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ravindra kumar

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Oct 13, 2013, 8:47:54 AM10/13/13
to mobihangama

हमारी याददात

एज़ाम हॉल म बैठकर हम यही सोचते ह िक हमारी याददात बहत कमजोर है...

लेिकन, जससे कभी यार िकया हो और उसे भूलना चाहो... . . . . . . . . तो लगता है िक जैसे सारी दुिनया के काजू-बादाम हमने ही खा रखे ह

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