की भअ गेल मिथिला के ? नजरि लागि गेल की ? ई नजरि उतरत कोना ? गप्प एक्कर जे मिथिला सुधरत कोना ?
इतिहास अवश्य लिखत जे कोना मैथिल अप्पन पहचान के पेटक खातिर, अप्पन लाचारीक कारण बिसरा देलक । इतिहास इहो लिखत जे कोना अनेकता में एकताक दंभ भरअ बला भारत बेशर्मी सों एकटा सम्पूर्ण संस्कृति के नष्ट कअ देलक । एकटा सम्पूर्ण भाषा के खा गेल । एकटा सम्पूर्ण मानव जाति के कुचलि देलक जेना चीन तिब्बत आ जमीनी तिब्बती संग कअ रहल अछि । जाहि तरहें बिहार सरकार आ भारत सरकार मिथिलाक उपेक्षा दशकों सों कअ रहल अछि एकरा सांस्कृतिक आतंकवाद जों कही तअ अतिशयोक्ति नहि ।
जे इतिहास मिथिला में पढाओल जा रहल अछि ताहि में एक्को टा मैथिल आन्दोलानकारिक जिक्र नहि । स्वतंत्रता आन्दोलनक इतिहास में दसवीं तक हम कतहु मिथिलाक योगदान नहि पढलहु । कियक ? की मिथिला में अंगरेजक अत्याचार नहि छल ? की अंगरेजक शिकार मैथिल किसान नहि भेल ? की मिथिला में जमींदारी प्रथा नहि छल ? मध्य बिहार आ दखिन बिहारक बहुत लोकक जीवनी पढबा में भेटत मुदा मैथिल ! डिबिया लअ कअ ताकब तैयो नहि भेटत । एखनो गाम में सुनै छी कोना सुखदेव पहलवान अंग्रेज सब के ताकि-ताकि मारै छलाह । भारत सरकारक शिक्षा व्यवस्था में मिथिलाक कोनो चर्चे नहि । जेना मिथिलाक नाम सुनितहि अपच भअ जाइत छनि । कतहु-कतहु एकटा छोट-छीन चर्चा जरुर भेटत जेना अखबार में तेरहम-चौदहम पन्ना पर कोनो विदेशक दू-तीन लाइनक समाचार छपै छैक । भारतक स्वतंत्रता संग्राम में मैथिलक योगदान पर शोध आवश्यक अछि । हम सब अहि पोथीक माध्यम सों अहि विषय पर शोध पत्रक निवेदन करब ।
विभिन्न प्रकरण छैक जाहि कारने सजग मैथिल पहिनो मिथिला राज्य लेल संघर्ष करैत प्राण माँ जानकीक चरण में न्योछावर कअ देलाह । आब नव, सजग, युवा, उत्साही आ विवेकी मैथिल ओहि आन्दोलन में अपन प्राण दओ कअ जान फूंकअ लेल तैयार छथि । तअ ई निर्णय भेल जे आम मैथिल के जगेबा लेल, बुझेबा लेल सभ कारण के एकत्र रूप में हुनका समक्ष राखल जाओ ।
मुख्य रूप सों चारि कारन पर चर्चा अहि पोथी में अछि । आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक आ सांस्कृतिक । चारो कारनक विधिवार चर्चा मिथिलाक विद्वान, कवि, समाजसेवी, आंदोलनकारी, पत्रकार आ आम आदमीक माध्यम सों अपने सभक सामने प्रस्तुत अछि ।
धन्यवाद
संजय कुमार झा “रिक्थ”