जन भावनाओं के विपरीत काम कर रहे हैं हमारे जन प्रिय नायक और युवाओं के चालाक आदर्श पुतले....आखिर इनके पास जनता की गाढ़ी कमाई का ही चूसा हुआ पैसा है न..

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MahanDeshBharat

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Oct 12, 2012, 8:53:02 AM10/12/12
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जन भावनाओं के विपरीत काम कर रहे हैं हमारे जन प्रिय नायक और युवाओं के चालाक आदर्श पुतले....आखिर इनके पास जनता की गाढ़ी कमाई का ही चूसा हुआ पैसा है न..

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कालाधन विदेश से वापस लाने के अभियान में इन्होने अभी तक अपनी जबान क्यों नहीं खोली, फिल्मो में और दर्शकों से आदर्श दर्शाने वाले इन चालाक भेदियो को क्या जनता की आकांक्षा समझ में नहीं आती है.

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मीडिया क्रिकेट और फिल्म का महिमा मंडन करती है, लोग फिर उसको देखने जाते हैं, समय और पैसा बरबाद करते हैं, फिर ये हरामखोर विदेशी और नुकसान देह चीजों का प्रचार करते हैं जिससे इन चालाक भेडियो के समर्थक इन उत्पादों की जम कर खरीदी करते हैं, जिससे कंपनियों को खूब पैसा जाता है, इन पैसो से इन हीरो-हिरोइनों-खिलाडियों को खूब हिस्सा मिलता है, कंपनी उसी कमाई में से मडिया को भी पैसा देती है. यानी ये चालाक आदर्श बने शातिर लोग जनता को बेवकूफ बनाते है और इस देश व् देश की जनता  के बारे में इनकी सोच बहुत ही घिनौनी है...नहीं तो क्या ये---

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१) भारत की लूट के कालाधन के बारे में चल रहे अभियान समर्थन नहीं करते.
२) विदेशी सामानों को देश के मेहनत काश जनता का पैसा नहीं लुट्वाते,
३) भारत में आत्महत्या कर रही किसान परिवारों के मुख्या कारणों पर अपनी राय नहीं देते,
४) भारत की बंद होती छोटी फैक्टरियो पर  दुखी नहीं होते,
५) सफलता मिलते ही टीवी के विज्ञापनों में पेप्सी और कोक तथा शराब व् अन्य हानिकारक विदेशी उत्पाद  नहीं बेचते,
६) अमिताभ बच्चन ५ रुपये का मैगी नहीं बेचते,,यह पहले पेप्सी भी बेच चुके हैं..

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इनके पास जो शोहरत है वह जनता के दिल में इनके असलियत की मालुमात नहीं होने की वजह से है, नहीं तो सोचिये क्रिकेट खेलकर सांसद बन जाने वाले सचिन से जनता का क्या फायदा हुआ, सिवाय इसके की बच्चे पढाई छोडकर कर क्रिकेट देश रहे हैं और गेहू बेचकर फल खाने के बजाय सिगरेट और पेप्सी पी रहे हैं. इनके कर्मो से परिवारों को नुक्सान ही नुक्सान है, इस पर तुर्रा ये की इनको महा नायक और भगवान बताकर "भारत रत्न" देने की बात की जाती है, जबकि भारत की असली सेवा करने वालो को झूठे आरोपों में जेल में डाल दिया जाता है..

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इन महानायको की वजह से ही बाजार में उत्पाद भी कम महगे खरीदने पड़ते हैं और स्वदेशी कंपनिया बंद होती जा रही है जिसके कारन बेरोजगारी बढती जा रही है.

क्या ये चालाक और शातिर  "आईकोन" भारत माता को विश्वगुरु बनाने के हमारे अभियान के लिए कुछ भी नहीं कर सकते, क्या जबानी समर्थन भी नहीं...

भगवान की इनकी बुद्धि को शुद्ध करे..

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जय भारत,  
--

आपने स्वयं और अपने परिवार के लिए सब कुछ किया, देश के लिए भी कुछ करिये,

क्या यह देश सिर्फ उन्ही लोगो का है जो सीमाओं पर मर जाते हैं??? सोचिये...... 


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MahanDeshBharat

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Aug 28, 2013, 8:16:55 AM8/28/13
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(नोट : यदि आपको मेरे मेल पसंद नहीं हैं / मेल नहीं चाहिये, तो कृपया उत्तर देकर अवश्य सूचित करें) 

--संजय कुमार मौर्य, अयोध्या, फैजाबाद, उ.प्र.

(सामाजिक और प्राकृतिक अर्थशाश्त्र विश्लेषक : भारत को युवाओ के नैतिक-विकास के साथ पशुधन-कृषि-योग-आयुर्वेद-सूर्यशक्ति-जलसंरक्षण-भूसंपदा के विवेकपूर्ण  उपयोग से विश्वशक्ति बनाया जा सकता है) 

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