ईश्वरीय जीवन के क्या-क्या नियम मर्यादाये है

2,966 views
Skip to first unread message

OM SHANTI

unread,
May 12, 2017, 11:03:10 PM5/12/17
to


ईश्वरीय जीवन के क्या-क्या नियम मर्यादाये है

1- *अमृतवेले याद की यात्रा* :
अमृतवेले 4.00से 4.45 बजे तक बाबा को प्यार से याद का अभ्यास करना बहुत जरूरी है।सबसे पहले उठकर बाबा को गुडमोर्निंग कहना।

2. *प्रात: नियमित मुरली सुनना* :
बाबा कहते है तुम बच्चों का ज्ञान मुरली ( शिवबाबा के महावाक्य), मिस नहीं करना चाहियें।मुरली ही तुम्हारी पढ़ाई हैं l मुरली ही तुम्हारे पुरूषार्थ के लिए श्रेष्ठतम श्रीमत हैं l मुरली ही आत्मा की मन व बुद्धि के लिये भोजन व खुराक हैं।

3. *ब्रह्मचर्य का पालन* :
शिवबाबा कहते हैं मीठे बच्चे ब्रह्मचर्य का बल बुद्धि को शुद्ध बनाता हैं l योगयुक्त बनने में मदद करता हैं l इसलिये संगमयुग पर मन, वचन, कर्म, द्दष्टि, वृत्ति, संबंध-सम्पर्क में सदा पवित्र बनों व राजयोगी बनोंl

4. *अन्न शुद्धि* :
जैसा अन्न वैसा मन।योगयुक्त हाथ का बना हुआ सात्विक शाकाहारी शुद्ध भोजन ही स्वीकार करना हैं l खाते समय बाबा की याद में रहना हैं।ऐसा नहीं हो कि किसी ने अच्छा भोजन याद से पका के खिला रहे हों लेकिन हमने बात करते करते ही भोजन खाया, तो ये भी नही होना चाहिए। भोजन योगयुक्त होकर ही खाना है, साइलेंस में होकर ही खाना है, ये नियम मर्यादा है।नशीले व तमोगुणी पदार्थो का सेवन नहीं करना हैं।

5. *संगदोष से दोष दूर* :
जैसा संग वैसा रंग l नित्य बाबा के संग अर्थात् याद व योग युक्त रहने से ही ऊँचे बनेगें।

6. *दैवी गुणों की धारणा* :
यही जीवन का सच्चा श्रृंगार हैं l दैवी गुणों की धारणा ही सच्चा धर्म हैं।नम्रता, हर्षितमुखता, सहनशीलता, मधुरता, सहयोग की भावना, सर्व प्रति शुभ चिंतन आदि।फिल्म देखना, टीवी सीरियल, न्यूज देखना, जो सब्जेक्ट हमारा हैं ही नहीं वहा बुद्धि न जाये।

7. *ईश्वरीय सेवा* :
यही ब्राह्मणों का दिव्य व श्रेष्ठ कर्तव्य हैं-- ईश्वरीय सेवा। हमें सारे दिन में कुछ समय ईश्वरीय कार्य में देना होता है।चाहे वो किसी भी आत्मा को सहयोग देना हो या किसी को ज्ञान दान करना हो या सेवाकेंद्र पर कोई सेवा है।सेवा बी. के. का धर्म है। तीन प्रकार की सेवा है मनसा, वाचा और कर्मणा।

8. *श्वेत वस्त्र धारण करना* :
कपड़े हमेशा श्वेतवस्त्र धारण करना ।अगर कलर कपड़े है तो लाइट कलर हो, व वस्त्र इस प्रकार के हों कि शरीर पूरा ढका हुआ होना चाहिए।

9. *निवृत्ति पश्चात् स्नान*:
सबेरे शाम स्नान के अलावा निवृत्ति पश्चात् भी स्नान करना और वस्त्र बदलना।यह मोस्ट इम्पोर्टेन्ट है कि जब भी हम सुबह, शाम या किसी भी समय टॉयलेट जाते हैं तो कपडा बदल कर के नहा कर ही हम तैयार हों क्योंकि ये नियम है। तो इस नियम का पालन करना भी बहुत ज़रूरी है।
जहां तक हो सके तो हम अगर बाबा के बच्चे हैं और घर के अन्य सदस्य बाबा के बच्चे नही हैं तो हमारी सब चीज़ें थोड़ी अलग रहे तो अच्छा है। भले साथ रहे, लेकिन छोटी छोटी चीज़ जैसे हमारा बेडरूम अलग हो, हमारे नहाने का साबुन अलग हो आदि जो भी होते हैं वो सब चीज़ अलग होना चाहिए, हमारे नहाने की बाल्टी भी अलग हो। तो जितनी सफाई हो उतना अच्छा है। हर जगह ये बात पॉसिबल नही होती लेकिन ये सब नियम मर्यादाएं हैं कि हमारी जो उपयोग की चीज़ है वो दूसरे का इस्तेमाल किया हुआ ना हो।

10. *चार्ट लिखना* :
चार्ट लिखना ही उन्नति का पहला साधन हैं।

11. *प्राश्चित पत्र लिखना* :
ईश्वरीय नियमों के विरूद्ध कोई भूल हो जायें तो स्वयं ही बापदादा को या निमित बनी बड़ी बहनों को प्रायश्चित पत्र लिखकर भेजें तो विकर्म का खाता कम हो जायेगा l और भूल रिपिट नहीं होगी।न भेज पाने की स्थिति में स्वयं लिखकर , बाबा को समुख हाजिर नाज़िर मानकर माफ़ी लेलें फिर फाड़कर फेंक दें।

12. मधुबन तथा सेवाकेन्द्र इन्चार्ज ब्राह्मणी को अधिकार है कि कोई भी विकार वश अशांति फैलाने वाले भाई व बहिन को मधुबन व सेवाकेन्द्र में आने से मना कर सकते हैं।

13. सेन्टर पर आने वाले भाई बहिन अपनी स्व उन्नति के उद्देश्य से ही ज्ञान व राजयोग की पढ़ाई पढ़ने के लिये आते है l अत: सेन्टर पर कोई भी स्थूल पैसे आदि की लेन-देन व धन्धे आदि की बातें नहीं करनी है।

14. कोई भी सेंटर का विद्यार्थी किसी अन्य शहर में सेवा केन्द्र पर जाते हैं तो अपने टीचर से स्वीकृति पत्र लेकर जावे।

15. कोई भी रूहानी विद्यार्थी कम से कम आठ मास पूरे दैवी मर्यादाओं के चलने के बाद मधुबन तपस्वी भूमि में जा सकते हैं।

16. शाम का नुमाशम योग। अगर आपको शाम में समय मिलता है तो रोज शाम में 6:30pm से 7:30 बजे तक योग करे। सारे विश्व को अपनी शक्तियों का दान करें।

17. दिन भर में अव्यक़्त वाणी का अध्धयन , मनन चिंतन भी आवश्यक है जैसे किसी को बीमारी के समय ठीक करने के लिए दवा देतें हैं इसी प्रकार हमें भी ज्ञान की क्लास सुनना व् पढ़ना भी दिनचर्या में अति आवश्यक है।

18. ज्ञान के साथ ही दिनचर्या में प्रैक्टिकल गुणों की धारणा भी आवश्यक है जैसे दूसरों को शुभकामना , शुभ भावना देना , दूसरों की बातों को समाना, शुभ व्यवहार और शुभ संकल्प भी आवश्यक हैं।

19. दिन में 5 बार *ट्रैफिक कण्ट्रोल* का अभ्यास करें
07:00am, 10:30am, 12:00pm, 05:30pm, 07:30pm

20. प्रातः किसी भी समय मुरली से कोई भी एक स्वमान का अभ्यास लिखकर करें।

21 *कहा जाता है जितना कायदा उतना फायदा।*
तो इसी प्रकार जैसे बता गया है कि पैसो की लेन देन आपसी नही होनी चाहिए, चाहे सेण्टर में या कहीं बाहर भी, जो बी.के. भाई है वो इसके लिए पहले निम्मित से पूछ लें।लौकिक में रहते हुए भी अलौकिकता का अनुभव करें।
--स्वस्थ एवं सकारात्मक चिंतन
--कम, मीठा और धीरे बोलो।
--पवित्र दृस्टि
--लग्न से परमात्मा की याद में कार्य करना
--ईश्वरिय याद में सात्विक एवं गहन निद्रा।

22 *ईश्वरिय याद में सात्विक एवं गहन निद्रा*:-
सोने से पहले कुछ अच्छे ज्ञान के पॉइंट्स पढ़े उसका मनन चिंतन करे। फिर प्राणप्यारे परमपिता परमात्मा शिवबाबा की गोदी में उनको याद करके सो जाएँ। 9:30 -10 pm के बीच अपना पोतामेल बाप को देकर हल्के होकर सो जाएँ।

❉❉

*Also consider the following points and Directions of God Shiv BaBa in our daily routine* :-

To make your sanskars completely pure, forget your body and forget all bodily relationships; have faith in yourself as a soul. Practice this: ‘I am a soul, my relationship with others is brotherhood.’

In order to become satopradhan (completely pure) , go continuously in remembrance of Shivbaba . Do not get tired while traveling on this pilgrimage of remembrance.

Practice not to look at the world while you are seeing it. Let the intellect remain
aware that nothing of the old world is useful for me. Shrimat, God’s directions, for you are: ‘Children, erase your attachment with these things, Have no desires of
this polluted world.’

Become ignorant of all desires. Do not wish for anything. Finish off
needing to be especially well-dressed and eat extra good food.

always be truthful to the true father. Do not hide anything that has happened in this life from the father. Be clean and straight inside and out.

To make the soul satopradhan, perform each action as karma yogi. Through the day make the effort to remain in Baba’s remembrance for at least 8 hours. While working to maintain the physical body, connect the yoga of intellect with the father. Let the hand be at the task and the heart be with the father.

Do not blame Maya become subtle enough to recognize your own weaknesses and remove them.

Sweet children, be clean and straight with Baba internally and externally. It is said that the lord is pleased with a clean heart.

हम ईश्वरीय संतानो(Bks) को रोज ये दिनचर्या फॉलो करनी है।जो इसका सच्ची रीती पालन करते हैं उन्हें सदा ईश्वर का हाथ और साथ प्राप्त होता है।वो सदा निर्विघ्न और हलके रहते हैं।ईश्वरीय मस्तियों में उडते रहते है।

❉❉

▆▅▄▃RAJYOG MEDITATION
COURSE
ONLINE▃▄▅▆

whatsapp पर चलाया जा रहा है जोकि नि:शुल्क है ,
यह कोर्स केवल nonbk भाई बहनों के लिये है

जो भाई बहन आनलाइन कोर्स के इच्छुक हैं

वह अपना नाम , पता और यह कोर्स कौनसी भाषा में करना चाहते (हिंदी या इंग्लिश) ये नीचे दिए गए वाट्सप नम्बर पर मैसेजhttps://www.facebook.com/images/emoji.php/v8/fbe/1.5/16/2709.png में लिखकर भेजे।

https://www.facebook.com/images/emoji.php/v8/fa6/1.5/16/1f4de.png📞 +919541650650

➠➠➠➠➠➠➠➠➠➠➠➠➠➠
❉❉*ओम शांति*


​​
​​
​​

 




Reply all
Reply to author
Forward
0 new messages