जय शंकर भोले
PHOOLGADI –चिठ्ठी-AM- 16-2020 VOLUME:16 OF 2020, AM SERIES-64
आत्म मंथन- नारीणां स्त्रियों वाली विभूति आत्म मंथन (“श्रोतव्य, मंतव्य, निदिध्यासन”)
नवरात्रियों की हार्दिक शुभकामनाये
AATAM MANTHAN- FEMAL ATTRIBUTES NAVARATRI 2020 (DOWNLOAD)
श्री कृष्ण भगवान जब अर्जुन को ईश्वर भाव, उपस्थिति, विभूतियों का उपदेश दे रहे थे तो उन्होंने अर्जुन को बताया की नारीणां स्त्रियों वाली भूमिका में इन गुणों को देता हूँ या विपरीत होने पर हर भी लेता हूँ वो क्या भाव थे इस पर निम्न चर्चा है
श्लोक
कीर्तिः श्रीर्वाक्च नारीणां स्मृतिर्मेधा धृतिः क्षमा ॥
भाव: मैं स्त्रियों में कीर्ति, श्री, वाक्, स्मृति, मेधा, धृति और क्षमा हूँ॥10/34॥
भगवान कहते है की हे अर्जुन ! मैं स्त्री वर्ग के भावों की विभिन्न विभूतियों को भी रखता हूँ I
कीर्ति= धर्म की जीवन में प्रवृति होने से, मैं व्यक्ति को कीर्ति प्रदान करता हूँ I और उसको जीवन में उच्चता का यश प्रदान करता हूँ I और उससे प्रेरित होक वो और पुण्यमय कार्य करता है और इसके विपरीत, अधर्म से उसको अपयश और जगत में निम्न श्रेणी में ले जाता हूँ और वो ये कहता है की “अगर बदनाम हुये तो क्या नाम नहीं होगा”
श्री = धर्म पालन से श्री लक्ष्मी आती है और अधर्म से पाप श्री आती है जब ईश्वर प्रधान होते है तो धर्म होता है और ये श्री सदैव उन्नति और शांति प्रदायनी होती है और इसके विपरीति, विनाश और अशांति होती है और इसकी व्यवस्था इतनी हो की “साई इतना दीजिये जामे कुटम्ब समाये” अर्थात खा पी के कोई कर्जा न हो और थोडा सा बच भी जाये बस इतनी श्री कहाती है
वाक् = वाणी की मुदुता जीवन की सहजता है कोई व्यक्ति यदि वाणी पर संयम रखता है तो वो अपने जीवन को उच्चता की और ले जाता है तो ये भाव भी ईश्वर का दिया हुआ है और उस व्यक्ति के कार्य सहज रूप में होते जाते है और वाणी में शक्ति और सिद्धि भी होती जाती है
स्मृति= विश्व में ऐसा कोई भी विद्द्वान नहीं होगा जिसकी स्मृति शक्ति उन्नत न होती होगी क्योंकि स्मृति ही बुद्धि को निर्णय करने का समान प्रदान करती है जैसे की ये कब कब हुआ, क्या क्या हुआ, संख्या क्या थी, व्यक्ति कितने थे इत्यादी I स्मृति व्यक्ति को दूषित मार्ग के आते ही विभिन्न उदहारण देकर और भय दिखाकर उस मार्ग से फिरा देती है
मेधा= स्मृति के संकलन पर जो निर्णय लेता है वो बुद्धि होती है मेधा तो बुद्धि का उच्च कोटि का गुण होता है I जैसे कहाँ जाता है की ये तो मेधावी छात्र है इत्यादी तो ये मेधा आप को बुद्धि की उच्चता देती है क्योंकि “जहाँ सुमति तहाँ सम्पत्ति नाना I जहाँ कुमति तहाँ विपत्ति निदाना I”
धृति = धैर्य धारण करना जीवन में प्रत्येक व्यक्ति के अन्दर धृति नहीं होती है संकट और शक्ति के समय में अपनी भावनाओ में नियंत्रण रखने का गुण ही धैर्य है जीवन में असफलता आई तो भी और सफलता आई तो भी दोनों ही प्रस्थिति में सन्तुल का ताना बनाये रखना ही धृति है I जीवन में अध्यात्मिक और सांसारिक उन्नति के लिए धृति एक अत्यंत आवश्यक बिंदु और शक्ति है जिसका विकास होना चाहिए और मूल मंत्र है “धीरे धीरे रे मना धीरे धीरे सब कुछ होये” मन को समझाते रहे की धैर्य रखो धैर्य रखो और तीर्वता संकट कारी है
क्षमा = क्षमा करने का गुण ऐसा है की किसी ने आप का अहित किया है और वो आप से क्षमा मांगता है और क्षमा कर देते है तो आप बड़े हो जाते है क्योंकि क्षमा वीरस्य भूषणं और दूसरी और ये भी कहाँ जाता है की “क्षमा शोभती उस भुजंग को जिस के पास गरल हो I” अर्थात की जिस सर्प के पास जहर होता है उसी की क्षमा क्षमा है नहीं तो वो क्षमा नहीं है मज़बूरी है परन्तु ईश्वर तो ये कहते है की क्षमा उनकी ही विभूति है तो इसको धारण करो I
[पाठकों के लिए: ये नवरात्री है एक पुनह अवसर नारीणां स्त्रियों/ माता के उपरोक्त सात गुणों के विकास के लिए, इनको जानना और जीवन में इनका उपयोग और प्रयोग करना जिस से जीवन ईश्वर की उपरोक्त विभूतियों से उन्नत हो जाये I तो आप को प्रयास करना है इनको जानने का और उसी के अनुरूप इनका पालन करने का II धन्यवाद II]
टीकाकार – ओदाजी
नवरात्री
2020 (१८/१०/२०२०)