेंट के उपर से अपनी बूर रागरते हुए कुछ खीझहे लेहज़े में सिसकी
” एक तो एह साली सुभहा से कुलमुला रही है रात भर उस रंडी पूजा से चटवाई ,
फिर भी…. एक तो ये मरा सुंदर को भी छुट्टी पे अभी जाना था. तीन दिन से
मेरी बूर में लंड नही गया “.
” दीदी कुछ घंटों की तो बात है सुंदर ना सही ……….मंत्री जी आने ही वाले
हैं कोकिला हवलदार अपनी बॉसस को तससल्ी देते हुए कहा . “वोह तो ठीक है …
फिर वोह भी तो पेहले नये माल को चखेंगे…… स स पी अपनी पेंट की ज़ीप खोलती
बोली…….
कोकिला समझ गयी की ज़लर साहिबा काफ़ी गरम हो चुकी थी और अब मंत्री जी के
आने से पेहले उन की बूर का पानी छुड़वाना होगा. हवलदार कोकिला के लिए कोई
नया काम नही था. वोह भी अपनी बास की तरह लंड के इलावा सेहजात सेक्स की भी
शौकीन थी. लेसबियनिस्म महिला जेल की चारदीवारी में सेहज़ ही पनपता था-
मजबूरी शरीर की भूख मिटाने की , मर्दों की किल्लत के चलते जो बाद मैं शौक
बन जाती थी. शादी शुदा अफ़सरों और कर्मचारिओं को घर मोहय्या थे जहाँ वो
अपने परिवार रख सकते थे पैर जेल कंपस में गीने-चुने परिवार ही रहते थे.
मर्द GUARDS की DUTY जेल के मैं GATE और चारदीवारी की रखवाली ही थी. इस
के ईलावा जो मर्द कर्मचारी जेल के अंदर आ सकते थे वोह थे माली, वाहान्ं
चालक ,बिजली पानी की मुराम्मत करने वाले आदि थे ,जो अपना काम कर के निकल
जाते थे. सिर्फ़ जेलर तेजश्वरी राणा को एक 24 घंटे आर्द्ली मुहय्यया था
जो के उसकी घर में खाना बनाने के साथ उसकी कार भी चलता था . यहाँ ये बता
देना ठीक रहेगा के जेल आबादी से सुरक्क्षित दूरी पैर थी और आबादी तक
पहुँचने के लिए एक जंगली इलाक़े से गुज़रना ज़रूरी था. सारांश में jail
के अंदर मर्द काम ही दिखते थे और लंड किसी किस्मत वाली चाहवान को ही
मिलता था . हवलदार कोकिला ने भी अपना ग्लस्स ख़तम किया और जेलर साहिबां
की तरफ़ बड़ी.तेजेश्वरी राणा अब अपनी पेंट की ज़ीप खोल के पेंटी को नीचे
कर अपनी choot बुरी तरह मसल रहीं थी. ……..कोकिला तेजेस्वरी के पास
पहुँची. शराब और . नशा उस पे भी क़ाबिज़ हो रहा था. वासना के डोरे अब
दोनो पुलिस वालिओं की आँखों में साफ़ झलकने लगे थे. कोकिला ने नीचे होते
जेलर तेजेश्वरी के होटों पे अपने तपते होंट रख दिए. जेलर और हवलदार का
फ़र्क ख़तम हो चुका था मानो! ससपी तेजेस्वरी राणा ने अपनी जीभ निकल के
कोकिला के मुह में डाल दी जिसे हवलदार कोकिला जोश से चूसने लगी . उन्माद
में दोनो की आँखें बंद थी और नाक से गरम साँसे निकल रही थी. तेजेश्वरी
राणा का अपनी बूर के भगनाशे (clit) को रग़ड़रना बदस्तूर जारी था.
जेलर से जीभ चुस के कोकिला भी मस्त हो रही थी. उसने अपना थूक इकट्ठा किया
और तेजेश्वरी के मुह में थूक दिया. कोकिला की इस सेक्सी हरकत ने मानो
जेलर में नयी ‘ गर्मी ‘ का संचार कर दिया हो!…….. दोनो पुलिस वालियाँ
अपने सेक्स में विभिन्नता के साथ विभीत्सा भी पसंद करती थीं . चूम्मन के
दौरान कोकिला तेजेश्वरी के मम्मों को भी उसकी वर्दी वाली कमीज़ के उपर से
दबाने और मसलने लगी . वक़्त की कमी को ध्यान में रखते हुए हवलदार कोकिला
ने सीधे होते हुए अपनी बेल्ट खोलनी शुरू की. जल्दी ही उसकी पेंट घुटनों
तक पहुँच चुकी थी और उसके शरीर का निचला भाग अब नंगा था. उफ़्फ़…. गोरी
मासल टाँगें ….. झांघें …… चौड़े कुल्े…….. और उभरी हुई गांड…..! उसकी
बूर पे के काले रेशमी बाल थे….. जेलर तेजेश्वरी ऐसे ही नही हवलदार कोकला
की कायल हुईं थी .! अनुभवी हवलदार कोकिला को पता था की उसकी ‘मदाम’ को
कैसे जल्दी शांत करना है वैसे तो जेलर तेजेश्वरी विभिन्न लोगों से ,
जिसमे मर्द और औरतें दोनो शामिल थे विभिन्न प्रकार का सेक्स करती थी .
लेकिन वोह हवलदार कोकिला की गांड पे विशेष रूप से फ़िदा थी. वोह कई घंटे
कोकिला की गांड को चुमते, चाट ते बीता चुकी थी.जेल के गलियारों में दबी
आवाज़ चर्चा होती थी के कैसे हवलदार कोकिला समय से पेहले तररकी कर गयी
थी, अपनी कई स्मकलीन मुलज़मों से , लेकिन अंदर की बात कुछ ख़ास लोग ही
जानते थे….. (जिसका कुछ अंदाज़ा हमारे कहानी पड़ने वालों को भी लग गया
होगा) . कोकिला तेजेश्वरी के सामने गाये की तरह झुक गयी अपनी गांड अपनी
मदाम की तरफ़ करके. जेलर साहिबां को मानो स्वर्ग मिल गया हो.अपनी जूनियर
की गांड पे वोह बेताहाशा टूट पड़ी.___ ‘ तरबूज़ों ‘ को चुमती , काटती ,
सेहलती…. ___ .जल्दी ही जेलर सा सब्र ख़त्म हो गया ! …… उसने कोकिला की
गांड की फ़ाँक को फैलाया और उसमे अपनी नाक डाल दी. …..उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़
जन्नत !……. स्सपी तजेश्वरी राणा अपनी हवलदार कोकिला की गांड सूंघ के
मदहोश हो रही थी. लंबी -लंबी साँसें ले के मानो वोह कोकिला की गांड की
महक हमेशा के लिए अपने जेहन मे सेहेज के रख लेना चाहतीं थी . जी भर के
सूंघने के बाद जेलर तेजेश्वरी ने अपनी जीभ बहर निकली और उसे कोकिला की
गांड के मुहाने से चिपका दिया….. उनकी जीभ कोकिला की गांड में ज़ाने को
तत्पर थी.
हवलदार कोकिला के लिए भी एह एक स्वर्ग की अनुभूति जैसा था __ सेक्स की
ख़ुशी के इलावा उसे एक ‘ विभीत्स मानसिक ‘ सुख मिलता था _____ सोच कर की
उसकी मदाम , जेल की हुकमरान , उसकी गांड चाट रहीं हैं .कोकिला की गांड
चाट ते हुए जेलर अपनी बूर जको भी सेहला रही थी.अपनी बूर में उंगली करी तो
कभी बूर के दाने को मसलती, सेहलाती. गांड चटवाते कोकिला भी अपनी बूर में
उंगली करने लगी . वासना का उन्माद चरम वाग पे था…… जल्द ही दोनो पुलिस
वालिओं की सहनशीलता जवाब दे गयी और चरम शारीरिक सुख की अनिभूति करते हुए
दोनो सलखित हो गयीं.
--
as u need,
seksyseema / sonia
36dd_27_36 (rounded boobz).