बी.आर.ए.आई., जी.एम.ओ., मोनसेंटो... भारत छोड़ो
दिल्ली चलो
भारत छोड़ो दिवस की पूर्व संध्या पर 8 अगस्त 2013 को हमारे साथ खड़े हों
यूपीए सरकार ने संसद में एक विवादास्पद, अवांछित व त्रुटिपूर्ण कानून बनाने की पहल की है. विडंबना ये है कि यह सब विश्व पृथ्वी दिवस, अप्रैल 22, को हुआ जब इस सरकार ने संसद में बी.आर.ए.आई. बिल पेश कर दिया. आप जानते हैं कि पहले से ही ऐसी किसी कोशिश का पुरजोर विरोध हो रहा है.
इस विधेयक में ऐसा अनुमोदन किया गया है जिससे कि एकल खिड़की द्वारा ही हमारे भोजन, कृषि और पर्यावरण में जोखिम भरे आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों को मंजूरी दी जा सके.
इसका सीधा मतलब ये है कि सरकार इस क़ानून के द्वारा जी.एम.ओ. को बढ़ावा देना चाहती है. जी.एम. तकनीक दुनिया के अधिकाँश देशों में भारी संख्या में खारिज कर दिया गया है. ऐसे में हमारी सरकार क्यूँ इसे भारत में जल्दबाजी से लाना चाहती है. हम बार बार सरकार को बताते रहे हैं कि ऐसे प्रयासों से हमारे खेत, खेती, आजीविका, स्वास्थ्य, पर्यावरण और स्थिरता पर प्रतिकूलप्रभाव होंगे.
हम आपको बता दें कि अगर बी.आर.ए.आई. बिल पास हो गया तो सुरक्षित भोजन की कल्पना नहीं की जा सकती. और तो और, हमारे खाद्य और खेती दोनों ही मोनसेंटो जैसी बहुराष्ट्रीय कृषिव्यापार निगमों के हांथों गिरवी हो जाएगी.
इस बी.आर.ए.आई. बिल को तो कईयों ने भारत के मोनसेंटो संवर्धन एवं संरक्षण विधेयक का प्रारूप बताया है. अगर यह कानून बन गया तो किसानों और उपभोक्ताओं के विभिन्न विकल्प समाप्त हो जायेंगे.
हमारा प्रयास आपके भोजन, हमारे किसानों और हम सबकी स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है. याद है न, हमने मिलकर कैसे 2009-2010 में एक और अवांछित और असुरक्षित बी.टी. बैंगन को बाहर फेंक दिया था ! हम ऐसा फिर से कर सकते हैं. एक राष्ट्र के रूप में हमें अपनी खाद्य संप्रभुता की रक्षा करनी ही चाहिए. हमें आगे बढ़कर अपने खेत, खेती और भोजन सुरक्षित करना ही होगा. इन पर हम किसी और का नियंत्रण स्वीकार नहीं करेंगे. निर्णायक कार्रवाई करने के लिए हमें उठ खड़ा होना है.
सभी समान विचारधारा वाले संगठनों, गठबंधनों और व्यक्तियों के लिए यह सन्देश है कि वे ‘भारत छोड़ो दिवस’ की पूर्व संध्या पर 8 अगस्त 2013 को दिल्ली में एक साथ भारी संख्या में आवें और इकठ्ठा हों तथा आवाज़ दें... बी.आर.ए.आई., जी.एम.ओ., मोनसेंटो... भारत छोड़ो.
हमने जो भी सरकार चुनी हुयी है उसे हमें सशक्त संकेत देना है कि हम न तो असुरक्षित जी.एम. खाद्य पदार्थों को सहन करेंगे और ना ही अपनी भोजन व्यवस्था और कृषि के मामले में किसीकॉर्पोरेट प्रभुत्व को स्वीकार करेंगे. साथी नागरिकों को इसके लिए हम सबको तैयार करना है, उन्हें सच्चाईयों से अवगत कराना है.
कोलिशन फॉर जी.एम.-फ्री इंडिया एक व्यापक मंच है जो जी.एम.-मुक्त भारत के लिए संबंधित मुद्दों पर सार्वजनिक बहस कर रही है और स्थायी समाधान के लिए निर्णायक कार्रवाई कर रही है, ताकि शांतिपूर्ण तरीके से सभी नागरिक मिलकर एक साथ एक आवाज़ में अपने भोजन, बीज, खेत और खेती के लिए अपनी लोकतान्त्रिक असहमति दिखाकर भोजन, कृषि और स्वास्थ्य की रक्षा कर सकें. इसके लिए यह आखिरी मौका भी हो सकता है.
समय आ गया है जब हम-आप अपनी एकता दिखाएं.
आईये साथ खड़े हों, कंधे से कन्धा मिलाएं. बी.आर.ए.आई., जी.एम.ओ., मोनसेंटो को देश से बाहर खदेड़ दें.
दिल्ली आकर अपने शक्ति का प्रदर्शन करें.
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