High Powered Defence Committee : क्या देश कि रक्षा व वायु सेना का मज़ाक नहीं है ?

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rajiv upadhyay

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Mar 6, 2025, 8:14:12 AM3/6/25
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High Powered Defence Committee : क्या देश कि रक्षा व वायु सेना का मज़ाक नहीं है ?

राजीव उपाध्याय

यदि किसी को जानना हो कि भारत क्यों एक हज़ार साल गजनी से चीनियों तक  हर बड़ा युद्ध हार रहा है तो उसे इतिहास पढने की आवश्यकता नहीं है बल्कि सिर्फ हमारे MRCA के अंतर्गत देश के लिए फाइटर जेट खरीदने की पिछले बीस साल से आज तक की असफल कोशिशों को देख ले . उस पर निर्लज्ज तुर्रा  देखिये कि रक्षा विभाग के बाबुओं ने वायु सेना कि हवाई जहाजों की मांग  को स्वीकार कर मानों वायु सेना पर बड़ा एहसान कर दिया !

बाबु बुद्धि पर वारी जाऊं !

इसी बाबुओं के रक्षा विभाग ने २००८ मैं न केवल १२६ फाइटर जेट की मांग को स्वीकार कर टेंडर जारी किये थे बल्कि इस सौदे के लिए ५५००० हज़ार  करोड़ रुपयों ( ६.३ बिलियन डॉलर ) का प्रावधान भी किया था  . वायु सेना तो इसके पहले भी कई वर्षों से सचेत कर रही थी पर कछुए से भी मंथरगति  से चलने वाली सरकार ने २००८ मैं माना था . पर उसके बाद सोनिया सरकार के बेहद इमानदार मंत्री को राफेल से जान बचाने की चिंता हुई और उन्होंने ऐसी कलम तोड़ टिपण्णी  के साथ टेंडर अनुमोदित किया कि बाबू फिर घबरा गए और कोई फैसला नहीं लिया,

फिर आयी एंन  डी ए की मोदी जी की सरकार . बड़ी जद्दो जहद के बाद २०१५ मैं नए टेंडर मैं १२६ के बजाय सिर्फ ३६ रफाल जहाज फ्रांस से खरीदने का सौदा कर पाए वह भी ८.८ बिलियन डॉलर की कीमत पर ! वह तो गनीमत है कि अच्छा या बुरा कोई फैसला तो लिया . इसी राफेल जहाज के गुण गा कर और आरती उतार कर हमने इतने साल पाकिस्तान को डरा कर रखा . बाकि तो मिग २१ अब भी चला रहे हें . हमारा तेजस तो मात्र इन्तेर्सेप्तर जहाज ही है और किसी काम का नहीं .अब तो पाकिस्तान और चीन हम से कहीं ज्यादा आगे निकल गए हें .
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