ब्रह्मा भोजन करवाने , बनाने और पिरोसने की सेवा में तत्पर ब्राह्मणो के लिए ध्यान देने योग्य इशारे ।।
* भोजन बनाए वालों के शरीर की स्वच्छता आवश्यक है। jaise लंबे nails .. नहीं होने चाहिए। स्वच्छ ड्रेस हो , हाथ पाँव धोकर सेवा शुरू करें ।।
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भोजन पकाते समय न खुद डिस्टर्ब हो ,, न दूसरों को डिस्टर्ब करने के बोल बोलें ।
* मेरापन के संकल्प जैसे 'मैंने ब्रह्मा भोजन करवाया है ....
यही भोजन का मेनू होना चाहिए .. .' ऐसे भावनाएँ नहीं आएँ। यह याद रहे की बाबा और निम्मित ममा यज्ञ का प्रसाद सबको दे रहे है।
मतलब समर्पित भवन बापदादा तक वतन में पहुँचती हैं ।
* भोजन पकाते समय यह ध्यान रहे की हम जो सोचेंगे, हमारी जैसी भावना होगी वह खाने वाले पर भी प्रभाव डालेगी।
ब्रह्मा भोजन किसीके के लिए वरदान बन सकता है।। किसीके लिए दवाई का काम कर सकता है । किसीके विघ्न दूर कर सकता है । तो किसी की अवस्था को ऊँचा उठा सकता है।
* ब्रह्मा भोजन पकाते समय उस जगह की स्थूल सफाई और सूक्ष्म पवित्रता भी जरुरी है।
व्यर्थ संकल्पों का वातावरण भोजन को प्रभावित करता है ।
* ब्रह्मा भोजन खाते समय भी शांति का माहौल हो। बाबा की याद मैं बैठकर खाएँ और बातें न करें। अलौकिक माहौल हो ; लौकिक बातें व लौकिकता की फीलिंग न आये।
* यह याद रहे की खाते वक्त हमारे जैसे संकल्प, जैसी भावना होगी, वही हमारे सारे शरीर मैं फैलेगी। तो बाबा की याद में , कोई पावरफुल स्वमान में बैठकर उस भोजन से ताकत लें।
याद रहे ,
देवतायें भी ब्रह्मा भोजन के लिए तरसते हैं ।।
,,, साकार बाबा ।।