कविता : राष्ट्र प्रेम

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Aug 15, 2021, 7:04:50 AM8/15/21
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कविता : राष्ट्र प्रेम

PHOOLGADI INDIA INDIAN, KAVITA OR POEM August 15, 2021 1 Minute

कविता : राष्ट्र प्रेम     

(राष्ट्र प्रेमियों को समर्पित)

वीरकोमल आँचलमें पलते है I

उनके पैर पालने में ही दिखते हैII

जब मातृ धरा में पद रखते है I

उससे पूर्व इसको नमन करते है II

वन्दे मातरम् की ध्वनि गुंजाते है I

अपनेप्राणों को राष्ट्र रक्षा में लगाते हैII

राष्ट्र धर्म को निज स्वार्थ बनाते है I

निज स्वार्थ मानकर सर्वस्व लुटाते हैII

प्रेम बलिदान मातृ भूमि राष्ट्र शब्द जानते है I

शब्दकोष की झोली में अन्य शब्द नहीं पहचानते है II

लेखक : ओदाजी (08/08/2021)  

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Aug 15, 2021, 7:06:20 AM8/15/21
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15TH AUGUST 2021

कविता : राष्ट्र प्रेम     

(राष्ट्र प्रेमियों को समर्पित)

स्वतंत्र राष्ट्र में उज्जवल भविष्य बनायेगें I

स्वयं आगे होकर राष्ट्र को आगे ले जायेंगे I I

रात दिन दिन रात की माला बनायेंगे I

हर राह में मोती हो ऐसा दीप जलायेंगेI I

हिमालय पर तिरंगा और गगन में धुनी सुनायेंगे I

पड़ोसियों को भी मधुर मिष्ठान खिलायेंगे I I

सत्कार चमत्कार हथियार के भी दर्शन करायेंगे I

पूज्य धरा पर न पद पड़े ऐसा शौर्य दिखायेंगे I I

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Aug 15, 2021, 7:07:37 AM8/15/21
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कविता : राष्ट्र प्रेम     

(राष्ट्र प्रेमियों को समर्पित)

स्वतंत्र राष्ट्र के नागरिक गर्व कर I

राष्ट्र धरोहर का पूजन कर I I

स्वतंत्रता प्रेमियों को नमन कर I

उनके बलिदान को नमन कर I I

दिन रात को एक मान कर I

पल पल में जीवन दान कर I I

विपरीत व्यवस्था से लड़ कर I

आगे दिन रात बढ़ कर I I

निज स्वार्थों से ऊपर उठकर I

चैन नीद को त्याग कर I I

अनगिनत संग्रामियों के त्याग पर I

उनके तन मन धन मार्ग पर I I

बहाया रक्त जल मान कर I

भूख प्यास विश्राम त्याग कर I I

राष्ट्र वंदना प्रेम मानकर I

दी स्वतन्त्रता अपना मानकर I I

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