मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की गैस पीडि़तों के साथ वायदा खिलाफी के विरुद्ध
27 अगस्त को उनके निवास पर प्रर्दशन
27 अगस्त मंगलवार को सुबह 10 बजे यादगार-ए-शांहजहांनी पार्क पहुंचे ।
गैस पीडि़त साथियों आपको याद होगा कि 3 दिसम्बर 12 को कई हजार पीडितों के दस्तखत के ज्ञापनों से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से 4 मांगें की थी।
1 .माकूल मुआवजे के लिए सुप्रीम कोर्ट में राज्य नए सबूतों के आधार पर हस्तक्षेपकर्ता बन हमारी पांच गुना मुआवजे की लम्बित याचिका का समर्थन करैं।
2 .यूनियन कार्बाइड के दोषी अधिकारियों को सजा में हो रही देरी के मद्वेनजर शीघ्र सजा के लिए विशेष न्यायलय का गठन करैं।
3 .आर्थिक पुनर्वास (रोजगार) कार्यक्रम की समीक्षाकर उन्हें ऐसा बनाया जाए जिससे अधिक से अधिक गरीब पीडित परिवारों को लाभ मिले।
4. यूनियन कार्बाइड कारखाने व छोला दशहरा मैदान (सोलर इवप्पोरेशन पोड) के समीप पडे़ जहरीले कचरे को न केवल हटाया जाये बल्कि यूनियन कार्बाइड (डाउ केमिकल्स) से पर्यावरण व इंसानों को पहुंची क्षति के लिए मुआवजा वसूला जाए।
3.दिसम्वर 12 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से मिले हमारे मेम्बरों को उन्होने आश्वासन दिया था कि एक सप्ताह में गैस राहत विभाग की मिटिंग बुलाकर इन 4 मुद्धों को हल करेगे। किन्तु लगभग 8 माह में 10 स्मरण पत्र भेजने के बाबजूद सरकार की तरफ से कोई जबाब नहीं मिला है। जाहिर है की सरकार की मन्शा नेक नहीं है। दूसरी तरफ गैस पीडित जनता 28 वर्षो से माकूल मुआवजे बेहतर इलाज सम्मानजनक रोजगार और साफ सुथरे पर्यावरण की आस में है। हमारे हुक्मरानों ने अब तक 700 करोड रु. से अधिक राहत एवं पुनर्वास पर खर्च करने का दावा किया है। नए अस्पतालों तथा उनको सुन्दर बनाने पर कमीशन के लिए करोडो रु. फुके जा रहे है। किन्तु दवाओं और बेहतर जांच उपकरणों और चिकित्सकों तथा टेक्नीशियनों के लिए कार्यवाई नाम मात्र के लिए ही हुई है । आज तक गैस राहत को एक भी अस्पताल इमरजेन्सी तथा गम्भीर रोगों से निपटने लायक नहीं बन पाया है। सालाना 20 कारोड रु. से अधिक का बजट इन पर पानी की तरहा बहाया जा रहा है इसी तरह रोजगार के लिए कार्य योजना के 982.70 करोड की राशी में से आर्थिक पुनर्वास मद के 104 करोड रु. में भी खुली डकैती जारी है। तमाम तरह की अपनी चहेती व कमीशन देने वाली संस्थाओं को करोड़ रु. का काम इस दलील पर दिया है कि वह ट्रेनिंग के बाद रोजगार देंगे। लेकिन आज लगभग 2 वर्ष पश्चात यह पता नहीं की किन्हें और कहां रोजगार दिया गया है?
राज्य एवं केंद्र सरकार यूनियन कार्बाइड जहरीले कचरे के निपटारे में यह कह बच निकलती है कि मामला कोर्ट में है किन्तु प्रदूषण के मुख्य स्त्रोत सोलर इवप्पोरेशन पौड (जहरीला तालाब छोला दशहरा मैदान के समीप ) से कचरा तथा उस क्षेत्र में वर्षो से जहरीला पानी पीते रहे नागरिकों की मेडिकल जांच के लिए किसने रोका है ? ऐसा कोई कारण नहीं है की दोनों हुकुमतें पर्यावरणीय क्षति का कार्बाइड (डाउ) पर दावा नहीं कर सकती। पीडित भाईयो और बहनों क्या यह केंद्र और राज्य सरकार के लिए कम शर्मनाक है कि वह 28 वर्ष बाद भी प्रभावितों को न तो माकूल मुआवजा दिला सकी ना ही सही इलाज व आर्थिक (रोजगार) पुनर्वास का इंतिजाम कर सकी । और तो और वह संगठन की 5 गुना मुआवजे के लिए सुप्रीम कोर्ट में लम्बित याचिका का समर्थन करने में मुहॅ चुरा रही है। याद रखिए अब तक जितनी भी नगद राहतें मुआवजा आदि मिला है वह गैस पीडितों के लगातार सघंर्ष की बदौलत तथा सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप व आदेश से ही सम्भव हो सका है। यहां तक की टुटी फूटी इलाज व्यवस्था के पीछे भी हमारा संघर्ष ही है। तथा आगे भी जो कुछ हासिल होगा वह नेताओं की दया या मेहरबानी से नही संघर्ष की बदौलत होगा। आईए आगामी 27 अगस्त मंगलवार को सुबह 10 बजे राज्य के मुखिया शिवराज सिंह को उनकी वायदा खिलाफी के विरूद्ध धिक्कारने व अपना हक पाने के लिए।
अब्दुल जब्बार व साथी
940651172
संगठन ही एक मात्र ऐसी संस्था है जिसकी मीटिंग 27 वर्षो से हर शनिवार यादगार-ए-शाहजंहानी पार्क में होती हैं। तथा वह हर उस सवाल पर संघर्ष करता है जो पीडि़तों के हित में होते हैं।
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