12 शिवमहाज्योतिर्लिङ्ग
सौराष्ट्रेसोमनाथंचश्रीशैलेमल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यांमहाकालमोङ्कारे परमेश्वरम् ॥
केदारं हिमवत्पृष्ठे डाकिन्यां भीमशङ्करम् ।
वाराणस्यां च विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे ॥
वैधनाथं चिताभूमौ नागेशं दारुकावने ।
सेतुबन्धे च रामेशं धुश्मेशं च शिवालये ॥
द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत् ।
सर्वपापविनिर्मुक्तः सर्वसिद्धिफलं लभेत् ॥(शिवमहापुराण, कोटिरुद्रसंहिता १/२१-२४)
भाव: सौराष्ट्र में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग है और श्रीशैल पर्वत पर मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग है उज्जयनी {उजैनी} में {दो} महाकाल ज्योतिर्लिंग और ओमकारेश्वर ज्योतिर्लिंग परमेश्वर है हिमालय में केदारनाथ ज्योतिर्लिंग है डाकिन्या में भीमशंकर ज्योतिर्लिंग है वाराणसी में विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग है गौतमी तट में त्र्यम्बकं ज्योतिर्लिंग है चिताभूमी में वैधनाथ ज्योतिर्लिंग है दारुक वन में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग है समुन्द्र को बांधनेवाला रामेश्वर ज्योतिर्लिंग है शिवालय में घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग है इस प्रकार से १२ ज्योतिर्लिंगों के नामों को जो प्रातः उठकर पठता है सभी पापों से मुक्त होकर के सभी सिद्धि के फल को प्राप्त करता है