KAVITA--GUMAN

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Jagdanand Jha

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Sep 6, 2011, 12:16:18 PM9/6/11
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बहुत गुमान अछि हम मैथिल छि
मिथला हमर शान अछि
उदितमान इ अछि धरती पर
कोनो स्वर्ग समान अछि !
 
कण-कण खल-खल कोसी कमला 
बुझु एकर पहचान    अछि 
जनक-जानकी आ विद्यापति 
मिथलाक शिर  के पाग अछि !
 
भक्ती रस के कथा की कहू
स्वयं संकर चाकरी कने छथी
एकर बिद्व्ता जुनी कियो पुछू
मुंडनमिश्र आ अजानी
भारतीक नाम बिख्यात अछि !
            ****जगदानंद झा
 


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