गीत

1 view
Skip to first unread message

Maithilputra

unread,
Dec 18, 2011, 6:25:58 AM12/18/11
to MAITHILPUTRA
रविवार, १८ दिसम्बर २०११

लगबयौन-लगबयौन हिनकर बोली ई,दूल्हा आजु कए
हिनकर बर मोल छैन,ई त दूल्हा आजु कए
हिनकर बाबु बिकेलखिन लाखे,बाबा कए हजारी
लगबयौन मिल जुइल कए बोली ई दूल्हा आजु कए

हिनकर गुण छैन बरभारी,ई रखै छथि दू -टा बखारी
दरबज्जा पर जोड़ा बडद,रंग जकर छैन कारी
भैर दिन ई पौज पान करैत छथि,जेना करे पारी
भोरे उठी ई लोटा लs कs पिबए जाए छथि तारी

साँझु-पहर चौक पर जेता,चाहियैंह हिनका सबारी
ई छथि मएक बर-दुलरुआ,हिनका दियौंह एकटा गाड़ी
हिनकर गुण छैन बरभारी ई पिबई छथि खाली तारी
हिनका पहिरए आबै छैन नहि धोती,दियौन जोर भैर साडी

लगबयौन-लगबयौन हिनकर बोली ई,दूल्हा आजु कए
हिनकर बर मोल छैन,ई त दूल्हा आजु कए

***जगदानंद झा 'मनु'

Shivam Jha

unread,
Dec 19, 2011, 6:51:18 AM12/19/11
to maithi...@googlegroups.com
बहुत नीक !
Reply all
Reply to author
Forward
0 new messages