क्या कहूं, कैसी श्रधांजलि
वे मरे नहीं, मारे गए हैं |
हत्यारे बस आतंकी नहीं
हत्यारे हम भी ताड़े गए हैं |
जो लोग हमारा ध्यान ना करें
उनको हम सरकार चुनें ?
वे फेल हुए या हम हुए
उनको देख सर अपना धुनें ?
उनकी नाक रखें जूते पर
अब मुद्दा अपना जीवन हो |
जो भ्रष्ट रहे, जो कष्ट करे
वो नीचे, ऊपर सिंहासन हो |
दिन गिनाते, वर्ष गिनाते
ऐसे कैसे नेता हो ?
तुम चू...या...चोर कहीं के
किस माँ के तुम बेटा हो ?
जीवन एक बार मरता है
अवशेष बार-बार लड़ता है |
माँ का दिल रोज रोता है
पत्नी का हर पल खोता है |
बच्चों के पापा खो जाते
देश लाडला धन खोता है|
शर्म नहीं आती पद छोडो
अपनी दिशा कहीं अब मोड़ो |
अब तुमको धुल चाटना है
किसी देशभक्त को लाना है |
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Posted By Jha Saheb to
The Start-Up Specialist at 7/14/2011 08:36:00 PM