[Sanjay Kumar Maithil] मैथिल बने मालिक मैथिली खुदा

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Jha Saheb

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Feb 20, 2012, 10:21:46 PM2/20/12
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जीवन मिल भी गया दोबारा करूँ क्या ना अगर मिलता मरूँ क्या मृत्यु तो आनी ही है डरूँ क्या विश्व अपना है किससे अडूं क्या किन्तु प्रण है मरने से पहले डाल मारूं कुछ नहले पे दहले मैथिली में प्राण डाल जाऊं उत्थान के बीज पाल जाऊं मिला जाऊं उन्हें जो लड़ रहे हैं खिला जाऊं उन्हें जो मर रहे हैं पिला जाऊं उन्हें जो प्यास के भूखे जिला जाऊं उन्हें जो आस में सूखे सुगन्धित कर चलूँ जन्मभूमि को सुघर कर मर चलूँ मातृभूमि को रगों में ठूस दूं ऐसी अगर व्यथा हो कर्म की सारा शहर तड़प जाएँ सभी अपनी गरीबी पर लुटा दें प्यार वे अपने-करीबी पर उलझ जाएँ सदर से ऐसी ग़दर हो बेड़ियाँ टूटें आजादी नजर हो वोट के पत्थर ऐसे पड़ें अपने नहीं जो दुष्ट आपस लड़ें चोट ऐसी हो रहें बाहर सदा मैथिल बने मालिक मैथिली खुदा

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Posted By Jha Saheb to Sanjay Kumar Maithil at 2/21/2012 08:51:00 AM

Jha Saheb

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Feb 20, 2012, 10:24:07 PM2/20/12
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Posted By Jha Saheb to Sanjay Kumar Maithil at 2/21/2012 08:54:00 AM
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