[Sanjay Kumar Maithil] 6/10/2013 10:35:00 AM

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Jha Saheb

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Jun 10, 2013, 1:05:19 AM6/10/13
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मिथिला राज्य किएक - किछु विचार 


कतेको लोक पूछै छथि जे मिथिला राज्य किएक चाही । हम किछु बात रखै छी । मूल गप-विकास । विकास कथिक ? दैहिक, दैविक आ भौतिक विकास । दैहिक विकास सों की तात्पर्य ? तात्पर्य जे शारीरिक । दैविक विकास सों की तात्पर्य । तात्पर्य जे सांस्कृतिक । भौतिक विकास सों की तात्पर्य । तात्पर्य जे आर्थिक । एहि तीनू विकास के वर्तमान मिथिलांचल केर परिप्रेक्ष्य में देखल जाओ । आइ मैथिल युवक केर दैहिक विकास केर लेल की-की व्यवस्था सरकार देने अछि । नगण्य । हरियाणा में प्रायः सब प्रखंड में खेल-कूद केर नीक व्यवस्था अछि । एकर नतीजा अछि जे राष्ट्रीय आ अंतर-राष्ट्रीय स्तर पर हरियाणा बहुत आगू अछि । बिहार में एकटा अंतर-राष्ट्रीय स्तर केर प्रतियोगिता तक आयोजन नहि होइत अछि । खेल-कूद बच्चा केर मानसिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देत अछि । खेल-कूद आब रोजगारपरक नीक संसाधन सेहो बनि गेल अछि । कतय अछि मिथिला में एहि लेल आधारभूत संरचना ? जे सरकार एखन धरि बिहार में आओल ओ आय धरि आंखि मुनने सूतल अछि । एकरा ठीक करबाक वास्ते अप्पन सरकार चाही ।

आर्थिक रूप सों यदि आइ विश्व में कोनो क्षेत्र पिछरल अछि तअ मिथिलांचल अछि । बाढि केर विभीषिका सों प्रति वर्ष हम सब प्रताड़ित छी । कतय अछि बिहार सरकार द्वारा अहि सों निपटबा केर योजना । बल्कि अहि नाम पर हजारो करोड़ रूपया बिहार सरकार केंद्र सों ललक आ अन्य योजना जे मिथिलांचल सों बाहर अछि ओहि में खर्च केलक । मिथिलांचल संग होइत एहि भ्रष्ट व्यवहार केर विरुद्ध अछि मिथिला राज्य आन्दोलन । आजादी केर एतेक वर्ष बितला केर बाद आइ मिथिला के प्राप्त की भेल ? बालू, बलवा आ बतकट्टी !

किसान केर अनाज नष्ट भअ जाए-कोनो बात नहि ? माछ-मखान उपजाबअ बला पोखरि सूखि जाए-कोनो गप्प नहि ? केरल सों हर साल करोड़ों के मसाला निर्यात होइत अछि । महाराष्ट्र सों प्रति वर्ष हजारों करोड़ केर संतरा विश्व में निर्यात होइ या । मिथिला जेकर भूमि आम, लताम, कटहर, लीची आ माछ केर लेल विश्व में सबसों उपयुक्त अछि-कतेक करोड़ के निर्यात होइ या ? कतेक करोड़ केर दूध निर्यात होइ या मिथिला सों ? हरयाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, केरल, कर्णाटक, आंध्र, तमिलनाडु, राज्श्थान जेहेन राज्य सों लाखों विद्यार्थी अभियंत्रण, मेडिकल आ प्रबंधन केर डिग्री लए पूरा विश्व में सेवा दअ रहल अछि । अहि में मैथिल विद्यार्थी सेहो छथि । किया ? मिथिला में कतेक अहि तरहक संसथान अछि ? की हम सब योग्य नहि छी ? मैथिल प्रोफेसर तमाम संसथान केर सर्वेसर्वा बनि दिल्ली, कोटा, मुंबई, बंगलौर, हैदराबाद, जयपुर इत्यादी शहर में सेवा दअ रहल छथि । अपनों मिथिला में ई भअ सकै या ? किएक नहि भेल ? किएक तअ ई बिहार सरकार के सबटा पटना, नालंदा, गया में चाही । एहि सों मुक्त हेबाक लेल मिथिला राज्य चाही ।

उद्योग केर नाम पर एहेन विपन्न क्षेत्र हम आइ धरि नहि देखलहु । चीनी उद्योग भोपारि पारि कानि रहल अछि । मत्स्य उद्योग चौपट अछि । अनाज केर उत्पादन में निरंतरता नहि अछि । मनोरंजन उद्योग के भोजपुरी आ हिंदी खा गेल । यदि मनोरंजन उद्योग के सपोर्ट भेटय तअ दस लाख लोक के सीधा आ परोक्ष रोजगार भेटत । किएक नहि भेट रहल अछि । बंगलोर में बनल सिनेमा भाषा बदलि विभिन्न प्रदेश में देखल जाइ या । एहि में तमाम तरहक रोजगार छैक । ई वर्तमान आ विगत सरकार सदिखन मिथिलाक प्रति विरोधी भाव में रहल । एहि सों मुक्ति लेल मिथिला राज्य चाही ।

मिथिला साहित्य केर वर्तमानं दशा मुग़ल शासक बहादुरशाह जफ़र सों नीक नहि । नाम केर लेल मिथिला आ मैथिल सभ्यता आ संस्कृति केर निरंतर ह्रास । यदि मिथिला साहित्य के ठीक सों सींचल जाए तअ दस हजार करोड़क व्यापार छैक । लेकिन पांचो करोड़ के व्यापार मिथिला साहित्य नहि करै या । हम सब एकरा ठीक करब । एहि में लाखो लोक प्रत्यक्ष आ परोक्ष रूप सों लाभान्वित हेताह ।

मैथिल युवक परदेस के चकाचौंध में राज्यों केर विरोध में ठाड़ छथि । ई चकाचौंध मिथिलांचल में सेहो भअ सकैछ । ओहि सों नीक आ बेहतर व्यस्थक संग । हमर सभक प्रण हेबाक चाही जे गाम-गाम में घरेलु उद्योग के सुविधा हो, आर्थिक सहयोग हो जाहि सों पलायन रुकय । आर्थिक सम्पन्नातक आंधी अप्पन आँगन सों निकलय । हमर सभक प्रण हो जे मिथिला सौफ्टवेयर केर गढ़ बनय । इ बनि सकय या । कतेक सौफ्टवेयर पार्क केर निर्माण मिथिलांचल में भेल ? किएक नहि भेल ? नहि भेल तअ उद्योग के लगाओत ? एहि लेल मिथिला राज्य चाही । ओ सब नहि केलक । हम सब करब ।

विशेष अगिला अंक में .................अपनेक संजय झा ( 9213000762-Faridabad)


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Posted By Jha Saheb to Sanjay Kumar Maithil at 6/10/2013 10:35:00 AM
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