Jago deshvasiyon ! Jago !!

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Alok Kumar

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Sep 13, 2011, 1:51:44 PM9/13/11
to Loksatta NCR region, lok-satt...@googlegroups.com, loksattauttarpradesh
आलोक कुमार सिंह
लोकसत्ता, उत्तर प्रदेश
 
""सबसे अधिक दुख की बात, अंतिम त्रासदी, बुरे लोगों की बुराई नही, बल्कि उस बारे में अच्छे लोगों का मौन रहना है" -मार्टिन लूथर किंग
सचमुच मे शिक्षित वर्ग, युवा वर्ग और स्वतंत्र सोच के मेहनती लोगों के मौन के कारण ही कुटिल बलों ने अवसर छीन लिया है, उन्होनें विशुद्ध निर्लज्जता दिखायी है और उस स्थान पर कब्जा जमाया है जो वास्तव में सबसे बेहतर गुण वालों के लिए होना चाहिये। वह स्थान जहाँ कानून बनाए जाते हैं। देश के सबसे प्रतिभाशाली, बुद्धिजीवी , सत्यनिष्ठ, व सर्वोच्तम कोटि के लोग, जो राष्ट्र को स्वयं से ऊपर मानतें हों, ऐसे लोगों को उस संसद जैसे पवित्र स्थान पर होना चाहिए।
आपदा यह है कि एक ओर है - सरकार के विभाग न्याय(Judiciary ) और प्रशासन(executive) जहाँ कानून को केवल कार्यान्वित करना या अमल में लाने का काम होता है, वहाँ तो बेहद मेहनत करने वाले लोग जो औसत 8 साल कि पढाई करने के बाद कठिन अग्नि परिक्षण से गुजर्कर सिविल सर्विसेस की परीक्षा को पास करतें हैं,ऐसे लोग चाहियें। इस दौरान ये सम्मानित पुरुष और महिलाए देश के कानुन, देश के संविधान, इतिहास, भूगोल,विज्ञान और क्या नहीं, सभी का अध्ययन कर ज्ञानवान होतें हैं। जबकि दूसरी ओर है - सरकार कि सबसे महत्वपूर्ण शाखा नियामक(Legislative) जहां विधान कानून बनाये जाते हैं। भारत की जटिलता और कठिनाईयों को देखते हुए यह बात साफ है कि इस शाखा मे रचनात्मकता के सर्वोच्च गुणों की आवश्यकता है। दुर्भाग्य से भारत में कुछ अपराधिक पार्श्वभुमि के लोग कानून बनानेवाली संसद में चुने जाते हैं। बड़े दुःख की बात है कि आज भी १८२ (182) सांसद गंभीर चार्ज शीट हैं, ऐसे लोग हम देशवासियों के लिए कानून बना रहे हैं। शायद केवल 1-5 प्रतिशत लोगों के पास कुछ योग्यता है।
किंतु यह भारत का दुर्भाग्य है जिसके लिए हम सभी जिम्मेदार हैं। यदि हमने इस अव्यवस्था की जिम्मेदारी को ले लिया तो मानों कि हमने आधा युध्द जीत लिया। इसीलिए ऎसा ही हो!!! यह कैसे हो सकता है कि थोडे ही कुछ आपराधिक लोगों ने, सभी वर्गों के लोगों को अपने पैरों तले रोंदते हुए, बिखेरते हुए, पराजित करते हुए और पीसते हुए राज कर रखा है।
अभी बहुत देर नही हुई है। इस से पहले कि व्यवस्था और भी नई निचाइयों को छू ले, बुद्धिजीवी गणों का एक निश्चयात्मक संयुक्त प्रयास अनिवार्य है जिससे सभी जागरुक हो जाएं। यह जल्द ही जनों के समर्थन का जोर पकड लेगा। इसीलिए, आगे आओ-जागो, उठो और रुको मत जबतक आवश्यक परिवर्तन पुर्ण न हो जाए।
केवल समझदार वर्ग का उचित योगदान और पूर्ण रुपसे समर्पण ही भारत के भाग्य को बदल सकता है। यदि हम नहीं तो फिर कौन?? यदि अब नहीं तो फिर कब??
प्रत्येक कठिनाई एक नये अवसर को जन्म देती है। जहां कठिनाईयां हैं वहां उन्हें ठीक करने का अवसर भी है। हम सभी को इस नये अवसर का लाभ लेते हुए कदम बढ़ाने होंगे और एक ऐसी आधारशीला डालनी होगी जो कि आगे आने वाली सभी पीढ़ीया को लाभान्वित करेगी।
अंत में मैं कुछ शब्द कहना चाहुंगा जो कि महात्मा गांधीजी ने कहे थे: "तुम्हारा स्वप्न पुरा न हो सकेगा अथवा दुसरे लोग तुम्हारे स्वप्न मे विश्वास नही करेंगे, यह सोचकर कर्म करने मे संकोच करना, एक ऐसा भाव है जो तरक्की के रास्ते मे बाधा बनता है।
जागो देशवासीयो जागो!! भारत माता मदद के लिये पुकार रही है!!
लोकसत्ता के द्वारा दिये गये सुधार देश की समस्यों के समाधान की ओर पहिला कदम हैं। आजतक की सभी सरकारें व सभी पोलिटिकल पार्टिया देश के लिये स्वयं समस्यायें हैं। लोकसत्ता पार्टी ने अपने उसूलों के साथ बिना कोई समझोता किये, साफ सूत्रे साधारण, इमानदार व् सत्यनिष्ठ लोगों को चुनावो में आगे आने का मौका दिया और साफ सुथरे चलन से बिना किसी चुनावी गलत सहारे के समाज में एक नयी मिसाल कायम की है । लोकसत्ता पार्टी सभी देशवासियो की समानता, आज़ादी, सम्मान और न्याय जैसे मूलभूत मुल्यों के लिए पूरी तरह प्रयासरत हैं। आज भारत को सबसे जयादा जरुरी एक स्वच्छ राजनैतिक विकल्प की आवश्यकता है। आओ साथियों इस विकल्प का विस्तार करें ।
वंदे मात्रम!!! इन्कलाब जिंदाबाद !!!
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