[Sanjay Kumar Maithil] आवाज देकर उन्हें हम बुलाएं

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Jha Saheb

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Jul 17, 2011, 10:20:53 AM7/17/11
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आवाज देकर उन्हें हम बुलाएं
बुला सकते तो जरूर बुलाते

लोरी सुनाकर उनको सुलाएं
सुना सकते तो जरूर सुलाते

उनको छेड़ें उन्हें गुदगुदाएँ
उन्हें छू भी सकते तो हँसते हंसाते

उन्हें साथ लेकर कहीं घूम आयें
कई बात होती चलते चलाते

पर वे चले हमें कुछ ना कहकर
उछले जिगर की खुशबू लुटाते

मासूम बाहें सूनी निगाहें
सन्न सी गलियां रक्त-नहाते

ऐ प्रियतमे! तुम आज चल दीं 
तेरे प्राण, जीवन धमाकों ने हल दी


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Posted By Jha Saheb to Sanjay Kumar Maithil at 7/17/2011 07:50:00 PM
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