माथे पर हो भाषा की धूल
जीवन बने प्रकृति के अनुकूल
सहअस्तित्व हो, न हो ग्रीन हंट
देता यही संदेश है सरहुल
आप सभी को प्रकृति पर्व
‘सरहुल’ की अशेष मंगलकामनाएँ!
धरती, प्रकृति और मातृभाषाओं को बचाने का संकल्प करें
झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा
के द्वितीय महासम्मेलन 16-17 अप्रैल 2010 रांची में शामिल हों!
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वंदना टेटे
महासचिव, झारखण्डी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ा
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