*ब्राह्मण जीवन का फाउन्डेशन पवित्रता*
होलीहंसों की सभा से बापदादा पूछ रहे सवाल
बने हो कितने होलीहंस क्या क्या किये कमाल
पवित्रता की शक्ति अपने अन्दर कितनी बढ़ाई
क्या अपवित्र को पवित्र करने की शक्ति आई
पवित्रता की शक्ति से इतने सम्पन्न बन जाओ
दृष्टि, वृत्ति और कृति तीनों बदलकर दिखाओ
बाप से अगर सर्व सम्बन्ध जोड़ नहीं पाओगे
अपने संकल्प बोल और कर्म से हार खाओगे
बाप से मिलता हर व्यक्ति को संस्कार स्वभाव
किसी के व्यक्तित्व का ना पड़े तुम पर प्रभाव
दूसरों पर प्रभावित होकर बर्बाद ना हो जाना
व्यक्ति पर प्रभावित होने का धोखा ना खाना
अपवित्रता की शक्ति है मृग तृष्णा के समान
व्यक्तियों की विशेषता का करवाती गुणगान
औरों की विशेषता है पेड़ की रंग बिरंगी डाली
इसे नहीं पकड़ना ये है कमजोर गिराने वाली
यदि बाप से सर्व सम्बन्धों का रस ना पाओगे
अल्पकाल की प्राप्तिवश धोखा खाते जाओगे
अविनाशी प्राप्ति से बच्चों वंचित ना हो जाना
व्यक्ति वैभव के प्रभाव से खुद को तुम बचाना
पवित्रता की ताक़त सब कुछ तुम्हें दिलाएगी
दासी बनकर प्रकृति भी उपस्थित हो जाएगी
ब्राह्मण जीवन में अपवित्रता से हार ना खाओ
पवित्रता की शक्ति से अपवित्रता को मिटाओ
सर्व प्राप्तियों का यदि अनुभव कर ना पाओगे
ब्राह्मण ना होकर वंचित आत्मा बन जाओगे
विशेषताओं पर अगर प्रभावित होते जाओगे
बाप को भूलोगे और माया का गोला खाओगे
प्रभावित होकर अगर बाप को तुम भुलाओगे
धर्मराज के रूप में बाप को ही सामने पाओगे
मृगतृष्णा में पड़कर धोखा अगर तुम खाओगे
सौ गुणा पदमगुणा तुम दण्ड बाप से पाओगे
बाप को छोड़कर जो व्यक्तियों का बन जाता
ऐसे बच्चों के खातिर बाप धर्मराज बन जाता
सिर्फ कामना ही तुम्हें औरों के प्रभाव में लाती
यही कामना काम विकार का अंश कहलाती
प्रभावित करती है कामना या करती परेशान
धोखेबाज कामना का मिटा डालो नाम निशान
रूप काली का धरकर करो कामना का संहार
इस पर रहम करने का ना लाना कभी विचार
योग ना लगे तो सच्चाई से करो यही स्वीकार
खींच रहा अभी तक कोई छिपा हुआ विकार
कुदृष्टि किसी पर डालना है पदमगुणा विकर्म
ब्राह्मण जीवन में कभी ना करना ऐसा विकर्म
ऐसे पाप का परिणाम झेल नहीं तुम पाओगे
इन पापों में तड़प तड़पकर मृत्यु को पाओगे
पाप ना ऐसा करना बाप करते हमें खबरदार
ये कमजोरी जड़ से मिटाना बनकर होशियार
*ॐ शांति*