AM-2-2022-आत्म मंथन- शंकराचार्य की जयंती

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May 15, 2022, 10:30:03 PM5/15/22
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AM-2-2022-आत्म मंथन-  शंकराचार्य की जयंती

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May 15

जय शंकर भोले PHOOLGADI –चिठ्ठी-AM- 2-2022 आत्म मंथन-  शंकराचार्य की जयंती [आत्म मंथन (“श्रोतव्य, मंतव्य, निदिध्यासन”)] VOLUME : 2 OF 2022, AM SERIES-74 AM- BIRTHDAY OF AADI GURU SHRI SHANKARACHARY


आदि गुरु श्री शंकराचार्य की जयंती (बैशाख शुक्ल पंचमी) 06 MAY 2022

वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि तद अनुसार 6 मई 2022 । इनका शंकर आचार्य का जन्म ५०७-५०८ ई. पू. में केरल में कालपी अथवा 'काषल' नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम शिवगुरु भट्ट और माता का नाम सुभद्रा था। किसी व्यक्ति का विचार आध्यामिक उन्नति के लिए कितना महत्वपूर्ण होता है । ये आदिगुरु श्री शंकराचार्य ने बताया है । उनकी जयंती को उनके विचारों से प्रेरणा लेकर मनाना ही वास्तविक जयंती उत्सव मनाना कहा जायेगा ।

वदन्तु शास्त्राणि यजन्तु देवान् कुर्वन्तु कर्माणि भजन्तु देवताः।
आत्मैक्यबोधेन विनापि मुक्तिः न सिध्यति ब्रह्मशतान्तरेऽपि॥ ६॥ विवेकचूडामणि

भाव: सौ ब्रह्माओं के आने जाने से स्वार्थ सिद्धि हेतु शास्त्रों को बोलने से देवताओं के यजन करने से कर्मों को करने से देवताओं के भजन करने से सिद्धि प्राप्त नहीं होती है । क्योकिं आत्मा इस एक के बोध के बिना मुक्ति नहीं होती है ।

चित्तस्य शुद्धये कर्म न तु वस्तूपलब्धये।

वस्तुसिद्धिर्विचारेण न किंचित्कर्मकोटिभिः॥ ११॥ विवेकचूडामणि

भाव: चित की शुद्धि के लिए कर्म को करो परन्तु वस्तू की प्राप्ति के लिए नहीं । वस्तु की सिद्धि विचार से होगी न की करोड़ों कर्मों को करने से ।

सम्यग्विचारतः सिद्धा रज्जुतत्त्वावधारणा।

भ्रान्तोदितमहासर्पभयदुःखविनाशिनी॥ १२॥ विवेकचूडामणि

भाव: उचित विचार से सिद्धि होती है जैसे रस्सी और साँप का अंतर इसी से भ्रान्ति आदि महा सर्प जो भय और दुःख के कारण उनका नाश होता है ।

अर्थस्य निश्चयो दृष्टो विचारेण हितोक्तितः।

न स्नानेन न दानेन प्राणायमशतेन वा॥ १३॥ विवेकचूडामणि

भाव: किसी के अर्थ का निश्चय करने के लिए है तो हित की युक्तियों पर विचार करना होगा । न की स्नान करने से न दान करने से न ही सैकड़ों प्राणायाम करने से ।

वस्तु विषय के विचार की उपयोगिता ये है कि किसी युक्ति पर विचार किया जाए और उसके परिणाम आने तक लगातार उस पर प्रयास भी किया जाए । पहले सुनना या पढ़ना उसके पश्चात उस पर विचार करे और यदि योग्यता है तो उस और चल पड़े । तभी आत्मकल्याण संभव है अन्यथा नहीं ।

धन्यवाद  ओदाजी टीकाकार

MAY 2022

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